राजनीति
अनिल देशमुख ने सीएम फडणवीस को लिखा पत्र, लाडली बहनों को 2100 रुपये देने का किया आग्रह
मुंबई, 22 जनवरी। महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने महायुति सरकार से लाडली बहनों को 2100 रुपये देने का आग्रह किया है।
अनिल देशमुख ने पत्र में लिखा है राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में महायुति ने बहनों को 2100 रुपये देने का वादा किया था, चुनाव को दो महीने बीत चुके हैं, ऐसे में अब सरकार अपनी प्यारी बहनों को भूल गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि उनके पारिश्रमिक में वृद्धि के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। महायुति सरकार को हमारी बहनों से किए गए वादे तुरंत पूरे करने चाहिए। जानकारी मिली है कि सरकार जांच के नाम पर बड़ी संख्या में बहनों के आवेदन खारिज करने वाली है। अगर ऐसा हुआ तो हम राज्य में बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा जुलाई 2024 में मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना शुरू की गई थी। बहनों को जुलाई से दिसंबर तक 6 माह की राशि दी गई है। प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक छह किश्तों में 9 हजार रुपये मिल चुके हैं। इस योजना की वजह से राज्य सरकार को विधानसभा चुनाव में सफलता मिली थी।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति ने लाडली बहन योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का वादा किया था। चुनावी घोषणा पत्र में यह वादा किया गया था कि राज्य की गरीब महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये दिए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार करना और उन्हें सशक्त बनाना था।
वहीं बीते दिनों भाजपा की महिला नेता चित्रा वाघ ने कहा कि महाराष्ट्र की लाडली बहनों का अपना भाऊ (भाई) देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने हैं। मोदी सरकार या फडणवीस सरकार हो, महिला सशक्तिकरण के लिए कई तरह की योजनाएं चलती हैं। महाराष्ट्र के लाडली बहनों ने अपने भाई फडणवीस को भर-भर के प्यार दिया है। हम अपने वादों को पूरा करेंगे।
राजनीति
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का बंगाल दौरा, दो दिन तक संगठन को मजबूत करने पर देंगे जोर

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन रविवार से पश्चिम बंगाल का दो दिवसीय संगठनात्मक और जन-संपर्क दौरा करेंगे।
इस दौरे का मकसद पार्टी के जमीनी संगठन को मजबूत करना और पूरे राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ना है। उम्मीद है कि नवीन अपने कार्यक्रमों के दौरान संगठन को दिशा देंगे और भाजपा कार्यकर्ताओं से बातचीत भी करेंगे।
उनका यह दौरा अगले महीने पूर्वी मिदनापुर की नंदीग्राम विधानसभा सीट और मुर्शिदाबाद की रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनावों, और साथ ही पश्चिम बंगाल में सात शहरी निकायों के लिए नवंबर में होने वाले चुनावों के लिहाज से अहम है।
वे सुबह 10 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेंगे और फिर न्यूटाउन के एक होटल जाएंगे। सुबह 11 बजे वे न्यूटाउन के बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर पहुंचेंगे, जहां वे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रेडियो प्रोग्राम ‘मन की बात’ सुनेंगे। राज्य भाजपा सूत्रों ने बताया कि नवीन का दौरा पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने पर केंद्रित होगा।
इसके बाद नवीन की अध्यक्षता में भाजपा की संगठनात्मक बैठक का पहला चरण शुरू होगा। सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होगी, जिसमें राज्य भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के संयोजक, संगठनात्मक जिला अध्यक्ष, सांसद और अन्य प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे।
राज्य समिति के एक सदस्य ने कहा कि उम्मीद है कि नवीन पश्चिम बंगाल में पार्टी के संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सुझाव देंगे।
दोपहर 3 से 4 बजे तक वे कन्वेंशन सेंटर में पार्टी के सांसदों और विधायकों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे। इसके बाद शाम 4:30 से 6 बजे तक राज्य कैबिनेट के सदस्यों के साथ विशेष चर्चा होगी।
दिन की उनकी आखिरी बैठक शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक पश्चिम बंगाल के लिए भाजपा की कोर कमेटी के साथ होगी। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा राजनीतिक हालात के बीच राज्य में पार्टी की भविष्य की रणनीति तय करने के लिए यह बैठक बहुत अहम होगी।
भाजपा ने एक प्रेस रिलीज में कहा, “दौरे के दूसरे दिन, यानी सोमवार, 28 सितंबर को, भाजपा की ‘सेवा ही संगठन’ की विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबह 10:30 बजे पानीहाटी, सोदेपुर के लोक संस्कृति भवन में ‘आंगन का मिलन’ सेवा कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान वे भाजपा के देशव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत कम्युनिटी वॉलंटियर्स, सेवा कर्मियों और नागरिकों से सीधे बातचीत करेंगे।”
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के दौंड में दो भाइयों गुंडागर्दी, 29 साल के व्यक्ति से मारपीट कर लूटा

महाराष्ट्र के पुणे के दौंड इलाके में एक 29 साल के व्यक्ति से मारपीट और लूटपाट की घटना सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में दो भाइयों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित का नाम दिनेश भरत धनवे है। वहीं, आरोपियों की पहचान आदर्श अनिल जाधव और अमन अनिल जाधव के तौर पर हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता रेलवे ग्राउंड के पास खड़ा होकर फोन पर बात कर रहा था। उसी समय आरोपी उसके पास आए और पैसे की मांग करते हुए पूछा, “तुम हमारे इलाके में क्यों आए हो?”
