अंतरराष्ट्रीय
भारतपे ने सालाना टीपीवी में 20 अरब डॉलर की कमाई की
फिनटेक प्लेटफॉर्म भारतपे ने शुक्रवार को कहा कि वह सालाना कुल भुगतान मूल्य (टीपीवी) में 20 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिसने 400 शहरों और शहरों में अपने पदचिह्न् का विस्तार किया है। कंपनी का लक्ष्य मार्च 2023 तक 30 अरब डॉलर के भुगतान के अपने लक्ष्य को पार करना है। पिछले साल, भारतपे ने उसी समय-सीमा में 300 शहरों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी।
भारतपे के मुख्य व्यवसाय अधिकारी निशांत जैन ने कहा, “हम इस मील के पत्थर को समय से पहले हासिल करने में सक्षम हैं। भारतपे अपनी पहुंच का विस्तार कर रहा है और 2020 से यूपीआई क्यूआर को टियर 2, 3 और 4 शहरों में ले जा रहा है।”
भारतपे अब आने वाले महीनों में दूसरे चरण में भारत स्वाइप जैसे अन्य फिनटेक प्रोडक्ट्स के साथ अपनी सेवाओं को बढ़ाने की योजना बना रहा है।
जैन ने कहा, “भुगतान में हमारा वार्षिक टीपीवी जून के अंत में 18.5 अरब डॉलर से बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हम डिजिटल भुगतान में लगातार वृद्धि देख रहे हैं।”
भारतपे ने वित्त वर्ष 2013 की पहली तिमाही में 3,600 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण की सुविधा प्रदान की, जो पिछली तिमाही (वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही) की तुलना में 112 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करता है।
कंपनी ने कहा कि उसने वित्त वर्ष 2022 की अंतिम तिमाही में 66,000 व्यापारियों से वित्त वर्ष 2023 में 1.2 लाख से अधिक व्यापारियों को वितरण की सुविधा दी।
इस महीने की शुरुआत में, फिनटेक प्लेटफॉर्म ने एसबीआई कार्ड के पूर्व सीएफओ नलिन नेगी को अपना नया मुख्य वित्तीय अधिकारी नियुक्त किया, क्योंकि यह अपनी प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की तैयारी कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने हाल के विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लगभग 3,000 लोगों की सूची जारी की

नई दिल्ली, 2 फरवरी: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के कार्यालय ने देश में हाल ही में हुई अशांति के दौरान मारे गए लोगों की एक सूची जारी की है। इस सूची में 2,986 लोगों के नाम शामिल हैं।
रविवार को राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट पर जारी बयान में बताया गया कि यह सूची राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान के कानूनी चिकित्सा संगठन से मिले आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के जवानों के नाम भी शामिल हैं।
राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, अब तक कुल 3,117 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 131 लोगों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी पहचान होने के बाद एक अतिरिक्त सूची जारी की जाएगी।
बयान में कहा गया है कि सरकार पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें यह भी कहा गया कि मरने वाले सभी लोग ईरान के अपने बच्चे थे और किसी भी पीड़ित परिवार की बात अनसुनी नहीं की जाएगी।
बता दें कि दिसंबर के अंत से जनवरी तक ईरान में कई हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन हुए। ये प्रदर्शन देश की मुद्रा रियाल के तेजी से कमजोर होने के विरोध में शुरू हुए थे। शुरुआत में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में झड़पों में बदल गए। इस दौरान जानमाल का नुकसान हुआ और मस्जिदों, सरकारी इमारतों और बैंकों को भी नुकसान पहुंचा। ईरान ने इन घटनाओं के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है।
इस बीच, ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातामी ने पिछले सप्ताह चेतावनी दी कि अगर अमेरिका कोई भी गलती करता है, तो इससे उसकी अपनी सुरक्षा, इजरायल की सुरक्षा और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
तेहरान में एक समारोह के दौरान बोलते हुए हातामी ने कहा, “आज, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह से रक्षा और सैन्य तत्परता में हैं और क्षेत्र में दुश्मन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। हमारी उंगली ट्रिगर पर है। अगर दुश्मन कोई गलती करता है, तो यह निस्संदेह अपनी सुरक्षा और इजरायल और क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल देगा।” उन्होंने पड़ोसी देशों की उन घोषणाओं का भी स्वागत किया कि वे अपने क्षेत्र या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने देंगे, क्योंकि ये देश “जानते हैं कि ईरान के खिलाफ कोई भी असुरक्षा पूरे क्षेत्र को असुरक्षित बना देगी।
उन्होंने कहा कि अगर दूसरी पार्टी वास्तव में समस्या का समाधान चाहती है, तो उसे ईरानी जनता के साथ सम्मान से पेश आना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक बड़ा सैन्य बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है और ईरान के पास अमेरिका से समझौता करने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है।
वहीं, ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान अमेरिका के साथ परमाणु समझौता नहीं करता है, तो यह देखा जाएगा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की चेतावनी सही साबित होती है या नहीं। खामेनेई ने कहा था कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध भड़क सकता है।
व्यापार
बजट वाले दिन भी खुला रहेगा शेयर बाजार, बीएसई और एनएसई में होगी सामान्य ट्रेडिंग

