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राजनीति

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : इस बार बीएलओ घर-घर जाकर बांटेंगे वोटर स्लिप

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कोलकाता, 7 फरवरी : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वोट देने वाले मतदाताओं को पोलिंग बूथ पर वोट डालने जाने से पहले अपनी वोटर स्लिप डाउनलोड करके प्रिंटआउट लेने या इसके लिए अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के स्थानीय नेताओं पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने फैसला लिया है कि इस बार बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) चुनाव से पहले वोटरों के घर-घर जाकर वोटर स्लिप बांटेंगे।

यह फैसला आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की सिफारिश के बाद लिया है। सीईओ कार्यालय के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, “चुनावी प्रक्रिया के नियमों के अनुसार, मतदाताओं के बीच वोटर स्लिप बांटना बीएलओ का कर्तव्य है। हालांकि, 2011 के बाद से पश्चिम बंगाल के चुनावों में यह प्रथा खत्म हो गई थी। लेकिन इस बार, आयोग इस प्रथा को फिर से शुरू करना चाहता है। इससे न सिर्फ वोटरों के लिए चीजें आसान होंगी, बल्कि वोटर लिस्ट बांटने की व्यवस्था भी ज्यादा पारदर्शी होगी।”

सूत्रों के अनुसार, अगर वोटर स्लिप नहीं बांटी जाती हैं, तो मतदाता संबंधित बीएलओ से संपर्क करके सीधे उनसे वोटर स्लिप ले सकेंगे।

इस बीच, आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती के ऑफिस को बीएलओ, बीएलओ सुपरवाइजर, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एईआरओ) को राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में उनके काम के लिए बकाया मेहनताना तुरंत जारी करने के लिए एक रिमाइंडर भेजा है।

इस मामले में आयोग की ओर से मुख्य सचिव के ऑफिस से तीसरी बार संपर्क साधा गया है। आयोग ने इस मामले में पिछले साल अगस्त में रिमाइंडर भेजा था, जिसके बाद दूसरा पिछले साल दिसंबर में भेजा गया था।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच तनाव है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद यह तनाव बढ़ा। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई बार चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया, जिस मामले में अदालत ने आयोग को नोटिस भी भेजा।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

नेपाल: हेमलुंग बेस कैंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार, 12 लापता

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नेपाल स्थित माउंट हिमलुंग के बेस कैंप इलाके में हिमस्खलन की चपेट में आए चार लोगों के मौत की पुष्टि कर दी गई है।12 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।

मनांग के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (प्रमुख जिलाधिकारी) मुक्ति प्रसाद खनल ने आईएएनएस को बताया, “अब तक घटना वाली जगह से चार शव बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए दो शव काठमांडू भेजे गए हैं, जबकि दो अन्य को घटना वाली जगह से एयरलिफ्ट करके मनांग के जिला मुख्यालय, चामे लाया गया है।”

माना जा रहा है कि जब उस इलाके में बर्फीला तूफान (एवलांच) आया, तो 7,126 मीटर ऊंचे पहाड़ के बेस कैंप पर अलग-अलग अभियान कंपनियों के 24 से ज्यादा गाइड और कर्मचारी मौजूद थे। वे चढ़ाई शुरू होने से पहले रस्सियां ​​लगाने और टेंट लगाने के लिए वहां गए थे।

खनल ने बताया कि आपदा के बाद 11 लोगों से संपर्क हो पाया है। हमारा अनुमान है कि पहाड़ के बेस कैंप पर कुल 27 लोग मौजूद थे।

सोमवार सुबह से ही बचाव कार्य जारी रहा और बेस कैंप पर बचाव अभियान चलाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। खनल ने कहा कि मौसम में काफी सुधार हुआ है, जिससे बचाव कार्यों में मदद मिली है। इससे पहले कई दिनों तक लगातार बारिश हुई थी, जिसके कारण मनांग सहित देश के कई हिस्सों में भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी।

