राजनीति
कर्नाटक में सूखे का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम, तीन दिन के दौरे के बाद निष्पक्ष रिपोर्ट का दिया भरोसा
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को बताया कि केंद्रीय सूखा आकलन टीम कर्नाटक का तीन दिन का दौरा करेगी। टीम जमीनी हालात का जायजा लेगी और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा दिए गए डेटा और फील्ड में की गई पड़ताल के आधार पर एक निष्पक्ष रिपोर्ट सौंपेगी। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव और टीम के प्रमुख अजीत कुमार साहू ने यह भरोसा दिलाया है।
साहू ने शनिवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के ऑफिस-कम-रेसिडेंस ‘कृष्णा’ में हुई बैठक के दौरान यह भरोसा दिलाया। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने एनडीआरएफ नियमों के तहत कर्नाटक के लिए सूखे से राहत के तौर पर 3,705.30 करोड़ रुपए की मांग की थी।
मुख्यमंत्री की मांग का जवाब देते हुए साहू ने कहा कि केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम तीन दिनों तक राज्य का दौरा करेगी, जमीनी हकीकत का जायजा लेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले राज्य सरकार के अधिकारियों से जरूरी डेटा इकट्ठा करेगी।
यह बैठक तब हुई जब केंद्र की टीम राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति और फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए कर्नाटक पहुंची।
शिवकुमार ने केंद्र की टीम को बताया कि कर्नाटक सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है, जिससे किसान और आम जनता परेशान हैं। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि एनडीआरएफ नियमों के अनुसार राज्य को सूखे से राहत के लिए 3,705.30 करोड़ रुपए दिए जाएं।
उन्होंने कहा कि केंद्र के आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के अनुसार वैज्ञानिक आकलन के बाद कर्नाटक के 240 तालुकों में से 217 को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।
उन्होंने कहा, “बिना किसी दबाव में आए, केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए और बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से आकलन करके सूखा प्रभावित तालुकों की पहचान की गई।”
शिवकुमार ने कहा कि किसानों की परेशानी के राज्य की अर्थव्यवस्था और समाज पर व्यापक असर पड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर किसान परेशान हैं, तो सब कुछ ठप हो जाता है। इसलिए, केंद्र सरकार को कर्नाटक के किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।”
स्थिति को चिंताजनक बताते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि अपने और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के चार दशकों के सार्वजनिक जीवन में, उन्होंने लोगों को इतनी गंभीर मुश्किलों का सामना करते हुए कभी नहीं देखा।
उन्होंने कहा, “यह बहुत चिंताजनक स्थिति है।” उन्होंने आगे कहा कि राज्य ने चुने हुए प्रतिनिधियों और किसानों की समस्याओं को समझने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया था, जिसमें 150 विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं के बारे में बात की।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि कृष्णा बेसिन को छोड़कर राज्य के ज्यादातर हिस्सों में जलाशयों में पानी की आवक कम है। उन्होंने कहा कि मलनाड और तटीय इलाकों में भी बारिश की भारी कमी देखी जा रही है।
उन्होंने शहरी इलाकों में पानी की स्थिति की ओर भी इशारा किया और कहा कि राज्य पर पानी की उपलब्धता को लेकर दबाव है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कावेरी जल समिति कर्नाटक को कावेरी नदी में पानी छोड़ने का निर्देश दे रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए 2,500 रुपए की राहत राशि की घोषणा की थी, लेकिन राज्य को केंद्र से और अधिक मदद की उम्मीद थी।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि मंत्रियों ने जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए जिलों का दौरा किया है, जबकि अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में एहतियाती और राहत के उपाय किए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक दौरे के दौरान राज्य को सूखे की स्थिति के बारे में आगाह किया था और उसके बाद उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों और अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने कहा कि बारिश की स्थिति को देखते हुए किसानों को बुवाई के फैसलों के बारे में भी सलाह दी गई है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि किसान भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, जबकि गन्ना उत्पादक ज्यादा कीमत की मांग कर रहे हैं। दूध उत्पादक भी दूध की कीमतों में कम से कम 10 रुपए की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “इस मुश्किल हालात में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए।”
बैठक में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एल.के. अतीक, अतिरिक्त मुख्य सचिव और विकास आयुक्त डॉ. उमा महादेवन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव तुषार गिरिनाथ, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रितेश कुमार सिंह, राजस्व विभाग (आपदा प्रबंधन) के प्रधान सचिव मनोज कुमार मीना और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
फ्लाईदुबई फ्लाइट में घायल पायलट कैप्टन स्मित की हालत में सुधार, भारत ने यूएई सरकार का जताया आभार

