अंतरराष्ट्रीय
चीन के वीचैट ने बंद किया ब्लूमबर्ग का वित्तीय न्यूज अकाउंट
चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट ने ब्लूमबर्ग सोशल मीडिया अकाउंट को ऑनलाइन सार्वजनिक खातों पर देश के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए बंद कर दिया है। मीडिया ने शुक्रवार को इसकी सूचना दी है।
साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, टेंसेंट के स्वामित्व वाले वीचैट ने कहा कि उसे ब्लूमबर्ग के ‘डेब्रेक’ अकाउंट के बारे में ‘शिकायतें’ मिली हैं, जो वैश्विक बाजार अपडेट पोस्ट करता है।
चीनी मंच ने कहा कि जनवरी 2021 से सक्रिय इस खाते ने चीनी नियमों का उल्लंघन किया है।
ब्लूमबर्ग अकाउंट ने पिछले हफ्ते अपना आखिरी वित्तीय अपडेट पोस्ट किया था।
यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि किस सामग्री ने खाते को बंद करने के लिए प्रेरित किया था।
टेंसेंट और ब्लूमबर्ग ने विकास पर कोई टिप्पणी नहीं की।
इस साल की शुरुआत में, बोकॉम इंटरनेशनल हॉल्डिंग्स के पूर्व शोध प्रमुख और एक मुखर अर्थशास्त्री, होंग हाओ के सार्वजनिक खातों को वीचैट और ट्वीटर जैसे वीबो दोनों से हटा दिया गया था।
होंग ने ट्विटर पर पोस्ट किया कि ‘डेब्रेक’ खाते को बंद करने से ‘मुख्य भूमि के बाजार में तेजी से गलत सूचना और गलत मूल्य’ हो सकता है।
इंटरनेट कंपनियों पर कार्रवाई के साथ, चीन ने सामग्री और डेटा सुरक्षा के लिए सख्त आवश्यकताओं के साथ मोबाइल ऐप विकास नियमों को और कड़ा कर दिया है।
चीन के साइबरस्पेस प्रशासन ने पिछले महीने कहा था, “तेजी से विकास और मोबाइल एप्लिकेशन के व्यापक उपयोग के साथ, नई स्थितियां और समस्याएं सामने आती रहती हैं, जिन्हें (नियमों) संशोधित करने और नए विकास के अनुकूल बनाने की आवश्यकता होती है।”
चीन जल्द ही एक पदानुक्रमित डेटा वर्गीकरण प्रबंधन और सुरक्षा प्रणाली स्थापित करेगा।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार कमजोर वैश्विक संकेतों से लाल निशान में खुला, आईटी और मेटल में बिकवाली

share market
मुंबई, 13 मार्च : कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शुक्रवार को गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स 590.20 अंक या 0.78 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,444.22 और निफ्टी 176.65 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,462.50 पर खुला।
शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट का नेतृत्व आईटी और मेटल शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी मेटल टॉप लूजर थे। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, रियल्टी, सर्विसेज, डिफेंस और इन्फ्रा जैसे सूचकांक भी लाल निशान में थे।
सूचकांकों में केवल एनर्जी इंडेक्स ही हरे निशान में था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 181 अंक या 1.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 16,123 और निफटी मिडकैप 100 इंडेक्स 519 अंक या 0.92 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 55,734 पर था।
सेंसेक्स पैक में पावर ग्रिड, आईटीसी, एचयूएल, एनटीपीसी और सन फार्म गेनर्स थे। टाटा स्टील, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एमएंडएम, एचसीएल, इन्फोसिस और टाइटन लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसमें डाओ जोन्स में 1.56 प्रतिशत और नैस्डैक में 1.78 प्रतिशत की कमजोरी थी।
भारत के साथ वैश्विक बाजारों में कमजोरी की वजह अमेरिका, इजरायल-ईरान युद्ध का जारी रहना है। लंबे समय तक खींचने के कारण इस युद्ध का असर आपूर्ति श्रृंखलाओं पर हो सकता है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले मुकाबले और धीमी हो सकती है या मंदी में जा सकती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजारों में बिकवाली जारी रखी और गुरुवार को 7,049.87 करोड़ रुपए की इक्विटी से निकासी की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,449.77 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया।
व्यापार
मध्य पूर्व में तनाव से भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स एक प्रतिशत से अधिक फिसला

