अंतरराष्ट्रीय समाचार
अफगान सरकार-तालिबान की शांति बैठक दोहा में होगी आयोजित

अफगान सरकार और तालिबान ने घोषणा की है कि दोनों पक्षों के बीच पहली शांति वार्ता कतर की राजधनी दोहा में होगी। जहां आतंकवादी समूह तालिबान का अपना राजनीतिक कार्यालय है और उसने बहुप्रतीक्षित शांति समझौते पर 29 फरवरी को अमेरिका के साथ पर हस्ताक्षर किए थे।
अफगान प्रेसिडेंशिल पैलेस के प्रवक्ता सेदिक सिद्दिकी ने रविवार को ट्वीट कर कहा, ” अफगानिस्तान सरकार दोहा में होने वाली पहली बैठक के लिए सहमत हो गई है, हालांकि सीधी वार्ता के लिए स्थल को लेकर अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है।” उन्होंने समाचार एजेंसी एफे से भी इस बात की पुष्टि की।
बैठक की तारीख का एलान किया जाना अभी बाकी है।
11 जून को अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और मुतलाक बिन माजेद अल-कहतानी की अगुवाई में कतर की एक प्रतिनिधिमंडल के बीच काबुल में हुई बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बनी। कहतानी आतंकवाद के प्रतिवाद और संघर्ष समाधान की मध्यस्थता के लिए कतर के विदेश मंत्री के विशेष दूत हैं।
गनी के एक वरिष्ठ सहयोगी ने एफे को बताया कि वर्तमान समझौता केवल पहली बैठक के लिए है और अफगान शांति प्रयासों में शामिल पक्ष अभी भी बारीकी से इस पर काम कर रहे हैं।
अधिकारी ने कहा कि हम वार्ता स्थल के बारे में जल्द ही जानकारी साझा करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ाने के लिए यूपीआई लिंक का दिया प्रस्ताव

बैंकॉक, 4 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत के यूपीआई को बिम्सटेक देशों के पेमेंट सिस्टम से जोड़ने का प्रस्ताव दिया। इससे ग्रुप के सदस्य देशों के बीच व्यापार और पर्यटन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, सात देशों (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड) के समूह की छठी समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय करेंसी में रीजन में व्यापार बढ़ाने के लिए बिम्सटेक चेम्बर ऑफ कॉमर्स स्थापित करने का प्रस्ताव दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मार्च को म्यांमार और थाईलैंड में आए
बिम्सटेक समिट में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समृद्धि, सुरक्षा और समावेशिता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए बैंकॉक विजन 2030 को अपनाया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक समूह के दायरे और क्षमताओं को लगातार बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, गृह मंत्रियों के तंत्र को संस्थागत बनाने का स्वागत किया और भारत में पहली बैठक आयोजित करने की पेशकश की।
उन्होंने आगे कहा कि यह मंच साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा खतरों, आतंकवाद, साथ ही नशीली दवाओं और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस संबंध में, मैं 2025 में इसकी पहली बैठक भारत में आयोजित करने का प्रस्ताव करता हूं।
थाईलैंड द्वारा आयोजित बिम्सटेक समिट में भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और भूटान के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि एक स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और संरक्षित हिंद महासागर हमारी साझा प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “आज साइन हुए समुद्री परिवहन समझौते से व्यापारिक नौवहन और माल परिवहन में सहयोग मजबूत होगा और व्यापार में तेजी आएगी।”
विनाशकारी भूकंप में हुई जानमाल की हानि पर अपनी संवेदना व्यक्त की और आपदा की तैयारी, राहत और पुनर्वास पर सहयोग के लिए भारत में बिम्सटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में एक सस्टेनेबल मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट सेंटर की स्थापना की भी बात की। उन्होंने कहा, “यह केंद्र समुद्री नीतियों में क्षमता निर्माण, अनुसंधान, नवाचार और समन्वय पर ध्यान केंद्रित करेगा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को भी बढ़ावा देगा।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के वरिष्ठ जनरल से की बात, कहा- मुश्किल वक्त में भारत साथ खड़ा है

