राष्ट्रीय समाचार
भारत बन रहा वैश्विक आर्थिक शक्ति का नया केंद्र, एआई और बदलते पूंजी प्रवाह से बढ़ेंगे अवसर: रिपोर्ट
वैश्विक स्तर पर पूंजी प्रवाह में बदलाव, भू-राजनीतिक आधार पर बंटते व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत विकास की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए बहुध्रुवीय दुनिया में एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। सोमवार को जारी ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पूंजी प्रवाह, व्यापारिक रिश्तों और उद्योगों की संरचना तेजी से बदल रही है। एआई क्रांति शुरू हो चुकी है, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विस्तार नए निर्यात अवसर पैदा कर रहा है और शहरीकरण की गति लगातार बढ़ रही है।
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री टॉम ऑर्लिक ने कहा कि इन सभी बदलावों के बीच भारत विकास में मौजूद कई बाधाओं को कम करते हुए वैश्विक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का विस्तार होता मुक्त व्यापार नेटवर्क 2035 तक देश की जीडीपी में 140 अरब डॉलर से 170 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है। विनिर्माण लागत कम करने और कृषि क्षेत्र से श्रमिकों को अधिक उत्पादक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने जैसे घरेलू सुधार इन लाभों को और बढ़ा सकते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक पूंजी प्रवाह अब पहले की तुलना में अधिक केंद्रित और राजनीतिक होता जा रहा है। प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच पूंजी निवेश मित्र देशों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम है, जबकि निवेश का बड़ा हिस्सा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।
भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र की मजबूत मांग और विभिन्न देशों द्वारा दिए जा रहे निवेश प्रोत्साहनों के बीच वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने की अपनी गति बनाए रखे।
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई भारत की आर्थिक वृद्धि दर में हर साल 0.9 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बुनियादी ढांचे की सीमाएं एआई से मिलने वाले लाभ को कुछ हद तक सीमित कर सकती हैं। विशेष रूप से भारत का आईटी सेवा क्षेत्र अवसरों और चुनौतियों दोनों का सामना करेगा। एआई जहां कंपनियों को उच्च मूल्य वाली सेवाओं की ओर ले जा सकता है, वहीं स्वचालन कम लागत वाले श्रम आधारित मॉडल को चुनौती भी दे सकता है।
रिपोर्ट में भारत के शहरीकरण को भी एक बड़ी ताकत बताया गया है। इसके अनुसार, करीब 82 करोड़ भारतीय शहरी वातावरण में रहते हैं। यदि नगर प्रशासन, बुनियादी ढांचे और भूमि उपयोग योजना को और मजबूत किया जाता है, तो यह शहरी आबादी उत्पादकता वृद्धि का एक बड़ा स्रोत बन सकती है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत को बढ़ती ऊर्जा मांग के चलते तेजी से बढ़ानी होगी कोयला आधारित क्षमता: सीईए चेयरमैन

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि भारत को अपनी तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को बनाए रखने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के साथ पहले लगाए गए अनुमान से अधिक कोयला आधारित ऊर्जा क्षमता को तैयार करना होगा।
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में सीईए प्रमुख ने कहा कि मांग के रुझानों की वजह से नीति निर्मताओं को आने वाले दशक में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयले से बिजली बनाने की क्षमता बढ़ाने के पैमाने पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, सरकार ने पिछले साल अनुमान लगाया था कि 2035 तक देश की कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन क्षमता में 97 गीगावाट की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल स्थापित कोयला आधारित ऊर्जा क्षमता लगभग 307 गीगावाट हो जाएगी।
हालांकि, बिजली की खपत में उम्मीद से ज्यादा तेजी से हो रही बढ़ोतरी भविष्य की जरूरतों को काफी बढ़ा सकती है।
प्रसाद ने कहा, “मांग बढ़ रही है और जैसे-जैसे मांग बढ़ती है, हमें उस मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति के स्थिर स्रोतों की जरूरत है।”
प्रसाद के अनुसार, कोयले से चलने वाली अतिरिक्त क्षमता की जरूरतें पहले के अनुमानों से ज्यादा हो सकती हैं और मौजूदा विस्तार योजनाओं के अलावा 105 गीगावाट से 150 गीगावाट तक पहुंच सकती हैं।
उनका यह बयान उस चुनौती को दिखाता है जिसका सामना भारत कर रहा है, क्योंकि देश तेजी से बढ़ती बिजली की खपत और साफ ऊर्जा की ओर बढ़ने के अपने लंबे समय के लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
प्रसाद ने कहा कि इस साल बिजली की मांग में काफी तेजी आई है और रोजाना की पीक डिमांड पिछले साल के मुकाबले 45 गीगावाट से 50 गीगावाट ज्यादा रही है।
इसके अलावा, मानसून के मौसम में कम बारिश की वजह से पनबिजली उत्पादन भी कम हुआ है, जिससे सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए थर्मल पावर प्लांट पर निर्भरता बढ़ गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में बिजली की कमी बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे हो गई, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे ज्यादा स्तर था और यह तब हुआ जब कोयले से चलने वाले पावर प्लांट से बिजली का उत्पादन ज्यादा था।
राष्ट्रीय समाचार
जम्मू-कश्मीर : डोडा में गाड़ी पलटने से चार लोग घायल, दो महिलाएं भी शामिल

