राजनीति
बिहार में हो रहे विकास के कार्य, प्रदेश अब और आगे बढ़ेगा : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
अररिया, 11 मार्च : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को अपनी समृद्धि यात्रा के क्रम में अररिया पहुंचे। यहां उन्होंने विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों को कई निर्देश भी दिए। इस बीच, उन्होंने आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में हर तबके के लिए विकास का कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इशारों-इशारों में राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि 2005 से पहले वाली सरकार ने कुछ काम नहीं किया। बिहार में विकास के कार्य हो रहे हैं। अब बिहार और आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार में सड़कों, पुल-पुलियों का निर्माण किया गया। पहले हम लोगों का लक्ष्य सुदूरवर्ती इलाके से पटना पहुंचने के लिए छह घंटे का था, जिसे पूरा कर लिया गया। इसके बाद आज प्रदेश के किसी भी इलाके से लोग पांच घंटे में पटना पहुंच रहे हैं।
उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले की सरकार ने महिलाओं के लिए कोई काम नहीं किया था, लेकिन आज महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को मिलने वाली पेंशन की राशि 400 रुपए से बढ़ाकर 1100 रुपए कर दी गई है, जिससे 1.14 करोड़ लोगों को फायदा हो रहा है।
सीएम नीतीश ने कहा कि वर्ष 2023 में जाति आधारित गणना कराई गई जिसमें लोगों की आर्थिक स्थिति की भी जानकारी ली गई है। इसमें 94 लाख गरीब परिवार पाए गए, जिनमें अपर कास्ट, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित, महादलित एवं मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। इनके रोजगार के लिए दो लाख रुपए की दर से सहायता देना शुरू किया गया और इस सहायता को पांच वर्षों में सभी लोगों को देना था। हम लोगों ने अब तय कर दिया है कि इन सभी 94 लाख गरीब परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार योजनाओं से जोड़कर राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं एवं वर्ष 2007 में नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। अब तक चार चुनाव हो चुके हैं। हम लोगों ने वर्ष 2013 से पुलिस में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया। अब बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या देश में सबसे अधिक है। वर्ष 2016 से महिलाओं को सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। पहले बिहार में स्वयं सहायता समूह की संख्या बहुत कम थी।
नीतीश कुमार ने कहा कि 20 नवंबर 2025 को राज्य में नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद हम लोगों ने राज्य को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने हेतु सात निश्चय-3 के कार्यक्रमों को लागू किया है। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-3 के प्रमुख उद्देश्यों में एक उद्देश्य मजबूत आधार आधुनिक विस्तार है।
उन्होंने केंद्र सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार से भी लगातार सहयोग मिल रहा है। बहुत तेजी से बिहार आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने भविष्य की योजनाओं को लेकर कहा, “बिहार में हर क्षेत्र में काम हुआ है, चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, बिजली हो, कृषि हो। महिला सशक्तिकरण के लिए भी अनेक काम किए गए हैं। अब विकास की गति को और तेज किया जाएगा। केन्द्र सरकार का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। अगले पांच वर्षों के लिए सात निश्चय-3 को लागू किया गया है। दोगुना रोजगार, दोगुनी आय के अंतर्गत राज्य की प्रति व्यक्ति औसत आय को दोगुना किया जाएगा। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत हर महिला को 10 हजार रुपए दिए गए हैं। जिनका रोजगार अच्छा चलेगा, उन्हें दो लाख रुपए तक की सहायता दी जाएगी। अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे। बंद चीनी मिलों को चालू किया जाएगा।”
इस मौके पर लगाए गए विभिन्न विकासात्मक योजनाओं के स्टॉलों का भी मुख्यमंत्री ने निरीक्षण किया। कोशी दुग्ध परियोजना, पूर्णिया अंतर्गत अररिया सेंटर के सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण योजना समेत कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने दुग्ध आपूर्तिकर्ताओं से भी संवाद किया।
राष्ट्रीय समाचार
एफडीए की सख्ती के बीच उगाही का आरोप, संजय राउत ने कमिश्नर तुकाराम मुंढे को लिखा पत्र, 2 लाख तक वसूली का दावा

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को पत्र लिखकर विभाग में कथित उगाही और भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताई है।
