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‘जब गोल्ड जीतने पर राष्ट्रगान बजा, वह पल शानदार था,’ एरोबिक जिम्नास्टिक्स में इतिहास रचने के बाद अरिहा ने साझा किए अनुभव
भारतीय एयरोबिक जिम्नास्ट अरिहा पंगमबम ने कुछ हफ्तों पहले एशियन एयरोबिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता था, जिसके साथ वह एशियन चैंपियनशिप में सीनियर महिला व्यक्तिगत श्रेणी में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। फिलीपींस में हुए फाइनल में उन्होंने 19.100 अंक हासिल किए, जिसमें आर्टिस्ट्री (कलात्मकता) में 8.650, एग्जीक्यूशन (प्रदर्शन) में 7.600 और डिफिकल्टी (कठिनाई) में 2.850 अंक शामिल थे।
इस उपलब्धि के बाद अरिहा ने ‘आईएएनएस’ के साथ बातचीत में कहा, “जब मुझे यह गोल्ड मेडल मिला, तो वह पल बहुत शानदार था। मैं इसे शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती। जब मैंने पोडियम पर अपने देश का राष्ट्रगान बजते हुए सुना, तो उस पल मुझे गर्व भी महसूस हुआ क्योंकि मैं कुछ हासिल कर पाई थी, सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए। वह बहुत शानदार अनुभव था और मैं उस समय बहुत खुश थी।”
22 वर्षीय जिम्नास्ट ने कहा, “हम डबल फ्लेक्स फ्लोर, यानी लकड़ी का फ्लोर इस्तेमाल करते हैं। भारत में उत्तराखंड में एक फ्लोर है जो हमें नेशनल गेम्स के दौरान मिला था, लेकिन दुर्भाग्य से, न सिर्फ मैं, बल्कि पूरे भारत के ज्यादातर जिम्नास्ट उस पर ट्रेनिंग भी नहीं कर पाए। हम आमतौर पर रबड़ इंटरलॉकिंग मैट पर ट्रेनिंग करते हैं, इसलिए सिर्फ एक दिन में तालमेल बिठाना हमारे लिए बहुत मुश्किल होता है। प्रतियोगिता से पहले हमें खुद को ढालने के लिए एक दिन की पोडियम ट्रेनिंग दी जाती है, इसलिए हममें से ज्यादातर जिम्नास्ट को मुश्किल होती है, क्योंकि हमें उस फ्लोर पर कभी ठीक से ट्रेनिंग करने का मौका नहीं मिला। यही वह मुश्किल थी जिसका हमने सामना किया।”
उन्होंने कहा, “मुझे खुद पर बहुत गर्व था, और यह बहुत शानदार था क्योंकि हमने कभी अपना राष्ट्रगान बजते हुए नहीं सुना था। हम बस दूसरे देशों का राष्ट्रगान बजते हुए सुनते थे, और मैं सोचती थी कि पोडियम पर हमारा राष्ट्रगान कब सुनाई देगा? तो जब इस साल मुझे मेडल मिला और हमारा राष्ट्रगान बजा, तो वह वाकई बहुत शानदार अनुभव था। मैं इसे शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती। यह न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि हमारी पूरी टीम के लिए एक बहुत बड़ा पल था।”
“कोच ने मेरा काफी मार्गदर्शन किया है। सिर्फ जिम्नास्टिक्स में स्किल्स या मुश्किल एलिमेंट्स सीखने में ही नहीं, बल्कि आमतौर पर भी उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। वे कभी पढ़ना नहीं छोड़ते, कभी सीखना नहीं छोड़ते। उन्हें देखकर ही मुझे बहुत प्रेरणा मिलता है। चूंकि, मैंने फिजिकल एजुकेशन लिया है, इसलिए ट्रेनिंग के दौरान भी वे मुझे बायोमैकेनिक्स और एनाटॉमिकल टर्म्स सिखाते थे, ताकि मैं स्किल्स और जो हम कर रहे हैं, उसे गहराई से समझ सकूं। उन्होंने सफल एथलीट्स की कई कहानियाँ सुनाकर हमें मोटिवेट भी किया, ताकि मुझे हार न मानने और अपने लक्ष्यों के लिए आगे बढ़ने की वजह मिल सके। हालांकि प्रतियोगिता के समय मेरा परिवार वहां मौजूद नहीं था। असल में, मेरी बहन मेरे साथ उसी कैटेगरी में कॉम्पिटिशन में हिस्सा ले रही थी, जो हमारे लिए एक बहुत अच्छा पल था, लेकिन मेरे माता-पिता घर पर लाइवस्ट्रीम के जरिए इसे देख रहे थे। मेरे फोन करने से पहले ही उन्होंने मुझे फोन किया और वे बहुत खुश थे।”
