अंतरराष्ट्रीय
बार्सिलोना ने लीड्स युनाइटेड से राफिन्हा के साथ किया करार
एफसी बार्सिलोना और लीड्स यूनाइटेड फुटबॉल क्लब ने खिलाड़ी राफिन्हा को लेकर एक समझौता किया है। इस बारे में स्पेनिश क्लब ने बुधवार को जानकारी दी। कैटलन क्लब में शामिल होने से पहले राफिन्हा चेल्सी जाने के लिए तैयार थे और मेडिकल पास करते ही वह बार्सिलोना के नए खिलाड़ी बन जाएंगे।
लीड्स के कोच जेसी मार्श ने पहले कहा था, “मुझे उम्मीद है कि वह यह सौदा कर लेंगे, क्योंकि मुझे पता है कि बार्सिलोना के लिए खेलना उनका सपना है।”
ऐसा तब हुआ, जब ब्राजीलियाई ने लीड्स के पूर्व सीजन दौरे से बाहर निकलने का फैसला किया।
14 दिसंबर 1996 को जन्मे राफेल डायस बेलोली, जिन्हें ‘राफिन्हा’ के नाम से जाना जाता है, एक स्ट्राइकर हैं, जो एक के बाद एक शानदार खेल दिखा रहे हैं, डिफेंडरों को अपने खेल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। यूरोप में उनका पहला क्लब विटोरिया गुइमारेस था, जहां से वह 6.5 मिलियन यूरो में स्पोटिर्ंग क्लब डी पुर्तगाल चले गए थे।
पुर्तगाल में अपनी पहचान बनाने के बाद, फ्रांसीसी क्लब स्टेड डी रिम्स ने विंगर के लिए 21 मिलियन यूरो का भुगतान किया। लीग 1 में एक सफल स्पेल ने लीड्स युनाइटेड के कोच मासेर्लो बिल्सा का ध्यान आकर्षित किया और राफिन्हा ने प्रीमियर लीग में अपना कदम रखा।
अर्जेंटीना के कोच रफीना के तहत खेलते हुए अपने पहले सीजन में रफीन्हा ने 30 मैच में छह गोल किए और नौ सहायता प्रदान की। अगले सीजन में लीड्स के लिए ब्राजीलियाई ने 11 गोल किए और तीन सहायता प्रदान की।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान युद्ध पर घिरे ट्रंप, यूएस डेमोक्रेट्स ने उठाए सवाल

वाशिंगटन, 24 मार्च : अमेरिका में ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाते हुए युद्ध की बढ़ती लागत, स्पष्ट रणनीति की कमी और संघर्ष के लंबे खिंचने के खतरे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि इस युद्ध का कोई स्पष्ट लक्ष्य या रणनीति नहीं है। उन्होंने सीनेट में कहा, “ट्रंप का ईरान के साथ युद्ध चौथे हफ्ते में है और इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा।” चक शूमर ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति आगे की योजना को लेकर साफ जवाब देने में विफल रहे हैं।
चक शूमर ने व्हाइट हाउस के बयानों को भी विरोधाभासी बताया। उन्होंने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह कमांडर-इन-चीफ की लीडरशिप नहीं है। या तो वह भ्रमित हैं, या सच नहीं बोल रहे, या दोनों एक साथ हैं।”
उन्होंने इस युद्ध को अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल कीमतों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक महीने पहले गैस की औसत कीमत करीब 2.93 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 3.94 डॉलर हो गई है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद देखी गई सबसे बड़ी मासिक उछालों में से एक है।
चक शूमर ने सीनेट में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए रिपब्लिकन नेताओं से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमें जवाबदेही चाहिए, पारदर्शिता चाहिए, और सबसे जरूरी एक स्पष्ट रणनीति और अंत का रास्ता भी चाहिए।”
इसी तरह, सीनेटर ग्रेग लैंड्समैन ने कहा, “अब समय आ गया है कि ईरान में अभियान समाप्त किया जाए। न इसका विस्तार हो और न ही जमीनी सैनिक भेजे जाएं।”
ग्रेग लैंड्समैन के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च क्षमता को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया है और हथियारों के ढांचे को निशाना बनाने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अब और गहराई से शामिल होना अमेरिका को बिना रणनीति वाले लंबे युद्ध में फंसा सकता है।
सीनेटर पीटर वेल्च ने भी सरकार के रुख की आलोचना की और युद्ध के लिए मांगे गए 200 अरब डॉलर के फंड का विरोध किया। उन्होंने कहा, “हमारा देश इस पीढ़ी के सबसे बड़े युद्ध में गहराई तक उतर चुका है, लेकिन अब तक सीनेट में एक भी सुनवाई नहीं हुई है।”
पीटर वेल्च ने इसके आर्थिक असर पर भी चिंता जताते हुए कहा कि पूरे देश में पेट्रोल की कीमतें कम से कम 1 डॉलर बढ़ गई हैं, जिससे एक आम अमेरिकी परिवार को सालाना करीब 2,000 डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उर्वरक और हीटिंग ऑयल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त 1,000 डॉलर का बोझ पड़ सकता है।
वहीं, सीनेटर सारा जैकब्स ने इस पूरे मामले को अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा, “यह शायद अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी चूकों में से एक है।” सारा जैकब्स ने यह भी कहा कि सरकार के पास आगे की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और आम लोगों को यह तक नहीं बताया जा रहा कि यह युद्ध है क्या, इसका लक्ष्य क्या है और इसकी लागत कितनी होगी।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान से तनातनी के बीच ट्रंप ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर से फोन पर की बात

