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सोने और चांदी में उछाल, मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की बढ़ी मांग
सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को एक प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई। इसकी वजह मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ना है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट अपनी पिछली क्लोजिंग 1,42,883 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,44,852 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
सुबह 9:47 पर यह 1,517 रुपए या 1.06 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,44,400 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,44,311 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,44,883 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर बनाया है और दिखाता है कि खुलने के बाद सोने एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।
चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,23,779 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,26,568 रुपए प्रति किलो पर खुला।
फिलहाल यह 2,259 रुपए या 1.01 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,26,038 रुपए प्रति किलो पर खुला। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,25,885 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,26,892 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
जानकारों ने कहा कि इस तेजी की वजह अमेरिका-ईरान में तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग फिर से बढ़ना है। साथ ही, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने से भी कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 1.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,133 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.50 प्रतिशत की मजबूती के साथ 60 डॉलर प्रति औंस के करीब था।
दूसरी तरफ, अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के चलते मध्य पूर्व में तनाव हुआ है। अमेरिका ने लगातार 11वें दिन ईरान पर हमले किए, जिसमें उसकी ड्रोन भंडारण सुविधाओं, समुद्र में हमला करने की क्षमताओं और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं, ईरान भी मध्यू पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।
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धनतेरस पर देश में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होने का अनुमान: कैट

देशभर में शुक्रवार को धनतेरस के मौके पर 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है। इसमें अकेले सोने और चांदी की बिक्री 60,000 करोड़ रुपए से अधिक रहने का अनुमान है। यह जानकारी कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने दी।
कैट ने कहा कि त्योहारों के दौरान खरीदारी को लेकर ग्राहकों का उत्साह बरकरार है और वे धनतेरस से जुड़ी पारंपरिक खरीदारी कर रहे हैं। धनतेरस दिवाली के दौरान खरीदारी के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है।
इस बीच, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) ने कहा कि सोने और चांदी की ऊंची कीमतों के बावजूद इनकी मांग मजबूत बनी हुई है। खरीदार अब हल्के वजन के आभूषणों और पारंपरिक निवेश उत्पादों को अधिक पसंद कर रहे हैं।
व्यापारियों के मुताबिक, बाजारों में 14 कैरेट और 18 कैरेट के हल्के सोने के आभूषणों, चांदी के सिक्कों, सजावटी वस्तुओं और मछली, कछुए एवं हाथी जैसी शुभ आकृतियों की मांग मजबूत बनी हुई है।
हालांकि, कैट ने कहा कि देशभर में बिक्री के रुझान और ग्राहकों की प्रतिक्रिया का आकलन करने के बाद वह शुक्रवार को कारोबार के विस्तृत अनुमान जारी करेगा।
कैट का यह अनुमान विभिन्न राज्यों के व्यापारिक संगठनों से मिले इनपुट, ग्राहकों की मांग के रुझान और ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी बाजारों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों पर आधारित था।
व्यापारिक संगठन के मुताबिक, पिछले साल त्योहारी कारोबार लगभग 6.05 लाख करोड़ रुपए रहा था। इसमें वस्तुओं का कारोबार 5.40 लाख करोड़ रुपए और सेवाओं का कारोबार लगभग 65,000 करोड़ रुपए था।
साथ ही, कैट ने अनुमान लगाया है कि मौजूदा त्योहारी सीजन में सेवा क्षेत्र 80,000 करोड़ रुपए से लेकर 1 लाख करोड़ रुपए तक का कारोबार कर सकता है। इसमें परिवहन, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, पर्यटन, खानपान, इवेंट मैनेजमेंट और इससे जुड़ी गतिविधियों का योगदान रहेगा।
संगठन ने अनुमानित वृद्धि की एक प्रमुख वजह स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों के प्रति ग्राहकों की बढ़ती पसंद और ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेड इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को मिल रहा बढ़ता समर्थन बताया।
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धनतेरस पर शेयर बाजार में बरसा धन; सेंसेक्स 81,000 के पार बंद

