राष्ट्रीय
पीएम मोदी के ‘मेक इन इंडिया मेड फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में गुजरात का एक और ठोस कदम
गांधीनगर, 17 जनवरी : देश के विकास के रोल मॉडल राज्य गुजरात ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए मेक इन इंडिया मेड फॉर द वर्ल्ड के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक और ठोस कदम उठाया है।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड, जीआईडीसी की दी हुई 1750 एकड़ ज़मीन पर खोराज में 35 हज़ार करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट से एक नया गाड़ी बनाने का प्लांट लगाएगी। इस प्लांट के इन्वेस्टमेंट के लिए इन्वेस्टमेंट लेटर सौंपने का समारोह गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और मारुति सुजुकी के मैनेजिंग डायरेक्टर हिताची ताकेउची की मौजूदगी में हुआ।
इस मौके पर डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष संघवी और मारुति सुजुकी के होल टाइम डायरेक्टर और एग्जीक्यूटिव कमेटी मेंबर सुनील कक्कड़ भी मौजूद थे। मारुति के इस नए प्लांट से 12 हज़ार से ज़्यादा लोगों को नौकरी के मौके मिल सकते हैं। इतना ही नहीं, इस प्लांट से आस-पास के इलाकों में एंसिलरी यूनिट और एमएसएमई यूनिट भी लगेंगी, जिससे लगभग 7.50 लाख इनडायरेक्ट रोज़गार पैदा होंगे और एक पूरा क्लस्टर बनने से गुजरात की ऑटो हब के तौर पर पहचान और मज़बूत होगी।
इस प्रोजेक्ट के तहत, हर साल 2.5 लाख कार बनाने की कैपेसिटी वाले 4 प्लांट बनाए जाएंगे, जिनकी कुल प्रोडक्शन कैपेसिटी हर साल 10 लाख कार होगी। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड फाइनेंशियल ईयर 2029 से पहले प्लांट का प्रोडक्शन शुरू करने का प्लान बना रही है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के प्रोजेक्ट इन्वेस्टमेंट का स्वागत करते हुए कहा कि यह न सिर्फ एक नई ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है, बल्कि देश के सबसे बड़े और सबसे कॉम्पिटिटिव ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम भी है।
मुख्यमंत्री ने इस बात का खास तौर पर जिक्र किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-गुजरात-जापान के रिश्ते हमेशा जोशीले रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उस भरोसे को बनाए रखने की लगातार कोशिश करेगी, जिसमें सुजुकी के सीईओ ने जापान दौरे के दौरान गुजरात को अपना दूसरा घर कहा था।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सस्टेनेबल पॉलिसी मेकिंग की वजह से गुजरात एक पॉलिसी ड्रिवन राज्य बन गया है। इसके अलावा, गुजरात ने इंडस्ट्रीज़ की ज़रूरतों के हिसाब से मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट अप्रोच के लिए भी नाम कमाया है।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि वाइब्रेंट समिट की शुरुआत से ही जापान एक पार्टनर देश और डेवलपमेंट पार्टनर रहा है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू किया गया था। संघवी ने कहा कि जब मारुति सुजुकी मोटर्स पहली बार इन्वेस्टमेंट के लिए गुजरात आई थी, तब राज्य सरकार ने जो तैयारी और सहयोग दिखाया था, वह मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में आगे भी मिलता रहेगा।
मारुति सुजुकी मोटर्स के एमडी हिताची ताकेउची ने गुजरात सरकार द्वारा मारुति सुजुकी को दिए जा रहे सपोर्ट की तारीफ करते हुए कहा कि गुजरात के मोबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन में लीडर बनने से मारुति सुजुकी को भी फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि मारुति सुजुकी गुजरात सरकार के साथ मजबूत पार्टनरशिप के साथ गुजरात में मारुति की प्रोडक्शन यूनिट्स के जरिए मेक इन इंडिया पहल में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए भी तैयार है।
यहां यह बताना जरूरी है कि इस नई गाड़ी फैसिलिटी के कंस्ट्रक्शन के लिए 2024 वाइब्रेंट समिट में गुजरात सरकार और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन साइन किया गया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने 2012 में सुजुकी मोटर्स को गुजरात में इन्वेस्ट करने के लिए इनवाइट किया था। इसके जवाब में, गुजरात में मारुति का पहला प्लांट हंसलपुर में चालू है। यह प्लांट अभी हर साल 7.50 लाख कारें बनाता है और फाइनेंशियल ईयर 2026-27 तक प्रोडक्शन को 2.50 लाख कारें बढ़ाकर 10 लाख यूनिट हर साल करने का प्लान है।
