Connect with us
Thursday,29-October-2026
ताज़ा खबर

व्यापार

गोल्ड ईटीएफ एयूएम बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपए के पार, शीर्ष 5 फंड्स के पास 80 प्रतिशत मार्केट शेयर

Published

on

भारत की गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) इंडस्ट्री की सभी 26 स्कीम की एसेट्स बढ़कर 30 सितंबर, 2026 तक 1.86 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचट गई है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

आईसीआरए एनालिटिक्स द्वारा जुटाए गए आंकड़े के अनुसार, शीर्ष पांच गोल्ड ईटीएफ स्कीमों का हिस्सा गोल्ड ईटीएफ इंडस्ट्री की कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) का 80.2 प्रतिशत है। ये फंड मिलकर लगभग 1.49 लाख करोड़ रुपए का प्रबंधन करते हैं।

निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईईएस 56,982 करोड़ रुपए के एयूएम के साथ इस सेगमेंट की सबसे बड़ी स्कीम है, जो इस कैटेगरी के कुल एयूएम का 30.6 प्रतिशत है।

इसके बाद आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ का एयूएम 27,615 करोड़ रुपए, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ का 26,466 करोड़ रुपए, एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ का 23,900 करोड़ रुपए और कोटक गोल्ड ईटीएफ का 14,473 करोड़ रुपए है।

इस कैटेगरी में एसेट्स का कंसंट्रेशन काफी ज्यादा है। टॉप तीन स्कीमों के पास कुल एयूएम का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि टॉप दो स्कीमों के पास इंडस्ट्री के कुल एसेट्स का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा है।

अगली पांच सबसे बड़ी स्कीमों में टाटा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, एक्सिस गोल्ड ईटीएफ, यूटीआई गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, मिरे एसेट गोल्ड ईटीएफ और आदित्य बिड़ला सन लाइफ गोल्ड ईटीएफ शामिल हैं।

टॉप पांच फंडों के साथ मिलाकर, इन स्कीमों के पास इस कैटेगरी के कुल एयूएम का 92.4 प्रतिशत हिस्सा है।

रिपोर्ट पर आईसीआरए एनालिटिक्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मार्केट डेटा हेड अश्विनी कुमार ने कहा कि हालांकि भारत का गोल्ड ईटीएफ मार्केट काफी बड़ा हो गया है, लेकिन एसेट्स अभी भी कुछ बड़ी स्कीमों में ही केंद्रित हैं।

कुमार ने कहा, “भारत का गोल्ड ईटीएफ मार्केट काफी बढ़ा है, लेकिन एसेट्स का कंसंट्रेशन बना हुआ है। पांच सबसे बड़ी स्कीमों के पास इस कैटेगरी के कुल एयूएम का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा है। हालांकि नई स्कीमों के पास एसेट्स का हिस्सा काफी कम है, लेकिन उनके आगे बढ़ने की क्षमता यह बताएगी कि भविष्य में कॉम्पिटिशन कैसे बदलता है। अलग-अलग स्कीमों के रिटर्न में काफी समानता है, जिससे पता चलता है कि केवल परफॉरमेंस के अंतर से ही इस कंसंट्रेशन को नहीं समझाया जा सकता।”

हालांकि नई स्कीमों ने कुछ हद तक अपनी जगह बनाई है, लेकिन मार्केट में उनका हिस्सा अभी भी काफी कम है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि तीन साल से कम के रिटर्न इतिहास वाली 13 स्कीमों के पास कुल 14,575 करोड़ रुपए हैं, जो इस कैटेगरी के कुल एयूएम का लगभग 8 प्रतिशत है।

राष्ट्रीय समाचार

ईएसआईसी ने 31 दिसंबर तक बढ़ाई एमनेस्टी स्कीम की अवधि, कोर्ट के बाहर सुलझ सकेंगे विवाद

Published

on

भारत सरकार ने गुरुवार को कहा कि उसने नई एमनेस्टी स्कीम 2025 की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है, ताकि नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों को लंबित मामले सुलझाने के लिए ज्यादा समय मिल सके।

विभिन्न हितधारकों के सुझावों की समीक्षा के बाद कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने इसकी समय सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। पहले यह योजना 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक थी, अब इसे मौजूदा नियमों और शर्तों पर तीन महीने और बढ़ाकर 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है।

नई एमनेस्टी स्कीम एक वन-टाइम विवाद समाधान पहल है, जिसका मकसद कोर्ट में लंबित मामलों के बैकलॉग को कम करना और पुराने ईएसआई एक्ट के तहत अनुपालन को बढ़ावा देना है।

