अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान में पायलटों के सभी लाइसेंस ‘सही’ घोषित, उड्डयन मंत्री निशाने पर
पाकिस्तान में पायलटों को फर्जी या संदिग्ध लाइसेंस जारी होने के मामले में पूरी तरह से यू-टर्न आ गया है। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएए) ने ऐलान किया है कि उसके द्वारा पायलटों को जारी सभी लाइसेंस ‘सही’ हैं। इसके बाद देश के उड्डयन मंत्री गुलाम सरवर निशाने पर आ गए हैं जिन्होंने लाइसेंस पर सवाल उठाए थे।
सीएए द्वारा इस बारे में जारी बयान मंत्री के आरोप के ठीक उलट है जिन्होंने कहा था कि कम से कम 40 फीसदी पाकिस्तानी पायलटों के पास फर्जी लाइसेंस हैं।
सीएए के महानिदेशक हसन निसार जेमी ने ओमान के उच्च विमानन अधिकारियों को भेजे एक पत्र में कहा है, “यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएए) द्वारा जारी सभी सीपीएल/एटीपीएल पायलट लाइसेंस सही हैं और वैध रूप से जारी किए गए हैं। एक भी पायलट लाइसेंस फर्जी नहीं है। इस मामले को मीडिया और सोशल मीडिया में बेहद गलत तरीके से उछाला गया है।”
पत्र में कहा गया है, “सीएए ने विभिन्न नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों/विदेशी एयरलाइंस (यूएई/जीएसीए, वियतनाम एयरलाइंस, बहरीन एयर, नागरिक उड्डयन मलेशिया, हांगकांग नागरिक उड्डयन विभाग और तुर्की एयरलाइंस) से प्राप्त 104 नामों में से 96 पाकिस्तानी पायलटों को पहले ही सत्यापित कर दिया है।”
सीएए के इस रहस्योद्घाटन ने उड्डयन मंत्री को निशाने पर ला दिया है। विपक्षी दलों ने मंत्री की जवाबदेही के साथ उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है। नेशनल असेंबली और सीनेट की स्टैंडिंग कमेटी में विपक्षी दलों ने मंत्री का पुरजोर विरोध किया।
विपक्षी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सांसद नफीसा शाह ने नेशनल एसेंबली में कहा, “मंत्री ने अपने झूठे बयान से पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन (पीआईए) को 50 करोड़ (पाकिस्तानी) रुपये का दैनिक नुकसान पहुंचाया। इसके कारण विभिन्न एयरलाइन ने लगभग 200 पायलटों को हटा दिया है और दुनिया में राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।”
उन्होंने मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा, “दुनिया की विभिन्न विमानन एजेंसियों ने पहले ही हमें पत्र भेज दिए हैं। कल को हमारा हवाई क्षेत्र किसी अन्य देश को सौंपा जा सकता है। यह देशद्रोह है।”
लेकिन, उड्डयन मंत्री ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने पायलटों के लाइसेंस को ‘संदिग्ध’ कहा था, ‘फर्जी’ नहीं।
उन्होंने कहा, “यह अल्पावधि में देश के लिए नुकसानदेह हो सकता है, लेकिन भविष्य के लिए दुनिया को हमें यह बताना महत्वपूर्ण है कि हम अपने सिस्टम में सुधार करने वाले कदम उठा रहे हैं।”
पाकिस्तानी पायलटों के नकली लाइसेंस के मुद्दे ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। वैश्विक स्थलों, एयरलाइंस और वायु सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) की मान्यता को निलंबित कर दिया है।
इस मुद्दे के कारण पाकिस्तान को दुनिया भर में शर्मिदगी उठानी पड़ी और इसे वैश्विक विमानन उद्योग में सबसे बड़ा विमानन घोटाला बताया गया।
उड्डयन मंत्री की टिप्पणी ने यूरोपीय संघ की हवाई सुरक्षा एजेंसी को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में संचालन के लिए पीआईए की मान्यता को छह महीने तक निलंबित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) ने भी विमानन नियामक द्वारा लाइसेंसिंग और सुरक्षा निरीक्षण में गंभीर चूक पर अपनी चिंता साझा की।
अमेरिकी परिवहन विभाग ने भी अमेरिका के लिए पीआईए की चार्टर उड़ानों की अनुमति रद्द कर दी और पाकिस्तान की हवाई सुरक्षा रेटिंग को घटा दिया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में बातचीत के लिए तैयार: राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इराक के प्रधानमंत्री-नामित अली अल-जैदी के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान पेजेशकियान ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह किसी भी दबाव के आगे झुकेगा नहीं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, एक आधिकारिक बयान में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा, “हमारी समस्या यह है कि एक ओर अमेरिका देश पर दबाव की नीति अपना रहा है और दूसरी ओर वह चाहता है कि ईरान बातचीत की मेज पर आए और आखिरकार उसकी एकतरफा मांगों के सामने आत्मसमर्पण कर दे। लेकिन यह असंभव है।”
उन्होंने कहा कि ईरान मूल रूप से युद्ध और असुरक्षा को किसी भी तरह से उचित विकल्प नहीं मानता। इसके साथ ही, पेजेशकियान ने कहा कि ईरान को परमाणु तकनीक से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका ऐसे व्यवहार कर रहा है जैसे ईरान को परमाणु उद्योग रखने का अधिकार ही नहीं है। वह अत्यधिक मांगें सामने रखकर देश पर अतिरिक्त दबाव डालता है।”
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने आगे कहा कि पिछली सभी वार्ताओं में ईरान पूरी तरह तैयार था कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैश्विक निगरानी के तहत जो भी आवश्यक हो, वह सब कुछ उपलब्ध कराए ताकि उसके परमाणु गतिविधियों के शांतिपूर्ण स्वरूप को सुनिश्चित किया जा सके।
दूसरी ओर, अल-जैदी ने इराक की ओर से ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने की तत्परता जताई, ताकि क्षेत्रीय संकटों को कम किया जा सके। अल-जैदी के मीडिया कार्यालय के एक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने भविष्य में आधिकारिक यात्राओं के आदान-प्रदान पर भी सहमति जताई, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया जा सके।
