राष्ट्रीय समाचार
नागपुर में म्हाडा निर्माण स्थल पर क्रेन गिरने से 2 मजदूरों की मौत और 2 घायल
महाराष्ट्र के नागपुर में शुक्रवार को दर्दनाक हादसा हो गया। गणेशपेठ इलाके में महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) परिसर में एक टेक्सटाइल पार्क और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के निर्माण स्थल पर क्रेन गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई है। वहीं, दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, म्हाडा साइट पर टेक्सटाइल पार्क और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए दो क्रेनें काम कर रही थीं। इनमें से एक क्रेन का ऊपरी हिस्सा टूटकर लगभग 100 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गया और पास ही मौजूद दूसरी क्रेन से जा टकराया। क्रेन का टूटा हुआ हिस्सा दूसरी क्रेन से महज 30 फीट दूर स्थित मुख्य सड़क पर नहीं गिरा, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा टल गया।
शुरुआत में खबर आई थी कि इस हादसे में चार लोग घायल हुए हैं। बाद में पुष्टि हुई कि उनमें से दो लोगों की मौत हो चुकी है। म्हाडा इलाके में टेक्सटाइल पार्क और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के निर्माण का ठेका ‘बी.जी. शिर्के कंस्ट्रक्शन कंपनी’ को दिया गया है।
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) जोन 2 राहुल मदने ने बताया कि म्हाडा इलाके में ‘विजय शिर्के’ की कंपनी निर्माण कार्य कर रही है। शुक्रवार सुबह 10.30 बजे क्रेन ऑपरेटर के साथ 3 मजदूर काम कर रहे थे, तभी क्रेन असंतुलित होकर गिर गई। इस हादसे में क्रेन ऑपरेटर और एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। दो घायल मजदूरों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। क्रेन क्यों गिरी, यह पता लगाने के लिए संबंधित मैकेनिकल विभाग के अधिकारियों से सलाह ली जाएगी।
डीसीपी ने कहा, “मृतकों की पहचान भंडारा निवासी विश्वनाथ कटारे और उत्तर प्रदेश निवासी मुकेश निषाद के रूप में हुई है। घटना के समय दोनों मृतक स्ट्रक्चर के ऊपर मौजूद थे। हादसे में घायल दोनों मजदूर झारखंड के रहने वाले हैं। फिलहाल कंपनी के सुपरवाइजर स्टाफ से जानकारी जुटा रहे हैं और उचित कार्रवाई शुरू कर रहे हैं। काम रोकने का फैसला कंपनी को लेना है। हमने आकस्मिक मौत (एक्सीडेंटल डेथ) का मामला दर्ज कर लिया है।”
राजनीति
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को दी 5 सवालों की चुनौती, पूछा- जब ज्ञानेश सीईसी नहीं थे, तो कांग्रेस को कैसे मिली हार

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चुनाव आयोग और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कांग्रेस को 5 सवालों के जवाब देने की चुनौती दी है।
किरेन रिजिजू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “मैं कांग्रेस पार्टी को इन बुनियादी सवालों का जवाब देने की चुनौती देता हूं।”
पहला सवाल, जब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कांग्रेस की सरकार ने की थी, तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 44 सांसद कैसे मिले?
दूसरा सवाल जब, 2024 में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तो कांग्रेस को लगातार तीसरी बार हार का सामना कैसे करना पड़ा?
तीसरा सवाल, क्या मौजूदा कांग्रेस के मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे और 2014 से 2026 के दौरान सरकारें बनाने के लिए माफी मांगेंगे?
चौथा सवाल, क्या वोटर लिस्ट से अवैध अप्रवासी, मृत, शिफ्ट हो चुके या डुप्लीकेट नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं?
पांचवा सवाल, क्या 1952-56, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993, 1995 और 2002-2004 में किए गए एसआईआर अवैध थे?