यह योजना नियोक्ताओं को ईएसआईसी के साथ कानूनी विवादों को कोर्ट के बाहर सुलझाने के लिए एक व्यवस्थित तरीका देती है। ‘नई एमनेस्टी स्कीम, 2025’ विवाद समाधान का एक व्यावहारिक और नियोक्ता-अनुकूल रास्ता है और यह कारोबार करने में आसानी बढ़ाने के साथ-साथ ईएसआईसी से जुड़े नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के सरकार के बड़े लक्ष्य का भी समर्थन करती है।

इस स्कीम के तहत तदर्थ आकलन का निपटान वास्तविक अंशदान और ब्याज का भुगतान करके किया जा सकता है, इस पर कोई हर्जाना नहीं लगाया जाएगा। जिन मामलों में नियोक्ताओं ने पहले ही बकाया राशि का भुगतान कर दिया है, उनमें विवादित हर्जाने का 10 प्रतिशत भुगतान करने पर केस वापस ले लिए जाएंगे। साथ ही ईएसआईसी द्वारा रिकॉर्ड जमा न करने या देर से भुगतान के लिए दायर किए गए मामले, जिनका बाद में अनुपालन कर दिया गया था, वे भी कोर्ट की अनुमति से वापस ले लिए जाएंगे।

आधिकारिक बयान के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक दायर किए गए कोर्ट केस इस योजना के तहत पात्र हैं। इस स्कीम की अवधि बढ़ने से पात्र नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों को इसका लाभ उठाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

श्रम मंत्रालय ने कहा, “सभी संबंधित हितधारकों को सलाह दी जाती है कि वे 31 दिसंबर 2026 को बंद होने से पहले बढ़ाई गई इस अवधि का लाभ उठाएं।”

इस बीच केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने हाल ही में कहा था कि भारत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के जरिए 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रहा है।

Continue Reading

व्यापार

म्यूचुअल फंड्स में एक नवंबर से डिफॉल्ट होगा डायरेक्ट प्लान, निवेशकों को मिलेगा ज्यादा रिटर्न

Published

on

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर म्यूचुअल फंड स्कीमों में एक नवंबर से डायेक्ट प्लान डिफॉल्ट होंगे। यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की ओर से दी गई।

साथ ही, कहा कि एएमसी को उन ग्राहकों को अधिक एक्सपेंस रेश्यो की जानकारी देनी होगी, जो कि रेगुलर प्लान का विकल्प चुनते हैं।

इसके जरिए सेबी की कोशिश म्यूचुअल निवेशकों का रिटर्न बढ़ाना है। आमतौर पर डारेक्टर प्लान में रेगुलर की अपेक्षा एक्सपेंस रेश्यो कम होता है और निवेशकों अधिक रिटर्न मिलता है।

देश की आर्थिक राजधानी में एनडीटीवी प्रॉफिट इग्नाइट: दीपावली संस्करण में पांडे ने कहा कि नियामक मेनबोर्ड इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) और फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) के ढांचे की फिर से समीक्षा करेगा। साथ ही, वह एसएमई आईपीओ ढांचे और ‘इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म’ की भी समीक्षा कर रहा है – खासकर नई पीढ़ी की कंपनियों के लिए – ताकि विकासशील व्यवसायों को सार्वजनिक पूंजी तक बेहतर पहुंच मिल सके।

पांडे ने कहा, “सार्वजनिक पूंजी अपने साथ सार्वजनिक जिम्मेदारी भी लाती है।”

उन्होंने आगे बताया कि सेबी ने इस बात की सख्त निगरानी का प्रस्ताव रखा है कि इश्यू से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कैसे होता है, और वह डिबेंचर ट्रस्टियों के लिए बने ढांचे की भी समीक्षा कर रहा है।

पांडे ने बताया कि नियामक एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहा है, जिसके तहत थर्ड-पार्टी निगरानी एजेंसियां ​​यह जांच करेंगी कि इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल उन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है या नहीं, जिनका जिक्र ऑफर दस्तावेजों में किया गया था।

उनकी यह टिप्पणी तब आई है, जब सेबी ने इस महीने की शुरुआत में आईपीओ से जुटाई गई रकम की निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इस प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि ‘ऑफर-फॉर-सेल’ (ओएफएस) को छोड़कर, सभी पब्लिक इश्यू के लिए निगरानी एजेंसी रखना अनिवार्य कर दिया जाए, चाहे इश्यू का आकार कुछ भी हो।

अगर कोई कंपनी किसी निगरानी एजेंसी के साथ सहयोग नहीं करती है, तो स्टॉक एक्सचेंज उसे हर मामले के लिए 50,000 रुपए का जुर्माना लगा सकेंगे। अगर कंपनी लगातार नियमों का पालन नहीं करती है, तो डिपॉजिटरी प्रमोटरों के डीमैट अकाउंट को फ्रीज कर सकती हैं।

