अंतरराष्ट्रीय
दीपक चाहर, शार्दुल ठाकुर बल्लेबाजी पर कड़ी मेहनत करते हैं : विक्रम राठौर
भारत के बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर ने स्वीकार किया कि हरफनमौला खिलाड़ी शार्दुल ठाकुर और दीपक चाहर अपने बल्लेबाजी पर काफी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहर और ठाकुर की बल्लेबाजी टीम में मददगार साबित होती है। टीम में हार्दिक पांड्या और रवींद्र जडेजा की अनुपस्थिति में, चाहर और ठाकुर ने दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के खिलाफ एकदिवसीय मैचों के दौरान अलग-अलग समय में निचले क्रम में आकर अर्धशतक लगाया, जिससे टीम का मनोबल बढ़ा है।
राठौर ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “दोनों खिलाड़ी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं, जिसका कारण यह है कि दोनों अपनी बल्लेबाजी पर वास्तव में कड़ी मेहनत करते हैं। अभी नहीं बल्कि पिछले कुछ वर्षों में, वे अपनी बल्लेबाजी पर कड़ी मेहनत और अभ्यास कर रहे हैं। अब, आप इसका परिणाम देख सकते हैं। इसलिए, टीम में दो हरफनमौला खिलाड़ी होना वास्तव में अच्छा है।”
वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल ही में एकदिवसीय श्रृंखला में, भारतीय टीम के मध्य क्रम में बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों ने रन बनाए थे। राठौर खुश थे कि शीर्ष क्रम के जल्दी आउट होने के बाद मध्यक्रम के विभिन्न बल्लेबाजों ने टीम को जीत दिलाने का जिम्मा उठाया।
उन्होंने कहा, “अहमदाबाद में हमने जो एकदिवसीय श्रृंखला खेली थी, उसमें विकेट थोड़ा चुनौतीपूर्ण था। खिलाड़ियों के शुरुआती विकेट खोने के बाद आगे बढ़ते हुए देखना अच्छा था। हम अभी भी अच्छे स्कोर बनाने में कामयाब रहे और सीरीज जीती। टीम में सूर्या, श्रेयस, पंत जैसे खिलाड़ियों ने मध्यक्रम में आकर टीम का स्कोर संभाला।”
राठौर ने कहा, “जब बल्लेबाज फॉर्म में होते हैं तो टीम के लिए हमेशा फायदेमंद होता है। बल्लेबाज जितना अधिक फॉर्म में होता है, टीम के लिए उतना ही बेहतर होता है। मुझे अपने मध्य क्रम की बल्लेबाजी के लिए वास्तव में कभी चिंता नहीं हुई। हाल ही में, हम अपने साथ एकदिवसीय और टी20 आई में मध्यक्रम में खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे।”
राठौर को लगा कि अहमदाबाद में दूसरे वनडे में आश्चर्यजनक रूप से ओपनिंग करने वाले पंत का मध्यक्रम में अच्छा इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “हमारे पास टीम में कई खिलाड़ियों के विकल्प हैं। ऋषभ एक शानदार खिलाड़ी है। वह शीर्ष क्रम में अच्छा क्रिकेट खेल सकते हैं, लेकिन यह वास्तव में इस बात पर निर्भर करता है कि टीम को क्या चाहिए, हम क्या देख रहे हैं और टीम पंत को बल्लेबाजी के लिए कहां ले जाना चाहती है।”
उन्होंने कहा, “मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह 2023 के बाद टीम में शामिल रहेंगे। तब वह टीम के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहेंगे, लेकिन हम मध्य या निचले क्रम में उसका अधिक सटीक उपयोग कर सकते हैं, जो बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है।”
राठौर ने जोर देकर कहा कि दुनिया को अभी तक ऑलराउंडर वेंकटेश अय्यर की बल्लेबाजी देखना बाकी है। अय्यर, दक्षिण अफ्रीका में डेब्यू के बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ एकदिवसीय मैचों से बाहर हो गए, वे 16 फरवरी से शुरू होने वाली आगामी टी20सीरीज का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, “हमें अभी अय्यर का प्रदर्शन देखना है। वह टीम में नए हैं। इसलिए, चयनकर्ताओं का काम टीम को चुनना है। उनके लिए अवसर हैं। वह एक बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं और हम सभी को उम्मीद है कि वह अच्छा प्रदर्शन करेंगे और किसी भी प्रारूप में टीम में खुद को स्थापित करेगा।”
राठौर ने यह कहा कि उनका मुख्य ध्यान पहले टी20ई श्रृंखला जीतना होगा। हम अभी तक मैदान पर नहीं उतरे हैं। हमें अभी परिस्थितियों को देखना है और एक बार जब हम इसका आकलन कर लेते हैं, तो हमें टीम के संतुलन पर एक नजर डालने की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
चीनी राज्य परिषद ने ‘भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ की जारी

बीजिंग, 10 अप्रैल : चीनी राज्य परिषद द्वारा जारी ‘चीन (भीतरी मंगोलिया) पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ 9 अप्रैल को सार्वजनिक की गई। इसके साथ ही चीन में पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्रों की कुल संख्या 23 हो गई है।
