राष्ट्रीय समाचार
केंद्र से बोला सुप्रीम कोर्ट, ‘कॉलेजियम देश का कानून है, जिसका पालन किया जाना चाहिए’
जजों की नियुक्ति के मुद्दे पर केंद्र और न्यायपालिका के बीच चल रही खींचतान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र से कहा कि कॉलेजियम सिस्टम ‘देश का कानून’ है, जिसका पालन किया जाना चाहिए। कॉलेजियम के खिलाफ सरकारी अधिकारियों की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा, कॉलेजियम पर सामने आई टिप्पणियां अच्छी नहीं है और केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणी से कहा, आप उन्हें नियंत्रण करने के लिए कहें।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने एजी को बताया कि सिर्फ इसलिए कि समाज के कुछ वर्ग हैं जो कॉलेजियम प्रणाली के खिलाफ विचार व्यक्त करते हैं, यह देश का कानून नहीं रहेगा। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले, जिसने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली तैयार की, का पालन किया जाना चाहिए।
जस्टिस कौल ने एजी से कहा, समाज में ऐसे वर्ग हैं, जो संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से सहमत नहीं हैं, क्या अदालत को उस आधार पर ऐसे कानूनों को लागू करना बंद कर देना चाहिए? पीठ ने आगे कहा कि अगर समाज में हर कोई यह तय करेगा कि किस कानून का पालन करना है और किस कानून का पालन नहीं करना है, तो यह भंग हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कॉलेजियम प्रणाली के बारे में कानून मंत्री और उपाध्यक्ष द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों का हवाला दिया। जस्टिस कौल ने कहा कल लोग कहेंगे बुनियादी ढांचा भी संविधान का हिस्सा नहीं! न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने एजी से कहा, सिंह भाषणों का जिक्र कर रहे हैं, जो बहुत अच्छा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर टिप्पणी करना बहुत अच्छी तरह से नहीं लिया गया है। आपको उन्हें नियंत्रण करने के लिए कहना होगा।
एजी ने कहा कि ऐसे दो उदाहरण हैं जहां शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने केंद्र द्वारा वापस भेजे गए दोहराए गए नामों को खुद ही हटा दिया और इसने एक धारणा को जन्म दिया कि पुनरावृत्ति निर्णायक नहीं हो सकती है।
पीठ ने जवाब दिया कि ये अलग-थलग मामले हैं, जो सरकार को संविधान पीठ के फैसले को नजरअंदाज करने का लाइसेंस नहीं दे सकते हैं, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कॉलेजियम की पुनरावृत्ति बाध्यकारी है। यह देखा गया कि जब कोई निर्णय होता है, तो किसी अन्य धारणा के लिए कोई जगह नहीं होती है।
शीर्ष अदालत ने एजी से न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी के मुद्दे पर सरकार के साथ बातचीत में रचनात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया। पीठ ने कहा कि हमारे संविधान की योजना के लिए हमारी अदालत को कानून का अंतिम मध्यस्थ होना चाहिए और संसद को कानून बनाने का अधिकार है लेकिन इसकी जांच करने की शक्ति अदालत के पास है।
शीर्ष अदालत केंद्र द्वारा न्यायिक नियुक्तियों के लिए समय सीमा का उल्लंघन करने के खिलाफ एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ बैंगलोर द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला; सेंसेक्स 76,000 के ऊपर

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में खुला। इस दौरान सेंसेक्स 720 अंक या 0.96 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,135 और निफ्टी 247 या 1.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,967 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को ऑटो शेयर लीड कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी पीएसई के साथ ज्यादातर सूचकांक हरे निशान में थे। केवल निफ्टी आईटी ही लाल निशान में था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी हरे निशान में थे। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 183 अंक या 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,149 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 433 अंक या 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 61,847 पर था।
सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, मारुति सुजुकी, एसबीआई, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टीसीएस, इन्फोसिस, सन फार्मा और एनटीपीसी लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ खुले। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक हरे निशान में थे। वहीं, जकार्ता लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.58 प्रतिशत और नैस्डैक 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बातचीत अभी जारी है। इसमें होर्मुज स्ट्रेट खुलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि ईरान के साथ अमेरिकी की बातचीत अंतिम दौर में है।
इससे कच्चे तेल की कीमतों में भी कमी देखने को मिली है।
खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 5.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 97.90 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 91.12 डॉलर प्रति बैरल पर था।
राजनीति
बिजली संकट पर अखिलेश का तंज, बोले- चिट्ठियां नहीं अपनी राजनीति बचाने की कोशिश में भाजपाई