इस मौके पर चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार दास, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी इंडस्ट्रीज ममता वर्मा, चीफ मिनिस्टर के प्रिंसिपल सेक्रेटरी संजीव कुमार, इंडस्ट्रीज कमिश्नर पी. स्वरूप, चीफ मिनिस्टर के एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी डॉ. विक्रांत पांडे के साथ-साथ जीआईडीसी की एमडी श्रीमती प्रवीणा डीके और मारुति सुजुकी मोटर्स के सीईओ अर्नब रॉय, सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर मंजरी चौधरी और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर परीक्षित मैनी, जिगर देसाई वगैरह मौजूद थे।
राजनीति
निशिकांत दुबे ने 1978 में इंदिरा गांधी को निकाले जाने का किया जिक्र, मूल प्रस्ताव के जरिए राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने की मांग

नई दिल्ली, 14 फरवरी : भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव लाने के फैसले के साथ 1978 की ऐतिहासिक संसदीय कार्रवाई का हवाला देकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
निशिकांत दुबे ने दिसंबर 1978 की उस घटना से तुलना की, जब इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी और उन्हें जेल भी भेजा गया था।
संसदीय प्रक्रिया में मूल प्रस्ताव एक स्वतंत्र और स्पष्ट प्रस्ताव होता है, जिसे सदन के सामने निर्णय या राय व्यक्त करने के लिए रखा जाता है। इसे स्वीकार कर सदन में पेश किए जाने के बाद इस पर बहस होती है और अंत में मतदान कराया जाता है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाते हुए उनके लोकसभा सदस्य पद को रद्द करने और भविष्य के चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में 1978 के संसदीय रिकॉर्ड के अंश भी दिखाए और लिखा कि इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर इंदिरा गांधी की सदस्यता समाप्त हुई थी और उन्हें जेल भेजा गया था।
1978 का मामला 22 नवंबर 1978 को लोकसभा में पेश किए गए मूल प्रस्ताव से जुड़ा था। यह प्रस्ताव विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के आधार पर लाया गया था, जिसमें इंदिरा गांधी को सदन की अवमानना और विशेषाधिकार हनन का दोषी पाया गया था। आरोप 1975 के आपातकाल के दौरान की गई कार्रवाई से जुड़े थे, जिनमें उनके पुत्र संजय गांधी की मारुति परियोजना की जांच कर रहे चार सरकारी अधिकारियों को कथित रूप से बाधित करने, डराने-धमकाने और झूठे मामले दर्ज कराने का उल्लेख था।
लंबी बहस के बाद 19 दिसंबर 1978 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा लाया गया प्रस्ताव पारित हुआ। इसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया और उन्हें संसदीय सत्र की शेष अवधि के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया। हालांकि, यह निष्कासन स्थायी नहीं रहा और 7 मई 1981 को सातवीं लोकसभा ने निर्णय वापस ले लिया, जब वे फिर सत्ता में लौटीं।
गुरुवार को निशिकांत दुबे ने कहा था कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव शुरू किया है और उन पर ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों’ के साथ होने का आरोप लगाया। यह कदम लोकसभा में एक दिन पहले हुई तीखी बहस के बाद सामने आया, जब राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस समझौते में भारत और उसके नागरिकों के हितों से समझौता किया गया है और ‘भारत माता को बेच दिया गया’ है।
उनके बयान पर सत्तापक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध किया और इसे ‘असंसदीय’ बताते हुए रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। इसके बाद भाजपा सांसदों ने विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की घोषणा की और राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, खासकर जब देश के ऊर्जा और किसान हितों से जुड़े मुद्दे हों।
बाद में गुरुवार शाम को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार ने फिलहाल अपना प्रस्ताव स्थगित कर दिया है, क्योंकि निजी सदस्य के रूप में निशिकांत दुबे का मूल प्रस्ताव पहले ही पेश किया जा चुका है।
राजनीति
‘बलिदान के लिए देश सदैव ऋणी रहेगा’, राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने पुलवामा हमले के शहीदों को याद किया

नई दिल्ली, 14 फरवरी : पुलवामा हमले की 7वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने शहीदों को याद किया है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पुलवामा में 2019 के दुस्साहसी आतंकी हमले में शहीद हुए हमारे वीर जवानों को मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि। भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।” राहुल गांधी ने अपने जम्मू-कश्मीर दौरे की तस्वीर भी शेयर की है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पुलवामा आतंकी हमले में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “हम सब अपने शहीदों और उनके परिवारजनों के सदैव ऋणी रहेंगे। हमारे जांबाज सैनिकों का साहस, समर्पण, सेवा और शहादत हम सबके लिए अनुकरणीय है।”
