राजनीति
अमित शाह बोले- सपा, बसपा, कांग्रेस परिवारवादी पार्टियां, भाजपा रखती है विकास का माद्दा
गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लखनऊ में यूपी के चुनावी मिशन का आगाज कर दिया। उन्होंने विपक्षियों पर जमकर निशाना साधा कहा कि बीते 5 सालों में जो लोग घर पहुंच गए थे, वे नए कपड़े पहनकर आ गए हैं कि हमारी सरकार बनेगी। सपा बसपा पारीवारिक पार्टियां हैं, सिर्फ भाजपा ही यूपी के 22 करोड़ लोगों का विकास करने का माद्दा रखती है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मेरा परिवार-भाजपा परिवार सदस्यता अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछली पार्टियों इतने गड्ढे छोड़ दिए कि किसी के बस की नहीं थी, इन्हें भरना लेकिन भाजपा ने दिखाया कि ये कैसे होता है। सपा, बसपा और कांग्रेस परिवारवादी पार्टी भाजपा के अन्दर ही विकास करने माद्दा है।
अमित शाह ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि आप कहते थे कि मंदिर वहीं बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएंगे। आपको बताना चाहता हूं कि राम मंदिर की नींव भी रख दी गई है और आप 5,000 रुपया भी देने से चूक गए। अमित शाह ने कहा कि परिवारवादी पार्टी और भाजपा में यही फर्क है। हमारा वादा था कि हम कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाएंगे। इसके लिए हमारे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसके लिए बलिदान भी दिया था। अब जाकर हमने इस वादे को पूरा किया है।
इस दौरान अमित शाह ने कहा कि मेरा परिवार भाजपा परिवार के नाम से सदस्यता अभियान की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि नवंबर और दिसंबर में यह अभियान चलेगा। गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि महिलाओं, युवाओं और पिछड़ों समेत सभी वर्गों को भाजपा से जोड़ा जाए।
शाह ने कहा कि भाजपा जनता की इच्छा से ही घोषणा पत्र तैयार करती है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार ने 90 फीसदी वादों को पूरा कर दिया है। यही नहीं मंच से ही अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ से कहा कि अभी दो महीने बाकी हैं और आप इसे 100 फीसदी तक ले जाइए। भाजपा का यह सदस्यता अभियान नवंबर और दिसंबर महीने में चलेगा।
अखिलेश यादव पर सीधा वार करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह प्रदेश महात्मा बुद्ध की कर्मभूमि है। भगवान शिव की धरती काशी है। लेकिन कई सालों से लोगों को यह अहसास नहीं होता था। मुगलों के शासन से लेकर 2017 तक ऐसा महसूस नहीं होता था। 2017 में जब भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार आई तो उसने यूपी को उसकी पहचान वापस दिलाई।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहली बार सिद्ध किया है कि सरकारें परिवारों के लिए नहीं गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए होती हैं।
शाह ने कहा कि आज किसी की हिम्मत नहीं है पलायन कराने की। पहले हर जिले में दो-तीन बाहुबली थे लेकिन आज दूरबीन लेकर भी देखता हूं तो कोई बाहुबली नजर नहीं आता। आज 16 साल की बच्ची भी गहने लादकर रात 12 बजे भी स्कूटी पर निकल सकती है।
मोदी जी ने प्रदेश के हर घर में बिजली पहुंचाई। हमने 11 करोड़ घरों में गैस पहुंचाया, जिसे पहले लोग मजाक समझते थे। 10 करोड़ लोगों को घर देने का लक्ष्य रखा है जो जल्द पूरा होगा। आप लोगों ने 2019 में दोबारा और 2017 में भाजपा की सरकार बनवाई। मोदी जी अगर पूर्ण बहुमत के साथ दो बार जीते हैं तो उसका पूरा श्रेय यूपी की महान जनता को जाता है। दिल्ली का रास्ता लखनऊ से ही होकर जाता है।
आपने दोबारा दो-तिहाई बहुमत से जिताया तो मोदी जी ने मंदिर का शिलान्यास कर दिया और देखते ही देखते मंदिर बन जाएगा।
गृहमंत्री ने कहा कि 2017 में जब यूपी हमें मिला था तो इसकी अर्थव्यवस्था सातवें नंबर पर थी लेकिन अब ये दूसरे नंबर है। ईज ऑफ डूइंग में 14वां स्थान था और अब दूसरे स्थान पर यूपी है। बेरोजगारी आप 18 प्रतिशत छोड़ गए थे अब 4 प्रतिशत है। 2022 से पहले यूपी में 40 मेडिकल कॉलेज होंगे। पहले धान की खरीद पर 17 हजार करोड़ भुगतान होता था अब 38 हजार करोड़ होता है। हवाई अड्डे चार थे अब नौ बन गए हैं। एक्सप्रेसवे भी बने।
कहा सबसे ज्यादा अस्पताल यूपी में बने, 400 ऑक्सीजन प्लांट लगने वाले हैं 193 लग चुके हैं। यूपी में अपराध के क्षेत्र में भयंकर सुधार किया योगी जी ने। एक लाख से ज्यादा पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई। इसमें कोई भ्रष्टाचार भी नहीं है।