डेलिगेशन के हेड इंदरजीत सिंह राठौर ने कहा, “उस जीत का अहसास बहुत शानदार था। हमने जो हासिल किया है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। असल में, पूरे भारत को भी वैसा ही महसूस हुआ होगा। जब पोडियम पर राष्ट्रगान बजता है और भारत का झंडा सबसे ऊपर होता है, तो यह कोई मामूली बात नहीं होती। जब अरिहा ने ऐसा किया, तो हमारी 49 लोगों की पूरी टीम खुशी से रो पड़ी। यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।”
उन्होंने कहा, “मैं बस यही सोच रहा था कि अगर हमने एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है, तो भविष्य में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीत सकते हैं। मुझे अपने खिलाड़ियों, बच्चों और कोचों की काबिलियत पर भरोसा है; उन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, और हमें उम्मीद है कि इस बार हम वर्ल्ड कप में और भी मेडल जीतेंगे। बेशक, दूसरे देशों के मुकाबले हमारे पोडियम और इंफ्रास्ट्रक्चर उतने अच्छे नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद हमने यह कामयाबी हासिल की। हमारे जिम्नास्ट्स की काबिलियत की वजह से, सही पोडियम न होने पर भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन भविष्य में, हमें उम्मीद है कि बड़ी कंपनियां और सरकार हमें अच्छा पोडियम इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेंगी ताकि हम और भी मेडल जीत सकें। अरिहा निश्चित रूप से बहुत अच्छा कर रही है। वह नेशनल चैंपियन है और अब एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडलिस्ट भी बन गई हैं। मुझे उसके लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सफलता की उम्मीद है। उसे जिस भी मदद या सपोर्ट की जरूरत होगी, मैनेजमेंट टीम उसके साथ है।”
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‘भारतीय टीम में वापसी की उम्मीद के बिना लगातार मेहनत किया’: भुवनेश्वर कुमार

दाएं हाथ के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने 4 साल बाद भारतीय टीम में वापसी की है। भुवनेश्वर ने कहा है कि खुद से कोई उम्मीद न रखने और अपने काम पर फोकस करने की वजह से नेशनल टीम से दूर रहने के बावजूद उनकी तैयारियों पर कभी कोई असर नहीं पड़ा।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में भुवनेश्वर कुमार ने कहा, “पिछले तीन-चाल वर्षों में उन्होंने भविष्य की चिंता करने की जगह वर्तमान पर फोकस किया है।”
उन्होंने कहा, “मैं जिस सोच में हूं, वह बहुत सिंपल है। मुझे खुद से कोई उम्मीद नहीं है। मुझे लगता है कि पिछले 3-4 वर्षों में मेरे लिए चीजें ऐसे ही हुईं। कोई उम्मीद नहीं, बस अपना काम करते रहो। आम तौर पर, हम वर्तमान में रहने की बात करते हैं। हम भविष्य के बारे में नहीं सोचते। मुझे लगता है कि मैं अभी इसी सोच में हूं।”
भुवनेश्वर ने कहा, “मुझे पता है कि मैं देश के लिए नहीं खेला। लेकिन मैंने जो चीजें कीं और एक इंसान के तौर पर मुझमें जो परिपक्वता आई। मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे यही सिखाया कि वर्तमान में रहो। पिछले चार साल में, मैं कभी इंडियन जर्सी के पीछे नहीं भागा। मुझे यह भी नहीं पता था कि वे चार साल कब आएंगे।”
भारतीय टीम में वापसी का श्रेय भुवनेश्वर ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल को दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में उनकी वापसी होगी या नहीं, इसका उन्हें पता नहीं था, लेकिन घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के लिए तैयारी जारी रही।
उन्होंने कहा, “पिछले दो आईपीएल में, मैं बिना किसी उम्मीद के गया था। लेकिन ऐसा नहीं था कि मैंने तैयारी नहीं की थी। मैंने फिटनेस से लेकर स्किल्स और मानसिक पक्ष, सब पर काम किया। हां, इस बात की उम्मीद शून्य थी कि मैं क्या करूंगा। मुझे टीम के लिए योगदान करना था, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे दो साल में दो आईपीएल खिताब मिलेंगे।”
