राजनीति
दिल्ली सरकार ने वीरता पुरस्कारों के लिए आवेदन मांगे
दिल्ली सरकार ने उन लोगों को सम्मानित करने के लिए दिल्ली वीरता पुरस्कारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद की या अपनी जान जोखिम में डालकर किसी की जान बचाई। दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा मंगलवार को जारी एक सार्वजनिक नोटिस में कहा गया है कि सभी क्षेत्रों के व्यक्ति पुरस्कार के लिए पात्र हैं।
नोटिस में कहा गया है, “दिल्ली सरकार ने उन लोगों को पहचानने और सम्मानित करने के लिए दिल्ली वीरता पुरस्कार जारी रखा है, जिन्होंने गंभीर खतरे का सामना करने के लिए अनुकरणीय साहस, दिमाग की उपस्थिति और बहादुरी का प्रदर्शन किया है और जिन्होंने दूसरों की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर उत्कृष्ट बहादुरी और निस्वार्थ सेवा के कार्य किए हैं।”
इसमें कहा गया है कि पुरस्कार समिति द्वारा केवल 1 सितंबर, 2019 और 31 अगस्त, 2021 के बीच की अवधि में किए गए बहादुरी के कार्यों पर विचार किया जाएगा।
कहा गया है, “गणतंत्र दिवस 2022 पर एक सरकारी समारोह में बहादुरी के चयनित कार्यो को मान्यता दी जाएगी और बहादुर व्यक्ति को सम्मानित किया जाएगा।”
आदेश में कहा गया है, “आवेदक/उनके कानूनी उत्तराधिकारी/आवेदकों की ओर से कोई अन्य व्यक्ति अपने आवेदन/सिफारिशें अपने संबंधित उपायुक्त (राजस्व), दिल्ली सरकार के एनसीटी को 15 सितंबर, 2021 तक जमा कर सकते हैं।”
राष्ट्रीय समाचार
गया जी के देवघाट पर विदेशी तीर्थयात्रियों ने किया पिंडदान, पितरों की मोक्ष की कामना

मोक्ष की भूमि के रूप में विख्यात गया में चल रहे पितृ पक्ष मेले का आकर्षण अब सात समुंदर पार तक पहुंच गया है। इस वर्ष पितृ पक्ष 2026 के पावन अवसर पर रूस, जर्मनी, इटली, स्पेन, पुर्तगाल नीदरलैंड समेत कई देशों से आए 48 विदेशी तीर्थयात्रियों ने देवघाट पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान किया।
विदेशी तीर्थयात्रियों के साथ आए पुरोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पावन तिथि पर विदेश से आए श्रद्धालु गया के वातावरण और यहां की व्यवस्थाओं से अत्यंत संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि इटली, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड जैसे देशों से आए लोग यहां के पवित्र माहौल में आनंद की अनुभूति कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सहयोग की जो व्यवस्था की गई है, उससे भी संतुष्ट हैं। पुरोहित ने कहा कि गया की यह धरती ही इतनी पवित्र और शक्तिशाली है कि यहां आकर हर किसी को आध्यात्मिक शांति मिलती है।
उन्होंने बताया कि इस बार कुल 48 विदेशी श्रद्धालु पिंडदान के लिए आए हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पिंडदान कराना संभव नहीं होने के कारण उन्हें तीन समूहों में बांटा गया है। पहले दिन 22 लोगों ने, दूसरे दिन 8 लोगों ने और तीसरे दिन बाकी के लोग पिंडदान करेंगे। ये सभी श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों – किसी ने अपने पति को खोया है, किसी ने अपने बच्चों को, तो किसी ने अपनी बहन या मां को – उनकी आत्मा की शांति के लिए इस मोक्ष भूमि पर आए हैं।
पुरोहित ने बताया कि आने वाले समय में अफ्रीका से भी श्रद्धालुओं के जत्थे के गया आने की उम्मीद है।
पिंडदान करने आई रूस की एक महिला श्रद्धालु क्सेनिया ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, “मैं इस विशेष अनुभव के लिए गया आई हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह अनुष्ठान मेरे दिवंगत माता-पिता, दादी और दादाजी की आत्मा के लिए बहुत फलदायी होगा। गया में यह मेरा पहला अनुभव है और मैं पहली बार यहां आई हूं। मुझे विश्वास है कि सब कुछ बहुत अच्छा होगा।”
एक अन्य विदेशी महिला श्रद्धालु एलेक्जेंड्रा, जो जर्मनी के बर्लिन में रहती हैं, ने कहा कि गया एक बेहद पवित्र भूमि है। उन्होंने कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हम देखते हैं कि यहां लोग अपनी परंपराओं का कितना सम्मान करते हैं। हमें यहां बहुत ही स्वागत और सुरक्षित महसूस हो रहा है। हम यहां आने का अवसर मिलने के लिए बहुत आभारी हैं।”
एलेक्जेंड्रा ने बताया कि वह हिंदू परंपराओं के बारे में अध्ययन कर चुकी हैं और यह उनका दूसरी बार गया आना है। तीन साल पहले भी वह पिंडदान के लिए आई थीं। इस बार वह अपने साथ और भी लोगों को लेकर आई हैं, जो हिंदू परंपरा और पूर्वजों को सम्मान देने वाले इस अनुष्ठान में गहरी रुचि रखते हैं।
उन्होंने कहा, “लोग समझते हैं कि पितरों को सम्मान देने से न केवल उनके जीवन में बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन में भी सकारात्मक लाभ होता है, इसलिए वे इसे करना चाहते हैं। दुनिया में बहुत से लोग हर जगह घूमते हैं, लेकिन गया की इस पवित्र भूमि पर आने का सौभाग्य बहुत कम समूहों को ही मिलता है। इसलिए हम सभी यहां आकर खुद को बहुत विशेष और धन्य महसूस कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भले ही यह उनके लिए एक अलग संस्कृति है और शुरुआत में वे थोड़ा असहज थीं, लेकिन यहां के लोगों का व्यवहार बहुत ही अच्छा रहा। उन्होंने कहा, “यहां के लोग बहुत स्वागत करने वाले हैं, हमें देखकर मुस्कुराते हैं और उत्सुकता से सवाल पूछते हैं, इसलिए अब हम यहां बहुत सहज महसूस कर रहे हैं।”
अपराध
असम पुलिस ने 60 लाख रुपए की नशीली टैबलेट जब्त कीं, दो गिरफ्तार