गृहमंत्री ने कहा कि 8 नए विवि, 77 कॉलेज, 250 इंटर कॉलेज बने। नई पीढ़ी तैयार करने की व्यवस्था योगी जी ने की। अभी यूपी में बहुत कुछ करना बाकी है। हम फिर से घोषणापत्र लेकर आएंगे और उसे शत-प्रतिशत 2027 में करके दिखाएंगे। मैं कहने आया हूं कि आप एक बार फिर 2022 में भाजपा को 300 के पार करा दीजिए यूपी को नंबर एक पर लाकर दिखाएंगे।
राजनीति
चंडीगढ़ ने सिर्फ 140 दिनों में 85 फीसदी दोषसिद्धि दर हासिल की, यहां कभी ट्रैफिक जाम नहीं होता: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को चंडीगढ़ पुलिस के 60वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पुलिस लाइन में आयोजित हीरक जयंती समारोह में गृह मंत्री ने पुलिस परेड का निरीक्षण करने के साथ मार्च पास्ट की सलामी ली। इसके साथ ही चंडीगढ़ पुलिस को राष्ट्रपति की ओर से स्वीकृत प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ भी प्रदान किया।
अमित शाह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “चंडीगढ़ पुलिस को राष्ट्रपति निशान से अलंकृत किया जाना छह दशकों की सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता का सम्मान है। इस अवसर पर चंडीगढ़ पुलिस के सभी वीर शहीदों को नमन करता हूं। कर्तव्यपालन के लिए अपने प्राणों का बलिदान देना पूरे पुलिस बल के लिए गर्व की बात है। 1966 से आज तक चंडीगढ़ पुलिस ने अथक प्रयासों से देश के पुलिस बलों के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिखने का काम किया है। इसके लिए चंडीगढ़ पुलिस के सभी जवानों को हार्दिक शुभकामनाएं।”
गृह मंत्री ने कहा, “घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई और प्रभावी रिस्पॉन्स टाइम के मामले में चंडीगढ़ पुलिस आज देश में दूसरे स्थान पर है। आज 141 नए वाहनों के चंडीगढ़ पुलिस के बेड़े में शामिल होने से उसकी कार्यक्षमता और आपातकालीन सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन आधुनिक संसाधनों के बल पर चंडीगढ़ पुलिस रिस्पॉन्स टाइम के मामले में देश में प्रथम स्थान हासिल करेगी।”
उन्होंने कहा, “शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में बसा चंडीगढ़ देश के सबसे सुनियोजित शहरों में गिना जाता है। लेकिन जब आतंकवाद का दौर आया, तो चंडीगढ़ भी उससे अछूता नहीं रहा। उस कठिन समय में चंडीगढ़ पुलिस ने अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम की पराकाष्ठा का परिचय दिया। अपने शौर्य, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा से चंडीगढ़ पुलिस ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एवं शांति सुनिश्चित करने का काम किया। पुलिस का दायित्व नागरिकों को सुगम और सुलभ सेवाएं उपलब्ध कराना है। चंडीगढ़ पुलिस ने विभिन्न ऐप्स और आधुनिक तकनीकी मॉडलों के माध्यम से ऐसी व्यवस्था को धरातल पर उतारा है, जिससे नागरिकों को पुलिस सेवाओं के लिए थाने जाने की आवश्यकता ही न पड़े। इस सराहनीय पहल के लिए चंडीगढ़ पुलिस को विशेष बधाई देता हूं।”
चंडीगढ़ देश में प्रति व्यक्ति सर्वाधिक वाहनों वाले शहरों में शामिल है, फिर भी यहां यातायात व्यवस्था सुचारू रहती है। मैं यहां गृहमंत्री बनने से पहले और बाद में भी आया, लेकिन कभी ट्रैफिक जाम नहीं देखा। यहां क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) का रिस्पॉन्स टाइम मात्र 10 मिनट और पुलिस का घटनास्थल पर पहुंचने का समय महज 4 मिनट है। यह अन्य प्रदेशों के पुलिस बलों के लिए प्रेरणादायक है। चंडीगढ़ ने मात्र 140 दिनों में 85 फीसदी दोषसिद्धि दर हासिल की है। यदि देशभर में न्याय संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो, तो नागरिकों को न्याय के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई न्याय संहिताओं की शुरुआत भी चंडीगढ़ से की थी और अंग्रेजों के बनाए तीन कानूनों को तिलांजलि देकर कानून आगे बढ़ा। मुझे विश्वास है कि सबसे पहले चंडीगढ़ नशा मुक्त होगा।” शाह ने कहा, “रिस्पॉन्स टाइम के मामले में चंडीगढ़ दुनिया में दूसरे और देश में दूसरे स्थान पर है। मुझे पूरा भरोसा है कि 141 नए वाहन मिलने के बाद, अगले साल यह देश भर के पुलिस बलों में पहले स्थान पर आ जाएगा।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
दिसंबर के जी20 शिखर सम्मेलन तक साझा सहमति बनने की उम्मीद: जयशंकर