जब शिकायतकर्ता ने वहां से हटने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया और उसे थप्पड़ मारा, जिससे वह जमीन पर गिर गया। इसके बाद, आरोपी आदर्श जाधव ने धनवे पर हमला किया और लोहे की रॉड से उसकी पीठ, जांघ और सिर पर चोट पहुंचाई।
मारपीट के दौरान पीड़ित की पैंट की जेब से जबरन 3,500 रुपये निकाल लिए गए। इसके अलावा, जब शिकायतकर्ता ने अपने रिश्तेदारों को फोन किया, तो आरोपी ने अपने भाई अमन अनिल जाधव को मौके पर बुला लिया। दोनों ने मिलकर धनवे को अपशब्द कहे और जान से मारने की धमकी दी।
पीड़ित की शिकायत पर दौंड पुलिस स्टेशन में आदर्श और अनिल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की आगे की जांच चल रही है।
इससे पहले, मई में दौंड से मेडिकल फ्रॉड का एक मामला सामने आया था, जिसमें गैर-कानूनी तरीके से इलाज कर रहे एक फर्जी डॉक्टर को पकड़ा गया था।
पुलिस ने बताया कि उसके पास से दवाइयां, इंजेक्शन और 6.54 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ओमप्रकाश बंसीलाल स्वर्णकार ने यवत के कसुरदी गांव के अखदेवस्ती इलाके में एक अवैध क्लिनिक शुरू किया था। उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन या दवाएं बेचने का लाइसेंस नहीं था।
पुलिस द्वारा क्लिनिक पर छापा मारने के बाद इस अवैध काम का पता चला था। छापे के दौरान, वहां से अलग-अलग कंपनियों की एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन, सिरिंज, बिना लेबल वाली संदिग्ध तरल पदार्थों से भरी बोतलें और नकदी बरामद की गई थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
यूएनजीए में जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार पर दिया जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान बड़े स्तर पर शांति की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि गरीब और विकासशील देशों को उन युद्धों और फैसलों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए, जिनमें उनकी आवाज या भूमिका बहुत कम होती है।
जयशंकर के भाषण में खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों से लेकर खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे कई मुद्दे शामिल थे।
इन सभी मुद्दों के बीच उनका मुख्य संदेश यह था कि शांति सिर्फ युद्ध खत्म करने से नहीं आती। इसके लिए स्थिरता और जरूरी संसाधनों तक सभी की बराबर और सही पहुंच भी जरूरी है।
जयशंकर के सबसे कड़े शब्द उस देश के लिए थे, जिसका उन्होंने नाम नहीं लिया, लेकिन उसे ‘बार-बार आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाला देश’ बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस देश ने एक दिन पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया था। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके नतीजों से बचने के लिए भी तर्क दिए गए।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा।
जयशंकर ने उस देश का नाम नहीं लिया और न ही यह बताया कि भारत इस दिशा में किस तरह की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, उनके बयान से यह साफ था कि वह सीमा पार आतंकवाद को सामान्य संबंधों के साथ चलने वाली चीज नहीं मानते।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में चल रहे संघर्ष विकास की रफ्तार धीमी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, लड़ाई से बहुत दूर मौजूद देश भी बिना अपनी किसी गलती के इसका असर झेल रहे हैं।
उन्होंने महासभा से कहा कि जो देश इन संकटों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, अक्सर फैसले लेने में उनकी आवाज ही सबसे कम सुनी जाती है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव को लेकर जयशंकर ने संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत चाहता है कि आम नागरिकों की सुरक्षा हो और ऊर्जा तथा व्यापार की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे।
