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Thursday,08-October-2026
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बिहार विधानसभा चुनाव : छठ के बाद कैसे रूकेंगे प्रवासी मतदाता? भाजपा ने बनाया पूरा प्लान

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पटना, 23 अक्टूबर : बिहार में चुनावी बिगुल बजने के बाद भाजपा की टेंशन इस बात को लेकर बढ़ गई है कि आखिर छठ पूजा के संपन्न होने के बाद यहां प्रवासी मतदाताओं को कैसे रोका जाए? क्योंकि, छठ पूजा का त्योहार मनाने के लिए देश के कोने-कोने में रहने वाले बिहारवासी अपने प्रदेश का रुख करते हैं।

बिहार में दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को मतदान होगा। वहीं, छठ पूजा 25 अक्टूबर से शुरू होकर 28 अक्टूबर तक चलेगी। लेकिन इससे पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यहां के प्रवासी मतदाताओं को छठ पूजा के बाद रोकना है।

एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक, 48 लाख से ज्यादा प्रवासी बिहार छठ पूजा मनाने के लिए अपने प्रदेश का रुख करते हैं। इसमें से 45.78 लाख घरेलू प्रवासी और 2.17 लाख विदेश में काम करने वाले बिहार के लोग शामिल हैं।

यह सभी लोग प्रतिवर्ष छठ का त्योहार मनाने के लिए अपने प्रदेश का रुख करते हैं। इसके बाद अपने-अपने कर्मभूमि की ओर रवाना हो जाते हैं। आमतौर पर छठ पूजा के बाद लोग बिहार में रुकने से गुरेज करते हैं।

वहीं, अब जब बिहार में छठ के बाद चुनाव होना है, तो भाजपा ने ऐसे सभी प्रवासी लोगों को रोकने के लिए पूरा प्लान बना लिया है। भाजपा के एक सूत्र के मुताबिक, पार्टी की तरफ से प्रदेश के सभी जिलों में बूथ-स्तरीय अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनसे आग्रह कर रहे हैं कि वो मतदान समाप्त होने तक यहीं रहें। इसके बाद ही कहीं जाएं।

भाजपा के मुताबिक, हम इस बात को भलीभांति समझते हैं कि छठ के बाद किसी भी आम बिहारी के लिए अपने प्रदेश में रुकना मुश्किल हो जाता है। उन्हें अक्सर नौकरी गंवाने का डर रहता है। लेकिन, हम ऐसे सभी लोगों के बीच में जाकर उन्हें मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके अलावा, हम उन्हें मतदान का महत्व भी समझा रहे हैं। हम उन्हें यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान का क्या मूल्य होता है?

जानकारी के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव में प्रवासी लोगों की अहमियत को देखते हुए बूथ कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों तक को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रवासी मतदाताओं की सबसे अधिक संख्या पूर्वी चंपारण (6.14 लाख), पटना (5.68 लाख), सीवान (5.48 लाख), मुजफ्फरपुर (4.31 लाख) और दरभंगा (4.3 लाख) जैसे जिलों में है। यह सभी जिले पहले चरण के मतदान के तहत कवर कर दिए जाएंगे।

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सीएम बनने के बाद मुझे स्टिंग ऑपरेशन के जरिए फंसाने की कोशिश की गई: शिवकुमार

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नई दिल्ली/बेंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को दावा किया कि सीएम बनने के बाद उन्हें स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिए फंसाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि उनके पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए तस्वीरें और दस्तावेज़ हैं। दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए सीएम शिवकुमार ने कहा कि पद संभालने के बाद कई लोग उनसे मिले थे और उन्हें पता है कि इन कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे कौन था। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री बनने के बाद मुझे फंसाने की कोशिश की गई। कुछ लोग मुझसे मिले। मेरे पास तस्वीरें हैं। मुझे पता है कि इन स्टिंग ऑपरेशन का मास्टरमाइंड कौन है।” कन्नड़ की एक कहावत का ज़िक्र करते हुए—जिसमें कहा गया है कि अपराध करने के बाद चोर चालाकी दिखाते हैं, भले ही उनका काम सबके सामने हो—शिवकुमार ने कहा कि उन्हें इसमें शामिल लोगों के बारे में पता है और उन्होंने पुलिस को इस बारे में जानकारी दे दी है।

