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‘थोड़ी भी शर्म होती तो मैच न खेलता पाक,’ पाकिस्तान के यू-टर्न पर बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी

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नई दिल्ली, 10 फरवरी : शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच के बहिष्कार के फैसले से पलटने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को मजाक बताते हुए बीसीसीआई और पाकिस्तान, दोनों पर सवाल खड़े किए। इसके साथ ही उन्होंने संसद की कार्यवाही और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

पाकिस्तान के यू-टर्न पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा, “यह किस तरह का मजाक है? पूरा देश देख रहा है और इंतजार कर रहा है कि पाकिस्तान क्या फैसला लेगा। अगर पाकिस्तान में थोड़ी भी शर्म बची होती, तो वह साफ कह देता कि वह यह मैच नहीं खेलेगा। पहले बहिष्कार का ऐलान करना और फिर उससे पलट जाना, यह पाकिस्तान की गैर-गंभीरता को दिखाता है।”

उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से बीसीसीआई की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश की जनता इस फैसले को ध्यान से देख रही है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सरकार की घोषित नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कही थी, आतंक के साथ कोई व्यापार नहीं, आतंकवाद से कोई बातचीत नहीं, और पाकिस्तान को किसी तरह की रियायत नहीं। ऐसे में पाकिस्तान के साथ मैच खेलने को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य ने संसद की कार्यवाही और लोकतंत्र के कामकाज पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से संसद की प्रक्रिया चल रही है, उसमें ट्रेजरी बेंच लगातार विपक्ष पर हमला कर रही हैं और उन्हें कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि संसद में कई पुस्तकों का हवाला दिया गया, यहां तक कि देश के पूर्व थलसेनाध्यक्ष द्वारा लिखी गई पुस्तक का भी उल्लेख हुआ।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उस पुस्तक को लेकर इतना बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया गया कि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर प्रक्रिया पर जवाब देने तक नहीं आए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंताजनक बताया।

राजनीति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी

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नई दिल्ली, 14 फरवरी : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। ये सिर्फ स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है, यह इतिहास और भविष्य के संगम के भी पल हैं। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और फिर स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, गढ़ा है।

मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के लिए किया था। 1947 में भारत को गुलामी से तो मुक्ति मिली, लेकिन इन भवनों को तत्कालीन सरकार की ओर से अपने कार्यों के निष्पादन के लिए बनाए रखा गया। स्वतंत्रता के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक के इस भवन से कार्य करता रहा है।”

उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में बनी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले होते देखे हैं। इसकी सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह हैं। इस भवन की सीढ़ियों पर चढ़ते कदमों ने देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “बीते दशकों में यहां कैबिनेट की बैठकों में, संविधान के आदर्शों, जनता से मिले जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यहां भारत की सफलताओं का उत्सव भी मनाया गया, असफलताओं का आंकलन भी हुआ और साथ ही संकटों और चुनौतियों से निपटने के लिए कड़े और बड़े फैसले भी लिए गए।”

मीडिया को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की विभीषिका भी देखी, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों को भी देखा और शांतिकाल की नीतियों पर भी चिंतन और मनन किया। इन्होंने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, तकनीक की लंबी छलांग को महसूस किया है। यहां बैठकर अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने भारत को आजादी के तुरंत बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया। सबके प्रयासों का परिणाम है कि आर्थिक चुनौतियों और संकटों से निकलकर, आज भारत एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बनकर खड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा, “बीते एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में साउथ ब्लॉक राष्ट्र के अनेक ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। ये स्थान मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की प्रेरणा स्थली बना। यहां से रिफॉर्म एक्सप्रेस को पूरे देश में प्रोत्साहन मिला है। यहीं से डीबीटी, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, गरीब कल्याण से जुड़े अभियान, ‘डिजिटल इंडिया’ और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को आकार मिला। यहां से ही आर्टिकल-370 की दीवार गिराने और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने जैसे सामाजिक न्याय के साहसिक और संवेदनशील निर्णय लिए गए। यहीं लिए गए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘एयर स्ट्राइक’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के निर्णयों के माध्यम से भारत ने अपनी दृढ़ और आत्मविश्वासी सुरक्षा नीति का स्पष्ट संदेश विश्व को दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज का भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत आज एक सुरक्षित और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है और वैश्विक मंचों पर अपनी स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज रख रहा है। आज देश विकसित भविष्य के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके लिए एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण के प्रति अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी। एक ऐसा कार्यक्षेत्र, जो यहां काम करने वाले हर कर्मयोगी की उत्पादकता को बढ़ाए, सेवाभाव के उसके संकल्प को प्रोत्साहित करे।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के उ‌द्घाटन के करीब 95 साल के बाद शुक्रवार को भारत सरकार ने इन भवनों को खाली किया है और ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरित हुई है। यह प्रतीकात्मक रूप से गुलामी के अतीत से ‘विकसित भारत’ के भविष्य की ओर बढ़ने की ओर देश का एक और कदम है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में देश में ‘सत्ता भाव’ के बजाय ‘सेवा भाव’ की संस्कृति सशक्त हुई है। आज का ये स्थानांतरण, इन संस्कारों को और मजबूती देगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “शनिवार को कैबिनेट ने यह संकल्प भी लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाए, जो हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ये संग्रहालय, हमारी कालातीत और शाश्वत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।

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दुर्घटना

मुलुंड हादसा: मुंबई मेट्रो की चौथी स्लैब गिरने से एक व्यक्ति की मौत पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुख व्यक्त किया; मृतकों के लिए 5 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई।

