राजनीति
बिहार : वामपंथी दलों की राजद से बढ़ी ‘नजदीकियां’
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक दलों द्वारा ‘दोस्तों’ की खोज प्राारंभ हो गई है। इस बीच विपक्षी दलों के महागठबंधन में शामिल घटक दलों के बीच जहां एक ओर नाराजगी की बातें सामने आ रही हैं, वहीं वामपंथी दलों की राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से नजदीकियां बढ रही हैं।
राजग को टक्कर देने के लिए वामपंथी पार्टियां महागठबंधन के नेताओं के संपर्क में हैं और इसे लेकर बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है।
वामपंथी दलों के नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से बुधवार को मुलाकात की और इस मामले को लेकर चर्चा की। बैठक में सभी दलों में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने पर सहमति बनी है, हालांकि अभी सीट बंटवारे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का एक संयुक्त शिष्टमंडल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से मिला और इस बारे में चर्चा की।
भाकपा के प्रदेश सचिव रामनरेश पांडे ने बताया कि दलों में इस बात पर सहमति बनी कि राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, भाकपा, माकपा, अन्य वामपंथी दल एवं अन्य पार्टियां मिलकर सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि सभी दलों के बीच सम्मानजनक तरीके से सीटों के बंटवारे पर जल्द ही सहमति बना ली जाएगी।
उन्होंने कहा, “किसी भी परिस्थिति में व्यापक गठबंधन के बीच किसी प्रकार की अड़चन नहीं आने दी जाएगी। सभी पक्ष आपसी समझदारी और व्यापक राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे।”
उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों से समझौता के लिए राजद ने अपने प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को अधिकृत किया है।
वैसे इससे पहले भी भाकपा और माकपा, राजद या जनता दल के साथ गठबंधन में रह चुकी है, लेकिन यह पहली बार होगा जब भाकपा (माले) भी राजद के इस गठबंधन में होगी।
भाकपा (माले) के फि लहाल तीन विधायक हैं।
भाकपा (माले) के कार्यालय सचिव कुमार परवेज कहते हैं कि हमलोग राजद के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास पहले से ही तीन सीटें हैं और भोजपुर, पटना, अरवल और सीवान जिले में एक दर्जन से अधिक सीटों पर हमारी अच्छी पकड़ है।
उन्होंने कहा, “यह एक अच्छे संकेत की तरह दिखता है कि तीनों वामपंथी दल बिहार में महागठबंधन का हिस्सा बनने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों की इच्छा विपक्ष मजबूत और एकता के साथ चुनाव में उतरने की है और नीतीश कुमार के गठबंधन को शिकस्त देने की।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में भी वामपंथी दलों को कुछ सीटों पर समझौता हुआ था, लेकन बेगूसराय सीट पर जेएनयू छात्र संघ के पूर्व नेता कन्हैया कुमार के प्रत्याशी बनने के बाद वहां समझौता नहीं हो सका था।
बहरहाल, राजद और वामपंथी दलों के इस चुनाव में समझौता होने के बाद चुनाव प्रचार में तेजस्वी और कन्हैया मंच साझा करेंगे या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा।
राजनीति
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से घोषणा पर विपक्ष ने जताई आपत्ति, सरकार से पूछे सवाल

नई दिल्ली, 3 फरवरी : भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बाद विपक्षी पार्टियां सरकार पर हमलावर हैं। विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इन समझौते की घोषणा किए जाने पर आपत्ति जताई और सरकार से सवाल पूछे हैं।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पूछा, “सरकार बताए कि क्या देश की राजधानी दिल्ली से वाशिंगटन शिफ्ट हो गई है।” उन्होंने कहा, “‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोकने की घोषणा वाशिंगटन करता है, अभी डील की घोषणा भी वाशिंगटन से हो रही है। भारत तेल कहां से खरीदेगा, यह घोषणा भी वाशिंगटन से हो रही है।”
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो चाहते हैं, वह कहते हैं, लेकिन हमारी सरकार से आवाज नहीं आती है। जब ट्रंप ने 100 प्रतिशत टैरिफ किया था, तब खड़े होकर किसी ने नहीं बोला। जब इसे 50 प्रतिशत किया, तब भी किसी ने नहीं बोला। डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने से इनकार किया और वेनेजुएला से खरीदने को कहा, तब भी सरकार ने कुछ नहीं बोला। उन्होंने पाकिस्तान के साथ सीजफायर कराने की घोषणा भी की थी, तब भी सरकार ने कुछ नहीं कहा। लेकिन जब अमेरिकी टैरिफ को 18 प्रतिशत किया गया, तो सरकार में बैठे लोग बड़े खुश हो रहे हैं।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि भारत का टैरिफ अब शून्य है। लेकिन क्या यह सही है कि अमेरिका को होने वाले भारतीय एक्सपोर्ट पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जबकि भारत को होने वाले अमेरिकी एक्सपोर्ट पर शून्य टैरिफ लगेगा? ये वे अहम मुद्दे हैं, जिन पर हम स्पष्ट जवाब चाहते हैं।”
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “अभी अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी है, लेकिन इससे पहले यह टैरिफ कई गुना कम था। अभी 18 प्रतिशत टैरिफ अपने आप में सवाल खड़े करता है। इसकी घोषणा भारत सरकार की तरफ से भी नहीं की गई है।”
डिंपल यादव ने कहा कि यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने की है। जिस तरह से अमेरिका भारत के साथ बर्ताव कर रहा है, उससे पता चलता है कि भारत सरकार उस तरह से डील नहीं कर पा रही है, जैसा अमेरिका को करना चाहिए।
महाराष्ट्र
मुंबई नगर निगम ने स्वच्छता नियमों के उल्लंघन पर सख्त जुर्माने की घोषणा की: थूकने पर ₹250, कूड़ा फैलाने पर ₹500 और बिना लाइसेंस के कचरा ले जाने पर ₹25,000 का जुर्माना।

