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Monday,13-July-2026
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अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान को वापस पाषाण युग में भेज देंगे, ट्रंप की खुली चेतावनी

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TRUMP

वॉशिंगटन, 2 अप्रैल : ईरान के खिलाफ युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही भ्रमित दिख रहे हैं। वह कभी कहते हैं कि वह ईरान के विरुद्ध अपने अभियान को खत्म कर सकते हैं तो कहीं ईरान को धमकाते दिखते हैं। इस बीच उन्होंने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना कुछ ही हफ्तों में उन्हें पाषाण युग में वापस ले जा सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर से दावा किया है कि ईरान की सेना खत्म हो चुकी है। स्थानीय समयानुसार बुधवार को टीवी पर दिए भाषण में ट्रंप ने कहा कि “अभी सिर्फ एक महीना हुआ है, जब अमेरिकी सेना ने आतंक के दुनिया के नंबर वन स्पॉन्सर ईरान को टारगेट करते हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था।”

उन्होंने दावा किया कि लड़ाई के मैदान में तेजी से बढ़त हासिल की जा रही है।

उन्होंने कहा, “आज रात, ईरान की नेवी खत्म हो गई है। उनकी एयरफोर्स बर्बाद हो गई है। उनके नेता अब मर चुके हैं। ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता बहुत कम कर दी गई हैं और हथियार फैसिलिटी टुकड़ों में उड़ा दी गई हैं।”

उन्होंने इस कैंपेन को ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जरूरी बताया। ट्रंप ने कहा, “मैंने कसम खाई है कि मैं ईरान को कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं रखने दूंगा।” ट्रंप ने ईरान की मौजूदा सरकार को “धरती की सबसे हिंसक सरकार” कहा।

ऑपरेशन मिडनाइट हैमर और पहले के अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमने उन न्यूक्लियर साइट्स को पूरी तरह से खत्म कर दिया। ईरान ने कहीं और अपना प्रोग्राम फिर से बनाने की कोशिश की थी।”

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता और अपनी सीमाओं के बाहर ताकत दिखाने की उसकी काबिलियत को खत्म करना था। उन्होंने कहा, “ये मुख्य रणनीतिक मकसद पूरे होने वाले हैं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत फेल हो जाती है तो और तनाव बढ़ेगा और कहा, “अगले दो से तीन हफ्तों में, हम उन्हें स्टोन एज में वापस ले जाएंगे। अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट कर सकता है।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि ईरान के शासन में बदलाव तय मकसद नहीं था। ट्रंप ने कहा कि लीडरशिप में बदलाव पहले ही हो चुके हैं। सत्ता परिवर्तन हमारा मकसद नहीं था, लेकिन शासन में बदलाव उनके सभी असली नेताओं की मौत की वजह से हुआ है।”

राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनियाभर में तेल की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ऐसा कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए आतंकी हमलों की वजह से हुआ। उन्होंने मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर देशों से शिपिंग रूट सुरक्षित करने और इस इलाके पर निर्भरता कम करने की अपील की।

ट्रंप इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन जैसे क्षेत्रीय साथियों की सराहना करते हुए कहा कि वे अभियान में बहुत अच्छे साझेदार रहे हैं। ट्रंप ने अमेरिका की आर्थिक मजबूती पर भी जोर दिया और कहा कि देश दुनिया में तेल और गैस का नंबर एक प्रोड्यूसर है और लड़ाई से जुड़ी रुकावटों को झेल सकता है। उन्होंने 13 अमेरिकी सैनिकों के खोने की बात को स्वीकार किया और कहा कि उनके परिवारों ने उनसे काम पूरा करने की अपील की थी।

ऑपरेशन को ऐतिहासिक रूप से तेज बताते हुए, ट्रंप ने कहा कि इस कैंपेन ने सिर्फ एक महीने में एक बड़े खतरे को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, “हम अमेरिका और दुनिया के लिए ईरान के खतरनाक खतरे को खत्म करने की कगार पर हैं।”

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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

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तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।

फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।

ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।

इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।

ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”

आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।

इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।

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हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

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हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।

इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।

अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”

वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।

सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

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