भारत को उम्मीद है कि दिसंबर में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन तक सदस्य देश कुछ प्रमुख मुद्दों पर साझा सहमति बनाने में सफल होंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि यदि इसके लिए गंभीर प्रयास किए जाते हैं तो भारत इस दिशा में होने वाली कोशिशों का समर्थन करेगा।
अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर भारतीय पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर से पूछा गया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान जी20 शिखर सम्मेलन में जिस तरह आम सहमति बनी थी, क्या इस बार भी वैसी ही सहमति की उम्मीद की जा सकती है?
इस पर उन्होंने कहा, “अभी दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन का समय नहीं आया है, और उस समय की परिस्थितियों को देखकर ही कुछ कहा जा सकेगा।”
उन्होंने कहा, “जाहिर है, उम्मीद है कि जी20 साझा सहमति बनाने में सफल होगा।”
जयशंकर ने इस संदर्भ में ब्रिक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग परिस्थितियों और अलग-अलग देशों की भागीदारी के बावजूद इस समूह में प्रमुख सदस्यों के बीच साझा बयान पर सहमति बन सकी थी। उन्होंने कहा कि दिसंबर करीब आने के साथ जी20 में भी इस तरह की सहमति बनाने के प्रयास किए जाएंगे और भारत इसमें सहयोग करेगा।
विदेश मंत्री ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहमति बनाना आसान नहीं होता, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया कई मुद्दों पर ध्रुवीकृत नजर आ रही है। इसके बावजूद भारत का मानना है कि संवाद और प्रयासों के जरिए साझा आधार तैयार किया जा सकता है।”
बातचीत के दौरान जयशंकर से अमेरिका को ‘अकेली महाशक्ति’ बताने वाली उनकी पहले की टिप्पणी के बारे में भी सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या जी20 की बैठक में भी अन्य देशों के बीच इस तरह की भावना देखने को मिली।
इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी वह टिप्पणी एक बिल्कुल अलग संदर्भ में की गई थी। उन्होंने कहा, “म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही थी। वह कार्यक्रम जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक से अलग था।”
जयशंकर ने कहा, ” म्यूनिख में वह विश्लेषकों और नीति-निर्माताओं को संबोधित कर रहे थे, जबकि अटलांटा में विभिन्न देशों के विदेश मंत्री एक साथ मौजूद थे। इसलिए दोनों अवसरों पर कही गई बातों और चर्चाओं को एक ही संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि जी20 की बैठक में भारत की उस भूमिका की सामान्य रूप से सराहना देखने को मिली, जिसके तहत वह दुनिया के अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रखता है।
विदेश मंत्री के मुताबिक, बैठक में यह समझ और सराहना थी कि आज की ध्रुवीकृत दुनिया में भारत सभी पक्षों से बात करने की क्षमता रखता है। भारत संवाद में योगदान दे रहा है, देशों के बीच सेतु का काम कर रहा है और एक-दूसरे तक अपनी बात पहुंचाने में मदद कर रहा है।
जयशंकर ने कहा, “भारत के बारे में यह सामान्य समझ और सराहना थी कि आज की कुछ हद तक ध्रुवीकृत दुनिया में हम सभी पक्षों से बात कर सकते हैं। हम योगदान दे रहे हैं, सेतु बना रहे हैं और संवाद कायम कर रहे हैं।”
अटलांटा में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक पर भी उन्होंने बात की। जयशंकर ने बताया कि इस साल विदेश मंत्री स्तर पर क्वाड की यह तीसरी बैठक थी। इससे पहले दिल्ली और मनीला में भी इस स्तर की बैठकें हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “भारत को लगता है कि क्वाड ने इस दौरान अच्छी प्रगति की है। अब उम्मीद है कि समूह की अगली बैठकें ऐसी होंगी, जिनमें भविष्य की दिशा तय करने और उसके एजेंडे का विस्तार करने पर विचार किया जा सके।”
जयशंकर ने बताया कि जी20 बैठक के दौरान उन्होंने लगभग सभी देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इनमें कुछ मुलाकातें अलग-अलग हुईं, जबकि कुछ देशों के प्रतिनिधियों के साथ समूह में चर्चा की गई।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
दुनिया को युद्ध नहीं, कूटनीति से समाधान चाहिए: एस जयशंकर

भारत ने जी-20 देशों से अनुरोध किया है कि विभिन्न संघर्षों के समाधान का रास्ता डिप्लोमेसी यानी कूटनीति से निकाला जाए। उन्होंने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित होने से बचाने के लिए ठोस प्रयास करने का आग्रह किया है।
