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Saturday,03-October-2026
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दिल्ली में सीईसी से मिलेंगी सीएम ममता बनर्जी, एसआईआर के मुद्दे पर होगी

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नई दिल्ली, 2 फरवरी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को नई दिल्ली में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) के मुख्यालय में चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करेंगी।

इसके अलावा, वह रिवीजन एक्सरसाइज के खिलाफ आम सहमति बनाने के मकसद से विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेताओं से भी बातचीत कर सकती हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर नेशनल कैपिटल की यात्रा के लिए यह समय चुना है, क्योंकि चल रहे बजट सत्र के कारण सभी विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेता वहां मौजूद रहेंगे। सीएम ममता के कोलकाता लौटने की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि वह 5 फरवरी से पहले लौट आएंगी, क्योंकि उस दिन पश्चिम बंगाल विधानसभा में वोट ऑन अकाउंट पेश किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र भी महत्वपूर्ण है और ट्रेजरी बेंच सदन में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश करेगी। इसमें एक प्रस्ताव राज्य में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका की निंदा करने के लिए होगा। तो वहीं, दूसरा प्रस्ताव राज्य में चल रहे एसआईआर को जिस तरह से किया जा रहा है, उसकी निंदा करने के लिए होगा।

इससे पहले सीईसी को लिखे पत्र में सीएम ममता ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर (एसआरओ) और माइक्रो-ऑब्जर्वर के अधिकार पर सवाल उठाया था, जिन्हें उनके अनुसार, राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की समीक्षा के लिए केवल पश्चिम बंगाल में नियुक्त किया गया है।

पत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री का मुख्य तर्क यह है कि एसआरओ और माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका एसआईआर प्रक्रिया की देखरेख तक सीमित नहीं थी, क्योंकि उन्हें अप्रूविंग अथॉरिटी के रूप में भी नामित किया गया है। सीईसी के नाम लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने दावा किया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर को यह अधिकार देने से चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) असहाय, अलग-थलग पड़ गए हैं और सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि ऑब्जर्वर और माइक्रो-ऑब्जर्वर को यह अतिरिक्त अधिकार भारतीय संविधान द्वारा गारंटीकृत लोकतांत्रिक मूल्यों, संघवाद और मौलिक अधिकारों की भावना के खिलाफ है।

राजनीति

कर्नाटक में सूखे का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम, तीन दिन के दौरे के बाद निष्पक्ष रिपोर्ट का दिया भरोसा

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मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को बताया कि केंद्रीय सूखा आकलन टीम कर्नाटक का तीन दिन का दौरा करेगी। टीम जमीनी हालात का जायजा लेगी और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा दिए गए डेटा और फील्ड में की गई पड़ताल के आधार पर एक निष्पक्ष रिपोर्ट सौंपेगी। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव और टीम के प्रमुख अजीत कुमार साहू ने यह भरोसा दिलाया है।

साहू ने शनिवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के ऑफिस-कम-रेसिडेंस ‘कृष्णा’ में हुई बैठक के दौरान यह भरोसा दिलाया। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने एनडीआरएफ नियमों के तहत कर्नाटक के लिए सूखे से राहत के तौर पर 3,705.30 करोड़ रुपए की मांग की थी।

मुख्यमंत्री की मांग का जवाब देते हुए साहू ने कहा कि केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम तीन दिनों तक राज्य का दौरा करेगी, जमीनी हकीकत का जायजा लेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले राज्य सरकार के अधिकारियों से जरूरी डेटा इकट्ठा करेगी।

यह बैठक तब हुई जब केंद्र की टीम राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति और फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए कर्नाटक पहुंची।

शिवकुमार ने केंद्र की टीम को बताया कि कर्नाटक सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है, जिससे किसान और आम जनता परेशान हैं। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि एनडीआरएफ नियमों के अनुसार राज्य को सूखे से राहत के लिए 3,705.30 करोड़ रुपए दिए जाएं।

उन्होंने कहा कि केंद्र के आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के अनुसार वैज्ञानिक आकलन के बाद कर्नाटक के 240 तालुकों में से 217 को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा, “बिना किसी दबाव में आए, केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए और बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से आकलन करके सूखा प्रभावित तालुकों की पहचान की गई।”

शिवकुमार ने कहा कि किसानों की परेशानी के राज्य की अर्थव्यवस्था और समाज पर व्यापक असर पड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अगर किसान परेशान हैं, तो सब कुछ ठप हो जाता है। इसलिए, केंद्र सरकार को कर्नाटक के किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।”