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश में गहराते बिजली संकट और भीषण गर्मी को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जनता के बढ़ते आक्रोश से भयभीत भाजपा विधायक और सांसद अब दिखावटी चिट्ठियां लिखकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने में जुटे हैं।
अखिलेश ने आरोप लगाया कि यह जनहित की चिंता नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले डूबती भाजपा से दूरी बनाकर अपनी सियासत सुरक्षित करने की कोशिश है, जबकि बिजली संकट और अव्यवस्था का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उत्तर प्रदेश में असहनीय ‘महा विद्युत आपदा’ की वजह से लगातार बढ़ते आक्रोश से बचने के लिए भयभीत भाजपाई विधायक-सांसद दिखावटी चिट्ठियों के रूप में जिस ‘कागजी कवच’ से खुद को बचाना चाह रहे हैं, वह चिट्ठी दरअसल अपनी सरकार को लिखा कोई ‘जनहित का पत्र’ नहीं, बल्कि भाजपा रूपी डूबते जहाज को छोड़कर आगामी चुनावों में विपक्ष से टिकट पाने के लिए लिखा गया ‘आवेदन पत्र’ है।
उन्होंने लिखा कि हमारे गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है, जो जनता को दुख-दर्द और दिक्कतों के सिवा कुछ नहीं देते। इस जानलेवा गर्मी में परिवारों के बड़े-बुजुर्गों, बीमारों, बच्चों और खाने-पानी की व्यवस्था में जुटी महिलाओं की क्या दुर्दशा हो रही है, यह केवल परिवार वाले ही समझ सकते हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि कभी आपदा में अवसर ढूंढने वालों ने अवसर की जगह जिस ‘अफसर’ को ढूंढा था, वही अफसर अब स्वयं आपदा साबित हो रहा है। समस्या का समाधान पूछने पर दोनों हाथ खड़े करके नारे लगाकर बच निकलने वालों के रहते समस्या नहीं सुलझेगी। भाजपा के डबल इंजन की इस आपसी टकराहट का खामियाजा जनता क्यों भुगते?
उन्होंने कहा कि किसी के लिए यह बड़ा मौका है कि वह पूरी तरह से नाकाम हो चुके किसी ‘दूत-मंत्री’ को हटा दे, यानी बहुत समय से चुभ रहे इस कांटे को निकाल दे। अर्थात इस बार आपदा में वह किसी को बाहर का रास्ता दिखाने का अवसर ढूंढ ले। ऐसे में माननीय पर किसी के खिलाफ दुर्भावनावश काम करने का आरोप भी कोई नहीं लगा पाएगा। इसके बाद मुख्य जी को अपना मंत्रिमंडल विस्तार करने और उन बेचारे सहानुभूति के पात्रों में से किसी एक ‘घाटहीन’ को समायोजित करने का मौका भी मिल जाएगा, जो सत्ता सुख के लालच में अपनी अंतरात्मा से झूठ बोलकर भी केवल हाथ मलते रह गए हैं और अपनी राजनीति खत्म होने पर पछतावे के आंसू भी नहीं बहा पा रहे हैं।
सपा मुखिया अखिलेश ने कहा कि उप्र की भाजपा सरकार भी जानती है कि अब वह कभी वापस नहीं आएगी, इसलिए वह जनता की मुश्किलों और मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज करके बस अपने खजाने भरने में लगी है।
खेल
विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई डब्ल्यूएफआई को फटकार

भारत की महिला रेसलर विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किए जाने के फैसले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहना है कि देश में मातृत्व का सम्मान होता है और डब्ल्यूएफआई के पुराने सिलेक्शन मानदंडों से हटना बहुत कुछ कहता है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह विनेश के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाकर उनका मूल्यांकन करे और आगामी एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करे। विनेश मैटरनिटी ब्रेक के बाद वापसी कर रही हैं।
गौरतलब है कि डब्ल्यूएफआई ने विनेश को ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा था, जिसमें उन पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चार सवालों के जवाब मांगे थे। इसके साथ ही डब्ल्यूएफआई ने विनेश के किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में शामिल होने पर 26 जून, 2026 तक रोक लगा दी थी।
डब्ल्यूएफआई के इस फैसले की वजह से विनेश नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। विनेश ट्रायल की अनुमति मांगने के लिए डब्ल्यूएफआई के पास पहुंची थीं, लेकिन उनकी अपील को नजरअंदाज कर दिया गया था।
डब्ल्यूएफआई ने विनेश की नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट के ट्रायल में शामिल होने की अपील यह कहकर ठुकरा दी थी कि उनके खिलाफ वाडा के 5.6.1 नियम के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है। डब्ल्यूएफआई के अनुसार, इस नियम के मुताबिक संन्यास से वापसी कर रहे खिलाड़ियों को किसी भी टूर्नामेंट में खेलने से पहले कम से कम छह महीने तक का नोटिस पूरा करना जरूरी होता है।
इसके बाद विनेश ने कोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए एशियन गेम्स के लिए 30 और 31 मई को होने वाले ट्रायल में शामिल होने की अपील की थी। विनेश ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के बाद कोर्ट से इस मामले में दखल देने की गुजारिश की थी। हालांकि, मामले की पहली सुनवाई में कोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि वह डब्ल्यूएफआई का पक्ष सुने बिना कोई भी निर्देश जारी नहीं कर सकता है।
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