राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली-एनसीआर में शीतलहर जारी, 6 जनवरी को बारिश की संभावना
नई दिल्ली, 2 जनवरी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में कोल्ड वेव का असर लगातार जारी है। जिस कारण लोग सर्दी के सितम से परेशान हैं। आने वाले दिनों में भी शीतलहर का प्रकोप देखने को मिलेगा, जिससे सर्दी और बढ़ जाएगी।
मौसम विभाग के मुताबिक, वर्तमान में चल रही हवा से दोगुनी तेज हवा चलने की संभावना है, जिससे लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा, मौसम विभाग ने 6 जनवरी को एनसीआर में बारिश की संभावना भी जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में शीतलहर जारी है और तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। 2 जनवरी को सुबह न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 डिग्री कम रहा, जिसमें सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 7.6 डिग्री और पालम में 6.5 डिग्री दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में भी गिरावट होगी, जिससे दिन में भी ज्यादा सर्दी महसूस होगी।
मौसम विभाग ने कोल्ड वेव का अलर्ट जारी करते हुए बताया कि दिल्ली और पूरे एनसीआर में 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की आशंका है, जिससे लोगों को कड़ाके की सर्दी का सामना करना पड़ेगा।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर भी दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां घने कोहरे और न्यूनतम तापमान में गिरावट से लोग परेशान हैं, वहीं बीच-बीच में हो रही बारिश मौसम को कुछ सामान्य जरूर करती है, लेकिन अगले दिन से फिर से लोगों को फिर घने कोहरे का सामना करना पड़ता है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का अक्टूबर में कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 42 प्रतिशत बढ़कर 22.03 मिलियन टन रहा

सरकार ने सोमवार को बताया कि अक्टूबर में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयले का उत्पादन 22.03 मिलियन टन (एमटी) रहा, जो अक्टूबर 2025 के 15.49 एमटी से अधिक है। यह सालाना आधार पर 42 प्रतिशत की वृद्धि है।
पिछले महीने कोयले की आपूर्ति सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 21.11 एमटी रही, जो अक्टूबर 2025 के 15.48 एमटी से अधिक है।
कोयला मंत्रालय ने बताया कि इस क्षेत्र में सालाना आधार पर अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल की अप्रैल से अक्टूबर की अवधि की तुलना में, कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 11.30 प्रतिशत बढ़कर 117.23 एमटी हो गया है, जो कि पहले 105.33 एमटी था। कोयले की आपूर्ति 111.95 एमटी से बढ़कर 124.86 एमटी हो गई है। यह खनन कार्यों में बनी निरंतर तेजी को दर्शाता है।
इस क्षेत्र को और बढ़ावा देते हुए, झारखंड की लोहारी कोयला खदान को अक्टूबर 2026 में खदान खोलने की अनुमति दी गई है। यह खदान कई वर्षों से चालू होने का इंतजार कर रही थी, और इसे मिली मंजूरी मंत्रालय के व्यापार करने में आसानी सुधारों के असर को दर्शाती है।
मंत्रालय ने बताया कि इसके साथ ही, चालू कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खदानों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है।
इन खदानों से बढ़ता उत्पादन, आयातित कोयले पर निर्भरता को कम करने, सप्लाई-चेन को मजबूत बनाने और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचाने में मदद करेगा। साथ ही, यह औद्योगिक विकास के लिए जरूरी कच्चे माल के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर, सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को भी आगे बढ़ाएगा।
मंत्रालय ने कहा, “ये उत्साहजनक नतीजे बेहतर परिचालन दक्षता, खनन उत्पादकता में वृद्धि और कैप्टिव तथा कमर्शियल कोयला खनन क्षेत्रों में खनन क्षमताओं के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।”
इसके अतिरिक्त, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के चलते, अगस्त 2026 में भारत का कोयला आयात पिछले साल के इसी महीने के 111.05 मिलियन टन से 5.83 प्रतिशत घटकर 104.57 मिलियन टन रह गया। इस महीने देश का कोयला आयात 6.48 एमटी कम हुआ, जो घरेलू स्तर पर कोयले की बेहतर उपलब्धता और सप्लाई-चेन को मजबूत करने के उपायों को दिखाता है।