जिन कंपनियों पर सहयोग न करने की रिपोर्ट दर्ज होती है, वे तब तक एजेंसी के साथ अपना करार खत्म नहीं कर सकतीं या किसी दूसरी एजेंसी को नियुक्त नहीं कर सकतीं, जब तक कि वे अपनी गलती को ठीक न कर लें। ये प्रस्ताव अभी कंसल्टेशन फेस में हैं और इन्हें अभी तक नियमों के रूप में लागू नहीं किया गया है।

फिलहाल, अगर आईपीओ में ‘फ्रेश इश्यू’ का आकार 100 करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उससे जुटाई गई रकम की निगरानी सेबी में रजिस्टर्ड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए।

Continue Reading

व्यापार

ग्रीन हाइड्रोजन में भारत बना दुनिया का अग्रणी देश, 9.5 अरब डॉलर के समझौते हुए: प्रल्हाद जोशी

Published

on

भारत की कंपनियों द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए किए गए कुल ऑफटेक एग्रीमेंट अक्टूबर 2026 तक बढ़कर 5,55,610 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से अधिक के हो गए हैं। इसके साथ ही भारत ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति संबंधी प्रतिबद्धताओं में दुनिया का अग्रणी देश बन गया है। यह जानकारी सरकार की ओर से गुरुवार को दी गई।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, “भारतीय कंपनियों ने ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए 23 प्रमुख अनुबंध हासिल किए हैं, जिनके तहत 5.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक की आपूर्ति प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। इनमें 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वैश्विक निर्यात के लिए निर्धारित है। इस उपलब्धि से स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 90,000 करोड़ रुपए का निवेश बढ़ा है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत को वैश्विक स्तर पर नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य में अग्रणी बनने और हरित रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।”

वर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों ने 4 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक ग्रीन हाइड्रोजन के समतुल्य मात्रा की आपूर्ति के लिए 18 नए ऑफटेक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “भारतीय आपूर्तिकर्ता दुनिया में ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल की सबसे प्रतिस्पर्धी कीमतों की पेशकश कर रहे हैं, जिससे यूरोपीय और जापानी बाजारों में भारत की अग्रणी स्थिति मजबूत हो रही है। ग्रीन अमोनिया वैश्विक जहाजरानी क्षेत्र में स्वच्छ बंकरिंग ईंधन के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए ताप विद्युत संयंत्रों में भी अमोनिया को अन्य ईंधनों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है।”

दुनियाभर में उर्वरक उत्पादन और रिफाइनिंग क्षेत्र में भी ग्रीन हाइड्रोजन से बने उत्पादों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।

भारतीय कंपनियों ने दुनिया के प्रमुख बाजारों में महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियां की हैं और ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए बाध्यकारी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

प्रमुख अनुबंधों में भारत के एसीएमई ग्रुप का समझौता शामिल है। कंपनी ने जापान की आईएचआई के साथ 4,88,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए अनुबंध किया है। ग्रुप ने जापान की मित्सुबिशी गैस केमिकल (एमजीसी) को 1,00,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति के लिए भी समझौता किया है।

एलएंडटी और इटोचू ने 3,00,000 टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए एक विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) बनाई है। इसकी आपूर्ति दिसंबर 2029 से शुरू होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने दक्षिण कोरिया की सैमसंग सीएंडटी कॉरपोरेशन के साथ 3 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का दीर्घकालिक आपूर्ति एवं खरीद समझौता किया है। यह वैश्विक स्तर पर ग्रीन अमोनिया के सबसे बड़े ऑफटेक अनुबंधों में से एक है। इस समझौते के तहत आपूर्ति 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है।

अगस्त्य श्रीलंका की एसएआर को 2,50,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति के लिए ऑफटेक समझौते की प्रक्रिया में है।

अन्य कंपनियों में एएम ग्रीन शामिल है, जिसने तीन समझौते किए हैं। कंपनी को हिंटको द्वारा आयोजित ‘एच2ग्लोबल’ नीलामी में एशियाई श्रेणी का एकमात्र विजेता चुना गया है। इसके तहत कंपनी को जर्मनी में गैर-जैविक स्रोतों से उत्पादित नवीकरणीय ईंधन (आरएफएनबीओ) श्रेणी के अमोनिया की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक खरीद समझौता मिला है।

इस समझौते के तहत हिंटको 10 वर्षों की अवधि में एएम ग्रीन से कम से कम 58.5 करोड़ यूरो मूल्य का अमोनिया खरीदेगा। जर्मनी को इसकी पहली आपूर्ति 2029 में शुरू होने की उम्मीद है।

