अंतरराष्ट्रीय
एमेजन का ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 17 अक्टूबर से
एमेजन इंडिया ने मंगलवार को कहा कि इसका ग्रेट इंडियन फेस्टिवल (जीआईएफ) 17 अक्टूबर से शुरू होगा। फ्लिपकार्ट ने अपने बिग बिलियन डे की शुरुआत के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है।
अमेजन ने कहा है कि उसके प्राइम मेम्बर्स के लिए ग्रेट इंडियन फेस्टिवल की शुरुआत 16 अक्टूबर को ही हो जाएगी।
ग्रेट इंडियन फेस्टिवल के दौरान 6.5 लाख से अधिक सेलर्स एमेजन डॉट इन पर अपने प्रॉडक्ट्स की पेशकश करेंगे और ग्राहकों को चार करोड़ से अधिक प्राडक्ट्स खरीदने का मौका मिलेगा।
एमेजन ने कहा है कि 100 से अधिक शहरों की 20 हजार से अधिक दुकानें भी इस ग्रेट इंडियन फेस्टिवल में शामिल होंगी।
एमेजन ने कहा है कि जो लोग एचडीएफसी बैंक डेबिट या फिर क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करेंगे उन्हें अतिरिक्त 10 फीसदी की छूट मिलेगी।
इसके अलावा कम्पनी ने कहा है कि ग्रेट इंडियन फेस्टिवल में क्रेडिट एवं डेविट कार्ड्स से खरीद पर नो कास्ट ईएमआई मिलेगा और इसके अलावा कई एक्सचेंज ऑफर भी दिए जाएंगे।
एमेजन के मुताबिक भारतीय उपभोक्ता अधिक से अधिक संख्या में ग्रेट इंडियन फेस्टिवल में शरीक हों सकें, इसलिए इस साल उन्हें छह भाषाओं- अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ में खरीदारा का मौका मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय
बांग्लादेश: बीएनपी ने पीएम मोदी का किया धन्यवाद, रचनात्मक तरीके से भारत से जुड़ने की उम्मीद जताई

नई दिल्ली, 14 फरवरी : बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने बंपर जीत हासिल की है। बीएनपी चीफ तारिक रहमान दो विधानसभा सीटों से चुनावी मैदान में उतरे थे और दोनों पर ही उन्होंने जीत दर्ज की। वहीं बीएनपी और तारिक रहमान की जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले तारिक को फोन कर बधाई भी दी। बीएनपी ने भी पीएम मोदी का धन्यवाद किया है।
बीएनपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल से लिखा, “बहुत-बहुत धन्यवाद, माननीय नरेंद्र मोदी। राष्ट्रीय चुनाव में बीएनपी की निर्णायक जीत दिलाने में तारिक रहमान के नेतृत्व को आपने जिस तरह से सराहा, उसके लिए हम बहुत आभारी हैं। यह नतीजा बांग्लादेश के लोगों के हमारे नेतृत्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसे और विश्वास को दिखाता है।”
बीएनपी ने आगे लिखा कि बांग्लादेश अपने सभी नागरिकों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों और सबको साथ लेकर चलने और आगे बढ़ने वाले विकास को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर करने की उम्मीद के साथ उन्होंने कहा, “हम आपसी सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और हमारे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए एक साझा कमिटमेंट से गाइड होकर, अपने कई तरह के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ कंस्ट्रक्टिव तरीके से जुड़ने की उम्मीद करते हैं।”
इससे पहले पीएम मोदी ने एक्स पर बधाई संदेश में लिखा था, “मैं बांग्लादेश में संसदीय चुनाव में बीएनपी को बड़ी जीत दिलाने के लिए तारिक रहमान को दिल से बधाई देता हूं। यह जीत बांग्लादेश के लोगों का आपके नेतृत्व पर भरोसा दिखाती है। भारत एक डेमोक्रेटिक, प्रोग्रेसिव और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। मैं हमारे कई तरह के संबंधों को मजबूत करने और हमारे कॉमन डेवलपमेंट गोल्स को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं।”
बता दें, बीएनपी ने 212 सीटें जीतीं, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने 11 घटक दलों के गठबंधन के साथ मिलकर 77 सीटें हासिल कीं और नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) ने छह सीटें जीतीं।
