राष्ट्रीय समाचार
अंतरिक्ष एजेंसियों व तकनीकी साझेदारों से जुड़ेगी उच्च शिक्षा संस्थानों की रिसर्च
भारत अपने नवाचार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा। शिक्षा मंत्रालय की पहल पर फ्रांस में भारतीय आईआईटी, विश्वविद्यालय व अन्य संस्थानों की रिसर्च वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित की जाएगी। यहां भारतीय नवउद्यम वैश्विक निवेशकों, अंतरिक्ष एजेंसियों और तकनीकी साझेदारों से जुड़ेंगे।
भारत इनोवेटस 2026 एक ग्लोबल एक्सेलेरेटर के रूप में 100 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स और प्रमुख संस्थानों को 13 अत्याधुनिक क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से जोड़ रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत के उच्च शिक्षण संस्थान अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये संस्थान नवाचार, उद्यमिता और गहन प्रौद्योगिकी अनुसंधान के शक्तिशाली केंद्र बनकर उभर रहे हैं।
शोध प्रयोगशालाओं से लेकर रिसर्च सेंटर्स और नवउद्यम सहायता केंद्रों तक, देश के विश्वविद्यालय तेजी से बढ़ते नवउद्यम तंत्र को दिशा दे रहे हैं। इसी सोच को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारत इनोवेटस 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े नवउद्यमों, शोधकर्ताओं और युवा नवप्रवर्तकों को दुनिया भर के निवेशकों, उद्योग जगत, विश्वविद्यालयों और नवाचार साझेदारों से जोड़ने का बड़ा मंच बनेगी।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की दूरदर्शी सोच को आगे बढ़ाती है। इसमें नवाचार आधारित शिक्षा, बहु-विषयक अनुसंधान और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि भारत के युवा नवप्रवर्तक अब केवल देश की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए समाधान विकसित कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि “भारत इनोवेट्स 2026” में भारत की अग्रणी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी ध्रुव स्पेस भी भाग लेगी। हैदराबाद स्थित यह कंपनी भारत की पहली निजी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल है और पूर्ण अंतरिक्ष अभियांत्रिकी समाधान उपलब्ध करा रही है। कंपनी उपग्रह मंच, सौर पैनल और प्रक्षेपण सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है। यह नागरिक और रक्षा दोनों क्षेत्रों के लिए सेवाएं प्रदान कर रही है। कंपनी ने भारत सरकार को अंतरिक्ष गुणवत्ता वाले सौर पैनल उपलब्ध कराए हैं।
वहीं विदेशों की बात करें तो कंपनी ने संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया तथा फ्रांस जैसे देशों को निर्यात भी किया है। इससे ‘मेड इन इंडिया’ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की वैश्विक क्षमता और विश्वसनीयता साबित हुई है। एक जानकारी में शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि ध्रुव स्पेस अब तक विभिन्न निवेश चरणों के माध्यम से 21 मिलियन डॉलर से अधिक की पूंजी जुटा चुका है और तेजी से आगे विस्तार कर रहा है।
कंपनी वर्ष 2026 के अंत तक सिंथेटिक एपर्चर रडार आधारित उपग्रह समूह विकसित करने पर काम कर रही है। यह प्रणाली हर मौसम में चौबीसों घंटे उच्च गुणवत्ता वाली पृथ्वी निगरानी और चित्रण सुविधा प्रदान करेगी, जिसका उपयोग रणनीतिक और रक्षा उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत इनोवेट 2026 के माध्यम से भारत अपने नवाचार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सामर्थ्य को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा। यह आयोजन 14 से 16 जून 2026 तक फ्रांस के नीस शहर में आयोजित होगा। यहां भारतीय नवउद्यम वैश्विक निवेशकों, अंतरिक्ष एजेंसियों और तकनीकी साझेदारों से जुड़ेंगे। सरकार का कहना है कि भारत की अंतरिक्ष क्रांति अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है और दुनिया जल्द ही भारतीय युवाओं द्वारा विकसित अत्याधुनिक तकनीकों का प्रभाव देखेगी।
राष्ट्रीय समाचार
सरकार ने कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को उपलब्ध पूरी क्षमता पर चलाने का दिया निर्देश

बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिजली मंत्रालय ने बिजली अधिनियम की धारा 11 लागू करते हुए 50 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता वाले कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अधिकतम बिजली उत्पादन करने का निर्देश दिया है।
मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय मौजूदा मांग-आपूर्ति की स्थिति और बिजली की खपत में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, देशभर के उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।
बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत सरकार को असाधारण परिस्थितियों में बिजली उत्पादन कंपनियों को आधिकारिक निर्देशों के अनुरूप अपने बिजली संयंत्र संचालित करने का निर्देश देने का अधिकार है।
इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मंत्रालय ने पात्र कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए बिजली उत्पादन करने को कहा है।
मंत्रालय ने कहा कि देश में बिजली की कुल उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए कैप्टिव बिजली संयंत्रों समेत बिजली उत्पादन के सभी स्रोतों की क्षमता का पूरी तरह उपयोग करना जरूरी है।
निर्देशों के अनुसार, बिजली उत्पादकों को अपनी कैप्टिव जरूरतें पूरी करने के बाद बची हुई बिजली को लागू बाजार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत पावर एक्सचेंजों पर बेचने की पेशकश करनी होगी।
इस कदम से बाजार में बिजली की उपलब्धता बढ़ने और पीक डिमांड को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह आदेश 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान बिजली उत्पादन कंपनियों को पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो और अधिकतम बिजली उत्पादन जारी रखा जा सके।
निगरानी को सुगम बनाने के लिए मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इन रिपोर्टों में बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंजों और अन्य स्वीकृत माध्यमों से बिजली की बिक्री, उपलब्ध उत्पादन क्षमता तथा कोयला भंडार के स्तर की जानकारी शामिल होगी।
सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से देशभर में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और साल की अंतिम तिमाही में बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके तहत अतिरिक्त कैप्टिव बिजली उत्पादन क्षमता को ग्रिड में लाया जाएगा।
राष्ट्रीय समाचार
असम में सीजेपी की बैठक से पहले कार्रवाई, आशुतोष रांका समेत 30 से ज्यादा कार्यकर्ता हिरासत में

गुवाहाटी में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के 30 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को रविवार को असम पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें पार्टी की केंद्रीय समिति के चार सदस्य भी शामिल थे। ये सभी पार्टी के क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक के लिए इकट्ठा हुए थे।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कार्यक्रम एक निजी जगह पर होने वाली शांतिपूर्ण बैठक थी, फिर भी पुलिस ने रविवार सुबह से ही कार्रवाई शुरू कर दी।
रांका ने आरोप लगाया, “पुलिस रविवार सुबह से ही गुंडों की तरह व्यवहार कर रही थी। यह एक निजी जगह पर हो रही शांतिपूर्ण बैठक थी लेकिन पुलिस हमारी टीम के सदस्यों को हिरासत में लेती रही और अब हम सभी को हिरासत में ले लिया गया है।”
पार्टी के क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक शुरू में रविवार सुबह 10 बजे अठगांव में खड़गा चौधरी रोड पर स्थित ‘असम श्री परशुराम सेवा सदन’ में होनी थी। बाद में आयोजकों ने जगह बदलकर इसे असम सचिवालय के सामने ‘चौधरी टीला’ कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल स्थान के प्रबंधन पर बुकिंग रद्द करने का दबाव डाला गया था।
अंकित भारद्वाज, आकाश प्रेम, वरुण अग्रवाल और अनाम समेत सीजेपी के दूसरे सदस्यों के साथ शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे रांका ने पहले ही कहा था कि वेन्यू (कार्यक्रम स्थल) रद्द होने से पार्टी को असम में अपना कार्यक्रम करने से नहीं रोका जा सकेगा।
हिरासत में लिए जाने से पहले रांका ने असम सरकार पर आरोप लगाया कि वह पार्टी को राज्य से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने से रोकने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी सरकारी स्कूलों की हालत, जिसे उन्होंने ‘इंसानों की वजह से आई बाढ़’ बताया था, उसके असर और दूसरे जन-मुद्दों को उजागर करना चाहती थी।
रांका ने कहा, “सीएम हिमंता सरमा को डर है कि हम यहां के स्कूलों की हालत, इंसानों की वजह से आई बाढ़ की सच्चाई और दूसरे मुद्दों को उजागर कर देंगे। इसीलिए वे हमें धमका रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि हम किस मिट्टी के बने हैं। जब तक हम उनका पर्दाफाश नहीं कर देते, तब तक हम रुकेंगे नहीं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सुबह से ही सीजेपी के सदस्यों को रोका और उन्हें धमकाया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पार्टी अपनी गतिविधियां जारी रखेगी। रविवार दोपहर तक असम पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या की पुष्टि करने या हिरासत में लेने के कारणों के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सीजेपी असम में अपनी संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तार करने की कोशिश कर रही है; क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक का मकसद राज्य में पार्टी के समर्थकों और सदस्यों को एक साथ लाना था।
अपराध
सीबीआई ने गुजरात के 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने रविवार को बताया कि यह कार्रवाई उन सिंडिकेट्स (गिरोहों) के खिलाफ सीबीआई की लगातार चल रही मुहिम का हिस्सा है, जो देशभर के नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
एजेंसी के अनुसार, सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अपराधों पर देशव्यापी कार्रवाई को तेज करते हुए 10 राज्यों में 22 जगहों पर एक साथ तलाशी ली। इसी कड़ी में गुजरात के एक बड़े डिजिटल अरेस्ट मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस मामले में पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया था। साइबर अपराधियों ने पुलिस और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अधिकारी बनकर पीड़ित को 11.42 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास के रूप में हुई है। सीबीआई जांच के दौरान दोनों आरोपियों की अपराध से मिली रकम प्राप्त करने, उसकी लेयरिंग (कई खातों में घुमाने) और उसे आगे भेजने में भूमिका का पता चला।
जांच से यह भी पता चला कि उन्होंने कथित तौर पर एक कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल पीड़ित से ठगे गए 11.42 करोड़ रुपए में से 2.5 करोड़ रुपए प्राप्त करने के लिए किया था। साथ ही, ये दोनों मनी ट्रेल को छिपाने के इरादे से इन फंड्स को अपने साथियों के कई खातों में ट्रांसफर करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।
जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी और दूसरे साइबर अपराधों से कमाए गए पैसे को निकालने के लिए बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल करने और एपीके फाइलें इंस्टॉल करने में शामिल थे। उनके पास से जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस से कई ऐसे चैट, मैसेज और दस्तावेज भी मिले हैं, जो अपराध में उनकी भूमिका साबित करते हैं।
मनी ट्रेल के विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर तलाशी की गई। इस दौरान आपत्तिजनक बैंकिंग दस्तावेज, खाते से संबंधित रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए गए। सीबीआई ने कहा कि इन सबूतों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि राज्यों की सीमाओं के पार चल रहे डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट्स के बड़े वित्तीय और तकनीकी ढांचे का पता लगाया जा सके।
एजेंसी ने जानकारी दी कि सीबीआई ने अलग-अलग राज्यों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के कई मामले अपने हाथ में लिए हैं। इनमें से चार मामलों में पिछले 30 दिनों में सीबीआई ने 22 राज्यों में 142 जगहों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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