27 सितंबर के अपने पत्र में, राउत ने मिलावटी खाने, नकली डेयरी उत्पादों और गंदे होटल किचन के खिलाफ मुंढे की सख्ती की तारीफ की। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रष्ट एफडीए अधिकारी इन कार्रवाइयों का इस्तेमाल स्थानीय व्यवसायों से उगाही करने के लिए कर रहे हैं।
राउत ने सोमवार सुबह अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर पत्र पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि डेजिग्नेटेड ऑफिसर (डीओ) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (एफएसओ) भारी रिश्वत की मांग के लिए होटलों, रेस्तरां और क्विक-कॉमर्स व्यवसायों को लाइसेंस सस्पेंड करने की धमकी दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘क्लोजिंग नोटिस’ के लिए ‘रेट’ बहुत बढ़ गए हैं। पत्र के अनुसार, हाल की हाई-प्रोफाइल प्रवर्तन कार्रवाइयों के बाद ‘क्लोजिंग नोटिस’ को निपटाने का रेट 10,000-12,000 रुपए से बढ़कर 75,000 से 2,00,000 रुपए के बीच हो गया है।
राउत ने बांद्रा में एफडीए मुख्यालय और इसके ठाणे कार्यालय को इन गतिविधियों के मुख्य केंद्र के रूप में चिह्नित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें नागपुर, पुणे, सोलापुर, वर्धा और छत्रपति संभाजीनगर में छोटे व्यवसाय मालिकों से कई शिकायतें मिली हैं।
पत्र में ठाणे की एक घटना का जिक्र किया गया है, जहां कथित तौर पर दो डीओ ने एक क्विक-कॉमर्स कंपनी से सस्पेंड किए गए लाइसेंस को बहाल करने के लिए 17-18 लाख रुपए की मांग की थी।
राउत ने बिना उचित स्वतंत्र सत्यापन के, सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि वाली शिकायतों (जैसे चूहे दिखने की शिकायत) के आधार पर किए गए निलंबन की भी आलोचना की।
राउत ने दावा किया कि जहां छोटे खाद्य विक्रेताओं को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, वहीं गंभीर नियमों का पालन न करने वाली बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां अक्सर राजनीतिक समर्थन और कॉर्पोरेट प्रभाव के कारण जांच से बच जाती हैं।
राउत ने मुंढे से बांद्रा, ठाणे और अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों में कथित ‘क्लोजिंग नोटिस रेट कार्ड’ और लाइसेंस बहाली रैकेट की तत्काल जांच करने की अपील की है। उन्होंने मांग की कि नकली आरोपों को रोकने के लिए ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर छापेमारी करने से पहले अनिवार्य भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए।
उन्होंने मुंढे से यह भी कहा कि वे उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करें जो पैसे ऐंठने के लिए कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हैं। साथ ही, उन्होंने ठाणे के डीओ से जुड़े 17-18 लाख रुपए की उगाही के खास मामले की अलग से जांच करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस रद्द करने और बहाल करने से जुड़ी सभी जानकारी, तारीखें, सुनवाई का सारांश और वजहें डिजिटल रूप से पब्लिश करने को कहा।
पत्र में राउत ने जोर दिया कि जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा उगाही का बहाना नहीं बननी चाहिए। उन्होंने मुंढे से कहा कि वे जनता के बीच की कार्रवाई के साथ-साथ अपने विभाग में भी सुधार लाएं। राउत ने इस पत्र की एक कॉपी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी भेजी है।
राजनीति
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी वितरित की

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में ‘थाई मामन गोल्ड रिंग स्कीम’ की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने नवजात शिशुओं को एक-ग्राम सोने की अंगूठियां भेंट कीं और उनके परिवारों से मुलाकात की। उनके इस दौरे के दौरान शहरभर में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
सीएम विजय ने इस योजना की शुरुआत तीन बच्चों की उंगलियों में अंगूठियां पहनाकर की। इस दौरान, नवजात की माएं उनके बगल में बैठी थी। उन्होंने कई बच्चों को अपनी गोद में लिया और उनके माता-पिता से बात की। कुछ माता-पिता ने मुख्यमंत्री से अपने बच्चों का नाम रखने का अनुरोध किया।
विजय ने उनके अनुरोध स्वीकार किए, बच्चों को गोद में लिया और पारंपरिक नामकरण रीति का पालन करते हुए हर नाम को तीन बार दोहराया। उन्होंने सेल्फी भी खिंचवाईं और उनके पास आने वाली माताओं से हाथ मिलाया।
बाद में मुख्यमंत्री ने अस्पताल के इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट वार्ड का दौरा किया, जहां उन्होंने 10 और बच्चों को अंगूठियां दी। बच्चों के साथ समय बिताते और उनके माता-पिता के साथ हंसी-मजाक करते हुए डॉक्टर भी वहां मौजूद थे। राजाजी अस्पताल में वितरण कार्यक्रम सीएम विजय की मदुरै यात्रा का मुख्य कार्यक्रम था।
मुख्यमंत्री के चेन्नई से मदुरै हवाई अड्डे पहुंचने पर सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ता ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। जब उनका काफिला अस्पताल की ओर बढ़ा, तो समर्थकों और स्थानीय लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया और गाड़ियों पर फूल बरसाए।