उन्होंने कहा, “मैं उन सभी को जानता हूं। मैंने पुलिस को सूचित कर दिया है और मुख्यमंत्री बनने के बाद मुझसे संपर्क करने वाले कुछ लोगों से जुड़े सभी दस्तावेज़ अपने पास रखे हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि वह मामले की पूरी जानकारी तो नहीं दे सकते, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उन्हें पता है कि लोग उनसे कैसे मिले, वे किससे मिले और इस कथित ऑपरेशन के पीछे कौन था। उन्होंने कहा, “वे किसी मामले पर चर्चा करने आए थे। वे कैसे आए और मुझसे मिले, वे किससे मिले, मुझे हर बात पता है। कौन यह सब प्लान कर रहा है, यह भी मुझे पता है।” शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है क्योंकि सरकारी अधिकारियों को ऐसे ऑपरेशन में बेवजह फंसाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैं दूसरे लोगों को जवाब नहीं देना चाहता। मैंने अपने अधिकारियों से सावधान रहने को कहा है, क्योंकि हमारे अधिकारियों को बेवजह फंसाया जाता है। इसलिए, मैंने उन्हें सतर्क रहने को कहा है।” उन्होंने आगे दावा किया कि उनके आस-पास लोगों के तीन घेरे थे और आरोप लगाया कि कथित ऑपरेशन के हिस्से के तौर पर कुछ लोगों को काम पर रखा गया था। शिवकुमार ने कहा, “मेरे आस-पास तीन घेरे हैं। उन्होंने कुछ लोगों को काम पर रखा है। कुछ नेताओं ने ऐसा किया है, और मेरे पास पक्की जानकारी है।” मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि स्टिंग ऑपरेशन शुरू करने की कोशिश के तहत उन्हें खुद निशाना बनाया गया था और कहा कि दूसरों के खिलाफ भी ऐसे ही ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझे निशाना बनाया है, और वे मुझसे ही स्टिंग ऑपरेशन शुरू करना चाहते हैं। मेरे पास इसे साबित करने के लिए सारे सबूत हैं। मैं ऐसे ही नहीं बोल रहा हूँ। मेरे पास सारे सबूत हैं। मैं मुख्यमंत्री बनने के बाद मुझे निशाना बनाए जाने की बात कर रहा हूँ।” शिवकुमार ने यह भी दावा किया कि उन्हें पता है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे कौन है और उन्हें कौन फंड कर रहा है। उन्होंने कहा, “वे दूसरों पर भी स्टिंग कर रहे हैं। मुझे पता है कि इसके पीछे कौन है और स्टिंग ऑपरेशन के लिए कौन फंड दे रहा है।”

गौरतलब है कि कांग्रेस मंत्रियों को निशाना बनाकर संभावित स्टिंग ऑपरेशन का मुद्दा तब सामने आया जब मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कथित तौर पर कैबिनेट बैठक में आशंका जताई कि बीजेपी और जेडी(एस) मंत्रियों को निशाना बना सकते हैं और उनके खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन कर सकते हैं। भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने बुधवार को कांग्रेस मंत्रियों के खिलाफ कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर मुख्यमंत्री शिवकुमार से सवाल किया और कहा कि शिवकुमार ने खुद अपने कैबिनेट सहयोगियों को अपनी गतिविधियों और बातचीत को लेकर सावधान रहने की चेतावनी दी थी। कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने बुधवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस का स्टिंग ऑपरेशन करने और लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए उनका इस्तेमाल करने का इतिहास रहा है, और कहा कि पार्टी के अपने मंत्रियों और विधायकों से बात करके इसकी पुष्टि की जा सकती है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ बीजेपी नेता आर. अशोक ने बुधवार को दावा किया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार कांग्रेस मंत्रियों को निशाना बनाकर किए जा रहे कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर चिंतित थे क्योंकि वह खुद पहले ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे थे।

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‘अराजकतावादी मानसिकता’: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर नितिन नबीन ने राहुल गांधी पर निशाना साधा