असम पुलिस ने हैलाकांडी जिले में लगभग 60 लाख रुपए मूल्य की संदिग्ध नशीली टैबलेट की एक बड़ी खेप जब्त की है और दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यह कार्रवाई जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध परिवहन के खिलाफ तेज की गई मुहिम के तहत की गई। अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान 816.9 ग्राम संदिग्ध याबा टैबलेट बरामद कीं। इस जब्ती के सिलसिले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान बहारुल आलम मजूमदार और चायेक हुसैन लस्कर के रूप में हुई।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस द्वारा रोके जाने और उनके पास से प्रतिबंधित सामान बरामद होने के बाद आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस की ओर से आरोपियों को रोककर उनके पास से प्रतिबंधित सामग्री बरामद करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
जब्त की गई टैबलेट के याबा होने का संदेह है, जो मेथम्फेटामाइन और कैफीन वाली एक सिंथेटिक ड्रग है। आमतौर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में इसकी तस्करी की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए प्रतिबंधित सामान की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 60 लाख रुपए है।
एक मामला दर्ज किया गया है और नशीले पदार्थों के स्रोत का पता लगाने व इसे लेने वाले लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है। जांच टीमें यह भी पता लगा रही हैं कि क्या गिरफ्तार किए गए आरोपी असम और पड़ोसी राज्यों में चल रहे नशीले पदार्थों की तस्करी के किसी बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क से जुड़े हैं।
पुलिस दोनों आरोपियों से सप्लाई चेन के बारे में जानकारी जुटाने के लिए पूछताछ कर रही है, जिसमें खेप का स्रोत, इसके गंतव्य और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील इलाकों और नशीले पदार्थों के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संदिग्ध रास्तों पर निगरानी और चेकिंग बढ़ा दी गई है।
राष्ट्रीय समाचार
गांधी जयंती पर राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति ने पुष्पांजलि अर्पित की, पूर्व पीएम लाल बहादुर को किया नमन

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पुष्पांजलि अर्पित की है।
राष्ट्रपति ने राजघाट जाकर बापू को पुष्पांजलि अर्पित की। उनकी ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा गया, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर, मैं सभी देशवासियों की ओर से उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं।”
राष्ट्रपति ने एक संदेश में लिखा, “विश्व समुदाय द्वारा गांधीजी के जीवन और आदर्शों को बहुत सम्मान दिया जाता है। आज विश्व के अनेक क्षेत्रों में अशांति और युद्ध का वातावरण है तथा सभी देशों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी स्थितियों में महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।”
राष्ट्रपति ने आगे लिखा, “वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर हमारा देश आगे बढ़ रहा है। विकास की इस यात्रा में संवेदनशीलता और समावेश के मूल्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कोई भी देशवासी विकास के लाभ से वंचित न रहे। यह महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ के आदर्श के अनुरूप है, जिसमें सभी के कल्याण और उत्थान की भावना निहित है। आइए, गांधी जयंती के शुभ अवसर पर हम यह संकल्प लें कि अपने नैतिक आचरण तथा सक्रिय भागीदारी द्वारा आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में पूरी निष्ठा से अपना योगदान देंगे।”
वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के विजय घाट पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके कार्यालय आधिकारिक एक्स हैंडल से लिखा गया, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को उनकी जयंती पर राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित की। सत्य और अहिंसा में उनकी अटूट आस्था, न्याय के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता और हर व्यक्ति की गरिमा में उनका गहरा विश्वास आज भी मानवता को प्रेरित करता है। महात्मा गांधी जी का जीवन और संदेश शांति, करुणा, निस्वार्थ भाव और सेवा की एक स्थायी प्रेरणा है। इस विशेष अवसर पर, आइए हम उन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं जिन्हें वे मानते थे और एक न्यायपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण के लिए खुद को समर्पित करें।”
उपराष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके कार्यालय के आधिकारिक एक्स हैंडल से लिखा गया, “आज विजय घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शांत शक्ति और असाधारण संकल्प के धनी नेता, शास्त्री जी विनम्रता, ईमानदारी और देश के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल थे। भारत की यात्रा के एक निर्णायक मोड़ पर, उनके नेतृत्व ने आत्मविश्वास और एकता का संचार किया, जबकि उनके “जय जवान, जय किसान” के आह्वान ने हमारे सैनिकों के बलिदान और किसानों के महत्वपूर्ण योगदान को चिरस्थायी पहचान दिलाई। उनका जीवन इस बात की सशक्त याद दिलाता है कि सच्चा नेतृत्व सादगी, साहस और राष्ट्र सेवा में निहित होता है।”
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