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मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को मुलुंड पश्चिम में निर्माणाधीन मुंबई मेट्रो लाइन 4 के स्थल पर हुए घातक भूस्खलन की घटना पर दुख व्यक्त किया। और मृतकों के लिए 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की। महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक हैंडल X पर एक पोस्ट में बताया गया है कि मुलुंड में मेट्रो निर्माण के दौरान एक स्लैब गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए। मुख्यमंत्री ने घटना की जांच के आदेश दिए, मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की और कहा कि राज्य सरकार घायलों के चिकित्सा खर्च वहन करेगी। उन्होंने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की।

मुंबई मेट्रो लाइन 4 का एक बड़ा कंक्रीट का स्लैब दोपहर करीब 12:20 बजे जॉनसन एंड जॉनसन और ओबेरॉय होटल परिसर के पास मुलुंड पश्चिम के एलबीएस मार्ग पर वाहनों पर गिर गया, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। बताया जाता है कि स्लैब सीधे नीचे से गुजर रही कारों और एक ऑटो रिक्शा पर गिरा, जिससे एक ऑटो चालक और एक महिला मलबे के नीचे दब गए और तत्काल आपातकालीन बचाव अभियान शुरू किया गया।

दुर्घटनास्थल से मिले वीडियो में कुचली हुई कार और मलबे के नीचे दबी ऑटो रिक्शा के भयावह दृश्य दिखाई दिए। रिक्शा चालक, जो खून से लथपथ था, को मलबे के नीचे से निकाला गया। सभी घायलों को इलाज के लिए पास के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया।

रामधन यादव को मृत घोषित कर दिया गया। घायलों की पहचान राजकुमार यादव (45) के रूप में हुई है, जिनकी हालत गंभीर है, और महेंद्र प्रताप यादव (52) और दीपा रुहिया (40) को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

अधिकारियों ने इलाके को घेर लिया और व्यस्त एलबीएस रोड पर यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा। भूस्खलन का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है और विस्तृत जांच की उम्मीद है।

X पर पोस्ट किए गए एक बयान में, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने कहा कि यह घटना दोपहर लगभग 12.15 बजे राजीव (मिलन) खंड में मेट्रो लाइन निर्माण कार्य के पियर पी196 के पास, मुलुंड फायर स्टेशन के करीब हुई, जहां एक पैरापेट खंड का एक हिस्सा ऊंचाई से गिर गया और गुजर रहे एक ऑटो रिक्शा से टकरा गया।

अधिकारियों ने पुष्टि की कि दो लोग घायल हुए हैं और उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया है। मेट्रो परियोजना की टीम घटनास्थल पर मौजूद है और बृहन्मुंबई नगर निगम और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ मिलकर राहत कार्य और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था चला रही है।

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दुर्घटना

‘क्या लोगों की जान इतनी सस्ती हो गई है’, मुंबई में मेट्रो पिलर गिरने की घटना पर बोलीं कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़

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मुंबई, 14 फरवरी : कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने मुंबई के मुलुंड वेस्ट इलाके में हुई मेट्रो पिलर करने की घटना पर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि विकास चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं जिससे कि मुंबईकरों की जान को खतरा हो।

वर्षा गायकवाड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर घटना का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मुलुंड वेस्ट, एलबीएस रोड पर जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के पास बन रहे मेट्रो पिलर का एक हिस्सा गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया। एक बेगुनाह नागरिक की मौत हो गई और कई दूसरे गंभीर रूप से घायल हो गए। क्या सरकार और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) का इससे कोई लेना-देना है?”

कांग्रेस सांसद ने पूछा, “सिर्फ इंफ्रा मैन बनकर पीआर और मार्केटिंग कर रहे हैं, लेकिन मुंबईकरों की जान अधर में लटकी हुई है, इसका क्या मतलब है? जब मेट्रो का काम चल रहा था, तो सेफ्टी नियम सिर्फ कागजों पर क्यों थे? जब व्यस्त रोड पर काम चल रहा था, तो नीचे से गुजरने वाले ट्रैफिक के लिए सुरक्षा इंतेजाम क्यों नहीं थे?”

उन्होंने आगे कहा, “यह दिखाने के नाम पर कि मेट्रो का काम तेजी से हो रहा है, क्या इसकी क्वालिटी और टेक्निकल सेफ्टी को नजरअंदाज किया जा रहा है? कौन जिम्मेदार है?” वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि हर बार जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो सिर्फ ‘जांच’ का ड्रामा होता है। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

शनिवार दोपहर को मुलुंड पुलिस स्टेशन के इलाके में एलबीएस रोड पर मेट्रो पुल का एक हिस्सा चलते ऑटो रिक्शा पर गिर गया। इस दौरान एक कार भी चपेट में आई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

मृतक की पहचान रामधन यादव के रूप में हुई है, जबकि घायलों में राजकुमार इंद्रजीत यादव, महेंद्र प्रताप यादव और दीपा रूहिया शामिल हैं। राजकुमार इंद्रजीत यादव की स्थिति गंभीर बताई गई है।

मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने शुरुआती बयान में कहा कि दोपहर करीब 12:15 बजे मुलुंड फायर स्टेशन के पास एक घटना हुई, जहां पैरापेट सेगमेंट का एक हिस्सा ऊंचाई से गिरकर एक गुजरते हुए ऑटो रिक्शा से टकरा गया।

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