खेल
बेयरस्टो की घातक बल्लेबाजी ने पंजाब किंग्स को दिलाई बड़ी जीत
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ खेले गए शुकवार के मुकाबले में पंजाब किंग्स के बल्लेबाज जॉनी बेयरस्टो ने सीजन की बेहतरीन पारी खेली।
शुक्रवार को रॉयल चैलेंजर्स के खिलाफ खेले गए मैच से पहले उन्होंने 8, 12, 12, 9, 6, 32, 1, 56 रनों की पारी खेली थी। पारी में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर था।
आरसीबी के खिलाफ बेयरस्टो ने पहले ओवर से ही आक्रामकता दिखानी शुरू कर दी। बल्लेबाज ने शानदार पारी खेली, जिससे पंजाब को जीत हासिल करने में मदद मिली।
आरसीबी के खिलाफ पहले बल्लेबाजी पंजाब किंग्स ने की, जहां 32 वर्षीय दाएं हाथ के बल्लेबाज ने पारी की शुरुआत करते हुए पहले ओवर में ही एक छक्का जड़ दिया। साथ ही दूसरे ओवर में उन्होंने दो छक्के और दो चौके लगाए। वहीं, सिराज के ओवर में भी उन्होंने एक छक्का जड़ा। हालांकि, चौथे और पांचवें ओवर में उन्होंने एक भी बाउंड्री नहीं लगाई। लेकिन, सिराज के ओवर में उन्होंने जो पारी खेली, वो देखने लायक थी। उन्होंने इस ओवर में तीन छक्के और एक चौका जड़ा, जिसमें टीम ने पॉवरप्ले के दौरान एक विकेट खोकर 83 रन बना लिए थे, जो आईपीएल में अबतक का पॉवरप्ले में खेला गया सबसे बड़ा स्कोर है। उन्होंने इस ओवर में 23 रन बटोरे। हालांकि, शाहबाज अहमद के ओवर में आउट हो गए थे। इस दौरान उन्होंने 29 गेंद की पारी खेली, जिसमें उन्होंने सात छक्के और चार चौके की मदद से 66 रन बनाए।
वहीं, इस सूची में कोलकाता नाइट राइडर्स सबसे ऊपर है, जिसने 2017 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ विस्फोटक पारी खेलते हुए बिना विकेट गंवाए 105 रन बनाए थे।
227.58 की स्ट्राइक रेट से उनकी 29 गेंदों में 66 रन की पारी ने पंजाब को एक नई दिशा दिखाई। पहले छह ओवरों में 83/1 रन बनाने के बाद, पंजाब 7-15 ओवर के बीच सिर्फ 69/3 और 15-20 ओवर में केवल 57 रन ही बना सकी, जहां अंत में टीम ने 200 के पार का स्कोर खड़ा किया।
लियाम लिविंगस्टोन द्वारा खेली गई 42 गेंदों में 70 रन की पारी और बेयरस्टो द्वारा खेली गई 29 गेंदों पर 66 रन की पारी टीम के फायदेमंद साबित हुई, जिसने टीम को एक मजबूत स्कोर बनाने में मदद की।
वहीं, लक्ष्य का पीछा करने उतरी आरसीबी की शुरुआत खराब रही। उन्होंने पॉवरप्ले के दौरान ही विराट कोहली और कप्तान फाफ डु प्लेसिस का विकेट खो दिया। रजत पाटीदार (26) और ग्लेन मैक्सवेल (35) ने चौथे विकेट के लिए पचास रन जोड़े। पाटीदार भी 104 के समान स्कोर पर आउट हो गए, जहां टीम ने 20 ओवरों में नौ विकेट खोकर सिर्फ 155 रन बनाए।
शानदार प्रदर्शन के लिए बेयरस्टो को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया।
राष्ट्रीय
वोटर लिस्ट मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ रिवीजन पिटीशन की सुनवाई टली

नई दिल्ली, 13 मार्च : नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई टल गई। यह मामला कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से जुड़ा है, जिन पर बिना नागरिकता हासिल किए वोटर सूची में नाम शामिल कराने का आरोप है। अब अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।
इस मामले में अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की तरफ से सुनवाई टालने की मांग के कारण फिलहाल आगे बढ़ाया नहीं गया। अगली सुनवाई अब 30 मार्च को होगी।
पिछली सुनवाई में सोनिया गांधी की तरफ से जवाब दाखिल किया गया था। इसमें याचिका को तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया गया। बताया गया कि यह मामला केवल राजनीतिक उद्देश्यों के तहत हवा में उड़ा दिया गया है और किसी ठोस साक्ष्य पर आधारित नहीं है।
वहीं, याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी जबकि उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट में शामिल था। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि 1980 में उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल किया गया और क्या इसके लिए किसी फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया गया। इसके अलावा, यह भी पूछा गया कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से क्यों हटाया गया और जब 1983 में नागरिकता हासिल की गई, तब किस दस्तावेज के आधार पर उनका नाम सूची में शामिल किया गया।
सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका में आरोप लगाए गए थे कि इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि इस मामले की जांच कर सही तथ्य सामने लाए जाएं। हालांकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर में सोनिया गांधी की खिलाफ दर्ज याचिका को खारिज कर दिया था लेकिन याचिकाकर्ता ने इस फैसले के खिलाफ रिवीजन पिटीशन दाखिल की।
कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद अब 30 मार्च को अगली सुनवाई होगी। इस दौरान सभी पक्षों को अपने तर्क रखने का मौका मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय
क्या अमेरिका-इजरायल हमले में घायल हुए ईरान के नए सुप्रीम मोजतबा? राष्ट्रपति ट्रंप ने किया दावा

TRUMP
वॉशिंगटन, 13 मार्च : ईरान के सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दावे किए जा रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमले में ईरान के नए सुप्रीम लीडर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ये दावा किया है कि मोजतबा जिंदा तो हैं, लेकिन घायल हैं।
बता दें, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमले में पहले दिन ही ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया। ईरान का सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद से मोजतबा कहीं भी सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ये दावा कर रहे हैं कि मोजतबा जिंदा तो हैं, लेकिन वे घायल हैं।
ट्रंप का कहना है कि उन्हें लगता है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा हैं लेकिन ‘घायल’ हैं। इससे पहले ईरान के सरकारी चैनल ने इस बात की जानकारी दी थी कि मोजतबा को हल्की चोटें आई हैं। अली खामेनेई की मौत की खबर जब सामने आई थी, तब ये चर्चाएं भी हो रही थीं कि मोजतबा की भी इजरायल-अमेरिकी हमले में मौत हो गई।
हालांकि, बाद में जानकारी आई कि हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई के साथ, मोजतबा की पत्नी, उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्यों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स में अली खामेनेई के पोते और बेटी की भी मौत की जानकारी सामने आई।
साइप्रस में ईरान के राजदूत अलिरेजा सालारियन ने द गार्जियन को बताया कि मोजतबा खामेनेई के पैरों, हाथों और बांहों में चोटें आई हैं। उन्होंने कहा, “मैंने सुना है कि उनके पैरों और बांहों में चोटें आई हैं। मुझे लगता है कि वह हॉस्पिटल में हैं क्योंकि उन्हें चोट लगी थी।”
ईरान के बाहर की अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया कि मोजतबा का पैर टूट गया है और चेहरे पर हल्की चोटें आई हैं, जिसमें उनकी बाईं आंख के आसपास चोट के निशान और ऊपर की ओर कटा हुआ है।
अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। रविवार को एक पादरी सभा द्वारा चुने जाने के बाद से खामेनेई को ईरानियों ने नहीं देखा है। सुप्रीम लीडर बनने के बाद उनकी तरफ से जारी पहले बयान को गुरुवार को ईरानी टेलीविजन प्रेजेंटर ने पढ़ा।
एक ईरानी अधिकारी ने बताया कि नए नियुक्त सुप्रीम लीडर को हल्की चोटें आई हैं; सरकारी टेलीविजन द्वारा हमले में घायल बताए जाने के बाद उनका ऑपरेशन जारी है।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क गड्ढों-करंट से होने वाली मौत रोकने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली, 13 मार्च : सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर गड्ढों, खुले बिजली के तारों से करंट लगने और खराब बुनियादी ढांचे की वजह से होने वाली मौतों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पूरे देश के लिए एकसमान आदेश जारी करना संभव नहीं है। इस तरह की समस्याएं स्थानीय स्तर पर अलग-अलग होती हैं, इसलिए याचिकाकर्ता चाहें तो संबंधित हाई कोर्ट में जाकर याचिका दायर कर सकते हैं।
यह याचिका ‘जनश्रुति पीपुल्स वॉयस’ नाम की संस्था ने दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि सड़क हादसों, खुले तारों से होने वाले करंट लगने के मामलों और खराब सड़कों व अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी से होने वाली मौतों को रोकने के लिए देशव्यापी मानक प्रक्रिया और दिशा-निर्देश बनाए जाएं। याचिकाकर्ता ने इन मौतों को रोकने के लिए सख्त नीतियां और जिम्मेदारी तय करने की अपील की थी, क्योंकि ऐसी घटनाएं रोजाना हो रही हैं और इनमें निर्दोष लोगों की जान जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला हाई कोर्ट के दायरे में आता है, जहां स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बेहतर फैसला लिया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी इशारा किया कि बुनियादी ढांचे की देखभाल और सुरक्षा के मुद्दे मुख्य रूप से राज्य सरकारों, नगर निकायों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी हैं।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देशभर में सड़कों पर गड्ढों, खुले मैनहोल और बिजली के लटकते तारों से होने वाले हादसे आम बात हो गई है। कई हाई कोर्ट्स पहले ही ऐसे मामलों में सख्त रुख अपना चुके हैं, जैसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में गड्ढों से मौत होने पर मुआवजा देने के आदेश दिए थे।
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