समग्र योजना भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र को सुधारों में अधिक स्वायत्तता प्रदान करती है, जिससे इसे प्रायोगिक परियोजनाएं संचालित करने और व्यापक क्षेत्रों में गहन स्तर पर मौलिक, एकीकृत और विशिष्ट अन्वेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इसमें 19 सुधार और नवाचार उपायों की रूपरेखा दी गई है, जिनमें सीमा व्यापार में नवाचार और विकास, अंतरराष्ट्रीय रसद सेवाओं को मजबूत करना, वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के रूपांतरण और अनुप्रयोग की दक्षता में सुधार करना और विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान का विस्तार करना शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय
वेंस की पाकिस्तान यात्रा से पहले सुरक्षा को लेकर चिंता, सालों बाद यूएस के किसी शीर्ष अधिकारी का पाक दौरा

नई दिल्ली, 10 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते के अंत में पाकिस्तान में बातचीत होने वाली है। अमेरिका की तरफ से इस बैठक में शामिल होने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने डेलिगेशन के साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के इस दौरे से संबंधित सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं हैं। सालों के बाद अमेरिका का कोई आला अधिकारी पाकिस्तान का दौरा कर सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान के दौरे को लेकर गहरी चिंता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सुरक्षा चिंता की वजह से वेंस को पाकिस्तान ना जाने की सलाह दी है।
फिलहाल यह कन्फर्म नहीं है कि जेडी वेंस इस बैठक में शामिल होने जाएंगे या नहीं, लेकिन व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाएंगे।
किसी भी अमेरिकी अधिकारी के लिए पाकिस्तान के दौरे पर जाने से पहले उनके लिए सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद है। पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों की सक्रियता की वजह से वहां पर किसी भी दूसरे देश के नेता की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है।
वेंस ऐसे समय में पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं, जब अमेरिका ने खुद इस देश के लिए ‘लेवल 3: यात्रा पर पुनर्विचार करें’ की एडवाइजरी जारी की हुई है। इसकी मुख्य वजह आतंकवाद, अपराध और अशांति का खतरा है।
इसके अलावा अमेरिका ने हाल ही में लाहौर और कराची के वाणिज्य दूतावास से गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से हटा लिया गया था। यही सब कारण हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी के कोई भी नेता या अधिकारी पाकिस्तान जाने से बचते हैं।
पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों और दूतावास पर हमले की कई घटनाएं इतिहास में सामने आई हैं। ताजा मामला, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देखने को मिला था, जब उग्र भीड़ ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को घेरा और उसमें तोड़फोड़ की। इसके बाद पेशावर में अमेरिकी कांसुलेट बंद कर दिया गया और कराची और लाहौर में वीजा सेवाएं निलंबित हुईं।
आतंकवाद और सुरक्षा कारणों की वजह से अब तक केवल पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ही पाकिस्तान का दौरा किया, जिनमें ड्वाइट डी. आइजनहावर, लिंडन बी. जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश शामिल हैं। 2006 के बाद किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया।
हालांकि, इसके पीछे एक कारण अमेरिका में हुए 26/11 का वो हमला भी है। अमेरिका को संदेह था कि इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी है। हालांकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा। फिर अमेरिका ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी दूरी आई।
इसके अलावा, पाकिस्तान में चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यह भी एक कारण हो सकता है कि अमेरिका इस देश से दूरी बनाकर रखे हुए है। वहीं 2011 के बाद पहली बार अमेरिकी के किसी शीर्ष अधिकारी का पाकिस्तान का दौरा होने वाला है।
द संडे गार्जियन के अनुसार, सिक्योरिटी प्लानर्स ने आने वाले डेलिगेशन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मोटरकेड सिस्टम तैयार करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट के लॉजिस्टिक्स टीम और इक्विपमेंट लेकर आने के बाद तैयारियां और तेज हो गईं। इस तरह के बड़े इंतजाम इस दौरे की सांकेतिक अहमियत और युद्ध के समय की डिप्लोमेसी से जुड़े असली सुरक्षा खतरों, दोनों को दिखाते हैं।
बीते दिन पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने ईरानी डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी दी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।
ईरानी राजदूत ने अपने पोस्ट में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत के लिए ईरान के एक डेलिगेशन के पाकिस्तान आने की घोषणा की थी। यह पोस्ट पहले रेजा अमीरी मोगादम के सोशल मीडिया हैंडल पर थी, जो अब नजर नहीं आ रही है। इसकी पीछे की वजह सुरक्षा से संबंधित हो सकती है।
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