राजनीति
‘बलिदान के लिए देश सदैव ऋणी रहेगा’, राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने पुलवामा हमले के शहीदों को याद किया
नई दिल्ली, 14 फरवरी : पुलवामा हमले की 7वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने शहीदों को याद किया है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पुलवामा में 2019 के दुस्साहसी आतंकी हमले में शहीद हुए हमारे वीर जवानों को मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि। भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।” राहुल गांधी ने अपने जम्मू-कश्मीर दौरे की तस्वीर भी शेयर की है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पुलवामा आतंकी हमले में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “हम सब अपने शहीदों और उनके परिवारजनों के सदैव ऋणी रहेंगे। हमारे जांबाज सैनिकों का साहस, समर्पण, सेवा और शहादत हम सबके लिए अनुकरणीय है।”
इससे पहले, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हम भारत माता के उन वीर शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति दी। बहादुर जवानों का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटल समर्पण हमेशा हमारी यादों में रहेगा। उनका सर्वोच्च बलिदान चिरकाल तक अमर रहेगा। हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे।”
वहीं, एनसीपी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने लिखा, “भारतीय सैनिकों ने हमेशा अपने साहस, बहादुरी, त्याग और बलिदान से देश की सुरक्षा व संप्रभुता को बनाए रखा है। उनकी अटूट राष्ट्र निष्ठा और देशभक्ति को हमेशा याद रखा जाएगा। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी शहीद सैनिकों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लिखा, “मैं 2019 में आज ही के दिन पुलवामा हमले में शहीद हुए बहादुर सीआरपीएफ जवानों को सलाम करती हूं।”
दुर्घटना
मुंबई: मुलुंड पश्चिम में निर्माणाधीन मेट्रो 4 का स्लैब वाहनों पर गिरने के बाद एमएमआरडीए का पहला बयान

मुंबई: शनिवार को मुलुंड में हुई एक घटना के बाद, जिसमें निर्माणाधीन मुंबई मेट्रो लाइन 4 कॉरिडोर के कंक्रीट पैरापेट का एक हिस्सा नीचे वाहनों पर गिर गया। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) का सहारा लेकर विवरण प्रदान किया।
अपने पोस्ट में, एमएमआरडीए ने बताया कि यह घटना दोपहर करीब 12.15 बजे मेट्रो लाइन 4 परियोजना के राजीव (मिलन) खंड पर स्थित पियर पी196 के पास, मुलुंड फायर स्टेशन के नजदीक घटी। पैरापेट का एक हिस्सा ऊंचाई से गिर गया और वहां से गुजर रहे एक ऑटो-रिक्शा से टकरा गया।
एजेंसी ने आगे बताया कि इस घटना में दो लोग घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। एमएमआरडीए ने यह भी कहा कि मेट्रो परियोजना की टीम को तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया और वह वर्तमान में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ घनिष्ठ समन्वय में राहत अभियान चला रही है और क्षेत्र को सुरक्षित कर रही है।
नवीनतम जानकारी के अनुसार, शनिवार, 14 फरवरी को जॉनसन एंड जॉनसन और ओबेरॉय परिसर के पास मुलुंड पश्चिम में एलबीएस मार्ग पर मुंबई मेट्रो लाइन 4 से एक बड़ा कंक्रीट का स्लैब वाहनों पर गिर जाने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। खबरों के मुताबिक, मलबा सीधे नीचे से गुजर रही कारों और एक ऑटो रिक्शा पर गिरा। बताया जा रहा है कि एक ऑटो चालक और एक महिला मलबे के नीचे फंस गए, जिसके चलते तुरंत आपातकालीन बचाव अभियान चलाया गया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: यवतमाल में गणतंत्र दिवस समारोह में छात्रों ने पाकिस्तानी सैन्य गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया; स्कूल स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई

यवतमाल: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में एक सरकारी उर्दू स्कूल के छात्रों को सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर पाकिस्तानी सैन्य थीम वाले गीत पर नृत्य करने के लिए मजबूर किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। जिसके चलते पुलिस ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उमरखेड़ स्थित अब्दुल गफूर शाह म्युनिसिपल उर्दू स्कूल नंबर 2 के प्रधानाध्यापक और एक शिक्षक के खिलाफ गणतंत्र दिवस से संबंधित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन से जुड़ी शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई है।
कार्यक्रम के वीडियो, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और व्यापक रूप से प्रसारित हुए, उनमें छात्र प्रतीकात्मक या नकली तलवारें पकड़े हुए एक कोरियोग्राफ किया हुआ नृत्य करते हुए दिखाई दे रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान बजाया गया गीत “ऐ मर्द-ए-मुजाहिद तेरी यलगार कहां है” बताया जा रहा है, जिसे पाकिस्तानी देशभक्ति या सैन्य-प्रेरक राष्ट्रगान के रूप में वर्णित किया गया है।
वीडियो में मंच की वेशभूषा पहने बच्चे लाउडस्पीकर पर बज रहे गाने के साथ-साथ एक विशेष पंक्ति में नृत्य करते हुए दिखाई दे रहे हैं। कार्यक्रम स्थल पर लगी स्क्रीन पर भी तस्वीरें प्रदर्शित की जा रही हैं। यह प्रस्तुति माता-पिता और स्थानीय निवासियों की उपस्थिति में आयोजित एक सुनियोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा प्रतीत होती है।
इन वीडियो ने ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दीं, जिसमें उपयोगकर्ताओं ने आरोप लगाया कि गाने का संबंध पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं से है और स्कूल समारोह में इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाए। युवा छात्रों पर इस तरह की सामग्री के संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं जताई गईं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार , भाजपा पार्षद गोपाल कलाने ने शिकायत दर्ज कराई है कि कक्षा 6 के छात्रों को प्रतीकात्मक तलवारों के साथ गाने पर नृत्य करने के लिए मजबूर किया गया था, उनका दावा है कि इससे जनभावना को ठेस पहुंची है और बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
शिकायत के बाद, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196(1)(सी) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि बयान दर्ज किए जा रहे हैं और कार्यक्रम को मंजूरी देने में स्कूल अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि गीत का चयन कैसे हुआ और क्या विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से संबंधित दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ है। विद्यालय प्रशासन ने इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
राजनीति
निशिकांत दुबे ने 1978 में इंदिरा गांधी को निकाले जाने का किया जिक्र, मूल प्रस्ताव के जरिए राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने की मांग

नई दिल्ली, 14 फरवरी : भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव लाने के फैसले के साथ 1978 की ऐतिहासिक संसदीय कार्रवाई का हवाला देकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
निशिकांत दुबे ने दिसंबर 1978 की उस घटना से तुलना की, जब इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी और उन्हें जेल भी भेजा गया था।
संसदीय प्रक्रिया में मूल प्रस्ताव एक स्वतंत्र और स्पष्ट प्रस्ताव होता है, जिसे सदन के सामने निर्णय या राय व्यक्त करने के लिए रखा जाता है। इसे स्वीकार कर सदन में पेश किए जाने के बाद इस पर बहस होती है और अंत में मतदान कराया जाता है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाते हुए उनके लोकसभा सदस्य पद को रद्द करने और भविष्य के चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में 1978 के संसदीय रिकॉर्ड के अंश भी दिखाए और लिखा कि इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर इंदिरा गांधी की सदस्यता समाप्त हुई थी और उन्हें जेल भेजा गया था।
1978 का मामला 22 नवंबर 1978 को लोकसभा में पेश किए गए मूल प्रस्ताव से जुड़ा था। यह प्रस्ताव विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के आधार पर लाया गया था, जिसमें इंदिरा गांधी को सदन की अवमानना और विशेषाधिकार हनन का दोषी पाया गया था। आरोप 1975 के आपातकाल के दौरान की गई कार्रवाई से जुड़े थे, जिनमें उनके पुत्र संजय गांधी की मारुति परियोजना की जांच कर रहे चार सरकारी अधिकारियों को कथित रूप से बाधित करने, डराने-धमकाने और झूठे मामले दर्ज कराने का उल्लेख था।
लंबी बहस के बाद 19 दिसंबर 1978 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा लाया गया प्रस्ताव पारित हुआ। इसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया और उन्हें संसदीय सत्र की शेष अवधि के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया। हालांकि, यह निष्कासन स्थायी नहीं रहा और 7 मई 1981 को सातवीं लोकसभा ने निर्णय वापस ले लिया, जब वे फिर सत्ता में लौटीं।
गुरुवार को निशिकांत दुबे ने कहा था कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव शुरू किया है और उन पर ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों’ के साथ होने का आरोप लगाया। यह कदम लोकसभा में एक दिन पहले हुई तीखी बहस के बाद सामने आया, जब राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस समझौते में भारत और उसके नागरिकों के हितों से समझौता किया गया है और ‘भारत माता को बेच दिया गया’ है।
उनके बयान पर सत्तापक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध किया और इसे ‘असंसदीय’ बताते हुए रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। इसके बाद भाजपा सांसदों ने विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की घोषणा की और राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, खासकर जब देश के ऊर्जा और किसान हितों से जुड़े मुद्दे हों।
बाद में गुरुवार शाम को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार ने फिलहाल अपना प्रस्ताव स्थगित कर दिया है, क्योंकि निजी सदस्य के रूप में निशिकांत दुबे का मूल प्रस्ताव पहले ही पेश किया जा चुका है।
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