स्थिति को चिंताजनक बताते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि अपने और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के चार दशकों के सार्वजनिक जीवन में, उन्होंने लोगों को इतनी गंभीर मुश्किलों का सामना करते हुए कभी नहीं देखा।

उन्होंने कहा, “यह बहुत चिंताजनक स्थिति है।” उन्होंने आगे कहा कि राज्य ने चुने हुए प्रतिनिधियों और किसानों की समस्याओं को समझने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया था, जिसमें 150 विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं के बारे में बात की।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि कृष्णा बेसिन को छोड़कर राज्य के ज्यादातर हिस्सों में जलाशयों में पानी की आवक कम है। उन्होंने कहा कि मलनाड और तटीय इलाकों में भी बारिश की भारी कमी देखी जा रही है।

उन्होंने शहरी इलाकों में पानी की स्थिति की ओर भी इशारा किया और कहा कि राज्य पर पानी की उपलब्धता को लेकर दबाव है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कावेरी जल समिति कर्नाटक को कावेरी नदी में पानी छोड़ने का निर्देश दे रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए 2,500 रुपए की राहत राशि की घोषणा की थी, लेकिन राज्य को केंद्र से और अधिक मदद की उम्मीद थी।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि मंत्रियों ने जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए जिलों का दौरा किया है, जबकि अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में एहतियाती और राहत के उपाय किए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक दौरे के दौरान राज्य को सूखे की स्थिति के बारे में आगाह किया था और उसके बाद उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों और अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने कहा कि बारिश की स्थिति को देखते हुए किसानों को बुवाई के फैसलों के बारे में भी सलाह दी गई है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि किसान भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, जबकि गन्ना उत्पादक ज्यादा कीमत की मांग कर रहे हैं। दूध उत्पादक भी दूध की कीमतों में कम से कम 10 रुपए की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इस मुश्किल हालात में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए।”

बैठक में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एल.के. अतीक, अतिरिक्त मुख्य सचिव और विकास आयुक्त डॉ. उमा महादेवन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव तुषार गिरिनाथ, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रितेश कुमार सिंह, राजस्व विभाग (आपदा प्रबंधन) के प्रधान सचिव मनोज कुमार मीना और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

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राजनीति

यूपी में सपा ने बदले दो एमएलसी उम्मीदवार, अखिलेश बोले-अनुभवी चेहरों के आने से जीत पक्की

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उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अचानक अपने दो उम्मीदवार बदल दिए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कमलेश यादव की जगह डॉ. संजयन त्रिपाठी और आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रकाश चंद्र गुप्त की जगह पूर्व एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की है। दोनों बदलावों को अखिलेश यादव ने संबंधित नेताओं की सहमति से लिया गया फैसला बताया।

अखिलेश यादव ने नए प्रत्याशियों का स्वागत करते हुए पहले घोषित उम्मीदवारों कमलेश यादव और प्रकाश चंद्र गुप्त, उनके परिवारों तथा समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि दोनों ने जिस तरह पार्टी के फैसले में सहयोग किया है, उसके लिए वह उनके हमेशा आभारी रहेंगे। अखिलेश ने यह भी कहा कि समय आने पर दोनों को उचित सम्मान दिया जाएगा। सपा ने इससे पहले गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर कमलेश यादव और आगरा शिक्षक सीट पर प्रकाश चंद्र गुप्त को प्रत्याशी घोषित किया था। अब पार्टी ने दोनों सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा है।

23 अक्टूबर को इन सीटों समेत विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटों के लिए मतदान होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। अखिलेश यादव ने कहा कि दोनों अनुभवी नेताओं के आने से पार्टी को चुनाव में मजबूती मिलेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से नए प्रत्याशियों के साथ पूरी ताकत से जुटने और पार्टी के सभी उम्मीदवारों को जिताने की अपील की। गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर डॉ. संजयन त्रिपाठी का नाम सामने आना खास तौर पर महत्वपूर्ण है। चुनावी घटनाक्रम के दौरान त्रिपाठी भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे थे।

भाजपा द्वारा ध्रुव त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने पार्टी से दूरी बनाई थी और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद अब सपा ने उन्हें अपने उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है। आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में डॉ. आकाश अग्रवाल पहले निर्दलीय एमएलसी रह चुके हैं। उनका कार्यकाल भी इस चुनाव के साथ समाप्त होने वाली सीटों में शामिल है। ऐसे में सपा का उन्हें उम्मीदवार बनाना क्षेत्र में उनके चुनावी अनुभव को साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