इससे पहले, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हम भारत माता के उन वीर शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति दी। बहादुर जवानों का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटल समर्पण हमेशा हमारी यादों में रहेगा। उनका सर्वोच्च बलिदान चिरकाल तक अमर रहेगा। हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे।”
वहीं, एनसीपी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने लिखा, “भारतीय सैनिकों ने हमेशा अपने साहस, बहादुरी, त्याग और बलिदान से देश की सुरक्षा व संप्रभुता को बनाए रखा है। उनकी अटूट राष्ट्र निष्ठा और देशभक्ति को हमेशा याद रखा जाएगा। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी शहीद सैनिकों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लिखा, “मैं 2019 में आज ही के दिन पुलवामा हमले में शहीद हुए बहादुर सीआरपीएफ जवानों को सलाम करती हूं।”
राजनीति
पुलवामा हमले की बरसी: पीएम मोदी ने किया शहीद जवानों को याद, खड़गे-शरद पवार ने भी दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 14 फरवरी : पुलवामा आतंकी हमले को सात साल हो गए हैं। यह भारत के इतिहास का एक दुखद अध्याय था जब देश ने आतंकी हमले में 40 बहादुर जवानों को खो दिया। पूरा देश उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दे रहा है। पुलवामा हमले की बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी निष्ठा, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति सेवा हमारी सामूहिक चेतना में सदा अमिट रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “2019 में आज के दिन पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर नायकों को याद कर रहा हूं। उनकी निष्ठा, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति सेवा हमारी सामूहिक चेतना में सदा अमिट रहेंगे। हर भारतीय को उनके अटूट साहस से शक्ति मिलती है।”
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद हुए सभी अमर वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “मां भारती के वीर सपूतों का अमर बलिदान हमें आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने की प्रेरणा देता है। आज भारत आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस की नीति’ के साथ एकजुटता एवं मजबूती से खड़ा है और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।”
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मैं साल 2019 में आज ही के दिन पुलवामा में हुए कायराना आतंकी हमले में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और राष्ट्र के प्रति उनकी अभूतपूर्व सेवा का स्मरण करता हूं। हमारे अमर जवानों का बलिदान भारतीय शौर्य और पराक्रम के उस अजेय संकल्प का उद्घोष है, जो हमें आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा। राष्ट्र आपके सर्वोच्च बलिदान के लिए सदैव ऋणी रहेगा।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पुलवामा हमले में शहीद हुए वीर जवानों को याद किया। उन्होंने लिखा, “हमारे अमर जवानों का बलिदान भारतीय शौर्य के उस अजेय संकल्प का उद्घोष है, जो हमें आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने हेतु सदैव प्रेरित करता है।”
विपक्ष के भी कई नेताओं ने पुलवामा हमले में शहीद हुए वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लिखा, “हम भारत माता के उन वीर शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति दी।”
खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “बहादुर जवानों का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटल समर्पण हमेशा हमारी यादों में रहेगा। उनका सर्वोच्च बलिदान चिरकाल तक अमर रहेगा। हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे।”
एनसीपी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने लिखा, “भारतीय सैनिकों ने हमेशा अपने साहस, बहादुरी, त्याग और बलिदान से देश की सुरक्षा व संप्रभुता को बनाए रखा है। उनकी अटूट राष्ट्र निष्ठा और देशभक्ति को हमेशा याद रखा जाएगा। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी शहीद सैनिकों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
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