भुवनेश्वर का मानना है कि आईपीएल ने उन्हें टी20 क्रिकेट की बदलती जरूरतों को समझने में भी मदद की है, जिसमें बल्लेबाज ज्यादा आक्रामक हो गए हैं और हाई स्कोर आम बात हो गई है।
उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि एक इम्पैक्ट प्लेयर होता है। लेकिन उस इम्पैक्ट प्लेयर ने बैट्समैन का माइंडसेट बहुत बदल दिया है। वे पहली बॉल से ही पीछे पड़ जाते हैं। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हम गेंदबाजों को पीड़ित मानते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, एक गेंदबाज के तौर पर आप गेम को नियंत्रित कर सकते हैं। आप चाह सकते हैं कि वे वहीं हिट करें जहां हम चाहते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह सिर्फ एक नजरिया है।”
भुवनेश्वर ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में गेम में काफी बदलाव आया है, सिर्फ फ्रेंचाइजी क्रिकेट में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी। 200 एक छोटा स्कोर हो गया है।”
इस अनुभवी पेसर ने विदेशों में खेलने की चुनौतियों के बारे में भी बताया, खासकर सेना देशों में, जहां बैट्समैन और बॉलर दोनों के लिए हालात मुश्किल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, “यह कोई बड़ी बात नहीं है। हम एक युवा टीम हैं। हम कई सालों से खेल रहे हैं। जब आप किसी विदेशी दौरे पर आते हैं, तो यह मुश्किल होता है। हालात अलग होते हैं। आम तौर पर, हम उम्मीदों के साथ आते हैं कि शायद हमें किसी फास्ट बॉलर से कुछ मिलेगा, लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों से, जिस तरह से हम व्हाइट बॉल फॉर्मेट देख रहे हैं, गेंदबाजों को ज्यादा सपोर्ट नहीं मिलता। मैंने महसूस किया है कि टी20 एक ऐसा फॉर्मेट बन गया है जहां आपको एक गेंदबाज के तौर पर बहुत परिपक्वता की जरूरत होती है।”
भुवनेश्वर ने कहा, “जब भी हम किसी विदेशी दौरे पर आते हैं, तो सबसे बड़ा माइंडसेट वहां जीतने का होता है, खासकर जब हम सेना (साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया) देशों में आते हैं। यह आसान नहीं है, लेकिन ऐसे देशों में जीतने से आपको बहुत संतुष्टि मिलती है।”
भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 में जीत मिली थी। उस पर भुवनेश्वर ने कहा, “जिस तरह से हमने पहला गेम जीता, मुझे पता है कि यह बॉलर्स के लिए मुश्किल था। बल्लेबाजों ने जिस तरह चेज किया, उससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले मैच में जीत आगे के मैचों और सीरीज के लिए आत्मविश्वास लेकर आती है।”
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न्यूजीलैंड के क्रिकेट फैंस के बीच रोहित और विराट को देखने का आकर्षण है: जेम्स पैमेंट

भारतीय क्रिकेट टीम 5 टी20, 5 वनडे और 2 टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए न्यूजीलैंड के दौरे पर है। रोहित शर्मा और विराट कोहली वनडे सीरीज का हिस्सा हैं। ऐसे में वनडे सीरीज को लेकर न्यूजीलैंड क्रिकेट फैंस के बीच उत्साह ज्यादा है।
न्यूजीलैंड के पूर्व सहायक कोच और मुंबई इंडियंस के फील्डिंग कोच रह चुके जेम्स पैमेंट ने कहा है कि रोहित और विराट का आकर्षण बहुत ज्यादा है। इस वजह से वनडे सीरीज को लेकर फैंस के बीच रोमांच ज्यादा है।
जेम्स पैमेंट ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, “मुझे ऐसा लगता है कि न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका की कंडीशन काफी समान हैं। डरबन, पोर्ट एलिजाबेथ (अब गकेबरहा) और न्यूलैंड्स जैसे मैदान न्यूजीलैंड की कंडीशन से काफी मिलते-जुलते हैं। ऐसे मैदान ही भारतीय खिलाड़ियों को पांच वनडे मैचों की सीरीज में मिलेंगे।”