वॉशिंगटन, 24 मार्च : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध से उपजी चिंताओं के बीच पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश करता नजर आ रहा है। वह अमेरिका के संदेशों को ईरान पहुंचा रहा है और ईरान के जवाबों से अवगत करा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर से फोन पर बात की।
व्हाइट हाउस के मुताबिक चर्चा का मुख्य विषय ईरान युद्ध था। हालांकि इस बातचीत को संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों ने और ज्यादा बताने से इनकार कर दिया।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लिविट ने पहले कहा था कि ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चा है और अमेरिका मीडिया के जरिए कोई वार्ता नहीं करेगा।
सूत्रों के अनुसार, मुनीर ने ट्रंप से बातचीत की और पाकिस्तान ने खुद को अमेरिकी और ईरानी वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वार्ता की संभावित जगह के रूप में पेश किया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की। एक्स पोस्ट के जरिए उन्होंने ईद-उल-फितर और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और ईरान के लोगों के साथ अपनी सहानुभूति जताई।
शरीफ ने कहा कि दोनों पक्षों ने खाड़ी क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा की और तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति की जरूरत पर सहमति जताई। उन्होंने इस्लामी दुनिया में एकता और क्षेत्र में शांति स्थापित करने में पाकिस्तान की भूमिका पर भी जोर दिया।
इस बीच सोमवार को ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बेहतर और सार्थक बातचीत के बाद उन्होंने हमले को पांच दिनों तक टालने की घोषणा की थी, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता का ट्रंप के फैसले से सीधा संबंध है या नहीं। ईरान ने सीधे अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ मित्र देशों के माध्यम से संदेश मिले हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कूटनीतिक प्रयास अभी शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह से संरचित वार्ता नहीं माना जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने अमेरिका को दी बड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी- ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया, तो अंजाम भुगतना होगा

तेहरान, 23 मार्च : ईरान की मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ ने चेतावनी दी है। कि अगर अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला करता है, तो जिन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, वहां के पावर प्लांट्स भी निशाने पर लिए जाएंगे।
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी दी थी। यह जानकारी सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने ईरानी सरकारी मीडिया ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ के हवाले से दी है।
बयान में कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है और यह ईरान के “स्मार्ट नियंत्रण” में है। यहां से सामान्य जहाजों की आवाजाही तय नियमों के तहत जारी है, ताकि देश की सुरक्षा और हित सुरक्षित रहें।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका अपनी धमकी पर अमल करता है, तो वह तुरंत कड़े कदम उठाएगा। इनमें सबसे बड़ा कदम होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद करना होगा, जो तब तक बंद रहेगा जब तक ईरान की क्षतिग्रस्त फैसिलिटी का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता।
इसके अलावा ईरान ने कहा है कि वह इजरायल की बिजली, ऊर्जा और संचार व्यवस्था पर बड़े स्तर पर हमले कर सकता है। साथ ही, उन क्षेत्रीय कंपनियों को भी निशाना बनाया जा सकता है जिनमें अमेरिकी पूंजी लगी है और उन देशों के पावर प्लांट्स पर भी हमले हो सकते हैं जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं।
ईरान ने साफ कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए “हर जरूरी कदम” उठाएगा और क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों की आर्थिक और ऊर्जा संरचना के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा।
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोलता, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को “पूरी तरह तबाह” कर देगा। उन्होंने यह भी कहा था कि इस संघर्ष में अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों के करीब पहुंच चुका है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट करते हुए साफ अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर बिना किसी धमकी के होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोलता, तो अमेरिका उसके बड़े पावर प्लांट्स पर हमला करेगा और उन्हें नष्ट कर देगा।
यह चेतावनी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव में तेज बढ़ोतरी का संकेत है, जो दुनिया के लिए एक बेहद अहम ऊर्जा मार्ग है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई जल्द समाप्त हो सकती है।
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