उम्मीदवारों की घोषणा के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोगों ने गलत तरीके से वोट बनवाए हैं। साथ ही उन्होंने पिछले 10 वर्षों के शासन, प्रशासन और पुलिस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने गोरखपुर में सड़क पर पानी भरे होने का वीडियो सोशल मीडिया पर डालने वाले व्यक्ति के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने का दावा किया। उन्होंने संतकबीरनगर में एक पहलवान की हत्या का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं। उन्होंने पुलिस व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में पुलिस व्यवस्था खराब हो चुकी है।

सपा अध्यक्ष ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को भी आगामी चुनावों के प्रमुख मुद्दों में शामिल करने के संकेत दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक की घटनाएं बढ़ीं और सरकारी नौकरियों में भेदभाव हुआ। अखिलेश यादव ने कहा कि तदर्थ शिक्षक, वित्तविहीन शिक्षक, शिक्षामित्र और पुरानी पेंशन योजना जैसे मुद्दों को समाजवादी पार्टी अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के साथ भेदभाव बड़ा सवाल है और पार्टी इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।

उन्होंने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर गरीबों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। अखिलेश यादव ने सपा के पीडीए-पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक-सामाजिक गठजोड़ को भी चुनावी विमर्श के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इंडिया ब्लॉक के साथ भाजपा को हराया था और आगामी चुनाव में पीडीए की ताकत के सामने भाजपा टिक नहीं पाएगी।

उन्होंने कहा कि सपा के पीडीए में प्रेम, दया और अपनापन है तथा पार्टी हर दुखी, पीड़ित और अपमानित व्यक्ति के साथ खड़ी है। उन्होंने भाजपा पर समाज के विभिन्न वर्गों के साथ अन्याय और भेदभाव करने का आरोप लगाया। सपा अध्यक्ष ने नई पीढ़ी और जेन-जी के बीच रोजगार को लेकर चिंता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास पर्याप्त नौकरी और रोजगार के अवसर नहीं हैं तथा बेरोजगारी बढ़ रही है। अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान युवाओं को लैपटॉप दिए गए थे और आज वही युवा मोबाइल और लैपटॉप के जरिए सरकार से सवाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी विकास चाहती है और पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच लेकर जाएगी।

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र से मानसून की और विदाई; कोंकण क्षेत्र के लिए गर्म और आर्द्र मौसम की चेतावनी

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मुंबई प्रेस — भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को घोषणा की है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के साथ-साथ उत्तर भारत के शेष हिस्सों, गुजरात और मध्य प्रदेश से पूरी तरह वापस चला गया है।

मानसून की वापसी की मौजूदा रेखा महाराष्ट्र में हरनई, बारामती, परभणी और ब्रह्मपुरी से होकर गुजर रही है, जो उत्तर-पूर्व में रायपुर, रांची और सुपौल तक फैली हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों के दौरान मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों से मानसून की आगे की विदाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
तटीय महाराष्ट्र के लिए गर्म और आर्द्र मौसम का अलर्ट

तटीय इलाकों के निवासियों को इस सप्ताहांत बढ़ती उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। आईएमडी ने 3 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक कोंकण और गोवा क्षेत्र में गर्म और आर्द्र (हॉट एंड ह्यूमिड) मौसम रहने की चेतावनी जारी की है।
इस शुष्क और उमस भरे दौर के बाद क्षेत्र में हल्की बारिश की गतिविधियां फिर से शुरू होने की संभावना है। 6 से 9 अक्टूबर के बीच कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट वर्षा होने का अनुमान जताया गया है।

दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत का पूर्वानुमान

एक तरफ जहां देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों से मानसून विदा ले रहा है, वहीं दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 4 से 6 अक्टूबर के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा, 5 और 6 अक्टूबर को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी तेज बौछारें पड़ सकती हैं।
पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 3 अक्टूबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है।

मछुआरों और किसानों के लिए सलाह

अरब सागर के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण, आईएमडी ने मछुआरों को 3 अक्टूबर को केरल तट, लक्षद्वीप, मालदीव और कॉमोरिन क्षेत्र से सटे समुद्र में न जाने की सलाह दी है। साथ ही, भारी बारिश वाले क्षेत्रों के किसानों को फसलों को नुकसान से बचाने के लिए खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने और कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने का परामर्श दिया गया है।

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