मुंबई, 31 जनवरी : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी यानी रविवार को यूनियन बजट 2026 पेश करने वाली हैं। आम तौर पर शनिवार और रविवार को शेयर बाजार बंद रहता है, लेकिन बजट के चलते इस बार रविवार को घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बीएसई और एनएसई खुले रहेंगे। इसके साथ ही कमोडिटी मार्केट यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) भी स्पेशल ट्रेडिंग सेशन के तौर पर खुला रहेगा।
यह कोई पहली बार नहीं है जब छुट्टी वाले दिन शेयर बाजार खुला रहेगा, पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि जब 1 फरवरी को बजट पेश हुआ है और उस दिन छुट्टी रहा है, तब भी शेयर बाजार में ट्रेडिंग कराई गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को सुबह 11 बजे लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने सर्कुलर में कहा है कि “केंद्रीय बजट पेश होने के चलते, सदस्यों से अनुरोध है कि वे ध्यान दें कि एक्सचेंज 1 फरवरी 2026 को मानक बाजार समय (सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक) के अनुसार लाइव ट्रेडिंग सत्र आयोजित करेगा।
चूंकि यह सेटलमेंट हॉलिडे है, इसलिए 30 जनवरी को खरीदे गए शेयर 1 फरवरी को बेचे नहीं जा सकेंगे। इसी तरह, बजट वाले दिन खरीदे गए शेयर अगले दिन बेचना संभव नहीं होगा।
निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह किसी भी वित्त मंत्री के लिए सबसे लंबे लगातार कार्यकालों में से एक है। यह 2024 में एनडीए सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट भी होगा।
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों का ध्यान सरकार के कर्ज, राजकोषीय घाटे और अगले साल की उधारी योजना पर रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि उधारी में साल-दर-साल करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 4.1 से 4.2 प्रतिशत के आसपास रह सकता है।
बजट से जुड़े सभी दस्तावेज आर्थिक मामलों का विभाग तैयार करता है। इनमें सरकार के खर्च, आमदनी और आने वाले वित्त वर्ष के लिए नई योजनाओं का पूरा ब्योरा होता है।
इससे पहले 29 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 संसद में पेश किया गया था। इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस को इसकी जानकारी दी थी।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ईरान की ओर पहले से बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेज रहा है, सभी विकल्प खुले : ट्रंप

वाशिंगटन, 31 जनवरी : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान की ओर पहले से ज्यादा बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेज रहा है। उनका कहना है कि वॉशिंगटन बातचीत के जरिए समझौता चाहता है, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो दूसरे रास्तों के लिए भी तैयार है।
ट्रंप ने बताया कि यह तैनाती अमेरिका की उस नौसैनिक मौजूदगी से भी बड़ी होगी, जो पहले वेनेजुएला के पास थी। उन्होंने इसे एक बड़ा जहाज़ी बेड़ा बताया। उनका कहना था कि इस कदम का मकसद दबाव बढ़ाना है, जबकि बातचीत की कोशिशें जारी रहेंगी।
ट्रंप ने कहा, “हम अब ईरान की ओर ज्यादा संख्या में जहाज भेज रहे हैं। उम्मीद है कि समझौता हो जाएगा।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान को कोई समय-सीमा दी गई है, तो उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह बात केवल ईरान ही ठीक से जानता है।
ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उनका ईरान से सीधे संपर्क हुआ है। जब उनसे पूछा गया कि क्या संदेश ईरान के नेताओं तक पहुंचा है, तो उन्होंने कहा, “हां, पहुंचा है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत से हल निकालना चाहता है, लेकिन हालात बिगड़ने की संभावना को भी नकारा नहीं। ट्रंप बोले, “अगर समझौता हो गया तो अच्छा है। अगर नहीं हुआ, तो आगे देखा जाएगा।”
सवालों के जवाब में ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य ताकत पर जोर दिया, लेकिन किसी खास कार्रवाई का विवरण नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास “दुनिया के सबसे शक्तिशाली जहाज” हैं और इस तैनाती को रोकथाम की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया।
उन्होंने सैन्य योजनाओं के समय और नियमों पर बात करने से इनकार किया। ट्रंप ने कहा कि वह सैन्य मामलों पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बताना चाहते।
ये बयान व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुए एक कार्यक्रम के दौरान आए, जहां घरेलू आयोजनों के बीच ट्रंप ने विदेश नीति, रक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
अमेरिका और ईरान के रिश्ते कई सालों से तनाव में हैं। इसकी वजह प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे रहे हैं। पहले भी बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन सीमित सफलता मिली और टकराव की स्थिति बार-बार बनी।
अमेरिका ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के समय नौसैनिक तैनाती का इस्तेमाल अक्सर रोकथाम और संकेत दोनों के रूप में किया है, जबकि यह भी कहा है कि वह कूटनीतिक समाधानों के लिए खुला है।
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