व्यापार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी, सेंसेक्स 829 अंक फिसला
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मुंबई, 12 मार्च : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा और प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स व निफ्टी लाल निशान में बंद हुए।
इस दौरान 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1.08 प्रतिशत या 829.29 अंक गिरकर 76,034.42 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी50 0.95 प्रतिशत या 227.70 अंक गिरकर 23,639.15 पर बंद हुआ।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स में 992.53 अंक या 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह दिन के निचले स्तर 75,871.18 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 में 298.15 अंक या 1.25 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,556.30 पर आ गया। बाद में सेंसेक्स ने अपनी बढ़त कुछ हद तक कम की और 600 अंक की रिकवरी करते हुए दिन के उच्चतम स्तर 76,681.71 पर पहुंच गया।
व्यापक बाजार में भी बेंचमार्क सूचकांकों के अनुरूप गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.37 प्रतिशत तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 0.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी ऑटो इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और यह 3.19 प्रतिशत तक गिर गया। वहीं, निफ्टी एफएमसीजी में 1.77 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 1.63 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 1.14 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जबकि, निफ्टी ऑयल एंड गैस शीर्ष प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बनकर उभरा।
निफ्टी50 में महिंद्रा एंड महिंद्रा, आइशर मोटर्स, मारुति सुजुकी इंडिया, बजाज फाइनेंस, टीएमपीवी, एलएंडटी और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली और निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल रहे।
वहीं इसके विपरीत, कोल इंडिया, एनटीपीसी, पावरग्रिड, टेक महिंद्रा, जियो फाइनेंस, अदाणी इंटरप्राइजेज और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई और ये टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
बाजार में इस गिरावट के कारण निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले दिन के करीब 442 लाख करोड़ रुपए से घटकर लगभग 440 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यानी एक दिन में निवेशकों को लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
राष्ट्रीय समाचार
भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर में आर्थिक गतिविधियां रहीं मजबूत, पीएमआई 56 के पार

भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रही हैं और इससे कंपोजिट पीएमआई 56.5 पर रहा है, जो कि अगस्त में 54.3 पर था। यह जानकारी एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई डेटा में बुधवार को दी गई।
एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों सेक्टर्स के डेटा को शामिल किया जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों कंपनियों ने मजबूत ग्रोथ दिखाई है। इस दौरान नए ऑर्डर और नौकरियों में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, महंगाई का दबाव कम हुआ और कारोबारी भरोसा मजबूत हुआ।
आंकड़े के अनुसार, सितंबर में निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है और यह जून के बाद सबसे उच्चतम स्तर पर हैं। साथ ही, संबंधित इंडेक्स अपने लंबे समय के औसत से ऊपर पहुंच गया है।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग में मजबूती के कारण प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में तेजी आई है। आउटपुट और नए घरेलू ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं। मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव के कारण कंपनियों ने अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर बनाना शुरू कर दिया है।”
भंडारी ने बताया कि इनपुट की खरीद में तेजी आई है और तैयार माल के स्टॉक का इंडेक्स अब साढ़े 11 साल के उच्चतम स्तर पर है। मैन्युफैक्चरर्स के लिए कीमतों का दबाव बढ़ा है और आउटपुट की कीमतों में महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जो मार्जिन बचाने की नई कोशिश का संकेत है।
सितंबर में भारतीय प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के कुल नए बिजनेस में तेजी से बढ़ोतरी हुई।
दोनों सेक्टर में डिमांड बढ़ी, लेकिन सामान बनाने वाली कंपनियों में यह तेजी ज्यादा साफ तौर पर देखी गई। यहां, सेल्स में बढ़ोतरी सर्विस कंपनियों के मुकाबले ज्यादा रही और यह सात महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
सर्विस क्षेत्र की कंपनियों ने बताया कि मार्केटिंग की कोशिशों से ऑर्डर मिलने में मदद मिली, सर्वे के क्वालिटेटिव हिस्से में प्रॉपर्टी, ट्रांसपोर्ट सर्विस और नई ट्रैवल बुकिंग के लिए ज्यादा मांग का जिक्र किया गया है।
वहीं, डेटा से पता चला कि सामान बनाने वाली कंपनियों ने एल्युमीनियम प्रोडक्ट, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, खाने-पीने की चीजों, फार्मास्युटिकल सामान और आम तौर पर नए मॉडलों की डिमांड में बढ़ोतरी की सूचना दी।
इसके अलावा, सितंबर में कुल रोजगार में मजबूत बढ़ोतरी हुई, क्योंकि कंपनियों ने आउटपुट और नए ऑर्डर में लगातार बढ़ोतरी के बीच अपनी स्टाफिंग क्षमता को बढ़ाना जारी रखा। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस, दोनों सेक्टर में नौकरियां पैदा हुईं और विस्तार की दरें लगभग एक जैसी रहीं।
राष्ट्रीय समाचार
वित्त वर्ष 26 में सैमसंग इंडिया का मुनाफा 36 प्रतिशत घटकर 7,228 करोड़ रुपए रहा

सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में अपने कंसोलिडेटेड मुनाफे में 36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है।
बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म टॉफ्लर के जरिए हासिल नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 7,228.10 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष में दर्ज 11,287.50 करोड़ रुपए से कम है।
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन निर्माता कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व वित्त वर्ष 2026 में सालाना आधार पर 1.2 प्रतिशत बढ़कर 1.12 लाख करोड़ रुपए हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 1,11,183.40 करोड़ रुपए था।
अन्य आय समेत कंपनी की कुल कंसोलिडेटेड आय वित्त वर्ष के दौरान 1,14,738.60 करोड़ रुपए रही।
सैमसंग इंडिया के राजस्व में मोबाइल फोन कारोबार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, जो देश में कंपनी के कारोबार के प्रमुख आधारों में से एक बना हुआ है।
कंपनी की टेलीविजन, टैबलेट, घरेलू उपकरणों और कंप्यूटर समेत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के कई क्षेत्रों में भी मजबूत मौजूदगी है।
दक्षिण कोरियाई टेक्नोलॉजी दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का हिस्सा यह कंपनी भारत के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में प्रमुख कंपनियों में बनी हुई है।
यह देश के अप्लायंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की एकमात्र कंपनी है, जिसका कारोबार 1 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है।
सैमसंग का वित्तीय प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी तेज है। वैश्विक और घरेलू कंपनियां विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में आक्रामक तरीके से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
इस बीच, दक्षिण कोरिया की एक अन्य प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने भी वित्त वर्ष 2026 में अपेक्षाकृत स्थिर वृद्धि दर्ज की। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल आय सालाना आधार पर करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 2,46,049.12 करोड़ रुपए हो गई।
इसके अतिरिक्त, इस महीने की शुरुआत में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बढ़ती परिचालन लागत, कमजोर उपभोक्ता मांग और संगठनात्मक पुनर्गठन के बीच लागत को तर्कसंगत बनाने की कवायद के तहत सैमसंग इंडिया ने अपने टेलीविजन और होम अप्लायंस कारोबार से जुड़े कर्मचारियों की छंटनी की है।
कई रिपोर्टों में कहा गया कि इस कार्यबल में कमी का असर विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों पर पड़ा है, जिनमें निदेशक, टीम लीडर, ब्रांच मैनेजर और एरिया मैनेजर शामिल हैं।
व्यापार
तेजी के बाद फिर गिरा बाजार, सेंसेक्स 330 अंक लुढ़का, निफ्टी में 0.36 प्रतिशत की गिरावट

पिछले दिन की बढ़त के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स में 0.44 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इस तरह निफ्टी50 की चार दिन की लगातार बढ़त का सिलसिला टूट गया क्योंकि आईटी और वित्तीय शेयरों में गिरावट आई।
बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 74,529.08 पर आ गया, जबकि निफ्टी50 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत गिरकर 23,329.00 पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.08 प्रतिशत और 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली।
निफ्टी50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा कोल इंडिया के शेयरों में 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, इसके साथ ही इटरनल, इंडिगो, टाइटन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे। वहीं इसके विपरीत, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, नेस्ले इंडिया, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, ग्रासिम, ट्रेंट, आयशर मोटर्स और टीसीएस सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि लगातार चार सेशन की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से 99-100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। वहीं, विदेशी निवेश की निकासी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर सेंटीमेंट पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई और इंपोर्ट कॉस्ट को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
एक्सपर्ट ने बताया कि रुपया 95.8 रुपए प्रति डॉलर के आसपास बना हुआ है, जबकि ग्लोबल रेट्स को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।
मार्केट एक्सपर्ट ने आगे कहा कि निफ्टी के 23,300–23,350 के जोन में रहने के कारण, निवेशकों को शॉर्ट-टर्म रैली के पीछे भागने से बचना चाहिए। उन्हें निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटना चाहिए, अच्छी कमाई की संभावना वाली मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए और बाजार में बड़ी गिरावट का फायदा उठाने के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी (कैश) रखनी चाहिए।
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