राजनीति
संगठन में कमियों को दूर करने उदयपुर में कांग्रेस करेगी आत्ममंथन
बढ़ती आर्थिक असमानता के चलते कांग्रेस पार्टी और देश दोनों को प्रगति के पथ पर लाने के लिए तीन दिवासीय चिन्तन शिविर में आत्मचिंतन, आत्ममंथन, आत्मावलोकन करेगी। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गुरुवार को प्रेस वार्ता कर कहा, ‘उदयपुर से उदित होगा देश की उम्मीदों का सूर्य।’ उन्होंने कहा आज जब देश प्रजातांत्रिक, आर्थिक और सामाजिक संकट के दौर से गुजर रहा है, तब कांग्रेस एक बार फिर देश को प्रगति, समृद्धि और उन्नति के पथ पर लाने के लिए एक “नव संकल्प” का ²ढ़ संकल्प लेगी। देश में बढ़ती आर्थिक असमानता के चलते 142 सबसे बड़े अमीरों की सम्पति तो एक साल में 30 लाख करोड़ रुपए बढ़ गई, लेकिन देश के 84 फीसदी घरों की आय घट गई। 15 लाख हर खाते में आना तो दूर, बचत का पैसा भी लुट गया।
उन्होंने कहा कि गिरती अर्थव्यवस्था के चलते 1 अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिर कर 77.56 हो गई, जो 75 साल में अबतक की सबसे बड़ी गिरावट है। दूसरी ओर देश का कर्ज साल 2014 में 55 लाख करोड़ रुपए से बढ़ कर साल 2022 में 135 लाख करोड़ हो गया। साफ है की केंद्र सरकार हर रोज 4,000 करोड़ रुपए का कर्ज ले रही है। देश के हर नागरिक पर 1 लाख का कर्ज है। महंगाई ने आम जनजीवन का हाल बेहाल कर दिया है। साल 2014 में 410 रुपए में मिलने वाला रसोई गैस सिलेंडर अब एक हजार का हो गया है। पेट्रोल 71 रुपए लीटर था जो आज 105.41 रुपए लीटर हो गया है। डीजल 95.87 रुपए लीटर हो गया। अकेले पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगा कर केंद्र सरकार ने आम जनता से 27 लाख करोड़ रुपए वसूले। यही हाल आटा, दाल, खाने का तेल, सब्जी, साबुन, टूथपेस्ट, फ्रिज और रोज जरूरत की हर वस्तु का है।
उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी की दर 8 फीसदी से अधिक है। भारत सरकार, सरकारी उपक्रमों व प्रांतीय सरकारों में मिलाकर 30 लाख से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। सेनाओं में 2,55,000 पद खाली हैं। निजी क्षेत्र में लघु और छोटे उद्योग तालाबंदी की कगार पर हैं। 2 करोड़ रोजगार हर साल देना तो दूर, करोड़ों रोजगार चले गए हैं। किसान व खेती को प्राइवेट कंपनियों को सौंपने की कवायद जारी है। पहली बार खेती पर जीएसटी लगाया गया। मनरेगा का बजट काट दिया गया है। किसान की आय साल 2022 तक दुगना होना तो दूर, उपज की कीमत भी नहीं मिल रही।
सुरजेवाला ने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि दलित व आदिवासी सब प्लान खत्म कर दिया गया है। उनके आरक्षण व दलित पक्षधर कानूनों पर हमला बोला जा रहा है। यहां तक कि दलित कल्याण को टारगेटेड केंद्रीय योजनाएं कुल बजट का मात्र 4.4 प्रतिशत रह गई हैं। अब तो केंद्र सरकार पिछड़े वर्गों की संख्या का सेन्सस तक जारी करने से इनकार कर रही है।
देश की भूभागीय अखंडता पर हमला बोला गया है। चीन ने दुस्साहस कर लद्दाख में भारत की सरजमीं पर कब्जा कर रखा है। अरुणाचल की सीमा पर अतिक्रमण कर चीन आए दिन नये ठिकाने बना रहा है। डोकलाम में चीन द्वारा किए नए सड़क निर्माण, तोपखाने व सैनिक ठिकानों का निर्माण हमारी अखंडता को सीधी चुनौती है। पर मोदी सरकार चीन को हमारी सरजमीं से वापस खदेड़ने में असक्षम साबित हुई है।
सरकार केवल चीनी ऐप बैन कर वाहवाही लूट रही है जबकि चीन से वस्तुओं का आयात बढ़कर 97 बिलियन डॉलर हो गया है।
उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि देश व समाज की इन समस्याओं पर पर्दा डालने के लिए सरकार ने चौतरफा धर्मांधता-रूढ़िवादिता का अंधकार फैला अल्पसंख्यक वर्गों, खास तौर से मुस्लिम, ईसाइयों व सिखों को निशाना बना रखा है। समाज में हिंदू-मुस्लिम विभाजन के बीज बो कर व तुष्टिकरण की इस राजनीति को आधार बना कर भाजपा चुनावी जीत तलाशती है।
उन्होंने कहा कि देश की अपेक्षाओं के अनुरूप उसे अपनी संगठनात्मक क्षमता, दक्षता, कार्यकुशलता और कार्यशैली का न सिर्फ़ मूल्यांकन करना होगा बल्कि वर्तमान चुनौतियों व परिस्थितियों के अनुरूप ढालना भी होगा। इसी के ²ष्टिगत कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान प्रांत के उदयपुर में चिंतन शिविर का आयोजन किया है।
सुरजेवाला के मुताबिक चिंतन शिविर में जिन 430 चिंतकों को आमंत्रित किया गया है, वे सब अलग अलग समूहों में इस प्राथमिक अध्ययन पर लगातार अलग अलग सत्रों और समूहों में लगातार तीन दिन चिंतन मंथन करेंगे तथा इस व्यापक चिंतन मंथन का जो निष्कर्ष निकलेगा उसे कांग्रेस अध्यक्ष के सम्मुख रख और फिर उसे कांग्रेस वकिर्ंग कमेटी में रखकर अंतिम रूप प्रदान किया जाएगा। जो भी निष्कर्ष निकलेगा वो कांग्रेस को न सिर्फ वर्तमान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से उबार एक नई दिशा देगा अपितु भारत के गौरवशाली भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त करेगा ।
