राष्ट्रीय समाचार
छत्तीसगढ़ में देश का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम
देश में हरित ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जा रहा है और उसी के चलते छत्तीसगढ़ में देश के सबसे बड़े बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम ने काम करना शुरु कर दिया है। इससे प्रतिदिन पांच लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन होगा और लगभग 4.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
राजनांदगांव जिले में डोंगरगढ़ रोड पर ग्राम ढ़ाबा के आस-पास के चार-पांच गांव के पहाड़ी क्षेत्र में स्थापित किया गया है।
संयंत्र के साथ स्थापित बैटरी सिस्टम के माध्यम से रात्रि में भी बिजली की सुविधा रहेगी। इससे प्रतिदिन पांच लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन होगा और लगभग 4.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा।
आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि क्रेडा द्वारा राजनांदगांव में ऑनग्रिड सोलर पावर प्लांट स्थापना का कार्य सोलर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) एवं छत्तीसगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को सौंपा गया था। इस कंपनी द्वारा एक फरवरी 2024 को संयंत्र स्थापना कार्य पूर्ण कर लिया गया और उसने काम करना भी शुरु कर दिया है।
यह देश का पहला ऑनग्रिड सोलर सिस्टम है, जिसमें 100 मेगावॉट का सोलर संयंत्र स्थापित किया गया है।
इस प्लांट की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें 660 वॉट क्षमता के कुल दो लाख 39 हजार बाईफेसियल सोलर पैनल स्थापित किये गये हैं, जिससे पैनल के दोनों ओर से प्राप्त सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली का निर्माण किया जा रहा है।
कुल परियोजना लागत 960 करोड़ रूपये है, जो कि सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन कर आगामी सात वर्षों तक प्राप्त हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ शासन द्वारा राजनांदगांव जिले के बैरन पहाड़ी क्षेत्र में देश एवं प्रदेश के प्रथम सोलर पार्क की स्थापना का निर्णय लिया गया था। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रारंभ वर्ष 2016 में हुआ। इसके तहत् ग्रिड कनेक्टेड मेगा साईज सोलर पावर प्लांट की स्थापना हेतु छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के द्वारा दो चरणों में सोलर पार्क की स्थापना का कार्य प्रस्तावित किया गया तथा इस हेतु कुल 17 गांव की 626.822 हेक्टेयर शासकीय भूमि की मांग की गई थी।
राष्ट्रीय समाचार
उत्तर प्रदेश: बाराबंकी में चलती कार में आग लगने से ड्राइवर की जलकर मौत

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सफदरगंज इलाके में शनिवार सुबह एक दुखद घटना ने दहशत फैला दी, जब चलती कार में अचानक आग लग गई, जिससे चालक की मौत हो गई, जो वाहन के अंदर फंसा हुआ था और बाहर नहीं निकल सका।
जानकारी के अनुसार यह घटना सुबह करीब 6 बजे जिला मुख्यालय से लगभग 33 किलोमीटर दूर प्यारेपुर सैदपुर नहर के पास घटी। आग तेजी से फैल गई और कुछ ही मिनटों में पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे चालक को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिला।
घटना की सूचना मिलते ही दमकलकर्मी और सफदरगंज पुलिस मौके पर पहुंचे। दमकलकर्मी ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। हालांकि, तब तक कार पूरी तरह से आग की चपेट में आ चुकी थी और चालक की मौके पर ही मौत हो गई।
मृतक की पहचान प्रदीप कुमार के रूप में हुई, जो बाराबंकी जिले के प्यारेपुर गांव का निवासी था। पुलिस ने वाहन के पंजीकरण नंबर के माध्यम से उसकी पहचान की।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुमार लखनऊ हवाई अड्डे पर यात्रियों को छोड़ने के बाद बाराबंकी लौट रहे थे, तभी यह घटना घटी। दुर्घटना के समय कार में केवल वही मौजूद थे।
सफदरगंज पुलिस स्टेशन के प्रभारी अजय प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि शव को कब्जे में ले लिया गया है और आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
चलती गाड़ी में अचानक लगी आग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आग लगने का कारण क्या था और चालक बच क्यों नहीं पाया। हालांकि, आग लगने का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।
पुलिस ने घटना के कारणों का पता लगाने और आग लगने के कारणों को जानने के लिए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद और अधिक जानकारी सामने आएगी।
इस घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग घटनास्थल पर जमा हो गए, जहां आपातकालीन सेवाओं ने आग बुझाने का प्रयास किया। वाहन के अंदर चालक की मौत से निवासी सदमे में थे।
अधिकारियों द्वारा आग लगने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है, और जांच के निष्कर्षों से आग लगने का कारण और घातक घटना को जन्म देने वाली घटनाओं का क्रम स्थापित होने की उम्मीद है।
राजनीति
“आप” का आरोप: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली छावनी में तब्दील