सरकारी राजाजी अस्पताल पहुंचने पर सीएम विजय लोगों के उत्साह के बीच कार्यक्रम स्थल तक गए। रास्ते में उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों सहित कई लोगों का अभिवादन करने के लिए कई बार रुककर उनसे बात की और उनमें से कुछ के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
अस्पताल परिसर में अलग-अलग जगहों पर तैनात नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने भी उनका अभिवादन किया और उनके साथ सेल्फी ली। अस्पताल के अंदर सभी का ध्यान नवजात शिशुओं और उनके परिवारों पर केंद्रित हो गया। सीएम ने इस योजना के तहत पहली अंगूठियां बांटी।
राजनीति
अखिलेश यादव का चुनावी ऐलान : सत्ता में आए तो पुरानी पेंशन बहाल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने का वादा

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को विधानसभा चुनाव को लेकर कई बड़े चुनावी वादे किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा और शिक्षामित्रों को शिक्षक के रूप में सम्मान देने के साथ उनकी स्थिति बेहतर की जाएगी। उन्होंने मदरसा शिक्षकों के बकाया वेतन के भुगतान और संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं के समाधान का भी भरोसा दिया।
लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर समाज को बांटने और शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास लोगों को बांटने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं है। मदरसों के साथ भेदभाव किया गया है। भाजपा को केवल समाज को तोड़ना आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने आधी-अधूरी नौकरियां और आधी-अधूरी शिक्षा देने का काम किया।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार बनने पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। शिक्षामित्रों के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्हें बेहतर बनाने के साथ शिक्षक के रूप में सम्मान देने का काम किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि शिक्षामित्रों की समस्या का समाधान होने से बंद पड़े स्कूलों को भी फिर से संचालित करने में मदद मिलेगी। अखिलेश यादव ने कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की मांग पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के साथ मंथन कर पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने मदरसा शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आधुनिक मदरसा शिक्षकों का लंबे समय से लंबित वेतन दिलाने का काम किया जाएगा। साथ ही संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का भी समाधान करने का उन्होंने आश्वासन दिया। अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान सपा समर्थकों के बड़ी संख्या में वोट काटे गए, जिसके कारण प्रदेश में सपा की सरकार नहीं बन सकी।
उन्होंने कहा कि 2017 में पार्टी इस तरह की गड़बड़ियों को समझ नहीं सकी थी और तब वह मानते थे कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां लंबे समय से होती रही हैं, लेकिन अब इससे जुड़ी बातें सामने आ रही हैं। अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा के लोगों ने गांव-गांव से वोट कटवाने के प्रयास किए और बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरकर भेजे गए। उन्होंने लखनऊ का उदाहरण देते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति ने 100 से अधिक वोट कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरवाए, जबकि एक व्यक्ति के लिए पांच लोगों के संबंध में ही ऐसा आवेदन करने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों के बीच चुनाव आयोग का बचाव कर रहे हैं तो इससे सवाल उठता है कि वह भी कथित घोटाले में शामिल हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव में वोटों की कथित चोरी और बेईमानी का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। उनके मुताबिक, 2022 में सपा समर्थकों के बड़ी संख्या में वोट काटे गए और अब इस तरह की खबरें सार्वजनिक होने के बाद लोगों को चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी हो रही है। उन्होंने नोएडा में अभी भी फर्जी वोट बनाए जाने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने कहा कि वोट चोरी से जुड़ी खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत को पश्चिम बंगाल और बिहार में दोबारा चुनाव कराने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराया और 2027 में उत्तर प्रदेश से भाजपा का सफाया कर दिया जाएगा। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वह पूंजीपतियों और बड़े कारोबारियों के हित में काम करती है।
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