राष्ट्रीय समाचार
केंद्र का 1,847 बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स पर खर्च बढ़कर 21.97 लाख करोड़ रुपए हुआ

भारत का 1,847 बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स (जिन्हें अभी बनाया जा रहा है) पर पूंजीगत खर्च जून, 2026 तक 21.97 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह केंद्र सरकार द्वारा बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए निर्धारित किए गए 40.54 लाख करोड़ रुपए के कुल निवेश का 54 प्रतिशत से अधिक है। यह जानकारी केंद्र द्वारा सोमवार को जारी फैक्टशीट में दी गई।
फैक्टशीट के अनुसार, कई प्रोजेक्ट पूरे होने के एडवांस स्टेज पर पहुंच चुके हैं। लगभग 709 प्रोजेक्ट्स में से 80 प्रतिशत से ज्यादा विकसित हो चुके हैं, जबकि 337 अन्य प्रोजेक्ट्स में 80 प्रतिशत से ज्यादा वित्तीय काम पूरा हो चुका है।
कनेक्टिविटी पर फोकस को देखते हुए, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर 1,341 प्रोजेक्ट्स (जिनकी कीमत 22.32 लाख करोड़ रुपए है) के साथ सबसे आगे है।
ये प्रोजेक्ट देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ाने और ज्यादा नौकरियां पैदा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पीएआईएमएएनए (राष्ट्र-निर्माण के लिए प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स) डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुशल निगरानी की जा रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा विकसित, पीएआईएमएएनए का इस्तेमाल 150 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा लागत वाले चल रहे केंद्रीय क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए किया जाता है।
प्रोजेक्ट की निगरानी को मजबूत करने के अलावा, पीएआईएमएएनए ने 16 अप्रैल, 2026 को लॉन्च किए गए एक समर्पित ‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदर्शन की निगरानी में मदद करने के लिए अपनी भूमिका का विस्तार किया है।
‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के प्रदर्शन संकेतक को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक साथ लाता है। ये संकेतक संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक डेटा से संकलित किए जाते हैं और नवीनतम उपलब्ध जानकारी के आधार पर समय-समय पर अपडेट किए जाते हैं।
एक विस्तृत संकेतक ढांचा छह इंफ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्रों तक फैला हुआ है। इनमें बिजली, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार, रेलवे, सड़कें, और बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग शामिल हैं।
‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ का विस्तार अब 165 संकेतक तक कर दिया गया है। इस विस्तार में 54 नए संकेतक को शामिल किया गया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदर्शन की निगरानी की व्यापकता में काफी वृद्धि हुई है।
एक ही डिजिटल इंटरफेस क्षेत्र-दर-क्षेत्र प्रदर्शन की निगरानी की सुविधा देता है। यह नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और हितधारकों के लिए इंटरैक्टिव विज़ुअलाइजेशन और टाइम-सीरीज विश्लेषण की सुविधा प्रदान करता है।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु में धान और गन्ना उत्पादकों को बड़ी राहत, सरकार ने बढ़ाई प्रोत्साहन राशि

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को धान और गन्ना किसानों के लिए ज्यादा प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों का बेहतर दाम दिलाने की कोशिश कर रही है, जिसके तहत खरीद की प्रभावी कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।
विधानसभा में नियम 110 के तहत बयान देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सरकार फसलों के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा, अच्छी किस्म के धान के लिए 289 रुपए प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के धान के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त प्रोत्साहन देगी।
इस बदलाव के बाद अच्छी किस्म का धान बेचने वाले किसानों को 2,750 रुपए प्रति क्विंटल मिलेंगे, जबकि सामान्य किस्म के धान की खरीद कीमत बढ़कर 2,600 रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बढ़ी हुई सहायता का मकसद किसानों पर आर्थिक बोझ कम करना और उनकी उपज के लिए उन्हें अच्छी कीमत दिलाना है।