यूएई से इजरायल जा रहे अमीराती विमान फ्लाईदुबई फ्लाइट एफजेड1073 के कॉकपिट में बुधवार को हुई घटना में घायल भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का यूएई में इलाज चल रहा है। यूएई में भारतीय दूतावास ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।
दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, ”भारतीय बहादुर कैप्टन स्मित का बेहतरीन इलाज चल रहा है और वे तेजी से ठीक हो रहे हैं। हम उनके परिवार और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं और उनके जल्द ठीक होने में मदद कर रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए हम यूएई सरकार का धन्यवाद करते हैं। हम भी उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने वालों के साथ शामिल हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार से बात की थी। उन्होंने स्मित मच्छार से उनका हालचाल जाना और जल्द स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने कहा कि आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात यह है कि आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है।
पीएम मोदी ने स्मित मच्छार से कहा कि पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है। महामृत्युंजय के जाप चल रहे हैं। आपकी हिम्मत, धैर्य और सूझबूझ ने लोगों की जान बचाई है। आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले लोग नहीं है, बल्कि जान बचाने वाले लोग हैं।
स्मित ने पीएम मोदी से कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि आपसे मेरी बात होगी।” स्मित के भावुक होने पर पीएम मोदी ने कहा, “आपने इतना बड़ा काम किया है कि हर देशवासी और पूरी दुनिया के लोग आपको देखने, आपसे बात करने के लिए आतुर हैं। आपने सचमुच में पूरे देश का नाम रोशन किया है।”
पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपका स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक है। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा (आप सभी की जान न बचाते) न करते तो पता नहीं, पूरे देश और भारत के पायलटों पर क्या-क्या बीतती। सभी पायलटों को किस तरह से देखा जाता। आपने सभी को बचा लिया है।”
इस दौरान पीएम मोदी ने सऊदी और यूएई सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन सरकारों ने स्मित की बहुत देखभाल की। मैं उनका बहुत आभारी हूं।
फ्लाइट में हुए हादसे के दौरान कैप्टन स्मित ने बहादुरी और साहस का काम था। हमलावर साथी पायलट के हमले के बाद गर्दन और हाथों में गंभीर चोट लगने के बावजूद वह रेंगते हुए आगे बढ़े, कॉकपिट खोला और इजरायली लोगों को अंदर मौजूद आतंकवादी पर काबू पाने का मौका दिया।
राष्ट्रीय समाचार
एआईएमई 2026 में भारतीय नौसेना के जहाज सह्याद्रि और कुलिश की भागीदारी संपन्न

भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने फिलीपींस में आयोजित बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास एआईएमई 2026 में अपनी भागीदारी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस अभ्यास की थीम “भरोसे की नींव, समुद्र में एकजुट” यानी “विश्वास में जड़ें, समुद्र में एकजुट” थी।
एआईएमई 2026 के दौरान भारतीय नौसेना के जहाजों ने हार्बर और सी फेज में विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। अभ्यास का उद्देश्य पेशेवर संवाद, संचालन संबंधी समन्वय और समुद्री प्रशिक्षण के जरिए भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच सहयोग और आपसी तालमेल को मजबूत करना था।
अभ्यास के उद्घाटन समारोह के बाद हार्बर फेज आयोजित किया गया। इसमें प्रमुख अधिकारियों के बीच संवाद, खेल गतिविधियां, योग, सामुदायिक संपर्क और विशेषज्ञ स्तर पर विचार-विमर्श जैसी गतिविधियां शामिल रहीं। इसके अलावा टेबल-टॉप एक्सरसाइज, ऑपरेशनल सिंक्रोनाइजेशन और प्री-सेल ब्रीफ के जरिए समुद्री चरण के लिए योजनाओं और तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
सी फेज के दौरान आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने विभिन्न समन्वित समुद्री अभ्यासों में हिस्सा लिया। इनमें मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर), विजिट-बोर्ड-सर्च-सीजर (वीबीएसएस) और अंडरवे रीप्लेनिशमेंट ड्रिल शामिल थीं।
इसके अलावा हेलीकॉप्टर से जुड़े अभ्यासों में क्रॉस-डेक लैंडिंग, वर्टिकल रीप्लेनिशमेंट और केसवैक (घायल या बीमार लोगों को चिकित्सा निकासी) ड्रिल भी की गईं। इन गतिविधियों के जरिए भाग लेने वाली समुद्री सेनाओं के बीच संचालन संबंधी समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा मिला।
एआईएमई 2026 के हार्बर और सी फेज ने भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने के साथ समुद्री सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाया। इससे प्रभावी समुद्री साझेदारी को और मजबूती मिली।
आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश की इस भागीदारी ने भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और महासागर के विजन के अनुरूप साझेदार समुद्री सेनाओं के साथ निरंतर सहयोग और जुड़ाव के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित किया।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिलने पर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची इंडियन यूथ कांग्रेस

इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने पर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आईवाईसी अध्यक्ष उदय भानु चिब की ओर से याचिका दाखिल कर दिल्ली पुलिस के फैसले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।
आईवाईसी की याचिका में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग करते हुए कहा गया है कि संगठन चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी बात रखना चाहता है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
आईवाईसी ने हाई कोर्ट से मांग की है कि दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं देने के फैसले में हस्तक्षेप किया जाए और संगठन को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की इजाजत दी जाए।
यह मामला ऐसे समय में हाई कोर्ट पहुंचा है, जब एक दिन पहले जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें से दो मामले संसद मार्ग थाने और एक मामला कनॉट प्लेस थाने में दर्ज किया गया।
पुलिस के मुताबिक, संसद मार्ग थाने में दर्ज दोनों एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए), 221, 132 और 3(5) लगाई गई हैं। वहीं, कनॉट प्लेस थाने में दर्ज मामले में बीएनएस की धारा 223, 221, 132 और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।
ये मामले 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास हुए प्रदर्शन के बाद दर्ज किए गए। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, वाम दलों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
पुलिस ने प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने और वहां एकत्र होने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर दैनिक डायरी में दर्ज प्रविष्टियों के आधार पर दर्ज की गई हैं। इनमें फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है। हालांकि, प्रदर्शन के आयोजकों और इसमें शामिल संगठनों का उल्लेख किया गया है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से करीब 750 लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के मद्देनजर इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।
विपक्षी दलों और संगठनों का यह विरोध निर्वाचन आयोग की ओर से कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इन्हीं आरोपों को लेकर सीईसी के इस्तीफे की मांग भी की जा रही है।
विपक्ष ने दावा किया है कि एसआईआर के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए। हालांकि, यह विपक्ष का दावा है। निर्वाचन आयोग एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने की कवायद बताता रहा है।
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