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज 10 अक्टूबर को प्रस्तावित वोट चोरी और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के विरोध में होने वाले प्रदर्शन को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। आप नेताओं आतिशी और गोपाल राय ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
पार्टी ने दावा किया कि प्रदर्शन से पहले बड़े पैमाने पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है तथा कई स्थानों पर लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। आप नेता आतिशी ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं, जबकि करीब 45 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई है। उन्होंने हजारों लोगों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने, इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और बाजारों के बंद होने का भी आरोप लगाया।
आतिशी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर एक ऐसे व्यक्ति की सुरक्षा के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था क्यों की जा रही है, जिस पर उन्होंने भाजपा को अवैध तरीके से चुनाव जिताने में मदद करने का आरोप लगाया। उनके बयान का संदर्भ चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के खिलाफ आप के आंदोलन से जुड़ा है। पार्टी लगातार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रही है।
आप नेता गोपाल राय ने भी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “देश में आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा ब्लैक इमर्जेंसी घोषित की गई है।” गोपाल राय ने आरोप लगाया कि पूरे दिल्ली शहर को छावनी में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के लिए जितनी अधिक कोशिश की जाएगी, यह आंदोलन उतना ही आगे बढ़ेगा। उनके मुताबिक, पार्टी का विरोध प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के मुद्दे को जनता के बीच उठाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना राजनीतिक दलों और नागरिकों का अधिकार है। पार्टी नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था और कथित प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को विरोध की आवाज दबाने के बजाय उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर मतभेदों के बावजूद भारत-अमेरिका साझेदारी आगे बढ़ रही है : रिपोर्ट

पिछले 25 वर्षों के ज्यादातर समय में भारत-अमेरिका संबंध इस सोच पर आधारित रहे हैं कि एक मजबूत भारत एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने, सप्लाई चेन में विविधता लाने और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक को मजबूत करने में मदद करके अमेरिका के बड़े रणनीतिक मकसद को पूरा करता है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मतभेद तो हमेशा से रहे हैं, लेकिन व्यापक रणनीतिक वजहें इतनी मजबूत मानी जाती थीं कि वे इन मतभेदों को झेल सकें। हालांकि, अब इस सोच को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने हाल ही में ‘इंडिया नैरेटिव’ में लिखा, “भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा मतभेद सिर्फ तेल के मुद्दे तक सीमित नहीं हैं। शायद साझेदारी के मतलब को लेकर भी गहरी असहमति है। वॉशिंगटन अक्सर रणनीतिक तालमेल को राजनीतिक सहमति की मांग करने का आधार बनाता है। वहीं, नई दिल्ली में साझेदारी का मतलब संप्रभु देशों के बीच सहयोग माना जाता है, जिनके बीच रूस, ईरान और चीन से निपटने के तरीकों को लेकर मतभेद बने रहेंगे।”
उन्होंने कहा, “जब ये मतभेद वफादारी की सार्वजनिक परीक्षा बन जाते हैं तो कूटनीति की जगह दिखावा ले लेता है। समझौता करना इसलिए और मुश्किल हो जाता है क्योंकि इसे घुटने-टेकने जैसा दिखाया जाता है।”
राव ने कहा कि नई दिल्ली ने वॉशिंगटन की उस पुरानी सोच से दूर होने में कई साल लगाए हैं, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को एक ही क्षेत्रीय समीकरण का हिस्सा माना जाता था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने के ट्रंप के बार-बार किए जा रहे दावों से उस पुरानी सोच पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
पूर्व भारतीय राजनयिक ने कहा, “यह आपत्ति सिर्फ सम्मान की बात नहीं है। भारत के वैश्विक आर्थिक, तकनीकी और समुद्री हित हैं, जिन्हें सिर्फ पड़ोसी देश के साथ झगड़े के संकीर्ण नजरिए से नहीं समझा जा सकता, लेकिन सोचने की पुरानी आदतें दशकों की कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद बनी रह सकती हैं, खासकर तब जब वे किसी राष्ट्रपति के राजनीतिक जुनून को पूरा करती हों।”
इस रिपोर्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हाल ही में न्यूयॉर्क में की गई टिप्पणियों का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने भारत का पक्ष साफ तौर पर रखा।
विदेश मंत्री जयशंकर ने एशिया सोसाइटी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा से जुड़ी भारत की सबसे अहम चिंताओं में से किसी एक को न समझने से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने पड़ोसी देश से होने वाले आतंकवाद को दशकों से चली आ रही एक सोची-समझी नीति बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रतिक्रिया आहत राष्ट्रवाद से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि रणनीतिक स्वायत्तता की असली परीक्षा इस बात से नहीं होती कि बाहरी दबाव की कितनी जोर-शोर से निंदा की जाती है, बल्कि इस बात से होती है कि देश उसका कितनी प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।
राव ने ‘इंडिया नैरेटिव’ में लिखा, “इसके लिए अलग-अलग तरह की डिफेंस सप्लाई, बेहतर एनर्जी सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी की क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग की ताकत और संस्थागत मजबूती की जरूरत है। इन आधारों के बिना स्वायत्तता सिर्फ बातें होंगी जो असल में निर्भरता पर टिकी होंगी। भारत को उन कीमतों को समझना होगा जो उसे चुकानी पड़ सकती हैं और उन्हें चुकाने के साधन भी विकसित करने होंगे।”
इस बात पर जोर देते हुए कि इसका मतलब अमेरिका से पीछे हटना नहीं है, उन्होंने कहा, “एशिया में अनुकूल संतुलन बनाए रखने के लिए भारत को अमेरिकी टेक्नोलॉजी, निवेश और सहयोग की जरूरत है। वहीं, अमेरिका को ऐसे भारत की जरूरत है जो चीन के दबदबे का मुकाबला कर सके। दोनों देशों के पास जो कुछ उन्होंने बनाया है, उसे बनाए रखने की वजह है, और जब भी किसी असहमति को रिश्तों पर जनमत संग्रह बना दिया जाता है, तो किसी को भी फायदा नहीं होता।”
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