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Thursday,29-October-2026
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एआई आधारित सेवाओं से 2030 तक 100-200 अरब डॉलर के नए कारोबारी अवसर पैदा होने की उम्मीद : रिपोर्ट

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं से वर्ष 2030 तक 100-200 अरब डॉलर के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके लिए जरूरी प्रतिभाओं का बड़ा हिस्सा पहले से ही टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनियों में मौजूद है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई आधारित सेवाओं से 2030 तक उद्योग की वृद्धि में 300-400 अरब डॉलर का योगदान मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मौजूदा राजस्व अनुबंधों में लगभग 200 अरब डॉलर की कमी आने की आशंका है। इसके परिणामस्वरूप शुद्ध अवसर 100-200 अरब डॉलर का रह जाएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य चुनौती प्रतिभाओं की उपलब्धता नहीं, बल्कि उन्हें सही काम में लगाने की है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनियों के एआई से जुड़े कर्मचारियों में से 10-15 प्रतिशत कर्मचारी एप्लाइड एआई के क्षेत्र में काम करते हैं, जबकि एआई आधारित कंपनियों में यह आंकड़ा 90-95 प्रतिशत है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनियों के शेष 85-90 प्रतिशत कर्मचारी इन्फ्यूज्ड एआई के दायरे में आते हैं, जहां पेशेवर मौजूदा काम को बेहतर बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग में 300-400 अरब डॉलर की वृद्धि एजेंटिक सॉल्यूशंस को विकसित करने और उनका संचालन करने से होगी। एजेंटिक टूल्स के विकसित होने के साथ ही इस तरह के काम को आउटसोर्स करना संभव होता जाएगा।

वैश्विक सर्विसेज बाजार के 2025 में लगभग 1.6-1.7 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 2030 तक 2.2-2.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

बीसीजी की मैनेजिंग डायरेक्टर और पार्टनर स्रेइशा जॉर्ज ने कहा, “एप्लाइड एआई के क्षेत्र में काम करने में सक्षम लोग पहले से ही काफी हद तक कंपनियों के पेरोल पर मौजूद हैं और ग्राहक अब घंटों के हिसाब से भुगतान करने के बजाय नतीजों के आधार पर भुगतान करने की ओर बढ़ रहे हैं। इससे काम के लिए कर्मचारियों की तैनाती और उन्हें मिलने वाले पारिश्रमिक का तरीका बदल जाता है।”

रिपोर्ट में एप्लाइड एआई से जुड़ी 40 अलग-अलग भूमिकाओं की पहचान की गई है, जिनमें से प्रत्येक को टेक्नोलॉजी क्षेत्र की किसी मौजूदा भूमिका से जोड़ा गया है। उदाहरण के लिए, डेटा साइंटिस्ट या फुल-स्टैक डेवलपर आगे चलकर फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर बन सकता है। इसी तरह, एक डेवऑप्स इंजीनियर एआई ऑप्स इंजीनियर और डेटा इंजीनियर सेमांटिक इंजीनियर की भूमिका में आगे बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किसी डेटा साइंटिस्ट को फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर की भूमिका के लिए तैयार करने में उतने प्रयास की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक कौशल विकास की जरूरत होती है, जितनी एक डेटा इंजीनियर को एआई डेटा इंजीनियर बनाने में पड़ती है।

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अदाणी एंटरप्राइजेज का दूसरी तिमाही में दमदार प्रदर्शन, राजस्व 74 प्रतिशत बढ़कर 38,023 करोड़ रुपए पहुंचा

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अदाणी समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का समेकित राजस्व सालाना आधार पर 74 प्रतिशत बढ़कर 38,023 करोड़ रुपए पहुंच गया।

कंपनी की स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, ईबीआईटीडीए में 62 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 6,316 करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जबकि निरंतर परिचालन से कर-पूर्व लाभ (पीबीटी) 146 प्रतिशत बढ़कर 2,002 करोड़ रुपए हो गया।

