राजनीति
बिहार: एआईएमआईएम ने महागठबंधन का चुनावी गणित बिगाड़ा
एआईएमएआईएम ने न केवल पांच सीटें अपनी झोली में डाली बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेतृत्व वाले महागठबंधन का चुनावी गणित भी गड़बड़ा दिया।
असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पार्टी बिहार के सीमांचल क्षेत्र की पांच सीटों में जीत दर्ज कर अपनी मजबूती का प्रदर्शन कर दिया है। ऐसा नहीं कि मुस्लिम आबादी बहुल इस इलाके में एआईएमआईएम पहली बार चुनावी मैदान में उतरी थी, लेकिन अन्य चुनावों में इसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। इस चुनाव में पार्टी ने भले ही पांच सीटें जीती हैं, लेकिन शेष जगहों पर इसने महागठबंधन के प्रत्याशियों के लिए परेशानी बढ़ा दी।
इस चुनाव में ओवैसी की पार्टी बिहार में 20 सीटों पर चुनाव लड़ी, इनमें से ज्यादातर पर सात नवंबर को मतदान हुआ था। एआईएमआईएम ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट का हिस्सा है। इस गठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी शामिल है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में 1.24 फीसदी वोट एआईएमआईएम को मिले हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा था और उसे सिर्फ 0.5 फीसदी मत ही हासिल हो पाया था। ओवैसी ने सीमांचल के अलावा कोसी और मिथिलांचल में भी अपना प्रभाव छोड़ा है।
ओवैसी की पार्टी राजद के माय (मुस्लिम-यादव) समीकरण में भी बड़ी सेंधमारी की है। सीमांचल की राजनीति को जानने वाले वाले अहमद कहते हैं कि इस चुनाव में पहली बार ओवैसी की पार्टी ने अमौर, वायसी, जोकीहाट, बहादुरगंज और कोचाधामन सीट पर जीत हासिल की है। इससे पहले उपचुनाव में पार्टी ने किशनगंज की सीट जीतकर बिहार में अपना खाता खोला था।
अहमद कहते हैं कि अगर ओवैसी कांग्रेस, राजद के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ती, तो राजद को 11 अन्य सीटों पर जीत मिलती। एआईएमआईएम ने मुस्लिम वोट के साथ-साथ दलित और पिछड़ों का भी वोट हासिल किया।
अहमद कहते हैं कि एआईएमआईएम ने खुद को विकास के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया, जिससे लोगों में स्वीकार्यता बढ़ी और जहां भी इसके प्रत्याशी उतरे लोगों ने उसका दिल खोलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे में जहां ओवैसी की पार्टी के वोट बढ़े, कांग्रेस और राजद के वोटबैंक में सेंध लगी।
राजनीति
केरल में राहुल गांधी का सीएम विजयन पर हमला, वामपंथी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गए

कन्नूर, 31 मार्च : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केरल में सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लेफ्ट और भारतीय जनता पार्टी के बीच अभूतपूर्व साझेदारी बन गई है और इस बार के विधानसभा चुनाव को विचारधाराओं की लड़ाई के रूप में देखा जाना चाहिए।
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के स्टार प्रचारक के तौर पर कन्नूर पहुंचे गांधी ने पहले स्थानीय नेताओं के साथ नाश्ते पर बैठक की। इसके बाद उन्होंने जिले भर से आए उम्मीदवारों और जनता को संबोधित किया।
रैली में सीपीआई (एम) के दो वरिष्ठ पूर्व नेता, टी.के. गोविंदन और वी. कुंजिकृष्णन भी मौजूद थे। ये दोनों अब यूडीएफ समर्थित उम्मीदवार हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह लेफ्ट में आए बदलाव का सबूत है।
राहुल गांधी ने कहा, यह चुनाव दो विचारधाराओं—लेफ्ट और यूडीएफ के बीच है, लेकिन पहली बार हम लेफ्ट और भाजपा के बीच साझेदारी देख रहे हैं।”
उन्होंने इसे एक पहेली बताया, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इन दोनों की विचारधाराएं पूरी तरह अलग रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज का लेफ्ट अपने मूल सिद्धांतों से भटक गया है और अब उसके मन में कॉरपोरेट्स के प्रति नरमी है। उनका तर्क था कि यह अब लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश में धार्मिक मुद्दे उठाते हैं, लेकिन केरल में खासकर सबरीमाला के मामले पर ऐसा नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ कई कानूनी चुनौतियां होने के बावजूद—जिनमें कई मामले, लोकसभा सदस्यता रद्द होना और लंबी पूछताछ शामिल हैं, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन या उनके परिवार के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा चाहती है कि सीपीआई (एम) सत्ता में बनी रहे, क्योंकि वे उन्हें आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार को बीजेपी नियंत्रित नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि केवल कांग्रेस ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असरदार विरोध करने की क्षमता रखती है।
राष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए गांधी ने केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के पक्ष में हाल में लिए गए व्यापारिक फैसलों से भारतीय किसानों को नुकसान होगा, विशेषकर उन किसानों को जो रबर, मक्का, सोया और फलों की खेती करते हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और छोटे व्यवसायों के लिए संभावित खतरों की चेतावनी भी दी।
चुनाव को मूल्यों की लड़ाई बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि केरल ऐतिहासिक रूप से एकता, अहिंसा और सभी को साथ लेकर चलने के पक्ष में रहा है। उन्होंने कहा कि यूडीएफ लोगों को प्यार और भाईचारे के जरिए जोड़ती है, जबकि लेफ्ट और बीजेपी का गठबंधन समाज में फूट और विभाजन को बढ़ावा देता है।
कन्नूर से गांधी को कोझिकोड जिले के नाडापुरम जाना है, जहां वह दो और चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। उनके इस दौरे का मकसद लोगों के बीच यूडीएफ के चुनावी संदेश को मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जनसमर्थन जुटाना है।
महाराष्ट्र
मुंबई: एटीएम सेंटर पर सीनियर सिटिजन को निशाना बनाने वाला जालसाज गिरफ्तार, 25 एटीएम कार्ड और कैश बरामद