मंत्रालय उत्पादन में वृद्धि बनाए रखने, आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करने और कोयले की उपलब्धता में सुधार करने पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा। इसके लिए प्रगतिशील नीतियों, मजबूत नियामक निगरानी और सभी हितधारकों के निरंतर सहयोग का सहारा लिया जाएगा, ताकि देश की बढ़ती ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में एक भरोसेमंद योगदान सुनिश्चित किया जा सके।
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आविन ने दूध की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी का रखा प्रस्ताव, सरकार की मंजूरी का इंतजार

तमिलनाडु की सहकारी दुग्ध आपूर्तिकर्ता कंपनी आविन ने खुदरा दूध कीमतों में 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। संस्था का कहना है कि बढ़ती परिचालन लागत और दूध बिक्री केंद्र संचालकों की वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए यह कदम आवश्यक हो गया है। हालांकि यह बढ़ोतरी तभी लागू होगी जब राज्य सरकार इसे मंजूरी देगी।
आविन सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित 5 रुपए की बढ़ोतरी में से 4 रुपए सहकारी समिति को मिलेंगे, जबकि 1 रुपया दूध आउटलेट संचालकों के लिए निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य उनके कारोबार को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाना है।
आविन प्रतिदिन लगभग 35 लाख लीटर दूध की खरीद करती है, जबकि अकेले चेन्नई में इसकी दैनिक बिक्री करीब 15 लाख लीटर है। अपेक्षाकृत कम कीमत के कारण आविन दूध घरेलू उपभोक्ताओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों दोनों के बीच लोकप्रिय है।
वर्तमान में 500 मिलीलीटर के नारंगी पैकेट वाला दूध 30 रुपए में बिकता है, जबकि समान मात्रा के हरे और बैंगनी पैकेट की कीमत 24 रुपए है। नीले पैकेट की कीमत 20 रुपए है।
दूध विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें प्रति पैकेट केवल 75 पैसे का कमीशन मिलता है, जो बिजली बिल, दुकान किराया और अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कई विक्रेता लगातार मांग होने के बावजूद अपने कारोबार को बनाए रखने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, वित्तीय दबाव के कारण कई नए खुले आविन आउटलेट कुछ महीनों के भीतर बंद हो गए हैं। यही वजह है कि प्रस्तावित मूल्य वृद्धि में विक्रेताओं के लिए अतिरिक्त सहायता का प्रावधान रखा गया है।
आविन और निजी ब्रांडों के बीच बढ़ते मूल्य अंतर ने व्यावसायिक ग्राहकों की मांग भी बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, निजी कंपनियां दूध 75 रुपए प्रति लीटर से अधिक कीमत पर बेच रही हैं। इसके चलते होटल, चाय की दुकानें और मिठाई विक्रेता बड़ी मात्रा में आविन दूध खरीदते हैं, जिससे कई बार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्धता प्रभावित होती है।
आविन का कहना है कि कम बिक्री मूल्य का दबाव किसानों, सहकारी समिति और खुदरा विक्रेताओं तीनों पर पड़ रहा है। हाल ही में सरकार द्वारा दूध खरीद मूल्य बढ़ाए जाने से किसानों को राहत मिली है, लेकिन सहकारी संस्था और उसके वितरण नेटवर्क के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों का समाधान अभी भी आवश्यक है।
कंपनी ने यह भी उल्लेख किया है कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक में हाल ही में दूध की कीमतों में 8 रुपए प्रति लीटर तक की वृद्धि की गई है, जबकि तमिलनाडु के लिए प्रस्तावित बढ़ोतरी उससे कम है।
फिलहाल 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी केवल प्रस्ताव के रूप में सरकार के विचाराधीन है। जब तक राज्य सरकार मंजूरी नहीं देती, तब तक मौजूदा खुदरा कीमतें ही लागू रहेंगी।
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उत्तराखंड चुनाव 2027: पिछली बार अल्मोड़ा की छह में से कांग्रेस ने जीतीं दो सीटें, बाकी पर भाजपा का कब्जा

2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दलों की ओर से भी कमर कसी जा रही है। अल्मोड़ा जिले की विधानसभा सीटों की स्थिति का आकलन करने के लिए पिछले चुनाव परिणामों पर गौर करना होगा। अल्मोड़ा में विधानसभा की छह सीटें द्वाराहाट, सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर (सुरक्षित), अल्मोड़ा और जागेश्वर हैं। आइए जानते हैं कि पिछली बार यहां के चुनावी नतीजे क्या थे?