यह घटना नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ के ठीक एक महीने बाद हुई है। उस बाढ़ की वजह एक बड़े ग्लेशियर का टूटना और भूस्खलन था, जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 5,000 से अधिक लोग लापता बताए गए।

नेपाल की आय के मुख्य स्रोतों में से एक पर्यटन है। भोटेकोशी बाढ़ आपदा के बाद, देश पर्यटकों से नेपाल आने का आग्रह कर रहा है और कह रहा है कि देश के अन्य हिस्से सुरक्षित हैं।

इससे पहले, मनांग जिला प्रशासन कार्यालय ने हिमालय के ऊंचे इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश और बर्फबारी के पूर्वानुमान के कारण 25 से 27 सितंबर तक कई ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रेकिंग पर रोक लगा दी थी।

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राष्ट्रीय समाचार

नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस में समुद्री सुरक्षा अभियान व तैयारियों पर होगा मंथन

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नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडर्स तीन दिनों तक देश की समुद्री सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन मंथन करेंगे। इसके लिए नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नौसेना भवन में आयोजित की जाएगा। नौसेना का यह सर्वोच्च स्तर का सम्मेलन है। यह केवल नियमित समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि सैन्य और रणनीतिक स्तर पर नौसेना की तैयारियों का व्यापक आकलन करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है।

कांफ्रेंस में नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ ऑपरेशनल तैनाती पर कार्यरत व एरिया कमांडर शामिल होंगे। इनके जरिए समुद्री अभियानों की तैयारियों, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों पर व्यापक चर्चा होगी। साथ ही, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भी संस्थागत संवाद किया जाएगा। यह वर्ष 2026 में आयोजित होने वाले नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स कांफ्रेंस का दूसरा संस्करण है। इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी हैं और समुद्री मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में यहां भारतीय नौसेना की भूमिका सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रह सकती है।

नौसेना के अनुसार, देश के समुद्री हितों की सुरक्षा में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है। खास तौर पर ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के दौरान नौसेना ने जिस तरह समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े हितों की रक्षा के लिए अभियान चलाया है, उसने हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे एक भरोसेमंद समुद्री सुरक्षा साझेदार के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत किया है। भारतीय नौसेना लगातार हाई ऑपरेशनल स्तर पर काम कर रही है। ऐसे में सम्मेलन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि बदलते समुद्री सुरक्षा वातावरण में नौसेना अपनी युद्धक क्षमता और परिचालन तैयारियों को किस तरह और मजबूत कर सकती है।

सम्मेलन के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नौसेना के कमांडरों को संबोधित करेंगे। वह राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण और भारतीय नौसेना से देश की अपेक्षाओं पर अपनी बात रखेंगे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और थल सेनाध्यक्ष भी नौसेना कमांडरों के साथ संवाद करेंगे। इस पहल का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त अभियानों और सैन्य एकीकरण को और मजबूत करना है।

सम्मेलन के अगले दो दिनों में नौसेना प्रमुख और नौसेना के कमांडर-इन-चीफ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे। इनमें अभियान, सैन्य सामग्री, रसद, मानव संसाधन और प्रशिक्षण जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। इसके साथ ही युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए नई तकनीकों को तेजी से अपनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। एआई, बड़े आंकड़ों का विश्लेषण, स्वायत्त और बिना चालक वाली प्रणालियां तथा साइबर अभियान जैसे क्षेत्र चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

नौसेना का जोर अत्याधुनिक तकनीकों को केवल शामिल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें वास्तविक सैन्य अभियानों में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करने पर भी रहेगा। इसके लिए आधुनिक युद्ध की नई अवधारणाओं को अपनाने और तकनीकी क्षमता को तेजी से सैन्य ताकत में बदलने की जरूरत पर जोर दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का आधार नौसेना के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे। इनमें संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार हैं। इन्हीं के जरिए सरकार के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप नौसेना की भविष्य की क्षमता को आकार देने पर जोर रहेगा।

