राजनीति
चक्रवात ‘अर्नब’ से तबाही पर खड़गे और प्रियंका गांधी ने जताई चिंता, कार्यकर्ताओं से मदद की अपील
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब से हुई तबाही और ओडिशा में भारी बारिश और बाढ़ से बने हालात पर चिंता जताई। दोनों नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करने की अपील की।
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दोनों राज्यों में चक्रवात और खराब मौसम से प्रभावित लोगों के प्रति एकजुटता जताई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से राहत और बचाव कार्यों में सहयोग करने को कहा।
उन्होंने लिखा, “मेरी संवेदनाएं आंध्र प्रदेश में चक्रवात ‘अर्नब’ से तबाही झेल रहे लोगों और ओडिशा में भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों के साथ हैं। मैं सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हूं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आग्रह करती हूं कि वे प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करें और राहत तथा बचाव प्रयासों में सहयोग दें।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी आंध्र प्रदेश में जान-माल के नुकसान और ओडिशा में चक्रवात से जनजीवन में आए व्यवधान पर दुख जताया। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य सरकारों के साथ मिलकर राहत और पुनर्वास के उपाय करने और प्रभावित परिवारों को मदद सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण आंध्र प्रदेश में लोगों की जान जाने और ओडिशा में जनजीवन में बड़े पैमाने पर व्यवधान से बहुत दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिलकर राहत और पुनर्वास के समन्वित प्रयास करने चाहिए और पीएम केयर्स फंड के जरिए सभी प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए। मैं कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आग्रह करता हूं कि वे मुसीबत में फंसे लोगों की हर संभव मदद करें।”
इस बीच, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को बताया कि चक्रवात ‘अर्नब’ ने राज्य में सात लोगों की जान ले ली है और इससे करीब 4,600 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।
चक्रवात प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का प्रारंभिक अनुमान 4,600 करोड़ रुपए है, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद यह आंकड़ा बढ़ सकता है।
सीएम नायडू ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चक्रवात से हुए नुकसान के बारे में बात की है, उन्हें मौजूदा स्थिति और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी है और केंद्र को नुकसान पर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है।
वहीं, ओडिशा सरकार ने भी चक्रवात के कारण असाधारण रूप से भारी बारिश से आई बाढ़ के बाद गंजम और गजपति जिलों में बचाव और राहत अभियान तेज कर दिया है।
राष्ट्रीय समाचार
केशव का अखिलेश पर निशाना, बोले- यूपी की जनता 2027 में सपा की साइकिल पंचर कर सैफई भेज देगी

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले अखिलेश यादव को 2012 से 2017 तक के सपा शासनकाल की गुंडागर्दी, अपराध, माफियागिरी और दंगों की समीक्षा करनी चाहिए।
केशव प्रसाद मौर्य ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार यूपी में अंगद के पांव की तरह मजबूती से टिकी है। अगले 30 साल तक सपा सत्ता में नहीं आएगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव और उनके मित्र राहुल गांधी सत्ता वापसी का सपना देख रहे हैं, लेकिन न राहुल गांधी देश में सत्ता में आने वाले हैं और न ही अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में आएंगे।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी रामद्रोहियों की पार्टी है। 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता सपा को उसकी हैसियत दिखा देगी और उसकी साइकिल पंचर करके सैफई भेज देगी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव सांसद हैं, लेकिन उन्हें यह तक नहीं पता कि देश में नागरिकता का सर्टिफिकेट चुनाव आयोग नहीं बल्कि गृह मंत्रालय देता है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि एसआईआर को लेकर सपा प्रमुख इसलिए बौखलाए हुए हैं, क्योंकि अब उनके गुंडे वोटर लिस्ट में गड़बड़ी नहीं कर पाएंगे। एक-एक घुसपैठियों का नाम मतदाता सूची से बाहर निकाला जा रहा है, इसीलिए विपक्ष बिलबिला रहा है।
राजनीति
आंध्र प्रदेश स्कूल में छात्रा पर चेनसॉ से हमले को लेकर जगन मोहन रेड्डी ने सरकार पर साधा निशाना

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के राप्ताडु स्थित जिला परिषद हाई स्कूल में दसवीं कक्षा की छात्रा पर चेनसॉ से हुए हमले को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्य की टीडीपी गठबंधन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने घटना को राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति के पूरी तरह चरमराने का उदाहरण बताते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
जगन मोहन रेड्डी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राप्ताडु जिला परिषद हाई स्कूल की कक्षा में घुसकर एक छात्रा पर चेनसॉ से किया गया बर्बर हमला टीडीपी गठबंधन सरकार के ‘जंगल राज’ को उजागर करता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कोई हमलावर सरकारी स्कूल में इतनी आसानी से कैसे घुस सकता है और एक मासूम छात्रा पर बेरहमी से हमला कर सकता है? यह घटना शैक्षणिक संस्थानों के भीतर भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार की लापरवाही को दर्शाती है। उन्होंने हमले के दौरान छात्रा को बचाने की कोशिश में घायल हुई दूसरी छात्रा का भी जिक्र किया।
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि जब शासन की प्राथमिकता राजनीतिक प्रतिशोध और ‘रेड बुक’ के जरिए शासन करने पर केंद्रित हो जाती है, तो अपराधियों में कानून का डर खत्म हो जाता है। उन्होंने मांग की कि घायल छात्राओं को तत्काल सर्वोत्तम आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उनके परिवारों को भरोसे में लिया जाए। साथ ही, हमलावर को तुरंत गिरफ्तार कर पारदर्शी जांच के जरिए न्याय के दायरे में लाने की मांग की।
जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के सभी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा करने और इस घटना के लिए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू तथा नारा लोकेश की जवाबदेही तय करने की भी मांग की।
गौरतलब है कि शनिवार को राप्ताडु स्थित जिला परिषद हाई स्कूल में एक व्यक्ति ने दसवीं कक्षा की छात्रा पर चेनसॉ से हमला कर दिया था। हमले में छात्रा के चेहरे, सिर और गले पर गंभीर चोटें आईं। उसकी गर्दन और पेट पर गहरे घाव हुए, जबकि उसका दाहिना हाथ लगभग कट गया था। हमले के दौरान उसे बचाने की कोशिश करने वाली एक अन्य छात्रा भी गंभीर रूप से घायल हो गई।
घटना के बाद मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों से बात कर घायल छात्राओं के इलाज की जानकारी ली और चिकित्सा टीम को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने पुलिस को हमलावर की तलाश कर जल्द गिरफ्तार करने और उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का आदेश भी दिया।
मुख्यमंत्री ने घायल छात्रा की मां से फोन पर बात कर उन्हें हरसंभव सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया। वहीं, पुलिस मामले की जांच कर रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरोपी का घायल छात्रा से पहले से कोई परिचय था या नहीं।
राष्ट्रीय समाचार
कैसे एक ही तारीख बनी ऐतिहासिक? 1 नवंबर को 8 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस

यह दुर्लभ संयोग है कि भारत के 8 राज्य और 5 केंद्र शासित प्रदेश एक ही दिन एक नवंबर को अपना स्थापना दिवस मनाते हैं। सभी राज्यों के गठन का वर्ष भले अलग था लेकिन सभी के लिए एक नवंबर की तारीख ऐतिहासिक रूप में दर्ज है।
1 नवंबर को गठित 8 राज्यों में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, पंजाब और मद्रास (अब तमिलनाडु) शामिल हैं। इसके अलावा, 5 केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दिल्ली, लक्षद्वीप और पुडुचेरी शामिल हैं।
मध्य प्रदेश: भारत के मध्य में स्थित मध्य प्रदेश का पुनर्गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था। राज्य इस तिथि को ‘मध्य प्रदेश स्थापना दिवस’ के रूप में मनाता है, जिसमें रंग-बिरंगी परेड, पारंपरिक प्रस्तुतियां और स्थानीय उपलब्धियां हासिल करने वालों को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार समारोह आयोजित किए जाते हैं।
छत्तीसगढ़: यह भारत में बनने वाला 26वां राज्य था, जो 1 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आया। छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है। हालांकि, पारंपरिक रूप से यह शब्द कृष्णा और गोदावरी नदियों के बनाए डेल्टा क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लगभग 1,35,192 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह भारत का नवां सबसे बड़ा राज्य है और यहां की जनसंख्या लगभग 2.55 करोड़ है।
हरियाणा: भाषाई आधार पर पंजाब से अलग करके 1 नवंबर 1966 को इस राज्य का गठन किया गया था। अपने समृद्ध इतिहास और कृषि व खेल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पहचाना जाने वाला हरियाणा, अपनी विशिष्ट पहचान का जश्न मनाने के लिए इस दिन सार्वजनिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित करता है।
पंजाब: 1966 में इसी दिन पंजाबी भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य बनाने के उद्देश्य से पंजाब का पुनर्गठन किया गया था। अपनी जीवंत संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध पंजाब इस दिन को अपनी विरासत और उपलब्धियों को उजागर करने वाले उत्सवों के साथ मनाता है।
आंध्र प्रदेश: यह भाषा के आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य था। आंध्र प्रदेश 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आया, जब ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम’ के तहत हैदराबाद राज्य को विभाजित किया गया था।
कर्नाटक: अपनी जीवंत संस्कृति और टेक्नोलॉजी हब के रूप में मशहूर कर्नाटक पहले मैसूर के नाम से जाना जाता था। यह राज्य 1 नवंबर 1956 को ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम’ के तहत कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को मिलाकर पुनर्गठित किया गया था।
केरल: दक्षिण भारत के इस राज्य का गठन भी 1 नवंबर 1956 को मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर क्षेत्रों को मिलाकर किया गया था। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और साक्षरता के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए पहचाना जाने वाला केरल, अपने गठन का जश्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए मनाता है।
तमिलनाडु: 1 नवंबर 1956 को ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम’ के अंतर्गत तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी का भाषाई आधार पर विभाजन किया गया था। हालांकि, 1969 में मद्रास का नाम बदलकर तमिलनाडु रखा गया।
दिल्ली: 1 नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम के तहत दिल्ली को ‘पार्ट-सी’ राज्य से बदलकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।
चंडीगढ़: इस शहर की आधारशिला 1952 में रखी गई थी लेकिन एक नवंबर 1966 को राज्य के पुनर्गठन के समय, जब पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश बने, तो इस शहर को पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी होने का अनूठा गौरव प्राप्त हुआ। साथ ही, इसे एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और यह केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में आ गया।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत इसी दिन अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को भी ‘पार्ट-सी’ राज्य से बदलकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।
लक्षद्वीप: 1 नवंबर 1956 को लक्षद्वीप को भारत के एक अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में गठित किया गया था, और 1 नवंबर 1973 को इस द्वीप समूह का आधिकारिक नाम बदलकर लक्षद्वीप रख दिया गया।
पुडुचेरी: 1947 में अंग्रेज हमेशा के लिए भारत छोड़कर चले गए लेकिन फ्रांसीसियों का शासन 1954 तक बना रहा। 1 नवंबर 1954 को भारत में फ्रांसीसी कब्जे वाले क्षेत्रों को व्यावहारिक रूप से भारतीय संघ को सौंप दिया गया था, जिसके बाद यह एक केंद्र शासित प्रदेश बना। इसके साथ ही, भारत से 280 वर्षों के फ्रांसीसी शासन का अंत हुआ था।
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