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में आगे लिखा कि एक परिवार की पार्टी बाहरी ताकतों के साथ मिलकर संविधान और भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग की स्वायत्तता से समझौता किया है और ‘वोट चोरी’ किया है।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया का इस्तेमाल वोटर के नाम मनमाने तरीके से हटाने और सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में वोटरों को एक बूथ से दूसरे बूथ पर शिफ्ट करने के लिए किया गया है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के प्रभाव में काम कर रहे हैं, जिससे चुनावी संस्था की संवैधानिक स्वतंत्रता कमजोर हो रही है।
विपक्षी नेताओं का यह भी आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने आयोग के अंदर अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी या सहमति के बिना महत्वपूर्ण फैसले लिए और सुप्रीम कोर्ट में झूठे बयान दिए गए।
इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीन मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर को रद्द करना और ईवीएम की जगह पूरी तरह से पेपर बैलेट से वोटिंग कराना शामिल हैं।
राजनीति
पीएम मोदी ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार पटेल को अर्पित की पुष्पांजलि, 400 करोड़ रुपए से अधिक की योजनाओं का शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर गुजरात के केवड़िया स्थित विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। शनिवार को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती मनाई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे के दूसरे दिन शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर केवड़िया पहुंचे। यहां उन्होंने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार पटेल को पुष्प अर्पित किए।
इसके बाद, प्रधानमंत्री ने एकता नगर में 400 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया। इनमें सीवेज व जल उपचार संयंत्र, नर्मदा घाट का उन्नयन, आईआरसीटीसी होटल, वर्षावन और इको-ट्रेल सहित पर्यटन व बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
उन्होंने एकता नगर में ‘रेन फॉरेस्ट’ परियोजना का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर पीएम मोदी अधिकारियों के साथ परियोजना का निरीक्षण कर इसकी प्रमुख विशेषताओं का जायजा लिया।
इससे पहले, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए सरकार पटेल को याद किया। उन्होंने लिखा, “अखंड भारत के प्रणेता देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने एक सशक्त, समृद्ध और समर्थ भारत के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मां भारती की सेवा में उनका त्याग और समर्पण विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए बहुत बड़ा प्रेरणास्रोत है।”
एक अन्य पोस्ट के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें केवड़िया में आयोजित सांस्कृतिक विरासत, विविधता और राष्ट्रीय एकता पर आधारित ‘भारत पर्व’ की झलकियां दिखाई गईं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “अद्भुत भारत की विविध परंपराएं और संस्कृतियां। केवड़िया में ‘भारत पर्व’, जिसका उद्घाटन कल हुआ, हमारी एकता और जीवंतता का जश्न मनाता है।”
राष्ट्रीय समाचार
रक्षा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर व वायरलेस संचार तकनीक को बढ़ावा दे रहा डीआरडीओ

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारत को सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। इस दौरान रडार, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक संचार उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली कई स्वदेशी तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। यह आयोजन नई दिल्ली में किया गया। यहां विषय पर विशेष सत्र का नेतृत्व डीआरडीओ ने किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर को इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इसमें 12 मंत्रालयों और विभागों की भागीदारी रही। सत्र में उद्योग, शिक्षण संस्थानों और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसमें एआई आधारित चिप, नई माइक्रोप्रोसेसर तकनीक और स्वदेशी चिप विकास पर चर्चा हुई। 29 अक्टूबर तक चले इस कार्यक्रम में डीआरडीओ ने दो महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर तकनीकों का प्रदर्शन किया। इनमें मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट (एमएमआईसी) और इन्फ्रारेड फोकल प्लेन एरे (आईआरएफपीए) शामिल हैं। इन्हें दिल्ली स्थित सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी ने विकसित किया है।
गैलियम आर्सेनाइड और गैलियम नाइट्राइड आधारित एमएमआईसी का इस्तेमाल आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में होता है। वहीं, आईआरएफपीए तकनीक को मिसाइलों की आंख भी कहा जा सकता है। यह लक्ष्य से निकलने वाली गर्मी को पहचानकर उसकी तस्वीर तैयार करती है। इससे मिसाइल को उड़ान के अंतिम चरण में लक्ष्य की पहचान और उसका पीछा करने में मदद मिलती है। इसके शॉर्ट वेव, मिड वेव और लॉन्ग वेव संस्करण भी प्रदर्शित किए गए।
डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन, न्यूरोमॉर्फिक एक्सेलरेटर, उन्नत संचार प्रणाली, क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर, फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट और लेजर निकटता सेंसर भी दिखाए। सैनिकों के लिए विशेष ठंड-रोधी कपड़े, ‘प्रबला’ महिला फुल बॉडी प्रोटेक्टर और निष्क्रिय एवं बिजली से चलने वाले एक्सोस्केलेटन भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहे। वहीं डीआरडीओ ने सैन्य उपयोग के लिए वायरलेस संचार तकनीक पर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘विकॉम-26’ आयोजित किया है।
30 और 31 अक्टूबर के इस दो दिवसीय सम्मेलन में भारत और अमेरिका के विशेषज्ञों के साथ कुल 103 शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसमें सैन्य संचार, रेडियो तकनीक, एंटीना और संकेत प्रसंस्करण जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। साथ ही भारतीय कंपनियों ने संचार प्रणालियों, परीक्षण उपकरणों और सॉफ्टवेयर से जुड़ी स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन भी किया है।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में संचार प्रणाली केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि सैनिकों की स्थिति की जानकारी, सैन्य टुकड़ियों के बीच तालमेल और तेजी से फैसले लेने के लिए भी जरूरी है।
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