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एलपीजी सप्लाई बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जारी, संकट के बीच आम नागरिकों को प्राथमिकता: नितिन खारा
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नागपुर, 13 मार्च : ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न हुए वैश्विक तनावों के बीच देश में एलपीजी आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित कंपनियां लगातार प्रयास कर रही हैं। इसी क्रम में कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन नितिन खारा ने न्यूज एजेंसी मीडिया से बात करते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण एलपीजी सप्लाई को लेकर चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन कंपनी की प्राथमिकता देश के डीलरों और उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति बनाए रखना है।
नितिन खारा ने मीडिया को बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में एलपीजी की सप्लाई को लेकर रोजाना स्थिति की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी रोज सुबह यह आकलन करती है कि उस दिन गैस की आपूर्ति किस तरह सुनिश्चित की जाए। दिनभर देश भर से डीलरों के फोन आते रहते हैं और कंपनी की पूरी कोशिश होती है कि हर डीलर तक समय पर गैस पहुंचाई जा सके। हालांकि उपलब्धता में कमी के कारण कुछ चुनौतियां सामने आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि एलपीजी आयात करने वाली कंपनियों के सामने फिलहाल एक बड़ी समस्या यह है कि दो एलपीजी वेसल समुद्री बंदरगाहों के पास रुके हुए हैं और वे न तो अंदर आ पा रहे हैं और न ही बाहर जा पा रहे हैं। इसके कारण नियमित आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर कंपनी हर महीने करीब 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी का आयात करती है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण इसमें व्यवधान आया है। फिलहाल लगभग 11,200 मीट्रिक टन एलपीजी का एक वेसल भारत पहुंच चुका है।
नितिन खारा ने आगे बताया कि इस खेप में से करीब 850 मीट्रिक टन गैस खाली करने की योजना थी, जबकि बाकी गैस को मलेशिया की कंपनी इक्विनोर के साथ हुए एक कमिटमेंट के तहत आपूर्ति करने की बात थी। हालांकि इस संबंध में कोई औपचारिक सेल-पर्चेज एग्रीमेंट नहीं हुआ था, लेकिन कंपनी अपने कमिटमेंट को निभाने के पक्ष में रहती है।
उन्होंने कहा कि इस बीच कई डीलरों ने कंपनी से अनुरोध किया कि यह गैस भारत के नागरिकों और घरेलू उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी इस बात पर विचार कर रही है कि उपलब्ध गैस का उपयोग देश में ही किया जाए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार की ओर से भी सुझाव दिया गया है कि यह गैस स्थानीय स्तर पर ही उतारी जाए ताकि आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
खारा ने आगे कहा कि यदि यह एलपीजी देश में ही उपलब्ध हो जाती है तो इससे कम से कम 12 से 13 दिनों तक अतिरिक्त गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे बाजार में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
नितिन खारा ने बताया कि मौजूदा वैश्विक हालात और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर आज ही हालात सामान्य हो जाएं तब भी पूरी स्थिति को सामान्य होने में लगभग चार महीने का समय लग सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि कई रिफाइनरियों को नुकसान हुआ है, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि पहले रिफाइनरियों में उत्पादन शुरू होगा, फिर उस गैस को एलपीजी वेसल के जरिए विभिन्न देशों तक पहुंचाया जाएगा। फिलहाल एलपीजी वेसल की भी भारी कमी है, जिससे आपूर्ति चक्र प्रभावित हो रहा है। उत्पादन, परिवहन और वितरण की पूरी प्रक्रिया सामान्य होने में समय लगेगा।
नितिन खारा ने भरोसा जताया कि सभी संबंधित कंपनियां और सरकारें मिलकर स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने की दिशा में काम कर रही हैं। उनका कहना है कि कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता यही है कि देश के आम नागरिकों तक एलपीजी की आपूर्ति बनी रहे और उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान वार्ता के चलते इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में दर्ज की गई उल्लेखनीय बढ़त

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरों से बाजार की धारणा मजबूत हुई, जिसके चलते इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
निफ्टी में सप्ताह के दौरान 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और आखिरी कारोबारी दिन यह 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,719 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 231 अंक या 0.31 प्रतिशत बढ़कर 75,415 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.24 प्रतिशत की तेजी रही।
एक विश्लेषक ने कहा, “बाजार में सुधार के बावजूद निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। ऊंचे स्तरों पर मजबूत खरीदारी नहीं दिखने से बाजार की तेजी सीमित रही।”
आईटी सेक्टर इस सप्ताह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन के कारण इसमें निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
रियल्टी, सीमेंट और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूती बनी रही, जबकि एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर कमजोर रहे। थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के असर से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की चिंता बनी रही।
मिडकैप इंडेक्स ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप100 में 1.36 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.41 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने और मध्य पूर्व में तनाव कम करने की लगातार कोशिशों से रुपए को भी समर्थन मिला।
हालांकि, बढ़ती इनपुट लागत और सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं के कारण घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड इस सप्ताह 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इससे लगातार बनी महंगाई, ऊंची ऊर्जा कीमतों और बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनी रह सकती हैं, जिसका असर वैश्विक लिक्विडिटी और जोखिम वाले निवेशों पर पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जबकि 23,400 से 23,300 का स्तर अहम सपोर्ट एरिया रहेगा।
वहीं, बैंक निफ्टी में 54,200 के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस देखा जा रहा है, जबकि 53,600 से 53,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है।
एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इस सप्ताह भी बड़े पैमाने पर बिकवाली करते रहे और कुल निकासी लगभग 7,570 करोड़ रुपए रही।
निवेशकों की नजर अब भारत के अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों पर है, जिससे यह संकेत मिल सकता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालिया कमजोरी अस्थायी है या लंबे समय तक रहने वाली है।
इसके अलावा, आरबीआई की जून मौद्रिक नीति और अमेरिका के कोर पीसीई आंकड़े भी बाजार के लिए अहम संकेतक रहेंगे। यदि पीसीई आंकड़े ज्यादा आते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे उभरते बाजारों में एफआईआई निवेश सीमित रह सकता है।
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मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला शेयर बाजार, ऑटो स्टॉक्स में खरीदारी

मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को तेजी के साथ खुला। सुबह 9:17 पर सेंसेक्स 161 अंक या 0.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,344 और निफ्टी 40 अंक या 0.17 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,697 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी को ऑटो सेक्टर लीड कर रहा था। सूचकांकों में निफ्टी ऑटो टॉप गेनर था। निफ्टी प्राइवेट बैंक,निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी मेटल और निफ्टी इंडिया डिफेंस भी हरे निशान में थे। निफ्टी मीडिया, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी आईटी और निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 68 अंक या 0.11 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,369 पर था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7 अंक या 0.04 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,976 पर था।
सेंसेक्स पैक में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, एनटीपीसी, टाटा स्टील, इटरनल, भारती एयरटेल, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, एलएंडटी और सन फार्मा गेनर्स थे। पावर ग्रिड, आईटीसी, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, बीईएल और एचसीएल टेक लूजर्स थे।
वैश्विक बाजारों में तेजी देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, सोल, जकार्ता और बैंकॉक हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को हरे निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ हरे निशान में और टेक्नोलॉजी सूचकांक नैस्डैक 0.09 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ था।
वैश्विक बाजारों में तेजी वजह ईरान की ओर से तनाव कम होने के संकेत मिलना है।
ईरान की समाचार एजेंसी आईएसएनए का कहना है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थ के माध्यम से बातचीत जारी है, जिसमें दोनों पक्ष संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते का औपचारिक ढांचा स्थापित करने के प्रयास में संदेशों और ड्राफ्ट का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) गुरुवार के सत्र में भी शुद्ध विक्रेता रहे और इक्विटी मार्केट में 1,891.21 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,492.42 करोड़ रुपए की खरीदारी की।
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वैश्विक अस्थिरता के चलते भारत के प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में आई मामूली गिरावट : पीएमआई डेटा

वैश्विक अस्थिरता से भारत के प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में मई में मामूली गिरावट देखी गई है और इससे एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स 58.1 हो गया है, जो कि अप्रैल में 58.2 पर था। यह जानकारी गुरुवार को जारी निजी सर्वेक्षण में दी गई।
एचएसबीसी की ओर से जारी कम्पोजिट पीएमआई डेटा में बताया गया कि सर्विस अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार ने फैक्ट्री में कमजोर उत्पादन की भरपाई की है।
आंकड़ों में बताया गया कि अप्रैल में गिरावट के बाद, इनपुट कीमतों में महंगाई थोड़ी बढ़ी, लेकिन कंपनियों ने उत्पादन शुल्क में कम वृद्धि करके ग्राहकों पर अतिरिक्त लागत का बोझ सीमित कर दिया। इस दौरान सर्विसेज सेक्टर ने मैन्युफैक्चरिंग से बेहतर प्रदर्शन किया और उन पर महंगाई का दबाव कम रहा।
एचएसबीसी के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि दर में नरमी आने से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में मामूली गिरावट आई है, जबकि नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि में तेज कमी आई है। फिर भी, निरंतर इन्वेंट्री के कारण मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मोटे तौर पर अपने दीर्घकालिक औसत के अनुरूप बना रहा।”
उन्होंने आगे कहा, “मई में तैयार माल के भंडार में लगातार दूसरे महीने वृद्धि हुई और खरीद भंडार में पिछले तीन महीनों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। लागत का दबाव बढ़ गया, और इनपुट कीमतों में जुलाई 2022 के बाद से सबसे तेज वृद्धि हुई।”
पीएमआई आंकड़ों के अनुसार, मई में मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और सर्विस कंपनियों के साथ नए कारोबार में वृद्धि की दर धीमी रही, जिसके परिणामस्वरूप समग्र स्तर पर वृद्धि दर में गिरावट आई।
भारत के निजी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में मई में नए निर्यात ऑर्डर में धीमी वृद्धि देखी गई, जो पिछले 19 महीनों में सबसे कम है। पीएमआई आंकड़ों के अनुसार, वस्तु उत्पादकों ने सितंबर 2024 (फरवरी 2026 से पहले) के बाद से अंतरराष्ट्रीय बिक्री में दूसरी सबसे धीमी वृद्धि दर्ज की।
मई में कारोबारी विश्वास काफी सकारात्मक बना रहा, हालांकि सकारात्मक भावना का समग्र स्तर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया, फिर भी यह अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर रहा।
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