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वाराणसी: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष में हिम्मत है, तो उन्हें उन सीटों से इस्तीफा दे देना चाहिए जो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए चुनावों में जीती गई थीं। यह बयान बुधवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में जंतर-मंतर की ओर किए गए एक और विरोध प्रदर्शन के बाद आया। इंडिया ब्लॉक के सांसद जब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध करने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें ले जा रही बस को जनपथ के पास रोक दिया गया और दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्ष के अन्य सांसदों को हिरासत में ले लिया। पत्रकारों से बात करते हुए नितिन नबीन ने कहा, “मैं कहूंगा कि ये लोग अराजकतावादी सोच वाले हैं, जो समाज में सिर्फ जहर घोलना जानते हैं। आखिर, इसी चुनाव आयोग ने केरल में चुनाव कराए थे।”

उन्होंने कहा, “इसने तमिलनाडु में भी चुनाव कराए, जहां वे सत्ता में आए। अगर हिम्मत है, तो राहुल गांधी को पहले इस्तीफा देना चाहिए। जनता उनके खेल को अच्छी तरह देख रही है। विपक्ष के ये नेता घुसपैठियों को बचाने में लगे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “वे लोगों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं। हम उन्हें उनके अधिकार वापस दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। मेरा मानना ​​है कि जो लोग यहां के हैं, उनका देश के संसाधनों पर अधिकार है।” नबीन ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की गई व्यवस्थाओं के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं बिहार से हूं और वाराणसी आना हमारी परंपरा का हिस्सा है। मैं कहूंगा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बहुत अच्छे तरीके से बनाया गया है। भक्तों को भी यह पसंद आ रहा है। यह एक शानदार अनुभव है। इसके लिए मैं पीएम मोदी और सीएम योगी को बधाई देना चाहता हूं।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बाबा विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। वे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में युवाओं से बातचीत करेंगे और बाद में गोकुल धाम में आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर पार्टी पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।

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जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

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इंडिया ब्लॉक के नेताओं को बुधवार को जंतर-मंतर जाते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं। विपक्षी नेता लगातार दूसरे दिन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जा रहे थे।

हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “गृह मंत्री अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी, सीईसी ज्ञानेश कुमार और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ये सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन हम उन्हें न्याय के कटघरे में लाएंगे। यह मेरी गारंटी है कि इन चारों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह सब घबराहट में की गई प्रतिक्रिया है। यह सब डर है।”

पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को धक्का देते हुए बसों में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कस्तूरबा गांधी मार्ग पर हिरासत में लिए गए राहुल गांधी और अन्य नेताओं को ले जा रही बस का टायर कथित तौर पर पंक्चर कर दिया।

इससे पहले प्रियंका गांधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी के बीच सड़क पर लेट गईं और विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग से मिलने की अनुमति दिए जाने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया।

प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से कहा, “यह है कि वे सांसदों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, जो सिर्फ चुनाव आयुक्त से मिलने की मांग कर रहे हैं।”

उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर सांसदों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिसकर्मियों ने मुझे पूरी तरह खरोंच दिया है। उन्होंने हमें जमीन पर गिरा दिया। अब हम यहां से नहीं हटेंगे। उन्हें अपनी फोर्स वापस बुलाने दीजिए। मैं यहां से नहीं हटूंगी।”

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सुरक्षाकर्मियों पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं करेंगे। राहुल जी और मैं बस में थे। जब राहुल जी बस से नीचे उतरे तो राहुल जी और प्रियंका जी के साथ धक्का-मुक्की शुरू हो गई। उन्होंने गुंडागर्दी की है और गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”

कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, “जब तक हमें अपने सवालों के जवाब नहीं मिलते, हमारी आवाज मजबूत बनी रहेगी।”

वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेताओं को बसों में भरकर पुलिस थानों ले जाया गया और दुर्भाग्य से सुबह उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या सार्वजनिक स्थानों पर जाना, धरना देना, विरोध प्रदर्शन करना या मार्च निकालना देश में गैरकानूनी है।

इससे पहले जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने मंगलवार को आकाशवाणी भवन के बाहर नौ घंटे से अधिक समय तक धरना देने के मामले में अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले से ही 45 मामले हैं और उनका “लक्ष्य 100 प्राथमिकी” का है।

मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए प्रदर्शन किया था। बुधवार को भी विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।

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