बता दें कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे, जिसमें तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडरों और नागरिकों की मौत हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ, जिसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई, लेकिन वह बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी। फिलहाल, अमेरिका और ईरान लगातार समझौते के तहत युद्धविराम को जारी रखने की कोशिशों में जुटे हैं।
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चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात, हासिल किया परिचय पत्र

चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से अपने परिचय पत्र प्राप्त किए हैं। चीन में भारतीय दूतावास ने इसकी जानकारी दी। मार्च में 1992 बैच के आईएफएस अधिकारी दोराईस्वामी को चीन में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था।
चीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विक्रम दोराईस्वामी को चीन में राजदूत के तौर पर उनके असाइनमेंट के लिए भारत की राष्ट्रपति से क्रेडेंशियल्स मिले।” 1992 बैच के आईएफएस अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के मुताबिक उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर डिग्री ली।
1992-1993 में नई दिल्ली में अपनी इन-सर्विस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, दोराईस्वामी मई 1994 में हांगकांग में भारतीय दूतावास में थर्ड सचिव नियुक्त हुए। उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय के न्यू एशिया येल-इन-एशिया लैंग्वेज स्कूल से चीनी भाषा में डिप्लोमा पूरा किया।
विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी में बताया गया कि विक्रम दोराईस्वामी अभी ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर हैं और उन्हें चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। उम्मीद है कि वह जल्द ही यह काम संभाल लेंगे।
सितंबर 1996 में उन्हें बीजिंग में भारतीय दूतावास में नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने लगभग चार साल तक जिम्मेदारी संभाली। फिर 2000 में नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में लौटने पर दोराईस्वामी ने डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल (ऑफिशियल) नियुक्त की भूमिका निभाई। दो साल बाद उन्हें प्रधानमंत्री के ऑफिस में प्रमोट किया गया। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी सचिव के तौर पर काम किया।
2006 में दोराईस्वामी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में राजनीतिक सलाहकार के तौर पर और अक्टूबर 2009 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में भारत के महावाणिज्य दूत के तौर पर कार्यभार संभाला।
जुलाई 2011 में दोराईस्वामी नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में वापस आ गए, जहां उन्होंने साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (एसएएआरसी) विभाग का नेतृत्व किया। इस दौरान वे मार्च 2012 में नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स समिट के कोऑर्डिनेटर भी थे।
फिर अक्टूबर 2012 से अक्टूबर 2014 तक दोराईस्वामी विदेश मंत्रालय के अमेरिकी विभाग में संयुक्त सचिव थे। अप्रैल 2015 में कोरिया में भारत के राजदूत नियुक्त होने से पहले वे अक्टूबर 2014 में उज्बेकिस्तान में भारत के राजदूत बने।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने से कच्चा तेल चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर

अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने की संभावना के चलते गुरुवार को कच्चे तेल की कीमत चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
भारतीय समयानुसार सुबह 10:22 पर बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम 6.33 प्रतिशत बढ़कर 125.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 3.35 प्रतिशत बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
इससे पहले कच्चे तेल में यह कीमतें 2022 की शुरुआत में रूस-यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के दौरान देखी गई थीं।
कच्चे तेल में तेजी ऐसे समय पर देखी गई है, जब कुछ अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान में संभावित कार्रवाई के विकल्पों के बारे में जानकारी देगी। इससे दोनों देशों में फिर से संघर्ष शुरू होने की संभावना में इजाफा हुआ है।
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक कर रखा है, जिससे ईरान का तेल निर्यात करीब रुक गया है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कहा गया कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करता, तब तक यह नाकेबंदी नहीं हटेगी। ईरान भी पीछे हटने के तैयार नहीं है। हालांकि, वह अमेरिका के शांति के प्रस्ताव दे चुका है, जिसे ट्रंप ने ठुकरा दिया था।
इस हफ्ते की शुरुआत में मध्य पूर्व में तनाव के कारण अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैश ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए कच्चे तेल की औसत कीमतों के अनुमान में फिर एक बार बढ़ोतरी की है।
अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक का कहना है कि इस साल के अक्टूबर से दिसंबर अवधि में ब्रेंट क्रूड की कीमत औसत 90 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम औसत 83 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है।
औसत कीमतों में संशोधन की वजह, मध्य पूर्व में लगातार तनाव बने रहने के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित रहना है। इससे पहले गोल्डमैन सैश ने 2026 की चौथी तिमाही में ब्रेट क्रूड का दाम औसत 80 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम औसत 75 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था।
इन्वेस्टमेंट बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तनाव के चलते मध्य पूर्व से आने वाला लगभग 14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल बाजार से बाहर हो गया है।
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