अमेरिका के अटलांटा में शनिवार को जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारतीय पत्रकारों से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत अपने प्रयासों में अमेरिका के साथ तालमेल बिठा रहा है। उन्होंने उत्पादन नेटवर्क को भौगोलिक रूप से और अधिक विविध बनाने पर भी जोर दिया और उम्मीद जताई कि दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले यह समूह किसी आम सहमति पर पहुंच जाएगा।
इन चर्चाओं में भारत का संदेश स्पष्ट था कि संघर्षों की कीमत केवल सीधे तौर पर शामिल देशों को ही नहीं, बल्कि अन्य देशों को भी चुकानी पड़ रही है, खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) को। भारत की प्राथमिकताओं में कूटनीति, आपूर्ति सुरक्षा और किसी एक उत्पादन केंद्र पर निर्भरता को कम करना शामिल थे।
भारत रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ लगातार संपर्क में है। इन बातचीत का उद्देश्य काला सागर में अनाज की आवाजाही बहाल करना, नागरिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को रोकने के रास्ते तलाशना है।
उन्होंने कहा, “युद्ध को खत्म करने के लिए, अंतहीन युद्धों का सिलसिला रुकना चाहिए।”
जयशंकर ने कहा कि अटलांटा में हुई बैठक उपयोगी और खुली चर्चा का मंच रही। इसमें भू-राजनीतिक हालात, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े मुद्दों पर तीन सत्र आयोजित किए गए। पहले दो सत्र शुक्रवार को हुए, जबकि आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा शनिवार को हुई।
जयशंकर ने कहा कि भू-राजनीतिक चर्चा के दौरान दो बड़े संघर्षों के वैश्विक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया गया। भारत ने स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई से इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। इसके बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता तलाशना होगा।
उन्होंने कहा, “भारत स्वयं इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, और बैठक में दूसरे देशों के विदेश मंत्रियों ने भी भारत के प्रयासों का उल्लेख किया।”
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्धों को समाप्त करने की दिशा में प्रयास होने चाहिए। संघर्षों का असर खाद्य, ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति पर पड़ता है, जिसका सबसे अधिक दबाव विकासशील देशों पर आता है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत की पहल का ब्योरा देते हुए जयशंकर ने बताया, “भारत तीन प्रमुख मुद्दों पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है। इनमें नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा, रूस और यूक्रेन से अनाज का निर्यात फिर शुरू करना तथा ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमलों को रोकने की संभावनाएं शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत ने रूस और यूरोपीय देशों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। काला सागर से अनाज की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। रूस और यूक्रेन दोनों ही वैश्विक बाजार में अनाज के बड़े निर्यातक हैं। ऐसे में निर्यात प्रभावित होने का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो अपनी खाद्य जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं।
जयशंकर के मुताबिक, ग्लोबल साउथ के देशों की चिंता इसलिए भी अधिक है, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध अनाज के बड़े खरीदार हैं। भारत चाहता है कि अनाज की आपूर्ति फिर सामान्य हो सके, ताकि खाद्य सुरक्षा पर संकट और गहरा न हो।
ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के सवाल को उन्होंने बातचीत का सबसे जटिल पहलू बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के लिए ऊर्जा ढांचे का अर्थ अलग-अलग है। किसी के लिए इसमें तेल रिफाइनरी शामिल है, तो किसी के लिए बिजली ग्रिड और ईंधन की आपूर्ति करने वाले जहाज भी इसी दायरे में आते हैं।
जयशंकर ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी पक्षों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं है, लेकिन भारत उन्हें एक साथ लाने और साझा रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस विषय पर बातचीत की है। वह स्वयं मॉस्को और कीव की यात्रा कर चुके हैं। अटलांटा में भी उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की।