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि कंपनी के मजबूत नतीजे पिछले कुछ वर्षों में किए गए निवेशों की परिपक्वता और विभिन्न व्यवसायों की तेजी से बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा, “हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां बदलाव की गति बहुत तेज है और ऐसे में हमारी महत्वाकांक्षाओं का दायरा भी लगातार बढ़ना चाहिए। अदाणी एंटरप्राइजेज की सबसे बड़ी ताकत बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने की क्षमता है।”

उन्होंने कहा कि एकीकृत ऊर्जा, एयरपोर्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इकोसिस्टम में किए गए निवेश इसके हालिया उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक और घरेलू निवेशकों का लगातार बना विश्वास कंपनी की निष्पादन क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भी कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की। इस अवधि में समेकित राजस्व 62 प्रतिशत बढ़कर 71,569 करोड़ रुपए हो गया, जबकि ईबीआईटीडीए 56 प्रतिशत बढ़कर 11,958 करोड़ रुपए पहुंच गया। छह माह की अवधि में निरंतर परिचालन से पीबीटी 45 प्रतिशत बढ़कर 3,297 करोड़ रुपए रहा।

कंपनी ने बताया कि उसके कॉपर कारोबार ने आय वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पहली छमाही के दौरान कॉपर व्यवसाय से 2,033 करोड़ रुपए का ईबीआईटीडीए प्राप्त हुआ। कॉपर प्लांट की उत्पादन क्षमता में तेजी से विस्तार हुआ है और वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में बिक्री मात्रा सालाना आधार पर 5.2 गुना बढ़ गई।

उभरते कारोबारों में भी कंपनी ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एएनआईएल) ने सितंबर 2026 में 4.3 गीगावाट क्षमता की नई टॉपकॉन सोलर मॉड्यूल लाइन चालू की, जिसके बाद उसकी कुल सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता बढ़कर 10 गीगावाट हो गई।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अदाणीकॉनेक्स को नवी मुंबई डेटा सेंटर के लिए 240 मेगावाट का नया हाइपरस्केल ऑर्डर प्राप्त हुआ है, जो कंपनी के डेटा सेंटर कारोबार के विस्तार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

इस तिमाही के दौरान कंपनी की वित्तीय प्रोफाइल को भी मजबूती मिली। केयर रेटिंग्स ने अदाणी एंटरप्राइजेज की दीर्घकालिक क्रेडिट रेटिंग बढ़ाकर एए (स्टेबल आउटलुक) कर दी है। कंपनी के इतिहास में यह अब तक की सबसे ऊंची क्रेडिट रेटिंग है।

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सोने की कीमतों में मामूली बदलाव, चांदी 1.95 लाख रुपए के नीचे स्थिर

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सोने और चांदी ने सोमवार को एक सीमित दायरे में कारोबार किया। इससे सोने का दाम 1.42 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 1.95 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे स्थिर रहा।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 80 रुपए बढ़कर 1,41,710 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,41,630 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,29,806 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,29,733 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

वहीं, 18 कैरेट सोने का दाम 1,06,223 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,06,283 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है।

सोने के चांदी की कीमतों में भी मामूली बदलाव देखा गया है।

चांदी का दाम 64 रुपए बढ़कर 1,94,479 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 1,94,415 रुपए प्रति किलो था।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में तेजी देखी जा रही है।

कॉमेक्स पर खबर लिखे जाने तक सोने का दाम 0.55 प्रतिशत बढ़कर 4,029 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 0.26 प्रतिशत बढ़कर 54.09 डॉलर प्रति औंस हो गया है।

जानकारों ने कहा कि सोना कारोबारी सत्र में एक सीमित दायरे में रहा। हालांकि, कॉमेक्स पर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम सपोर्ट स्तर के आसपास टिकने में कामयाब रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं के चलते डॉलर को मजबूती मिल रही है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इस हफ्ते सबकी नजरें फेड के नीतिगत फैसले पर टिकी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि महंगाई की चिंताओं और अमेरिकी चुनावों से जुड़ी अनिश्चितता के बीच, बाजार के प्रतिभागी ब्याज दरों के भविष्य और केविन वॉर्श के मार्गदर्शन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। नीतिगत फैसले से पहले कॉमेक्स पर सोने की कीमत 3,950 डॉलर से 4,100 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती है। इसके बाद, अगला ट्रेंड फेड के फैसले और उनकी टिप्पणी पर निर्भर करेगा।

