अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका में चीन से जुड़ी कंपनियों पर सख्त प्रतिबंध लगाने के लिए नया विधेयक पेश
अमेरिका में दो वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसदों ने चीन के सैन्य-औद्योगिक तंत्र से जुड़े चीनी संस्थानों पर प्रतिबंधों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक विधेयक पेश किया है। उनका कहना है कि अमेरिका अब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) से जुड़े खतरों के खिलाफ कार्रवाई में और देरी नहीं कर सकता।
सीनेटर रिक स्कॉट और प्रतिनिधि एलिस स्टेफानिक ने ‘सीसीपी सैंक्शंस शॉट क्लॉक एक्ट’ पेश किया। इस विधेयक के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को उन चीनी व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ एक साल के भीतर कार्रवाई करना जरूरी होगा, जिन्हें अमेरिकी सरकार ने सुरक्षा के लिए खतरा माना है।
इस विधेयक का मकसद वित्त वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन करना है। इसके तहत एक साल की ‘शॉट क्लॉक’ (समय सीमा) तय की जाएगी, जिसके भीतर पहचानी गई संस्थाओं को ट्रेजरी विभाग की ‘नॉन-एसडीएन चीनी सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स कंपनियों की सूची’ में शामिल करना होगा।
वर्तमान कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को हर दो साल में एक रिपोर्ट पेश करनी होती है, जिसमें उन चीनी नागरिकों या संस्थाओं की पहचान की जाती है जो अमेरिकी सरकारी सूचियों में शामिल हैं और जिन्हें एनएस-सीएमआईसी सूची में डाला जा सकता है। हालांकि, ट्रेजरी विभाग पर इस सूची को अपडेट करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा लागू नहीं है। वहीं, प्रस्तावित कानून इस व्यवस्था को बदल देगा।
विधेयक के मसौदे के अनुसार, राष्ट्रपति की ओर से उपधारा (ए) के तहत रिपोर्ट पेश करने के एक साल के भीतर ट्रेजरी सचिव ट्रेजरी सचिव संबंधित विदेशी नागरिकों को इस सूची में शामिल करना होगा और इसका संशोधित संस्करण ‘फेडरल रजिस्टर’ में प्रकाशित करना होगा।
स्कॉट ने कहा कि जैसे ही किसी संस्था की पहचान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में हो जाती है, अमेरिका को तुरंत उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। स्कॉट ने कहा, “सीसीपी के सैन्य हितों के लिए काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को इस देश में कारोबार करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन है और अब हमें जागकर उसी के अनुरूप कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “जब किसी व्यक्ति की पहचान हमारी सुरक्षा और हमारी जीवनशैली के लिए खतरे के रूप में हो जाती है, तो हमें उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। यह विधेयक इसी कमी को दूर करता है।”
स्टेफानिक ने कहा कि यह बिल रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका मकसद चीन के सैन्य विस्तार से जुड़ी चीनी कंपनियों पर अमेरिका की आर्थिक निर्भरता को कम करना है।
उन्होंने कहा, “यह एक व्यावहारिक कानून है, जो यह सुनिश्चित करता है कि ट्रेजरी विभाग अब कम्युनिस्ट चीन के दुर्भावनापूर्ण प्रभाव और सैन्य विस्तार से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई में और देरी न कर सके।”
स्टेफानिक ने आगे कहा, “पिछले साल कांग्रेस ने प्रशासन से उन चीनी कंपनियों पर रिपोर्ट देने को कहा था जो बढ़े हुए प्रतिबंधों के दायरे में आती हैं। सीसीपी-सैंक्शंस शॉट क्लॉक एक्ट यह सुनिश्चित करेगा कि इन कंपनियों पर उतनी ही तेजी से प्रतिबंध लगाए जाएं, जितनी तेजी से अमेरिका को जवाब देने की जरूरत है।”
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मिशिगन में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं पर राजनीतिक दलों की नजर, ट्रंप करेंगे रैली

मिशिगन में रहने वाला भारतीय-अमेरिकी समुदाय, जो राज्य का सबसे बड़ा एशियाई समुदाय है, मिडटर्म चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में राजनीतिक दलों के लिए अहम बन गया है। यह राज्य कांग्रेस में सत्ता संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ऐसे में एशियाई-अमेरिकी राजनीतिक संगठन भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रविवार को मिशिगन के पोर्ट ह्यूरॉन में अपने समर्थकों को संबोधित करने वाले हैं।
व्हाइट हाउस के कार्यक्रम के अनुसार, ट्रंप रविवार को पोर्ट ह्यूरॉन के मैकमोरन प्लेस में रैली करेंगे। यह लगातार तीन दिनों में उनकी तीसरी चुनावी रैली होगी। इससे पहले वह शुक्रवार को फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स और शनिवार को जॉर्जिया के पेरी में कार्यक्रम कर चुके हैं।
ओकलैंड यूनिवर्सिटी के छात्र समाचार पत्र ‘द ओकलैंड पोस्ट’ के अनुसार, एशियाई-अमेरिकी उम्मीदवारों और मतदाताओं का समर्थन करने वाली सुपर पीएसी ‘एएपीआई विक्ट्री फंड’ ने 17 अक्टूबर को डेट्रॉइट के गॉडफ्रे होटल में एक कार्यक्रम आयोजित किया। द ओकलैंड पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन और राज्य की विदेश मंत्री जोसलिन बेन्सन, जो गवर्नर पद की डेमोक्रेट उम्मीदवार हैं, शामिल हुईं।
