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Friday,30-January-2026
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राष्ट्रीय

केंद्र ने जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में राज्यों को 75 हजार करोड़ रुपये जारी किए

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केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति के बदले में दी गई बैक-टू-बैक ऋण सुविधा के तहत राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों को 75 हजार करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी है। यह वास्तविक उपकर संग्रह में से हर 2 महीने में जारी की जा रही सामान्य जीएसटी क्षतिपूर्ति के अतिरिक्त धनराशि है।

28 मई 2021 को हुई 43वीं जीएसटी परिषद की बैठक के बाद, यह फैसला लिया गया था कि केंद्र सरकार 1.59 लाख करोड़ रुपये का ऋण लेगी और क्षतिपूर्ति कोष में अपर्याप्त धनराशि के मद्देनजर कम जारी की गई क्षतिपूर्ति के कारण संसाधन की कमी को पूरा करने के लिए बैक-टू-बैक आधार पर राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों को जारी करेगी।

यह धनराशि वित्तवर्ष 2020-21 में इसी तरह की सुविधा के लिए अपनाए गए सिद्धांतों के अनुसार है, जहां ऐसी ही व्यवस्था के तहत राज्यों को 1.10 लाख करोड़ रुपये जारी किए गए थे।

1.59 लाख करोड़ रुपये कीयह धनराशि 1 लाख करोड़ रुपये (उपकर संग्रह के आधार पर) से ज्यादा की क्षतिपूर्ति के अतिरिक्त होगी, जो इस वित्तवर्ष के दौरान विधानसभा वाले राज्यों/यूटी को जारी किए जाने का अनुमान है। कुल 2.59 लाख करोड़ रुपये की धनराशि वित्त वर्ष 2021-22 में जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि से ज्यादा होने का अनुमान है।

सभी पात्र राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (विधानसभा वाले) ने बैक-टू-बैक ऋण सुविधा के तहत क्षतिपूर्ति की कमी की भरपाई की व्यवस्था पर सहमति दी है। कोविड-19 महामारी पर प्रभावी प्रतिक्रिया और प्रबंधन व पूंजी व्यय के लिए सभी राज्यों को बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके प्रयास में सहायता के लिए, वित्त मंत्रालय ने वित्तवर्ष 2021-22 के दौरान बैक-टू-बैक ऋण सुविधा के तहत सहायता जारी करने में अग्रणी रहते हुए गुरुवार को एक किस्त में 75,000 करोड़ रुपये (पूरे साल के दौरान कुल कमी का लगभग 50 प्रतिशत) जारी कर दिए हैं। शेष धनराशि 2021-22 की दूसरी छमाही में नियमित रूप से किस्तों में जारी कर दी जाएगी।

75,000 करोड़ रुपये की धनराशि का भारत सरकार द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष में जारी 5-साल की प्रतिभूतियों से कुल 68,500 करोड़ रुपये और 2 साल की प्रतिभूतियों से 6,500 करोड़ रुपये का वित्तपोषण किया जा रहा है, जो क्रमश: 5.60 प्रतिशत और 4.25 प्रतिशत भारित औसत आय वाली हैं।

यह अनुमान है कि इस धनराशि से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अन्य कामों के अलावा स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्च र परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में अपने सार्वजनिक व्यय की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

राजनीति

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दी श्रद्धांजलि, बापू के आदर्शों को किया याद

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नई दिल्ली, 30 जनवरी : जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उपराज्यपाल ने कहा कि बापू की शिक्षाएं और आदर्श मानवता को राह दिखाते रहेंगे।

एलजी ऑफिस ने एक्स पोस्ट में लिखा, “मैं पूज्य बापू की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि देता हूं। उनकी शिक्षाएं और आदर्श मानवता को राह दिखाते रहेंगे। शहीद दिवस पर मैं उन बहादुर आत्माओं को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं जिन्होंने देश की आजादी, एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।”

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। श्रद्धेय ‘बापू’ का सत्यनिष्ठ आचरण, अहिंसा की उनकी अडिग साधना और मानवता के प्रति अनन्य करुणा संपूर्ण विश्व को सदैव आलोकित करती रहेंगी। आइए, ‘बापू’ के आदर्शों को आत्मसात कर समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा, “परम श्रद्धेय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। आपने सत्य, अहिंसा एवं एकता के संदेश से मानवता की सेवा का मार्ग दिखाया। आपका जीवन लोककल्याण के पावन ध्येय की प्राप्ति का अनुकरणीय अध्याय है।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिखा, “विश्व को सत्य, अहिंसा और सेवा का मार्ग दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन। आपका जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा का अमर संदेश है, जो हमें सदैव न्याय, समरसता और शांति के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता रहेगा।”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने लिखा, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। सत्य, अहिंसा, कर्तव्यनिष्ठा और करुणा के सिद्धांतों पर आधारित उनका जीवन हमें सदैव प्रेरणा देता रहेगा।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि। एक एकजुट, समावेशी भारत का गांधीजी का विजन ही हमारे लोकतंत्र की आत्मा है।”

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मनोरंजन

4 साल के गैप के बाद अहान शेट्टी के लिए मुश्किल रहा था शूटिंग करना, बताया कैसे नर्वसनेस को करते थे दूर

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मुंबई, 29 जनवरी : देश में 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद से ‘बॉर्डर-2’ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। फिल्म में सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी ने नेवी अफसर की भूमिका निभाई है। अहान शेट्टी ने फिल्म की शूटिंग, बॉर्डर फिल्म की तुलना और लंबे गैप के बाद वापस सेट पर शूटिंग करने के अनुभवों को साझा किया है।