मुंबई, 12 मार्च : मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में खुला। सुबह 9:19 पर सेंसेक्स 963 अंक या 1.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,899 और निफ्टी 303 अंक या 1.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,563 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में करीब सभी सूचकांक लाल निशान में थे। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, रियल्टी, मेटल, पीएसयू बैंक, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग में सबसे अधिक दबाव था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,070 अंक या 1.90 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 55,390 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 286 अंक या 1.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,127 पर था।
सेंसेक्स पैक में इटरनल, इंडिगो, एमएंडएम, टाटा स्टील, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, एलएंडटी, मारुति सुजुकी,बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, बीईएल, आईटीसी, इन्फोसिस और एचडीएफसी बैंक लूजर्स थे। दूसरी तरफ टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक गेनर्स थे।
ज्यादा एशियाई बाजारों में बिकवाली है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल, बैंकॉक और जकार्ता के बाजार लाल निशान में खुले थे। अमेरिकी बाजार का मुख्य सूचकांक डाओ बुधवार को लाल निशान में बंद हुआ था।
बाजार में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष में अब तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे इसमें और इजाफा हो गया है।
इस कारण से कच्चे तेल में बड़ी तेजी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 9.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.54 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 9 प्रतिशत की तेजी के साथ 95.14 डॉलर प्रति बैरल पर था।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बिकवाली जारी रखे हुए हैं और बुधवार को इक्विटी में 6,267.31 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) ने 4,965.53 करोड़ रुपए इक्विटी में निवेश किए थे।
अंतरराष्ट्रीय
भारत दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में अमेरिका का बहुत बड़ा साथी: राजदूत सर्जियो गोर

नई दिल्ली, 11 मार्च : अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने तेल की कीमतों को स्थिर रखने में भारत की भूमिका को अहम बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने भारत की रूस से तेल खरीद को ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए जरूरी बताया।
गोर ने लिखा कि भारत दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में बहुत बड़ा साथी रहा है। अमेरिका मानता है कि रूस से भारत की लगातार तेल खरीद भी इसी कोशिश का हिस्सा है।
उन्होंने आगे लिखा, “भारत तेल के सबसे बड़े कंज्यूमर और रिफाइनर में से एक है और अमेरिकियों और भारतीयों के लिए मार्केट में स्थिरता लाने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स और भारत का मिलकर काम करना जरूरी है।”
ये बयान ऐसे समय आया है जब ग्लोबल ऑयल मार्केट में ईरान संकट से बड़ी उठा पटक मची हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा है और आशंका है कि कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर और रिफाइनर है, इसलिए यहां की नीति वैश्विक बाजार पर असर डालती है।
इससे पहले व्हाइट हाउस ने प्रेस से कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे यूएस मिलिट्री कैंपेन से पैदा हुई दिक्कतों के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने की एक बड़ी कोशिश के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट को मंजूरी दी है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और नेशनल सिक्योरिटी टीम के सदस्यों के बीच बातचीत के बाद लिया गया।
लेविट ने एक सवाल के जवाब में कहा, “राष्ट्रपति और ट्रेजरी सेक्रेटरी और पूरी नेशनल सिक्योरिटी टीम इस फैसले पर इसलिए पहुंची क्योंकि भारत में हमारे सहयोगी अच्छे रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि यह तत्कालीन उपाय ईरान के संकट से पैदा हुई ग्लोबल तेल सप्लाई में रुकावटों को दूर करने के लिए किया गया है। लेविट ने आगे कहा, “जब हम ईरानियों की वजह से दुनिया भर में तेल सप्लाई के इस ‘टेम्पररी गैप’ (अस्थायी अंतर) को कम करने के लिए काम कर रहे हैं, तो हमने उन्हें तत्कालीन तौर पर रूसी तेल लेने की इजाजत दे दी है।”
लेविट ने बताया कि छूट मिलने से पहले ही शिपमेंट भेज दिए गए थे। व्हाइट हाउस के मुताबिक, प्रशासन को उम्मीद नहीं है कि इस व्यवस्था से मास्को को आर्थिक रूप से कोई खास फायदा होगा।
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