द्वाराहाट: पिछली बार इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच बेहद ही दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला था, लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार ने बाजी मार ली थी। कांग्रेस के मदन सिंह बिष्ट ने भाजपा के अनिल शाही को रोमांचक मुकाबले में सिर्फ 182 वोटों से हराया था। मदन सिंह बिष्ट को 17,766 वोट मिले थे। वहीं, भाजपा के अनिल शाही को 17,584 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर रहे उत्तराखंड क्रांति दल के उम्मीदवार पुष्पेश त्रिपाठी को 9,804 वोट मिले थे।
सल्ट: इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। 2022 में भाजपा उम्मीदवार महेश सिंह जीना ने कांग्रेस के रणजीत सिंह रावत को 3,688 वोटों से हराया था। भाजपा के महेश सिंह जीना को 22,393 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस उम्मीदवार रणजीत सिंह रावत को 18,705 वोट मिले थे। इस सीट पर तीसरे नंबर पर रहे उत्तराखंड क्रांति दल के राकेश नाथ को सिर्फ 1,292 वोट मिले थे।
रानीखेत: यहां के मतदाता एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस के उम्मीदवार को जीत दिलाते रहे हैं। 2022 के चुनाव में यहां भाजपा की जीत हुई थी। भाजपा उम्मीदवार प्रमोद नैणवाल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करण महारा को 2,584 वोटों के अंतर से हराया था। प्रमोद नैणवाल को 21,047 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के करण महारा को 18,463 वोट मिले थे। इस सीट पर तीसरे नंबर पर रहे आम आदमी पार्टी के नंदन सिंह बिष्ट को सिर्फ 656 वोट मिले थे।
सोमेश्वर (सुरक्षित): पिछली बार यहां से भाजपा की प्रत्याशी रेखा आर्य की जीत हुई थी। उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र बरकोटी को 5,293 वोटों के अंतर से हराया था। रेखा आर्य को 26,161 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे राजेंद्र बरकोटी को 20,868 वोट मिले थे। सोमेश्वर सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। राज्य बनने के बाद हुए चुनावों में यहां ज्यादातर बार भाजपा का ही कब्जा रहा है। कैबिनेट मंत्री होने की वजह से रेखा आर्या की स्थिति यहां मजबूत मानी जाती है।
अल्मोड़ा: 2022 में इस सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। दिलचस्प मुकाबले में कांग्रेस के मनोज तिवारी ने भाजपा उम्मीदवार कैलाश शर्मा को सिर्फ 127 वोटों के अंतर से हराया था। मनोज तिवारी को 24,439 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के कैलाश शर्मा को 24,312 वोट मिले थे। इस सीट पर मुख्य मुकाबला हमेशा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच सीधा रहा है।
जागेश्वर: पिछली बार इस सीट को भाजपा ने कांग्रेस से छीना था। भाजपा के मोहन सिंह मेहरा ने कांग्रेस उम्मीदवार गोविंद सिंह कुंजवाल को 5,883 वोटों के अंतर से हराया था। मोहन सिंह मेहरा को 27,530 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस उम्मीदवार गोविंद सिंह कुंजवाल को 21,647 मत मिले थे। तीसरे नंबर पर रहे उत्तराखंड क्रांति दल के मनीष सिंह नेगी को 936 वोट मिले थे।
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