Connect with us
Monday,12-October-2026
ताज़ा खबर

अंतरराष्ट्रीय समाचार

पीएम मोदी और जापानी समकक्ष ताकाइची भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल

Published

on

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को नई दिल्ली में अपनी जापानी समकक्ष साने ताकाइची के साथ 16वीं भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन-स्तर की बातचीत करेंगे। इस बैठक के दौरान दोनों पक्ष आपसी सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा करेंगे और उसे मजबूत करेंगे। इसके साथ ही दोनों नेता आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया जाएगा। पीएम ताकाइची बुधवार शाम को नई दिल्ली पहुंची और इसके साथ ही उनका तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा शुरू हुआ।

भारत के विदेश मंत्रालय ने जापानी पीएम का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का बहुत गर्मजोशी से स्वागत है, जो आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली आ रही हैं। पीएम ताकाइची का स्वागत एमओएस डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया। यह दौरा भारत और जापान के बीच रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने में एक जरूरी कदम है।”

इससे पहले दिन में, भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने कहा कि ताकाइची का दौरा दोनों पक्षों के लिए लोगों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने का एक बड़ा मौका होगा। ओनो केइची ने यह बात विदेश मंत्रालय की तरफ से होस्ट किए गए मानव संसाधन गतिशीलता फोरम के जापान सत्र के दौरान कही।

जापानी राजदूत ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से आयोजित किए गए मानव संसाधन गतिशीलता फोरम के जापान सत्र में बोलकर खुशी हुई। पीएम ताकाइची का दौरा लोगों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने का एक शानदार मौका होगा, जो हमारे गहरे और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की नींव है।”

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मानव संसाधन गतिशीलता फोरम के दौरान भारत और जापान के बीच सहयोग के उभरते रास्तों पर रोशनी डाली गई।

विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा, “स्किल बेस्ड मोबिलिटी में भारत-जापान सहयोग को बढ़ावा देना। मानव संसाधन गतिशीलता फोरम में मोबिलिटी में भारत और जापान के सहयोग के लिए उभरते रास्तों पर जोर दिया गया।”

भारत के लिए रवाना होने से पहले, साने ताकाइची ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात में भारत के साथ जापान के सहयोग की अहमियत पर जोर दिया।

पीएम ताकाइची ने बुधवार को टोक्यो में मीडिया से कहा, “इस दौरे के जरिए, मुझे उम्मीद है कि मैं प्रधानमंत्री मोदी के साथ तीन खास क्षेत्रों में ठोस सहयोग को आगे बढ़ा पाऊंगी: मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए जापान-भारत रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना; आर्थिक सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देना और निवेश और इनोवेशन में हमारे दोनों देशों के बिजनेस के बीच सहयोग को मजबूत करना।”

उन्होंने कहा, “इस दौरे के मौके पर, जापान-भारत संयुक्त आर्थिक फोरम होगा जिसमें 150 से ज्यादा जापानी कंपनियों और व्यवसायिक संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर काम करते हुए, मुझे उम्मीद है कि जापान-भारत सहयोग का दायरा बढ़ेगा और एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनेगी।”

पीएम ताकाइची ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी भारत और जापान की है। उन्होंने कहा कि वह फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) को साकार करने की कोशिशों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हैं।

उन्होंने कहा, “भारत, जापान के साथ, एशिया की लीडिंग डेमोक्रेसी में से एक है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी साझा करता है। इस बैकग्राउंड में, मैं प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) को पूरा करने की कोशिशों पर पूरी बातचीत करने का इंतजार कर रही हूं, जिसमें क्वाड फ्रेमवर्क के जरिए सहयोग भी शामिल है। आखिर में, क्योंकि यह दौरा पीएम मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है, मुझे यह भी उम्मीद है कि इससे हमारे बीच व्यक्तिगत भरोसे को और गहरा करने का मौका मिलेगा।”

अपने दौरे के दौरान, पीएम ताकाइची एक बिजनेस फोरम में भी शामिल होंगी। पद संभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

खेतों से स्कूलों तक फ्रांस में बेचैनी, महंगाई से लेकर एआई तक ने बढ़ाई चिंता

Published

on

भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार को दुनिया का ध्यान उन प्रदर्शनों और घटनाक्रमों की ओर दिलाया जिसका जिक्र संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने अपने उस बयान में नहीं किया था जो नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन के खिलाफ दिया गया था। एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था से कहा कि उन्हें अपने पास के क्षेत्रों पर भी नजर दौड़ानी चाहिए। उन्होंने नाम नहीं लिया लेकिन इन पास के क्षेत्रों में से एक फ्रांस भी है, जहां पिछले कुछ दिनों से बवाल मचा हुआ है।