जयशंकर ने यूक्रेन में चल रही शांति की कोशिशों का समर्थन किया और खाद्य तथा ऊर्जा से जुड़े दबाव को कम करने में भारत की मदद की पेशकश की।
मध्य पूर्व के मुद्दे पर उन्होंने टू-स्टेट सॉल्यूशन, यानी इजरायल और फिलिस्तीन के लिए दो अलग देशों के समाधान को लेकर भारत का समर्थन दोहराया। भारत फिलिस्तीनियों को मानवीय सहायता भी दे रहा है।
इन मुद्दों से भारत की अपनी चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं, क्योंकि जहाजों की आवाजाही, अनाज और ऊर्जा की सप्लाई में रुकावट का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है।
जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर से लेकर काला सागर तक हुए हमलों में भारतीय नाविक भी मारे गए हैं। जयशंकर ने विकासशील देशों के लिए, उन्होंने भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़े ‘4एफ संकट’ का जिक्र किया। जलवायु की स्थिति, उर्वरक की कमी और अनाज की आवाजाही में रुकावटों ने इस दबाव को और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु से जुड़ी समस्याएं, खाद की कमी और अनाज की आवाजाही में रुकावट इस संकट को और गंभीर बना रही हैं।
जयशंकर ने कहा कि बाजारों तक सीमित पहुंच और सामान्य बाजार के नियमों से अलग तरीके अपनाए जाने की वजह से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए अपने उद्योगों को विकसित करना और मुश्किल हो रहा है।
जयशंकर ने उस स्थिति की भी आलोचना की, जिसे उन्होंने ‘हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल’ करना बताया।
उन्होंने कहा कि फाइनेंस, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, संसाधन और कनेक्टिविटी जैसी चीजों का इस्तेमाल भी अब दूसरे देशों पर दबाव डालने के लिए किया जा रहा है।
उनके मुताबिक, देश इन जोखिमों को कम करने के लिए अपने संबंधों और सप्लाई के स्रोतों में बदलाव कर रहे हैं और अलग-अलग विकल्प तलाश रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही दुनिया में आपसी भरोसा भी कम हो रहा है।
जयशंकर ने भारत को एक उदाहरण और साझेदार, दोनों के तौर पर पेश किया। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और देश के अंदर लोगों तक बुनियादी सेवाएं पहुंचाने की व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 78 देशों में 600 बड़े विकास प्रोजेक्ट किए हैं। इनमें बुनियादी ढांचा, कृषि, सूचना तकनीक और ट्रेनिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
जयशंकर ने जलवायु से जुड़ी पहलों, आपात स्थिति में मेडिकल सहायता पहुंचाने और प्राकृतिक आपदाओं के बाद दूसरे देशों को दी गई मदद का भी जिक्र किया। उन्होंने खास तौर पर अफ्रीकी देशों और छोटे विकासशील द्वीपीय देशों के साथ भारत की साझेदारी पर जोर दिया।
यह बात ग्लोबल साउथ के लिए ज्यादा आवाज और भागीदारी की भारत की मांग से भी जुड़ी थी। भारत का कहना है कि वह दूसरे विकासशील देशों के साथ पहले से ही मिलकर काम कर रहा है।
अपने संबोधन के आखिर में जयशंकर ने इन सभी मुद्दों को इस बड़े सवाल से जोड़ा कि बदलती दुनिया के नियम आखिर कौन तय करेगा।
उन्होंने कहा, “1945 के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था अब नई वास्तविकताओं को जगह दे रही है।” उन्होंने वैश्विक फैसले लेते समय ज्यादा देशों से सलाह-मशविरा करने और फैसलों को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग की। जयशंकर ने कहा कि दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से को अब वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता।
जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत की सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं को इस बड़े तर्क के साथ जोड़ा कि दुनिया में शांति और विकास के लिए एक ज्यादा समावेशी और बराबरी वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जरूरत है।
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