इस बीच, जमात और उसके गठबंधन ने मिलकर 77 सीटें जीतीं। जमात-ए-इस्लामी को अपने सिंबल के साथ 68 सीटें मिलीं, एनसीपी को छह, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस को दो और खिलाफत मजलिस को एक सीट मिली।
अंतरराष्ट्रीय
न्यूयॉर्क हत्या साजिश में निखिल गुप्ता ने कबूला जुर्म, जानिए कितने साल तक हो सकती है जेल

वॉशिंगटन, 14 फरवरी : साल 2023 में निखिल गुप्ता न्यूयॉर्क में एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या कराने के लिए 15,000 डॉलर देने पर राजी हो गए थे। मैनहैटन की एक संघीय अदालत में पेश होकर उन्होंने यह बात खुद स्वीकार की। इस मामले में अमेरिका की संघीय जेल में अधिकतम 40 साल तक की सजा का प्रावधान है।
54 वर्षीय भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट में अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के सामने तीन आरोपों को स्वीकार किया। ये आरोप थे- भाड़े पर हत्या की साजिश, भाड़े पर हत्या, और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश।
अदालत में शपथ के तहत गुप्ता ने कहा, “2023 के वसंत में, मैं किसी दूसरे व्यक्ति के साथ यूनाइटेड स्टेट्स में एक व्यक्ति की हत्या करवाने के लिए राज़ी हुआ था।” उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने 15,000 डॉलर नकद एक व्यक्ति को दिए थे, जो अमेरिका में मौजूद था। पूछताछ के दौरान गुप्ता ने माना कि उन्हें पता था कि जिस व्यक्ति को निशाना बनाया जाना था, वह न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में रहता है, जबकि पैसा मैनहैटन में दिया गया।
जज सारा नेटबर्न ने सिफारिश की कि जिला जज विक्टर मरेरो इस दोष स्वीकार को मंजूर करें। बाद में अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया। सजा सुनाने की तारीख 29 मई 2026 तय की गई है।
फेडरल कानून के तहत, गुप्ता को भाड़े पर हत्या करने और भाड़े पर हत्या करने की साजिश के लिए ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल की सज़ा हो सकती है, और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के लिए 20 साल तक की सज़ा हो सकती है- कुल मिलाकर ज़्यादा से ज़्यादा 40 साल की सज़ा। हालांकि, हर मामले में अधिकतम सजा ही दी जाए, यह जरूरी नहीं है। अदालत सजा तय करते समय अमेरिकी सेंटेंसिंग गाइडलाइंस का पालन करती है और अन्य कानूनी पहलुओं को भी देखती है। दोष स्वीकार करने के कारण गुप्ता को कुछ राहत भी मिल सकती है।
सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता, भविष्य में ऐसे अपराध रोकने की जरूरत, जनता की सुरक्षा और अन्य कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा। अभियोजन पक्ष ने कहा कि अगर मामला ट्रायल तक जाता तो वे एक गुप्त सूत्र, एक अंडरकवर अधिकारी (जो खुद को सुपारी किलर बता रहा था), व्हाट्सऐप मैसेज और कॉल रिकॉर्डिंग, मोबाइल फोन के सबूत और न्यूयॉर्क में 15,000 डॉलर दिए जाने का वीडियो अदालत में पेश करते।
चार्जशीट में कहा गया था कि गुप्ता ने अन्य लोगों के साथ मिलकर, जिनमें भारत के कैबिनेट सचिवालय के एक कर्मचारी का नाम भी शामिल था, न्यूयॉर्क में रह रहे एक सिख राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या की योजना बनाई थी। यह कार्यकर्ता खालिस्तान की मांग का समर्थन करता था।
गुप्ता ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि वह भारत के नागरिक हैं और उनका दोष स्वीकार करना संभवतः उन्हें अमेरिका से निष्कासित किए जाने का कारण बनेगा। अमेरिकी आव्रजन कानून के तहत ऐसे मामलों में देश से हटाना लगभग अनिवार्य होता है।
दोष स्वीकार करके गुप्ता ने एक लंबे और डिप्लोमैटिक रूप से सेंसिटिव ट्रायल से बचाव कर लिया, जिसमें अमेरिकी जमीन पर विदेशी साजिश के आरोपों की सुनवाई होती। अब अदालत को यह तय करना है कि उन्हें कितने समय के लिए जेल भेजा जाएगा। इसका फैसला 29 मई 2026 को सुनाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय
बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार, भारत समेत दक्षिण एशिया पर क्या हो सकता है असर?