फ्रांस को अक्सर बेहतर जीवन स्तर, मजबूत सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा वाले देश के रूप में देखा जाता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से तस्वीर वैसी नहीं रही है। बच्चे अपनी शिक्षण व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं, किसान सूखे की मार से परेशान हैं, अस्पतालों में संसाधनों का दबाव है, परिवार महंगाई से जूझ रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फ्रांसीसी अखबार ‘ले मोंद’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक दबाव, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक सेवाओं की कमजोर स्थिति और राजनीतिक अनिश्चितता एक-दूसरे से जुड़कर लोगों की बेचैनी बढ़ा रहे हैं। यह असंतोष किसी एक वर्ग या समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है।

फ्रांस में हाल के दिनों में हाईस्कूल के विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शनों ने विशेष ध्यान खींचा है। विद्यार्थियों की शिकायत है कि कई स्कूलों में इमारतों की हालत खराब है, कक्षाओं में जरूरत से ज्यादा छात्र हैं और अनुपस्थित शिक्षकों की जगह दूसरे शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो पाती।

रिपोर्ट बताती है कि, फ्रांस में माध्यमिक स्तर पर फ्रेंच भाषा की एक कक्षा में औसतन 29 विद्यार्थी होते हैं, जबकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों का औसत 26 है। कुछ शहरी स्कूलों में एक कक्षा में 36 या उससे अधिक विद्यार्थी होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

समस्या केवल कक्षा के आकार की नहीं है। कुछ स्कूलों में छत से पानी टपकने, शौचालयों की खराब स्थिति, बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं होने और गर्मियों में कक्षाओं का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाने की शिकायतें हैं। कई विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।

दिलचस्प बात यह है कि फ्रांस हाईस्कूल शिक्षा पर ओईसीडी के औसत से अधिक खर्च करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च माध्यमिक शिक्षा पर उसका खर्च ओईसीडी के औसत से 28 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद संसाधनों के वितरण, शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे यह बहस तेज हुई है कि अधिक खर्च करने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था सभी विद्यार्थियों को समान अवसर क्यों नहीं दे पा रही है।

फ्रांस की अर्थव्यवस्था और उसकी सामाजिक पहचान में कृषि की अहम भूमिका है। लेकिन किसानों के सामने भी चुनौतियां बढ़ रही हैं। सूखा, भीषण गर्मी, जलवायु परिवर्तन और खेती में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की बढ़ती कीमतें उनकी आय पर दबाव डाल रही हैं।

खेती के लिए जरूरी ऊर्जा, खाद और अन्य सामान महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ती है। दूसरी ओर, मौसम की अनिश्चितता फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि अगली फसल से उन्हें पर्याप्त कमाई होगी या नहीं।

जलवायु परिवर्तन का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। फ्रांस में गर्मी की लहरों और जंगलों में आग की घटनाओं ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं। बढ़ते तापमान से खेती, पानी की उपलब्धता और लोगों के स्वास्थ्य पर एक साथ दबाव पड़ सकता है।

इस तरह किसानों की परेशानी केवल कृषि नीति का विषय नहीं रह जाती। इसका संबंध खाद्य पदार्थों की कीमतों, ग्रामीण रोजगार और आम परिवारों के घरेलू बजट से भी है।

फ्रांस में परिवारों के सामने जीवनयापन की लागत एक बड़ी चिंता बन रही है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें, महंगे आवास और रोजमर्रा के खर्च लोगों की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।

जब आय की तुलना में जरूरी खर्च तेजी से बढ़ते हैं, तो परिवारों के पास बचत, बच्चों की शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिए कम पैसा बचता है। जिन लोगों की आय पहले से सीमित है, उनके लिए यह स्थिति और कठिन हो सकती है।

आर्थिक दबाव का असर केवल व्यक्तिगत जीवन पर नहीं पड़ता। जब बड़ी संख्या में परिवार भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं, तो सरकारी नीतियों, सार्वजनिक सेवाओं और राजनीतिक नेतृत्व के प्रति असंतोष भी बढ़ सकता है।

तकनीकी विकास ने फ्रांस सहित दुनिया के कई देशों में उत्पादकता बढ़ाने और नए काम पैदा करने की संभावनाएं खोली हैं। लेकिन एआई के तेजी से विस्तार ने रोजगार की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी पैदा की हैं।