उन्होंने कहा, “न्यूजीलैंड के क्रिकेट फैंस और दुनियाभर के क्रिकेट फैंस शायद रोहित और विराट को न्यूजीलैंड में आखिरी बार देखने जा रहे हैं। यह अविश्वसनीय है। वनडे सीरीज के दौरान स्टेडियम हाउसफुल होगा। यह उन दोनों जैसे वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ियों को देखने का आकर्षण है। देखना होगा कि न्यूजीलैंड में हमारे लड़के इन खिलाड़ियों का कैसे मुकाबला करते हैं। हमने घर पर बहुत अच्छा वनडे क्रिकेट खेला है।”
वनडे सीरीज को लेकर पैमेंट ने कहा, “न्यूजीलैंड क्रिकेट के लिए यह बहुत जरूरी सीरीज है। 12 मैचों के लिए भारत की मेजबानी कर पाना आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद है। न्यूजीलैंड क्रिकेट को पिछले साल 7 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। इस सीरीज से उनके बोर्ड को आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी। सीरीज के सभी मैचों के टिकट बिक जाने की पूरी उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के बहुत से लोग रहते हैं। निश्चित रूप से वे अपने क्रिकेट स्टार्स को देखने के लिए स्टेडियम में आएंगे। ऐसे में मैचों के दौरान रिकॉर्ड संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।”
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‘लगातार सही लेंथ पर गेंदबाजी करने वालों को वनडे सीरीज में मिलेगी सफलता’: जेम्स पैमेंट

भारतीय क्रिकेट टीम को 5 टी20 मैचों की सीरीज के बाद न्यूजीलैंड में 5 वनडे मैचों की सीरीज भी खेलनी है। इस सीरीज में रोहित शर्मा और विराट कोहली भी खेलेंगे। ऐसे में वनडे सीरीज को लेकर रोमांच ज्यादा है। जसप्रीत बुमराह वनडे सीरीज में भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए यह गेंदबाजी टीम के लिए एक समस्या है।
न्यूजीलैंड के पूर्व सहायक कोच और मुंबई इंडियंस के फील्डिंग कोच रह चुके जेम्स पैमेंट ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में वनडे सीरीज के दौरान गेंदबाजों पर बात की।
उन्होंने कहा, “गेंदबाजों को यह पक्का करने की कोशिश करनी चाहिए कि उन्हें किस लेंथ पर गेंदबाजी करनी है। अपनी सबसे अच्छी गेंद लगातार फेंकें। जो खिलाड़ी सही लेंथ पर लगातार गेंदबाजी करेगा, वही अच्छा परफॉर्म करेगा।”
पैमेंट ने कहा, “न्यूजीलैंड के विकेट पिछले पांच से 10 वर्षों में काफी बेहतर हुए हैं। पहले हमारे विकेटों में थोड़ी सीम होती थी, जो काफी नीचे रहती थी और इससे स्कोर करना मुश्किल हो जाता था। लेकिन अब न्यूजीलैंड के विकेटों पर, अगर गेंदबाजों के पास गति और बाउंस होते हैं, तो इसका फायदा उन्हें मिलेगा।”
उन्होंने कहा, “बल्लेबाजों के नजरिए से, यह सकारात्मक रहने के बारे में होगा। आपके पास अपने छोटे-छोटे लक्ष्य होंगे, जिन्हें आप पाने की कोशिश करना चाहते हैं। सभी वनडे वेन्यू पर 300 से ज्यादा का स्कोर अच्छी बल्लेबाजी, कम्युनिकेशन और साझेदारी से हासिल किया जा सकता है।”
पैमेंट ने कहा, “मेरा बस यही मानना है कि आजकल 50 ओवर फेंकने में आम तौर पर लगभग चार घंटे लगते हैं। अगर पहली पारी शाम सात बजे तक चलती है, तो दूसरी पारी करीब 7:40 में शुरू होगी। जब तक गेम खत्म होगा, तब तक लगभग आधी रात होने वाली होगी। दूसरी पारी में कंडीशन गेंदबाजी के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है।”
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि दूसरी पारी में फील्ड में रहना मुश्किल हो जाएगा और टीमें दूसरी पारी में सिर्फ बल्लेबाजी को ही प्राथमिकता देंगी। इससे उन्हें फायदा होगा। मुझे लगता है कि वनडे क्रिकेट अच्छी कंडीशन में खेला जाता है। टीमों को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी कर अच्छा स्कोर बनाना चाहिए और फिर उसे डिफेंड करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। 100 ओवर के दौरान विकेट बहुत ज्यादा खराब नहीं होंगे। कंडीशन टॉस के फैसलों पर असर डाल सकती है।”
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