नई दिल्ली, 13 फरवरी : बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को गिराए जाने के लगभग 18 महीनों के बाद गुरुवार को संसदीय चुनाव हुए। शुक्रवार को सामने आए परिणामों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। इससे साफ हो गया है कि बांग्लादेश में बीएनपी की बहुमत की सरकार बन रही है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि बीएनपी की सरकार आने के बाद बांग्लादेश के भारत और दक्षिण एशिया के साथ रिश्तों पर कैसा असर पड़ेगा।
बांग्लादेश की कमान बीएनपी के हाथों में आने के बाद दक्षिण एशिया में रणनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच क्या संबंध रहेंगे। शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से बांग्लादेश में यूनुस की अंतरिम सरकार के शासन में भारत और बांग्लादेश के बीच काफी तनाव देखने को मिला।
इसके साथ ही बांग्लादेश में पाकिस्तान को एंट्री मिल गई। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में आईएसआई की सक्रियता भी बढ़ी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसका मकसद भारत के खिलाफ इन युवाओं का इस्तेमाल करना है।
जिस तरह से यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ दोस्ती में गहराई आई है, बीएनपी के आने से इसमें कुछ बदलाव देखने को जरूर मिलेगा। बीएनपी भारत के साथ अपने राजनयिक और कूटनीतिक संबंध बेहतर करने का प्रयास करेगी। बीएनपी की वापसी से दोनों देशों के बीच सीमा, अवैध आव्रजन और जल बंटवारे (जैसे तीस्ता) जैसे मुद्दे फिर प्रमुख बन सकते हैं।
इससे पहले पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध काफी अच्छे थे। हालांकि, अवामी लीग से पूर्व जब खालिदा जिया के नेतृत्व में बीएनपी का शासन था, तब भारत और बांग्लादेश के बीच कड़वाहट देखने को मिली थी। लेकिन, तारिक रहमान के हाथ में सत्ता की कमान होने के बाद इसमें थोड़ा बदलाव जरूर हो सकता है।
चीन की अगर बात करें, तो उसकी हमेशा से ही चटगांव पोर्ट पर नजर रही है। यूनुस के शासन में यह खबरें भी सामने आ रही थी कि बांग्लादेश के सभी बड़े पोर्ट का संचालन चीन के हाथों में सौंप दिया जाएगा। अगर ऐसा हो जाता, तो चीन भविष्य में भारत के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकता था।
बीएनपी सरकार चीन के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सहयोग को और बढ़ा सकती है। इससे दक्षिण एशिया, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।
उम्मीद की जा रही है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों में कुछ नरमी आ सकती है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन प्रभावित होगा। भारत के लिए यह सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। यदि आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो अस्थिरता का असर पड़ोसी देशों तक महसूस हो सकता है।
भारत के पूर्वोत्तर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सतर्कता बढ़ सकती है। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।
भारत के लिए बांग्लादेश एक बड़ा निर्यात बाजार है। नीतिगत बदलाव से कारोबारी माहौल प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बीएनपी की वापसी के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच हालात में सुधार की संभावनाएं हैं, लेकिन अगर जमात-ए-इस्लामी की वापसी होती तो यह भारत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता था।
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