इस घोषणा से पूरे तमिलनाडु में धान उगाने वाले बड़ी संख्या में किसानों को फायदा होने की उम्मीद है, खासकर उन किसानों को जो अपनी फसल बेचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्भर हैं।
धान राज्य की मुख्य फसलों में से एक है और खरीद की कीमतों का खेती के मौसम के दौरान किसानों की कमाई पर काफी असर पड़ता है।
मुख्यमंत्री विजय ने राज्य की चीनी मिलों को अपनी उपज बेचने वाले गन्ना किसानों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन में भी काफी बढ़ोतरी की घोषणा की।
केंद्र सरकार अभी मिलों को बेचे जाने वाले गन्ने के लिए 3,290.50 रुपए प्रति टन देती है। तमिलनाडु सरकार 709.50 रुपए प्रति टन का अतिरिक्त प्रोत्साहन देगी, जिससे किसानों को मिलने वाली कुल रकम 4,000 रुपए प्रति टन हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार है जब तमिलनाडु में गन्ने की कुल खरीद कीमत 4,000 रुपए प्रति टन के स्तर पर पहुंची है। मुख्यमंत्री ने धान के लिए बदले हुए प्रोत्साहन को भी किसानों के लिए एक अहम कदम बताया और कहा कि सामान्य किस्म के धान के लिए प्रोत्साहन राशि 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाई गई है।
ये घोषणाएं ऐसे समय में की गई हैं जब किसान खेती के सामान, मजदूरी और खेती की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए खरीद की कीमतें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसान समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य भर में खेती को मजबूत करने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए उपाय करती रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान की संसदीय समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए सुरक्षा कार्य योजना को दी मंजूरी

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी की “सुरक्षा और टिकाऊ प्रगति सुनिश्चित करने” के लिए एक रणनीतिक कार्य योजना की रूपरेखा को मंजूरी दे दी है।
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने कमेटी के प्रवक्ता हसन कशकावी के हवाले से बताया कि इस प्लान पर कमेटी की बैठक में चर्चा हुई और इसे बिना किसी विरोध के मंजूरी दे दी गई।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कशकावी ने कहा कि प्लान के सामान्य ढांचे को मंजूरी देने से पहले सांसदों ने ईरान की संबंधित संस्थाओं से मिली जानकारियों की समीक्षा की।
आईआरएनए के अनुसार, यह कानून 13 जुलाई को औपचारिक रूप से संसद में पेश किया गया था।
ईरान ने 28 फरवरी को जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी और इजरायल और अमेरिका के जहाजों या उनसे जुड़े जहाजों के सुरक्षित गुजरने पर रोक लगा दी थी। यह कदम ईरानी क्षेत्र पर उनके संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था।
जून में ईरान और अमेरिका ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों पक्षों को अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के भीतर बातचीत करनी थी, लेकिन हाल ही में इलाके में तनाव बढ़ने से बातचीत का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
जुलाई में अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर कई बार हमले किए। उनका कहना था कि ये हमले जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में और “व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कम करने” के मकसद से किए गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।
ईरान और ओमान कुछ हफ्तों से जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही के लिए एक नया रास्ता तय करने के समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा था कि अभी अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री ने यह बात विदेश मंत्रालय के ‘सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
अरागची ने कहा, “अभी अमेरिका के साथ हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है। बातचीत फिर से शुरू करने के रास्ते खोजने के लिए मध्यस्थ अभी भी कोशिश कर रहे हैं। हमारे नजरिए से जब तक अमेरिका ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ का उल्लंघन बंद नहीं करता और अपने किए गए उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता, तब तक बातचीत फिर से शुरू नहीं हो सकती।”
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