मीडिया से खास बातचीत में अभिनेता ने ‘तड़प’ के 4 साल बाद फिल्म बॉर्डर-2 में काम करने के अनुभव पर कहा, ‘लंबे गैप के बाद फिल्म की शूटिंग बड़े स्टार्स के साथ करना नर्वस कर देने वाला अनुभव था, लेकिन सनी सर, वरुण धवन और दिलजीत दोसांझ ने सेट पर काफी सपोर्ट किया था, जिससे चीजें करने में काफी आसानी रही। ‘तड़प’ के बाद का समय थोड़ा मुश्किल था, लेकिन मेरे परिवार और दोस्तों ने बहुत मदद की थी। उनकी वजह से ही कभी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और न ही रिग्रेट किया।”

फिल्म बॉर्डर की विरासत को आगे बढ़ाने के प्रेशर और शूटिंग के समय बड़ी स्टारकास्ट के साथ काम करने के अनुभव पर उन्होंने कहा, “मैंने सिर नीचे किया और सारा फोकस काम पर था। मैं सिर्फ हर चीज को अच्छा और परफेक्ट चाहता था और पूरी ईमानदारी के साथ काम किया। मेरे निर्देशक ने जो कहा मैंने सिर्फ वही किया और खुद को शांत रखने के लिए शूटिंग खत्म हो जाने पर मैं और वरुण रात में साथ में डिनर पर भी जाते हैं, जिससे काम को लेकर नर्वसनेस कम हो सके।”

अपने किरदार को लेकर की गई तैयारी पर अहान ने कहा, “एक नेवी अफसर का रोल निभाना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि सबसे जरूरी थी बॉडी लैंग्वेज और किरदार के साथ आई जिम्मेदारियां। उस दौरान बोलने का तरीका और नेवी अफसर की तरह एटीट्यूड रखना बहुत जरूरी था, क्योंकि एक नेवी अफसर बिना अपने बारे में सोचे देश के लिए सोचता है और चेहरे पर एक शिकन तक नहीं आती। वो जिम्मेदारी किरदार में लानी जरूरी थी।”

‘बॉर्डर’ और ‘बॉर्डर-2’ की तुलना पर अहान ने कहा, “दोनों फिल्में एक ही युद्ध पर बनी हैं, लेकिन दोनों का टाइम पीरियड अलग है। पहले जेपी सर ने फिल्म को शूट किया था और लाइव ब्लास्ट शूट किए, जो करना बहुत मुश्किल है और आज अलग तकनीक के साथ फिल्म की शूटिंग की है। कास्ट अलग है और क्रू भी। रही बात तुलना की, तो ये करना बेकार है क्योंकि ऑरिजनल, ऑरिजनल है। उसकी जगह कोई नहीं ले सकता है। सेट पर सनी सर और पापा ने भी काफी स्टोरी सुनाई कि फिल्म के दौरान कैसे शूटिंग हुई थी।”

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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए भेदभाव नियमों पर फिलहाल लगाई रोक, 2012 के नियम जारी रहेंगे

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Supreme Court

नई दिल्ली, 29 जनवरी : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने फिलहाल यूजीसी के नए रेगुलेशन पर रोक लगा दी है और स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि तब तक 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि उन्होंने यूजीसी के नए नियमों के सेक्शन 3सी को चुनौती दी है। उनका कहना था कि रेगुलेशन में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है, वह संविधान के अनुरूप नहीं है।

विष्णु शंकर जैन ने तर्क दिया कि संविधान के अनुसार, भेदभाव का प्रश्न देश के सभी नागरिकों से जुड़ा है, जबकि यूजीसी के नए नियमों में भेदभाव को केवल विशेष वर्ग तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह परिभाषा न केवल अधूरी है, बल्कि संवैधानिक भावना के विपरीत भी है।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मान लीजिए दक्षिण भारत का कोई छात्र उत्तर भारत में दाखिला लेता है या उत्तर का छात्र दक्षिण में पढ़ने जाता है और उसके खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी की जाती है, जबकि दोनों पक्षों की जाति की जानकारी नहीं है, तो ऐसी स्थिति में कौन-सा प्रावधान लागू होगा?

इस पर विष्णु जैन ने जवाब दिया कि सेक्शन 3ई ऐसी परिस्थितियों को कवर करता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव होता है, तो उसके लिए अलग से प्रावधान मौजूद है और उस पर कार्रवाई की जा सकती है।

एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाया कि यूजीसी के नए नियमों में रैगिंग से जुड़े प्रावधान क्यों हटाए गए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि नया रेगुलेशन शिक्षा व्यवस्था को आगे ले जाने के बजाय पीछे की ओर धकेल रहा है। उनका कहना था कि भविष्य में ऐसा हो सकता है कि कोई फ्रेशर, जो सामान्य वर्ग से आता हो, पहले ही दिन अपराधी की तरह देखा जाने लगे और जेल तक पहुंच जाए। यह गंभीर चिंता का विषय है।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं। सवाल यह है कि क्या इस नए कानून के जरिए हम और पीछे की ओर जा रहे हैं?

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यूजीसी के नए रेगुलेशन को समाप्त करने और उस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत अनुमति दे, तो वे इससे बेहतर और संतुलित रेगुलेशन तैयार कर सकते हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एक संवैधानिक मामला है। हालांकि, कोर्ट ने रेगुलेशन में प्रयुक्त भाषा को लेकर चिंता जताई।

चीफ जस्टिस ने कहा कि रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों से यह संकेत मिलता है कि इसके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि अदालत समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाने पर विचार कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सेक्शन 2ई पहले से मौजूद है, तो फिर 2सी की प्रासंगिकता कैसे बनती है?

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