नई दिल्ली, 29 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है।
एक्स पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा, “म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की। विनाशकारी भूकंप में हुई मौतों पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। एक करीबी दोस्त और पड़ोसी के रूप में, भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज और बचाव दल को प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजा जा रहा है।”
म्यांमार और पड़ोसी थाईलैंड में शुक्रवार को उच्च तीव्रता वाला भूकंप आया, जिससे इमारतें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए। म्यांमार में कम से कम 1,002 लोगों की मौत हुई।
भारत ने शनिवार को म्यांमार को 15 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा कि ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के हिस्से के रूप में, भारत ने शुक्रवार के भीषण भूकंप से प्रभावित म्यांमार के लोगों की सहायता के लिए पहले प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में काम किया। टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, भोजन के पैकेट, स्वच्छता किट, जनरेटर और जरूरी दवाओं सहित 15 टन राहत सामग्री की हमारी पहली खेप यांगून पहुंच गई है।”
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विनाशकारी भूकंप पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप के बाद की स्थिति से चिंतित हूं। सभी की सुरक्षा और खुशहाली के लिए प्रार्थना करता हूं। भारत हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। इस संबंध में, हमने अपने अधिकारियों से तैयार रहने को कहा है। साथ ही विदेश मंत्रालय से म्यांमार और थाईलैंड की सरकारों के साथ संपर्क में रहने को कहा है।”
म्यांमार में शुक्रवार दोपहर को 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, सागाइंग के पास आए इस भूकंप के बाद 2.8 से 7.5 तीव्रता के 12 झटके महसूस किए गए, जिससे प्रभावित इलाकों में हालात और खराब हो गए। म्यांमार के राज्य प्रशासन परिषद की सूचना टीम ने जानकारी दी है कि भूकंप में 1,002 लोग मारे गए, 2,376 लोग घायल हुए और 30 लोग अब भी लापता हैं।
म्यांमार के नेता वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समुदायों से मानवीय सहायता की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
दक्षिण कोरिया विनाशकारी भूकंप के लिए म्यांमार को 2 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देगा

सियोल, 29 मार्च। दक्षिण कोरिया ने विनाशकारी भूकंप से प्रभावित देश के लोगों की सहायता के लिए म्यांमार को 2 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने की योजना बनाई है, सियोल के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा।
मंत्रालय ने कहा, “हमने म्यांमार में भूकंप से हुए नुकसान के खिलाफ त्वरित प्रतिक्रिया में मदद करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के माध्यम से 2 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता प्रदान करने का फैसला किया है।”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की स्थिति के आधार पर अतिरिक्त सहायता की समीक्षा करेगा।
म्यांमार की राज्य प्रशासन परिषद की सूचना टीम के अनुसार, म्यांमार में आए भूकंप में कम से कम 1,002 लोग मारे गए, 2,376 घायल हुए और 30 लोग लापता हैं।
शुक्रवार दोपहर को देश में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद परिवहन और संचार नेटवर्क में गंभीर व्यवधान के बावजूद म्यांमार में बचाव कार्य तेज हो गए हैं।
सागाइंग के निकट आए भूकंप के कारण 2.8 से लेकर 7.5 तीव्रता के 12 झटके महसूस किए गए, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति और खराब हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तबाही बहुत व्यापक रही है, जिसमें मांडले, बागो, मैगवे, उत्तरपूर्वी शान राज्य, सागाइंग और ने पी तॉ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से हैं।
म्यांमार सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है, क्योंकि आपातकालीन प्रतिक्रिया दल जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। एक महत्वपूर्ण परिवहन लिंक, यांगून-मांडले राजमार्ग को ने पी तॉ और मांडले के निकट गंभीर क्षति पहुंची, जिससे राहत अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया।
भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने और बचाव प्रयासों में मदद करने के लिए लोगों ने पुराने यांगून-मांडले मार्ग का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इसके अतिरिक्त, मांडले हवाई अड्डे और राजमार्ग के कुछ हिस्सों में इमारतों के ढहने से म्यांमार के दो सबसे बड़े शहरों, यांगून और मांडले के बीच यात्रा और भी बाधित हो गई है। निचले म्यांमार से अग्निशमन सेवा कर्मियों सहित बचाव दल ने पी तॉ और मांडले जैसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच गए हैं। हालांकि, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे, बिजली की कटौती और फोन और इंटरनेट सेवाओं में व्यवधान ने राहत प्रयासों को जटिल बना दिया है।
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