एआई आधारित उपकरण कई ऐसे काम कर सकते हैं, जिनके लिए पहले इंसानी श्रम की जरूरत होती थी। इससे कुछ क्षेत्रों में काम करने के तरीके बदल सकते हैं और कर्मचारियों को नए कौशल सीखने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, कुछ नौकरियों की मांग घटने या रोजगार के स्वरूप में बदलाव आने की आशंका भी है।

वहीं, फ्रांस की सामाजिक व्यवस्था में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन अस्पतालों के कर्मचारियों पर काम का बढ़ता बोझ, संसाधनों की कमी और कामकाज की परिस्थितियों को लेकर असंतोष भी सामने आ रहा है।

जब शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी सार्वजनिक सेवाओं में समस्याएं एक साथ दिखाई देती हैं, तो नागरिकों के मन में यह सवाल उठता है कि सरकार उनकी बुनियादी जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा कर पा रही है।

यह चुनौती ऐसे समय में और जटिल हो जाती है, जब सरकार के सामने बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज और सीमित बजट के बीच खर्च की प्राथमिकताएं तय करने का दबाव हो। एक ओर नागरिक बेहतर सेवाओं की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार को उपलब्ध संसाधनों के भीतर कई प्रतिस्पर्धी जरूरतों का समाधान खोजना पड़ता है।

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय समाचार

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले की भारत ने की न‍िंदा, दो भारतीय लापता

Published

on

होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों पर हमले की भारत ने कड़ी आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में दो भारतीय नाविक लापता हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों में जहाज ‘एमटी पेट्रो डॉल्फिन’ पर सवार 11 में से 9 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, जबकि दो लापता हैं। ‘एमटी वाल्थेरा’ पर सवार सभी 11 भारतीय सुरक्षित हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर इस घटना की जानकारी साझा की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में दो जहाजों पर हमला बेहद निंदनीय है। उन्होंने बताया क‍ि इन हमलों में दो भारतीय नाविक लापता हो गए हैं।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमले तुरंत बंद होने चाहिए। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से समुद्री व्यापार का निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मंत्रालय ने बताया कि जहाज ‘एमटी पेट्रो डॉल्फिन’ पर उस समय 11 भारतीय नाविक सवार थे, जब जहाज पर ड्रोन हमला हुआ। इनमें से 9 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन दो नाविक अब भी लापता हैं।

वहीं, ‘एमटी वाल्थेरा’ पर सवार 11 भारतीय सुरक्षित हैं। जहाज को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल (हथियार) से निशाना बनाया गया था, लेकिन सभी भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं। इससे पहले से ही तनावपूर्ण हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।

मंत्रालय ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से व्यापार का सुरक्षित व बिना किसी रुकावट के जारी रहना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय समाचार

ट्रंप अगले महीने आसियान और एपेक शिखर सम्मेलनों में होंगे शामिल, मनीला से जाएंगे चीन

Published

on

व्हाइट हाउस ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने फिलीपींस की राजधानी मनीला में होने वाले ‘एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस’ (आसियान) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वह चीन में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपेक) शिखर सम्मेलन में शामिल होने जाएंगे।

व्हाइट हाउस ने रविवार को न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि ट्रंप 16 नवंबर को मनीला में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके बाद वह चीन के शेनझेन जाएंगे, जहां 17 से 19 नवंबर तक एपेक सम्मेलन होगा।

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस यात्रा का मकसद दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिका की अपने सहयोगी देशों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाना और अमेरिकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में ट्रंप की मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने की संभावना है। इस साल दोनों नेताओं की यह तीसरी आमने-सामने की बैठक हो सकती है। इससे पहले मई में बीजिंग में दोनों की मुलाकात हुई थी जबकि पिछले महीने शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस का दौरा किया था।

इस साल आसियान की अध्यक्षता कर रहे फिलीपींस ने 49वें आसियान शिखर सम्मेलन और उससे जुड़े कार्यक्रमों के लिए 16 से 18 नवंबर तक मेट्रो मनीला में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इन कार्यक्रमों में ईस्ट एशिया समिट भी शामिल है, जिसमें भारत और अमेरिका दोनों सदस्य हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जुलाई में ही राष्ट्रपति की इस सम्मेलन में रुचि का संकेत दिया था, जब वह मनीला में आसियान देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे। उस समय रुबियो ने पत्रकारों से कहा था, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप जाना चाहेंगे। हालांकि, मैं फिलहाल उनका कार्यक्रम नहीं जानता।”

सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने का निमंत्रण दोबारा दिया था। मार्कोस ने उस मुलाकात के बाद जारी बयान में कहा था, “मैं नवंबर में मनीला में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं।”

अगर मनीला में मोदी और ट्रंप की मुलाकात होती है, तो यह ऐसे समय में होगी जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के संबंध शुल्क (टैरिफ) और भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद को लेकर कुछ तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कुआलालंपुर में आयोजित आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया था। वहीं ईस्ट एशिया समिट में उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भेजा था। उस समय ट्रंप स्वयं सम्मेलन में मौजूद थे और दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हुई थी।

दोनों नेताओं की आखिरी बातचीत 30 सितंबर को टेलीफोन पर हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उस बातचीत को ‘सार्थक’ बताया था।

इस बीच, 18 अक्टूबर एक महत्वपूर्ण तारीख मानी जा रही है। लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 की धारा 113 के तहत राष्ट्रपति को यह फैसला लेना है कि रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए या नहीं। 2022 के बाद से भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है।

हालांकि, कानून में यह भी प्रावधान है कि अमेरिकी राष्ट्रपति यदि कांग्रेस को यह भरोसा दिला दें कि शुल्क में छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, तो वे इस कार्रवाई को टाल सकते हैं।

Continue Reading
Advertisement
राष्ट्रीय समाचार10 hours ago

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने पर अभिजीत दिपके का हमला, बोले-सरकार को विरोध की आवाज से दिक्कत

खेल10 hours ago

भारत बनाम वेस्टइंडीज: आईसीसी ने पॉवेल और रदरफोर्ड को फटकारा, खाते में डिमेरिट अंक भी जुड़ा

राष्ट्रीय समाचार10 hours ago

वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में मिले-जुले रह सकते हैं नतीजे, चुनिंदा क्षेत्रों में मांग मजबूत : रिपोर्ट

व्यापार10 hours ago

सस्ते में सोना और चांदी खरीदने का मौका; कीमतें करीब 1,400 रुपए तक घटीं

अपराध10 hours ago

ओडिशा से रायपुर लाया जा रहा 23.5 किलो गांजा जब्त, चार तस्कर गिरफ्तार

राष्ट्रीय समाचार10 hours ago

झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की तीन परीक्षाओं की नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर फैसला सुरक्षित रखा

राजनीति11 hours ago

देशभर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए आंदोलन होगा: इंडिया ब्लॉक

अंतरराष्ट्रीय समाचार11 hours ago

खेतों से स्कूलों तक फ्रांस में बेचैनी, महंगाई से लेकर एआई तक ने बढ़ाई चिंता

व्यापार12 hours ago

वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम में हुई 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी, रिकॉर्ड 1.47 लाख करोड़ रुपए का कारोबार

खेल12 hours ago

शंघाई मास्टर्स: जीत के बाद कैस्पर रूड और ऑगर-एलियासिम के बीच ‘राउंड ऑफ 16’ का मुकाबला तय

बॉलीवुड2 weeks ago

टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में 10 साल बाद कोर्ट ने बॉयफ्रेंड पर सुनाया फैसला

अपराध4 days ago

दिल्ली पुलिस ने मकोका के दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया, 30 लाख रुपए बरामद

खेल4 weeks ago

14 जनवरी से होगा डब्ल्यूपीएल 2027 का आगाज, 28 अक्टूबर को कोच्चि में होगी खिलाड़ियों की नीलामी

राजनीति3 days ago

“आप” का आरोप: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली छावनी में तब्दील

मनोरंजन4 weeks ago

‘बिग बॉस 20’ में एक तरफ अरिश्फा का गुस्सा, दूसरी तरफ रीति तिवारी के आंसू, बोलीं- ‘मेरे खिलाफ गए तो लड़ूंगी’

राष्ट्रीय समाचार3 weeks ago

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार को मिला सपोर्ट, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा; फार्मा, एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में तेजी

राजनीति2 weeks ago

अखिलेश यादव का चुनावी ऐलान : सत्ता में आए तो पुरानी पेंशन बहाल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने का वादा

व्यापार1 week ago

गांधी जयंती के चलते भारतीय शेयर बाजार बंद, एनएसई और बीएसई पर नहीं होगा कारोबार

मनोरंजन3 weeks ago

अर्चना पूरन सिंह ने कॉमेडी का असली नियम बताया, कहा- साथी कलाकार को बेहतर बनाना जरूरी

अपराध3 weeks ago

पंजाब में 47 किलो हेरोइन और अवैध हथियारों के साथ 4 तस्कर गिरफ्तार, सीमा पार से जुड़े तार

रुझान