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राष्ट्रीय समाचार

एफडीए की सख्ती के बीच उगाही का आरोप, संजय राउत ने कमिश्नर तुकाराम मुंढे को लिखा पत्र, 2 लाख तक वसूली का दावा

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शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को पत्र लिखकर विभाग में कथित उगाही और भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताई है।

27 सितंबर के अपने पत्र में, राउत ने मिलावटी खाने, नकली डेयरी उत्पादों और गंदे होटल किचन के खिलाफ मुंढे की सख्ती की तारीफ की। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रष्ट एफडीए अधिकारी इन कार्रवाइयों का इस्तेमाल स्थानीय व्यवसायों से उगाही करने के लिए कर रहे हैं।

राउत ने सोमवार सुबह अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर पत्र पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि डेजिग्नेटेड ऑफिसर (डीओ) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (एफएसओ) भारी रिश्वत की मांग के लिए होटलों, रेस्तरां और क्विक-कॉमर्स व्यवसायों को लाइसेंस सस्पेंड करने की धमकी दे रहे हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘क्लोजिंग नोटिस’ के लिए ‘रेट’ बहुत बढ़ गए हैं। पत्र के अनुसार, हाल की हाई-प्रोफाइल प्रवर्तन कार्रवाइयों के बाद ‘क्लोजिंग नोटिस’ को निपटाने का रेट 10,000-12,000 रुपए से बढ़कर 75,000 से 2,00,000 रुपए के बीच हो गया है।

राउत ने बांद्रा में एफडीए मुख्यालय और इसके ठाणे कार्यालय को इन गतिविधियों के मुख्य केंद्र के रूप में चिह्नित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें नागपुर, पुणे, सोलापुर, वर्धा और छत्रपति संभाजीनगर में छोटे व्यवसाय मालिकों से कई शिकायतें मिली हैं।

पत्र में ठाणे की एक घटना का जिक्र किया गया है, जहां कथित तौर पर दो डीओ ने एक क्विक-कॉमर्स कंपनी से सस्पेंड किए गए लाइसेंस को बहाल करने के लिए 17-18 लाख रुपए की मांग की थी।

राउत ने बिना उचित स्वतंत्र सत्यापन के, सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि वाली शिकायतों (जैसे चूहे दिखने की शिकायत) के आधार पर किए गए निलंबन की भी आलोचना की।

राउत ने दावा किया कि जहां छोटे खाद्य विक्रेताओं को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, वहीं गंभीर नियमों का पालन न करने वाली बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां अक्सर राजनीतिक समर्थन और कॉर्पोरेट प्रभाव के कारण जांच से बच जाती हैं।

राउत ने मुंढे से बांद्रा, ठाणे और अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों में कथित ‘क्लोजिंग नोटिस रेट कार्ड’ और लाइसेंस बहाली रैकेट की तत्काल जांच करने की अपील की है। उन्होंने मांग की कि नकली आरोपों को रोकने के लिए ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर छापेमारी करने से पहले अनिवार्य भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए।

उन्होंने मुंढे से यह भी कहा कि वे उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करें जो पैसे ऐंठने के लिए कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हैं। साथ ही, उन्होंने ठाणे के डीओ से जुड़े 17-18 लाख रुपए की उगाही के खास मामले की अलग से जांच करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस रद्द करने और बहाल करने से जुड़ी सभी जानकारी, तारीखें, सुनवाई का सारांश और वजहें डिजिटल रूप से पब्लिश करने को कहा।

पत्र में राउत ने जोर दिया कि जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा उगाही का बहाना नहीं बननी चाहिए। उन्होंने मुंढे से कहा कि वे जनता के बीच की कार्रवाई के साथ-साथ अपने विभाग में भी सुधार लाएं। राउत ने इस पत्र की एक कॉपी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी भेजी है।

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