समूह की अध्यक्ष लिन्ह गुयेन ने अखबार से कहा, “हमने सुपर पीएसी इसलिए बनाई क्योंकि एशियाई मतदाताओं और एशियाई उम्मीदवारों के समर्थन के लिए पर्याप्त राजनीतिक फंडिंग नहीं थी।” उन्होंने कहा कि मिशिगन और जॉर्जिया जैसे राज्य, जहां एशियाई-अमेरिकी आबादी अच्छी संख्या में है और जहां चुनावी मुकाबला कड़ा रहता है, संगठन के लिए अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।
गुयेन ने कहा, “हम अब्दुल एल-सय्यद जैसे उम्मीदवारों को वोट दे सकते हैं और इस पर गर्व भी कर सकते हैं।” उन्होंने यह बात डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार अब्दुल एल-सय्यद के संदर्भ में कही। समूह ने मिशिगन में जिन नेताओं का समर्थन किया है, उनमें अब्दुल एल-सय्यद, जोसलिन बेन्सन, लेफ्टिनेंट गवर्नर गार्लिन गिलक्रिस्ट द्वितीय और भारतीय मूल के विधायक रंजीव पुरी शामिल हैं।
‘एएपीआईडेटा’ की एक जानकारी के अनुसार, मिशिगन में करीब 1,38,644 भारतीय-अमेरिकी रहते हैं, जो राज्य का सबसे बड़ा एशियाई समुदाय है। वहीं राज्य में लगभग 1,23,545 एशियाई-अमेरिकी मतदाता मतदान के पात्र हैं।
मिशिगन में भारतीय-अमेरिकी आबादी मुख्य रूप से ओकलैंड काउंटी के उपनगरीय इलाकों जैसे ट्रॉय, नोवी, कैंटन और फार्मिंगटन हिल्स में रहती है। ये इलाके प्रतिस्पर्धी कांग्रेस क्षेत्रों के भीतर या आसपास आते हैं। मिशिगन से भारतीय मूल के एकमात्र अमेरिकी सांसद श्रीथानेदार हैं, जो डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं और डेट्रॉइट आधारित 13वें कांग्रेसनल जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पोर्ट ह्यूरॉन, जो सेंट क्लेयर काउंटी में स्थित है, राज्य के उस क्षेत्र में आता है जहां आमतौर पर रिपब्लिकन पार्टी का प्रभाव ज्यादा माना जाता है। हाल के चुनावों में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का झुकाव आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी ने भी कुछ प्रवासी समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है।
इस चुनावी चक्र में दोनों प्रमुख दल ऐसे माहौल में मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जहां एच-1बी वीजा नियमों में सख्ती और सोशल मीडिया पर बढ़ती भारत-विरोधी टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मिशिगन के मतदाता तीन नवंबर को गवर्नर, अमेरिकी सीनेटर और राज्य के सभी 13 प्रतिनिधि सभा (हाउस) सदस्यों का चुनाव करेंगे।
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जर्मन कंपनियों के लिए भारत में निवेश, विनिर्माण और नवाचार के बड़े अवसर: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में कई प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं के साथ बैठकों के दौरान कहा कि भारत जर्मन कंपनियों के लिए निवेश, विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्र में अपार अवसर प्रदान करता है। उन्होंने जोर दिया कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के पास विश्वास, प्रतिस्पर्धात्मकता और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं पर आधारित एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने का सुनहरा अवसर है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने फ्रेसेनियस ग्रुप के सीईओ माइकल सेन के साथ भी बैठक की। दोनों पक्षों ने भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा सेवाओं की मांग तथा मजबूत विनिर्माण क्षमता का लाभ उठाकर सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
गोयल ने कहा कि भारत की कुशल प्रतिभा और विश्वस्तरीय उत्पादन क्षमता का उपयोग कर जर्मन कंपनियां न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक बाजारों की जरूरतों को भी पूरा कर सकती हैं।
उन्होंने एक्स पर लिखा, “फ्रेसेनियस ग्रुप के सीईओ श्री माइकल सेन के साथ एक सार्थक बैठक हुई। भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा समाधानों की बढ़ती मांग और मजबूत विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाते हुए, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा की गई। यह भी पता लगाया गया कि कंपनी अपने कुशल कर्मचारियों और विश्व स्तरीय उत्पादन क्षमताओं का उपयोग करके घरेलू और वैश्विक बाजारों को कैसे सेवाएं प्रदान कर सकती है।”
इसके अलावा, उनकी स्टीफन ओएलरिख, जो बेयर के फार्मास्यूटिकल्स डिवीजन के अध्यक्ष हैं, के साथ सार्थक चर्चा हुई। इस दौरान भारत में बेयर की विस्तार योजनाओं और देश के तेजी से विकसित हो रहे स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक निवेश, नवाचार और सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने बर्लिन में नॉफ ग्रुप के ग्लोबल जनरल पार्टनर मुरात अकयिलदिज के साथ भी बैठक की, जिसमें भारत में कंपनी के बढ़ते विनिर्माण विस्तार, टिकाऊ निर्माण सामग्री और बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। यह सहयोग भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण और आर्थिक परिवर्तन के अनुरूप माना जा रहा है।