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कमजोर तिमाही नतीजों से एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का शेयर लुढ़का, आईपीओ कीमत से 24 प्रतिशत नीचे पहुंचा

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एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी सितंबर तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद निवेशकों ने शेयर में जोरदार बिकवाली की, जिसके चलते यह अपने लिस्टिंग के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर 7 प्रतिशत तक टूटकर 433.55 रुपए पर आ गया, जो 21 जुलाई 2026 को सूचीबद्ध होने के बाद का अब तक का सबसे निचला स्तर है। हालांकि बाद के कारोबार में शेयर ने थोड़ी रिकवरी की और 2.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ 452.45 रुपए पर बंद हुआ। मौजूदा स्तर पर यह अपने आईपीओ मूल्य 574 रुपए प्रति शेयर से लगभग 24.46 प्रतिशत नीचे है।

शेयर में गिरावट के पीछे दूसरी तिमाही के अपेक्षा से कमजोर नतीजे प्रमुख कारण रहे। इक्विरस सिक्योरिटीज के अनुसार, कंपनी का कर-पश्चात लाभ (पीएटी) 701 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6 प्रतिशत कम है। मुनाफे पर दबाव का मुख्य कारण परिचालन खर्चों में तेज बढ़ोतरी रही, जो सालाना आधार पर 24.3 प्रतिशत बढ़कर 301 करोड़ रुपए पहुंच गए।

ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की रेवेन्यू यील्ड भी तिमाही आधार पर 0.6 बेसिस प्वाइंट घटकर 36.1 बेसिस प्वाइंट रह गई। वहीं गैर-म्यूचुअल फंड व्यवसाय से जुड़ी यील्ड, एडवाइजरी आय को छोड़कर, 35 से 40 बेसिस प्वाइंट के दायरे में बनी रही।

कंपनी के इक्विटी क्वार्टरली एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (क्यूएएयूएम) में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन यह उद्योग की 6.6 प्रतिशत वृद्धि दर से कम रही। इसके परिणामस्वरूप कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 12 बेसिस प्वाइंट घटकर 12.53 प्रतिशत पर आ गई।

सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के मोर्चे पर भी कुछ दबाव देखने को मिला। सितंबर 2026 में मासिक एसआईपी प्रवाह में कंपनी की हिस्सेदारी घटकर 12 प्रतिशत रह गई, जो जून में 12.65 प्रतिशत थी। एसआईपी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट लगभग स्थिर रहते हुए 2.07 ट्रिलियन रुपए पर रहे, जबकि बाजार हिस्सेदारी मामूली घटकर 11.59 प्रतिशत हो गई। तिमाही के दौरान नए एसआईपी पंजीकरण 19 लाख रहे, लेकिन इस श्रेणी में भी बाजार हिस्सेदारी 10.6 प्रतिशत से घटकर 9.94 प्रतिशत पर आ गई।

हालांकि निकट अवधि की चुनौतियों के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का मुख्य म्यूचुअल फंड कारोबार अभी भी मजबूत स्थिति में है। सितंबर 2026 तक की तीन वर्षीय अवधि में कंपनी की इक्विटी और हाइब्रिड परिसंपत्तियों का आधे से अधिक हिस्सा प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन देने में सफल रहा है। इसके अलावा इक्विटी श्रेणी में शुद्ध निवेश प्रवाह भी मजबूत बना हुआ है।

इक्विरस सिक्योरिटीज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच कंपनी के म्यूचुअल फंड औसत एसेट्स अंडर मैनेजमेंट में 13 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) और ईबीआईटीडीए में 10 प्रतिशत सीएजीआर दर्ज की जा सकती है।

ब्रोकरेज ने शेयर पर अपना “लॉन्ग” रेटिंग बरकरार रखते हुए 540 रुपए का लक्ष्य मूल्य (टारगेट प्राइस) दिया है। रिपोर्ट में कंपनी के मजबूत ब्रांड, व्यापक वितरण नेटवर्क और वैकल्पिक निवेश कारोबार के विस्तार को दीर्घकालिक मजबूती का आधार बताया गया है।

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