भारत यूक्रेन के संपर्क में भी है और अमेरिका के साथ समन्वय बनाए हुए है। हालांकि, जयशंकर ने बातचीत की मौजूदा स्थिति या उसके विस्तृत ब्योरे को सार्वजनिक करने से परहेज किया।
ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा के दौरान भारत ने बाजार में पैदा हो रही विकृतियों और ऊर्जा आपूर्ति को राजनीतिक हथियार बनाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा प्रवाह का राजनीतिकरण नुकसानदेह है और इसका सबसे ज्यादा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा की कमी और आपूर्ति में रुकावट का सामना करने वाले देशों के लिए यह गंभीर चुनौती है। भारत ने जी-20 के मंच पर इस समस्या को स्वीकार करने और इसके समाधान के लिए कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।
खाद्य सुरक्षा पर चर्चा में अनाज की आपूर्ति के अलावा उर्वरकों की उपलब्धता का मुद्दा भी उठा। जयशंकर ने बताया कि उर्वरकों की आपूर्ति में व्यवधान का संबंध काला सागर के साथ-साथ खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र से भी है। इन क्षेत्रों में अस्थिरता का असर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के मुद्दे पर भारत ने उत्पादन और विनिर्माण के केंद्रों को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में विकसित करने की जरूरत बताई। जयशंकर ने कहा कि दुनिया को किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उत्पादन और आपूर्ति के सीमित केंद्र बाधित होते हैं तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। युद्ध और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाएं भी ऐसी ही चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
भारत ने यह भी आगाह किया कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को राजनीतिक दबाव बनाने या दूसरे देशों को नुकसान पहुंचाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति से बचना होगा। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन केंद्र विकसित करना सबसे बेहतर रास्ता है।
जी-20 बैठक में सर्वसम्मत साझा बयान जारी नहीं होने के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि अभी नेताओं का शिखर सम्मेलन होना बाकी है। दिसंबर में होने वाली बैठक से पहले सदस्य देशों के बीच साझा सहमति बनाने के प्रयास तेज होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि जी-20 देश कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक साझा जमीन तलाश सकेंगे। इसके लिए प्रयास किए जाएं तो सहमति बनना संभव है।
जयशंकर ने ब्रिक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग परिस्थितियों और सदस्य देशों के बावजूद वहां महत्वपूर्ण प्रतिभागी साझा बयान पर सहमत हुए थे। भारत जी-20 में भी इसी तरह की सहमति बनाने के प्रयासों का समर्थन करेगा।
अटलांटा में बैठक के दौरान जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय और छोटे समूहों में बातचीत भी की। उन्होंने कहा कि मौजूदा ध्रुवीकृत वैश्विक माहौल में भारत की यह क्षमता महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वह अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रख सकता है और उनके बीच मतभेद कम करने में योगदान दे सकता है।
जी-20 बैठक से इतर भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भी शनिवार सुबह क्वाड की बैठक की। इस साल यह चारों देशों के विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक थी। इससे पहले नई दिल्ली और मनीला में भी उनकी मुलाकात हुई थी।
जयशंकर ने कहा कि चारों देशों ने माना कि क्वाड के कामकाज में आगे बढ़ने के लिए उपयोगी प्रगति हुई है। आने वाले समय में इस समूह की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना को नई दिशा देने के साथ इसके एजेंडे का विस्तार करने पर भी विचार किया जाएगा।
अमेरिका को लेकर पहले की गई अपनी टिप्पणियों पर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “वे टिप्पणियां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ अलग संदर्भ में हुई बातचीत का हिस्सा थीं। अटलांटा में विदेश मंत्रियों की बैठक का माहौल और उद्देश्य अलग थे।”
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम में कही जाने वाली बात उसके संदर्भ और वहां मौजूद श्रोताओं के अनुरूप होती है।
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