दीपावली से पहले धनतेरस पर शुक्रवार को शेयर बाजार में बड़ी रैली देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,718.01 अंक या 2.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,028.02 और निफ्टी 493.75 अंक या 2.01 प्रतिशत की मजबूती के साथ 25,030.35 पर बंद हुआ।
यह लगातार सातवां सत्र था, जब बाजार बढ़कर बंद हुआ है। इस दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप 30 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 503 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि 28 अक्टूबर को 473 लाख करोड़ रुपए था।
बाजार में तेजी का नेतृत्व निजी बैंकों ने किया। सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक 3.22 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था।
इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 2.57 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.70 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.63 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 1.29 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा 1.21 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.84 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.77 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 0.76 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सूचकांक थे।
हालांकि, निफ्टी मीडिया 1.52 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.92 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद होने वाले सूचकांक थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 157.40 अंक या 0.82 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 18,975.05 और निफ्टी मिडकैप 14.25 अंक या 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 60,606.65 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में 30 में से 29 शेयर हरे निशान में बंद हुए।
एमएंडएम, आईसीआईआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, एनटीपीसी, अदाणी पोर्ट्स, सन फार्मा, एलएंडटी, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल और इटरनल टॉप गेनर्स थे। केवल पावरग्रिड ही लाल निशान में बंद हुआ।
जानकारों ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों ने वैश्विक गिरावट के बावजूद अपनी बढ़त का सिलसिला जारी रखा। इसकी वजह विदेशों में मची उथल-पुथल के बीच निवेशकों की ओर से घरेलू बाजार को एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में देखा जाना है।
जानकारों ने आगे कहा कि आज की रैली में बड़े निजी बैंक इसके सबसे बड़े लाभार्थी बनकर उभरे। उनकी मजबूत लिक्विडिटी और आकर्षक वैल्यूएशन ने उन्हें इस निवेश के लिए एक स्वाभाविक विकल्प बना दिया। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में साप्ताहिक गिरावट, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी और रुपए में मजबूती ने भारत के प्रति निवेशकों का आकर्षण और बढ़ा दिया है।
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कमजोर वैश्विक संकेतों से बाजार की फ्लैट शुरुआत, सेंसेक्स में 358 अंकों की बढ़त; आईटी शेयरों ने दिखाया दम

पिछले दिनों की लगातार शानदार तेजी के बाद, अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई तेज गिरावट के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुला।
बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,310.01 से 103.65 अंक यानी 0.13 प्रतिशत चढ़कर 79,413.66 पर खुला। हालांकि कुछ ही समय बाद इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 293.95 अंक यानी 0.37 प्रतिशत गिरकर 79,016.05 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि बाद के कारोबार में बाजार ने फिर से रिकवरी की और यह 358.36 अंकों यानी 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 79,668.37 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद भाव 24,536.60 की तुलना में 24,538.20 पर फ्लैट खुला और कुछ ही देर में इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 148.55 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 24,388.05 के दिन के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया। हालांकि बाद के कारोबार में इसने भी रिकवरी की और 108.55 अंक या 0.44 प्रतिशत चढ़कर 24,645.15 के दिन के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया।
इस बीच, व्यापक बाजारों में कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.89 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टोरल आधार पर सबसे ज्यादा दबाव मेटल शेयरों पर देखने को मिला, और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.7 प्रतिशत गिर गया। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में 1.56 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। केमिकल, ऑयल एंड गैस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में भी 1.34 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।
इसके विपरीत आईटी सेक्टर ने बाजार की धारणा को कुछ हद तक संभाला। निफ्टी आईटी करीब 2 प्रतिशत चढ़ गया। निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा, मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम, प्राइवेट बैंक और मीडिया शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बाजारों में आई भारी गिरावट का असर दुनिया के अधिकांश शेयर बाजारों पर दिखाई दे सकता है, लेकिन भारत पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। उनका कहना है कि नैस्डैक में 5.6 प्रतिशत की तेज गिरावट डेटा सेंटर निवेश में संभावित मंदी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कारोबार की विकास दर को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण आई।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तकनीकी शेयरों में आई गिरावट और एआई आधारित निवेश थीम की रफ्तार कम होने का भारतीय बाजार को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अन्य उभरते बाजारों की ओर बढ़ सकती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक बना हुआ है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने 35,781 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं। गुरुवार को उन्होंने लगातार पांचवें सत्र में 14,974 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार बिकवाली कर रहे हैं और गुरुवार को उन्होंने 10,444 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में जारी हालिया तेजी को मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों का समर्थन मिला है। खासकर लार्जकैप शेयरों में आकर्षक मूल्यांकन के कारण निवेशकों की खरीदारी बढ़ी है, जिससे बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 100.31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 91.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।
विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में वैश्विक बाजारों की अस्थिरता, कच्चे तेल की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और एफआईआई की खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक कारक बने हुए हैं।
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