मुंबई: मुंबई नगर निगम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के बारे में जागरूकता बढ़ाकर और उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाकर पूरे शहर में स्वच्छता और सफाई में सुधार के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह कदम आवासीय, वाणिज्यिक और सार्वजनिक क्षेत्रों में स्वच्छ सार्वजनिक स्थानों और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को सुनिश्चित करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।
नगर निगम अपशिष्ट उत्पादकों, प्रतिष्ठानों, अपशिष्ट सेवा प्रदाताओं और ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण से संबंधित नियमों के बारे में जागरूकता पैदा कर रहा है। ये नियम अपशिष्ट के भंडारण, पृथक्करण, परिवहन और निपटान को नियंत्रित करते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का पालन न करने वाले नागरिकों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
संशोधित नियमों के तहत, सामान्य उल्लंघनों के लिए जुर्माने की राशि निर्धारित की गई है। सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर 250 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। कूड़ा फेंकने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा, जबकि गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग न करने पर 200 रुपये का जुर्माना होगा। वैध लाइसेंस के बिना कचरा परिवहन करने पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगेगा।
नगर आयुक्त भूषण गगरानी के निर्देशों के अनुसार, नगर निगम की सीमा के भीतर स्वच्छता बनाए रखने के लिए नियमित कार्रवाई की जा रही है। अतिरिक्त नगर आयुक्त अश्विनी जोशी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन उपायुक्त किरण दिघावकर के मार्गदर्शन में बताया कि शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इन उपायों को सुदृढ़ करने के लिए समय-समय पर विशेष स्वच्छता अभियान और गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। ये नियम सभी अपशिष्ट उत्पादकों और सार्वजनिक एवं निजी स्थानों पर लागू होंगे। इनमें आवासीय भवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, पेशेवर एवं औद्योगिक परिसर, सरकारी एवं अर्ध-सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक स्थल, मनोरंजन स्थल और सार्वजनिक उपयोग के अन्य सभी क्षेत्र शामिल हैं।
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कूड़ा-करकट और उपद्रव को रोकना, परिसर की स्वच्छता सुनिश्चित करना और ठोस कचरे को स्रोत पर ही अनिवार्य रूप से अलग करना है। इन विनियमों में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के भंडारण और संग्रहण से संबंधित विस्तृत जिम्मेदारियां, उत्पादकों, नगरपालिका अधिकारियों, प्रतिनिधियों और ठेकेदारों के कर्तव्य तथा सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधाओं के संचालन का विवरण दिया गया है। इनमें जैव-चिकित्सा अपशिष्ट, ई-अपशिष्ट, निर्माण और विध्वंस मलबा तथा प्लास्टिक अपशिष्ट भी शामिल हैं।
कुछ विशेष अपराधों के लिए अतिरिक्त जुर्माने की घोषणा की गई है। सड़कों, फुटपाथों, बगीचों या सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। सार्वजनिक स्थानों पर स्नान करने पर 300 रुपये का जुर्माना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब या शौच करने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों या पक्षियों को खाना खिलाने पर भी 500 रुपये का जुर्माना लगेगा।
आंगन या परिसर को साफ न रखने पर 500 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। डॉ. अश्विनी जोशी ने नागरिकों और प्रतिष्ठानों से अपील की कि वे नियमों का सख्ती से पालन करें और मुंबई को स्वच्छ और अधिक सुंदर बनाए रखने में नगर निगम के साथ सहयोग करें।
राजनीति
पश्चिम बंगाल एसआईआर विवाद पर बुधवार को सुप्रीम सुनवाई, ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल

नई दिल्ली, 3 फरवरी : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई होगी। प्रदेश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर भी शीर्ष अदालत सुनवाई करेगी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को सवालों के घेरे में खड़ा किया गया है। सीएम ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। याचिका में इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया गया है और कहा गया है कि इसका सीधा असर निष्पक्ष चुनाव पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसे बिना पर्याप्त परामर्श व स्पष्ट दिशा-निर्देशों के लागू किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की प्रक्रिया से आम नागरिकों में भ्रम और भय का माहौल बन रहा है। अपनी याचिका में सीएम ममता ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और तानाशाही रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि जिस संवैधानिक संस्था से निष्पक्षता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की अपेक्षा की जाती है, वही संस्था अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद चिंताजनक है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि चुनाव आयोग का यह रवैया संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक संतुलन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ममता ने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले में सीधी दखल देने और समुचित निर्देश जारी करने की मांग की है।
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