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सड़क हादसे में कम से कम चार लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि जिले के भल्ला इलाके में शेनाई के पास एक गाड़ी के पलटने से उसमें सवार चार लोग घायल हो गए, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अभी-अभी डोडा से भदरवाह जा रही एक मिनी-बस के साथ हुए दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे के बारे में पता चलने पर डोडा के डीसी कृष्ण लाल से बात की।”
मंत्री ने कहा, “घायल यात्रियों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। अच्छी बात यह है कि किसी की मौत नहीं हुई है। हर जरूरी मदद दी जा रही है। मेरा कार्यालय जिला प्रशासन के संपर्क में है।”
घायलों की पहचान; आशिक हुसैन (35), पिता गुलाम रसूल (भदरवाह के गोठा के निवासी); मोहम्मद जावेद (48), पिता तालिब हुसैन और उनकी पत्नी रुबीना बेगम (46) (दोनों भल्ला के ब्रासू के निवासी); और इंशा (35), पत्नी राशिद अहमद (भदरवाह की निवासी); के रूप में हुई है।
इस बीच, पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है और आगे की जानकारी की पुष्टि की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी जिलों (जैसे रामबन, डोडा, किश्तवाड़, उधमपुर और बड़गाम के कुछ हिस्सों) में सड़क हादसे मुश्किल भौगोलिक स्थिति, खराब मौसम और मानवीय या बुनियादी ढांचे से जुड़ी वजहों से होते हैं।
खतरनाक इलाके, खराब सड़क बनावट, संकरी सड़कें, तीखे मोड़, खड़ी ढलान और कम दृश्यता के कारण पहाड़ी हाईवे और लिंक रोड पर गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है।
जरूरी सुरक्षा सुविधाओं जैसे क्रैश बैरियर, पैरापेट वॉल और सही सड़क संकेतों की कमी के कारण अक्सर छोटी-मोटी लापरवाही भी गहरी खाइयों में गिरने जैसे जानलेवा हादसों में बदल जाती है।
मानसून की बारिश, बर्फ पिघलने और घने कोहरे के कारण अक्सर भूस्खलन, चट्टानें खिसकने और सड़क की सतह खराब होने जैसी घटनाएं होती हैं, जिससे पकड़ और दृश्यता बहुत कम हो जाती है।
जुलाई और मानसून के महीनों में हादसों में काफी बढ़ोतरी होती है क्योंकि गीली सड़कों और कीचड़ के कारण गाड़ी पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता है।
अपराध
राजस्थान में श्रीगंगानगर में विस्फोटक और हथियार बरामद, दो गिरफ्तार

ARREST
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में पाकिस्तान सीमा के पास स्थित रावला मंडी क्षेत्र से सुरक्षा एजेंसियों ने संदिग्ध विस्फोटकों और हथियारों की खेप बरामद की है। इस मामले में पंजाब के दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि आस-पास के इलाकों में तलाशी अभियान चल रहा है।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक सोमवार रात पाकिस्तान सीमा के उस पार से एक ड्रोन के जरिए यह खेप गिराई गई थी। बरामद सामान में आरडीएक्स, दो पिस्तौल, चार मैगजीन, लगभग 650 कारतूस, चार जोड़ी बैटरी और दो रिमोट-कंट्रोल डिवाइस शामिल हैं।
जब्त किए गए सामान की सही प्रकृति और मात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
यह ऑपरेशन बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ), एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और रावला पुलिस की टीमों ने चलाया। यह कार्रवाई रावला इलाके में ग्राम पंचायत 12 केएनडी के तहत ‘चक 4 केएनएम डब्ल्यू टेल’ के पास संदिग्ध पैकेट गिराए जाने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई।
अधिकारियों के मुताबिक एएनटीएफ को जानकारी मिली थी कि सोमवार रात करीब 10 बजे एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन ने नहर के पास एक खेत में तीन पैकेट गिराए थे। शुरू में शक था कि पैकेट में नशीले पदार्थ हो सकते हैं। इस जानकारी पर कार्रवाई करते हुए सुरक्षाकर्मियों ने इलाके की तलाशी ली और संदिग्ध पैकेट बरामद किए। बताया जा रहा है कि उनमें हथियार और विस्फोटक सामग्री थी। ऑपरेशन के दौरान दो युवकों को पकड़ा गया।
शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि एक युवक जालंधर और दूसरा पंजाब के फिरोजपुर इलाके का है। खेप से उनकी भूमिका और संबंधों की जांच की जा रही है।
एएनटीएफ के इंस्पेक्टर जनरल विकास कुमार ने कहा कि ड्रोन का इस्तेमाल करके राजस्थान में भारी मात्रा में गोला-बारूद और संदिग्ध विस्फोटक गिराए गए थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि खेप किसने भेजी थी और इसका मकसद क्या था।
पूरे मामले की जांच चल रही है और जांच आगे बढ़ने पर और जानकारी सामने आएगी। आईजी ने पुष्टि की कि इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। यह पता लगाने के लिए खेतों, नहर के किनारों और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है कि क्या कोई और पैकेट या संदिग्ध सामान गिराया गया था।
जांचकर्ता गिरफ्तार युवकों से पूछताछ भी कर रहे हैं ताकि उनके कथित संबंधों का पता लगाया जा सके, खेप के पीछे के लोगों की पहचान की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि हथियार और विस्फोटक कहां पहुंचाए जाने थे। खबर है कि जब्त किए गए सामान की जांच करने और उसकी सही बनावट व मात्रा का पता लगाने के लिए जयपुर से एक खास टीम बुलाई गई है। सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही हैं और आगे की जानकारी का इंतजार है।
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