मुंबई: मुंबई पुलिस ने ओडिशा से मुंबई आकर एटीएम मशीन से पैसे निकालने के बहाने बुजुर्गों से ठगी करने वाले आरोपी का पर्दाफाश किया है। वह पिछले चार साल से वॉन्टेड था। दंडोशी पुलिस ने भी उसे गिरफ्तार करने का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक, शिकायत करने वाले विश्वास सदानंद (51) ने शिकायत दर्ज कराई कि जब वह मलाड में एटीएम सेंटर से पैसे निकालने गया, तो एक संदिग्ध ने उसकी मर्ज़ी के खिलाफ एटीएम से 40,000 रुपये निकाल लिए। इस मामले में पुलिस ने शिकायत करने वाले की शिकायत पर केस दर्ज किया। पुलिस ने इस मामले में 60 से 70 CCTV फुटेज की जांच की और फिर इस फुटेज और मुखबिर की जानकारी के आधार पर पुलिस ने नायगांव से कृष्ण चंद्र आचार्य को हिरासत में लिया और उसकी तलाशी के दौरान उसके पास से 25 एटीएम कार्ड और कैश बरामद हुए। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसकी रिमांड का आदेश दिया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ चार और मामलों का खुलासा हुआ है। उसके खिलाफ दंडोशी और कस्तूरबा मार्ग में कुल चार केस दर्ज हैं और वह इनमें भी वॉन्टेड है। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती के निर्देश पर की गई और DCP महेश चामटे ने इस आरोपी को गिरफ्तार करने के आदेश जारी किए थे। यह आरोपी मुंबई, ठाणे और ओडिशा में ऐसे क्राइम करता था। पुलिस इस मामले की आगे जांच कर रही है।
राजनीति
राघव चड्ढा ने संसद में उठाया ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा, बोले-केयरगिविंग सिर्फ मां की नहीं, पिता की भी जिम्मेदारी

नई दिल्ली, 31 मार्च : देश में पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) को कानूनी अधिकार बनाने की मांग तेज होती जा रही है। आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत में केयरगिविंग की जिम्मेदारी सिर्फ मां पर डालना एक बड़ी सामाजिक और कानूनी कमी है।
राघव चड्ढा ने कहा कि जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो बधाई माता-पिता दोनों को मिलती है, लेकिन उसकी देखभाल की जिम्मेदारी पूरी तरह से मां पर डाल दी जाती है। उन्होंने इसे ‘समाज की विफलता’ बताया। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम सिर्फ मातृत्व अवकाश (मेटरनिटी लीव) को मान्यता देता है, जबकि पिता की भूमिका को नजरअंदाज किया जाता है।
उन्होंने संसद में मांग करते हुए कहा कि पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाया जाना चाहिए, ताकि पिता को अपने नवजात बच्चे और पत्नी की देखभाल के लिए नौकरी और परिवार के बीच चुनाव न करना पड़े। राघव चड्ढा ने कहा, “एक मां को गर्भावस्था के नौ महीनों के बाद, सामान्य या सिजेरियन डिलीवरी जैसी कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे समय में उसे दवाइयों के साथ-साथ अपने पति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहयोग की बेहद जरूरत होती है।”
राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने यह भी स्पष्ट किया कि पति की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चे तक सीमित नहीं होती, बल्कि पत्नी की देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। इस समय पति की मौजूदगी कोई लग्जरी नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है।
उन्होंने आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि फिलहाल केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है, जबकि निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के पास यह अधिकार नहीं है। भारत की करीब 90 प्रतिशत कार्यबल प्राइवेट सेक्टर में काम करती है, यानी अधिकांश पिता इस सुविधा से वंचित हैं।
राघव चड्ढा ने उदाहरण देते हुए कहा कि स्वीडन, आइसलैंड और जापान जैसे देशों में पितृत्व अवकाश 90 दिनों से लेकर 52 हफ्तों तक कानूनी रूप से सुनिश्चित किया गया है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि कानून को समाज का आईना होना चाहिए और इसमें यह स्पष्ट दिखना चाहिए कि बच्चे की देखभाल सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता और पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
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