इससे पहले गोयल ने जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (डीजीएपी) के इंडिया सेंटर के उद्घाटन समारोह में भाग लिया। इस कार्यक्रम में जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे भी मौजूद थीं।
अपने संबोधन में गोयल ने कहा कि यह केंद्र भारत-जर्मनी संबंधों की बढ़ती मजबूती और दोनों देशों की सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “हमारी पूरक ताकतें महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता इस साझेदारी को और अधिक गति देने का काम करेगा।”
मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और जर्मनी मिलकर वैश्विक स्तर पर मजबूत और लचीली वैल्यू चेन विकसित कर सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों से परस्पर विकास और समृद्धि के लिए नए सहयोगी अवसर तलाशने का आह्वान किया।
बर्लिन स्थित ईएसएमटी बर्लिन द्वारा आयोजित बिजनेस लीडर्स राउंडटेबल में भी गोयल ने कई प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और जर्मनी के बीच व्यापारिक और आर्थिक साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।
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राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन ईरान को रोकना भी जरूरी: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ आगे भी सैन्य कार्रवाई संभव है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस युद्ध का असर आगामी कांग्रेस चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान के रूप में झेलना पड़ सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि इस संघर्ष का चुनावी अभियान पर क्या असर पड़ा है, तो ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिकी जनता की राय बंटी हुई है। युद्ध का असर आने वाले कांग्रेस चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक रूप से झेलना पड़ सकता है, लेकिन उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी था।
ट्रंप ने वाशिंगटन से रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, “एक तरह से लोग इसे पसंद करते हैं क्योंकि मैं वही कर रहा हूं जो पहले के राष्ट्रपतियों को बहुत पहले कर देना चाहिए था। दूसरी तरफ, कुछ लोग शायद इसे पसंद न करें।”
उन्होंने कहा, “इसके लिए एक राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है और मुझे यह बात तभी समझ आ गई थी जब मैंने यह फैसला लिया। लेकिन हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते।”
हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या वह किसी नए सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं, संभावित टारगेट कौन हो सकते हैं या ऐसा कदम कब उठाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “ईरान युद्ध में हमने उन्हें काफी बड़ा नुकसान पहुंचाया है और हो सकता है कि हम आगे भी कुछ और करें।”
उनका यह बयान आगे किसी कार्रवाई की संभावना का संकेत था, लेकिन इसे किसी नए अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने ईरान को हुए नुकसान का जिक्र तो किया, लेकिन इसके साथ कोई सैन्य ब्रीफिंग या आधिकारिक आंकड़े पेश नहीं किए।
ट्रंप का कहना था कि भले ही कुछ लोग इस अभियान का विरोध करते हों, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इसका समर्थन भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “एक तरह से लोग शायद इसे पसंद नहीं करते, लेकिन बहुत से लोग, बहुत से देशभक्त इसे सही मानते हैं। यह काम पहले के राष्ट्रपतियों को काफी पहले कर देना चाहिए था।”
इसी बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके समर्थक मतदान के लिए कितनी संख्या में बाहर निकलते हैं।
इस बीच, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी कि बढ़ते संघर्षों का असर अब उन देशों से कहीं आगे तक पहुंच रहा है जहां लड़ाई चल रही है।
गुटेरेस ने कहा कि ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्ग, आपूर्ति श्रृंखलाएं और वित्तीय व्यवस्थाएं ऐसे माध्यम बन गए हैं जिनके जरिए युद्ध का असर दुनिया भर के आम लोगों तक पहुंच रहा है।
गुटेरेस ने संघर्ष रोकने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि वह शुक्रवार को मिस्र की यात्रा पर जाएंगे। जब उनसे इस यात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मिस्र, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले देशों में से एक है। हालांकि उन्होंने किसी संभावित समझौते, सफलता या अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों की बैठक की घोषणा नहीं की।
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