कंपनी ने जर्मनी की यूनिपर के साथ 2,50,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए पक्का ऑफटेक समझौता भी किया है। इसके अलावा, जापान की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी जेईआरए के साथ 70,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए बाध्यकारी समझौता किया है।

जूनो जूल्स एक अन्य कंपनी है, जिसने सेलेक्ट एनर्जी जीएमबीएच के साथ प्रतिदिन 600 टन (लगभग 2,19,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष) ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए ऑफटेक समझौता किया है।

निर्यात के अलावा, सरकार की लक्षित योजनाओं के तहत घरेलू मांग भी मजबूत हुई है। मिशन के रणनीतिक हस्तक्षेप ग्रीन हाइड्रोजन परिवर्तन (एसआईजीएचटी) कार्यक्रम के तहत देशभर की 11 उर्वरक इकाइयों को 6,70,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया के उत्पादन और आपूर्ति के लिए समझौते किए गए हैं।

बयान में कहा गया है कि इसी तरह, एसआईजीएचटी कार्यक्रम के तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) की रिफाइनरियों को 30,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और आपूर्ति के लिए परियोजनाएं आवंटित की गई हैं।

Continue Reading
Advertisement
खेल2 hours ago

जोश इंग्लिस बने तीनों फॉर्मेट में एक से अधिक शतक जड़ने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई

मनोरंजन2 hours ago

अर्चना पूरन सिंह के बेटे आयुष्मान और समीक्षा शेट्टी की सगाई, रोमांटिक तस्वीरें आई सामने

मनोरंजन2 hours ago

1 नवंबर को मुंबई में प्रशंसकों से रूबरू होंगे मनोज बाजपेयी, साझा करेंगे जिंदगी के अनकहे किस्से

राष्ट्रीय समाचार2 hours ago

ईएसआईसी ने 31 दिसंबर तक बढ़ाई एमनेस्टी स्कीम की अवधि, कोर्ट के बाहर सुलझ सकेंगे विवाद

व्यापार3 hours ago

म्यूचुअल फंड्स में एक नवंबर से डिफॉल्ट होगा डायरेक्ट प्लान, निवेशकों को मिलेगा ज्यादा रिटर्न

व्यापार3 hours ago

ग्रीन हाइड्रोजन में भारत बना दुनिया का अग्रणी देश, 9.5 अरब डॉलर के समझौते हुए: प्रल्हाद जोशी

व्यापार3 hours ago

गोल्ड ईटीएफ एयूएम बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपए के पार, शीर्ष 5 फंड्स के पास 80 प्रतिशत मार्केट शेयर

राष्ट्रीय समाचार3 hours ago

चक्रवात ‘अर्नब’ का असर कमजोर, फिर भी राजस्थान के कई जिलों में बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी

राष्ट्रीय समाचार4 hours ago

भारत में खपत मजबूत, दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान : वित्त मंत्रालय

राजनीति4 hours ago

आई-पैक छापेमारी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की ईडी की मांग पर सुरक्षित रखा फैसला

बॉलीवुड4 weeks ago

टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में 10 साल बाद कोर्ट ने बॉयफ्रेंड पर सुनाया फैसला

अपराध3 weeks ago

दिल्ली पुलिस ने मकोका के दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया, 30 लाख रुपए बरामद

राजनीति3 weeks ago

“आप” का आरोप: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली छावनी में तब्दील

राष्ट्रीय समाचार3 weeks ago

दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों से विरोध-प्रदर्शन के कारण यात्रा की योजना पहले से बनाने की दी सलाह

खेल4 weeks ago

‘आपकी जीत बेहतरीन प्रदर्शन, दृढ़ संकल्प और टीम वर्क की भावना का सबूत,’ गोल्ड जीतने पर राष्ट्रपति मुर्मु ने टीम इंडिया को सराहा

मनोरंजन3 weeks ago

‘तुम झूठे हो गौतम गुलाटी’, प्रियंका चाहर चौधरी से भिड़े गौतम, ‘राइज एंड फॉल 2’ में छिड़ी तीखी जंग

व्यापार4 weeks ago

गांधी जयंती के चलते भारतीय शेयर बाजार बंद, एनएसई और बीएसई पर नहीं होगा कारोबार

मनोरंजन3 weeks ago

कनिका-लव की लड़ाई में कूदी आम्रपाली, गुल्लू से हुई बहस

राजनीति3 weeks ago

जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

खेल3 weeks ago

‘कोई नाराजगी नहीं, टीम के दरवाजे उनके लिए खुले हैं’, रोनाल्डो संग विवाद को लेकर बोले कोच जॉर्ज जीसस

रुझान