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रिकॉर्ड स्तर के बाद फीकी पड़ी सोने की चमक, चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार

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मुंबई, 13 जनवरी: सोमवार को रिकॉर्ड हाई स्तर छूने के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन, मंगलवार को शुरू में कीमती धातुओं (सोने और चांदी) की कीमतों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसकी वजह यह रही कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।

इससे पहले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई की खबरों के चलते सोने-चांदी के दाम काफी बढ़ गए थे और रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए थे।

हालांकि, बाद में चांदी ने रिकवरी की और एमसीएक्स पर इसकी कीमतों में उछाल देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत गिरकर 1,41,577 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जबकि, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपए की तेजी के साथ 2,70,322 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करते नजर आई।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत घटकर 1,40,482 रुपए हो गई, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,40,499 रुपए थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई थी। इसके बाद निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में गिरावट आई।

सोने की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह ऐलान रहा, जिसमें उन्होंने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने कहा कि बाजार की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच पर बनी हुई है। पॉवेल ने इसे राजनीतिक दबाव बताया है, जिसका मकसद ब्याज दरों में कटौती करवाना है।

निवेशक अब अमेरिका की महंगाई से जुड़े अहम आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि आगे की नीति की दिशा साफ हो सके। माना जा रहा है कि इस महीने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन साल के अंत तक दो बार कटौती हो सकती है।

पिछले सप्ताह आई अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने की जानकारी मिली थी। इससे यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है।

ईरान में हो रहे प्रदर्शनों, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए संकेतों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। इन कारणों से सोने की कीमतों को सहारा मिला है।

विश्लेषकों के अनुसार, सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपए के बीच सपोर्ट, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपए के स्तर पर रेजिस्टेंस मिल रहा है।

वहीं, चांदी में 2,60,810 से 2,54,170 रुपए के बीच सपोर्ट और 2,71,810 से 2,74,470 रुपए के बीच रेजिस्टेंस है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि चांदी की मांग लंबे समय में मजबूत बनी हुई है। उद्योगों और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती जरूरत और कम आपूर्ति के चलते आने वाले समय में चांदी की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

व्यापार

वैश्विक चिंताओं के चलते लगातार 7वें सप्ताह फिसला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी 0.88 प्रतिशत तक टूटा

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वैश्विक चिंताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में 0.88 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

साप्ताहिक आधार पर निफ्टी 0.88 प्रतिशत कमजोर हुआ, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन इसमें 0.34 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स शुक्रवार को 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 73,895 पर बंद हुआ, लेकिन पूरे सप्ताह में इसमें 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सप्ताह के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को दोनों प्रमुख सूचकांक 1.6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए थे, जबकि शुक्रवार को चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग के चलते सीमित रिकवरी देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह भर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने तेल बाजार को सहारा दिया। हालांकि सप्ताह के अंत में तेल कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली, जिससे आयात बिल, महंगाई, रुपए और कॉरपोरेट लागत पर दबाव की आशंकाएं थोड़ी कम हुईं।

दूसरी ओर, अमेरिकी बॉन्ड बाजार ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान 5.10 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची यील्ड वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को सख्त बनाती है और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों को अपेक्षाकृत कम आकर्षक बना सकती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, एफआईआई लगातार छठे सप्ताह शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने सप्ताह के दौरान 11,490 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हुए 16,398 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया, जिससे बाजार में गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।

सितंबर महीने में अब तक एफआईआई कुल 18,531 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि डीआईआई ने 52,617 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की है। इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के अंत के स्तर से लगभग 3.9 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।

बाजार की नजरें अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी टिकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को एक नया सात-दिवसीय प्रस्ताव दिया है, जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, तेल प्रतिबंधों में राहत और व्यापक युद्धविराम के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है। निवेशकों का मानना है कि यदि इस दिशा में प्रगति होती है तो तेल कीमतों पर भू-राजनीतिक प्रीमियम कम हो सकता है।

तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि 23,000 का स्तर निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट क्षेत्र बना हुआ है, जबकि 23,200 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस है। बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेश प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एफआईआई की बिकवाली जारी रहती है और वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी रहती हैं, तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी फिलहाल बाजार को बड़े नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

अगले सप्ताह निवेशकों की नजर विशेष रूप से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों, अमेरिका-ईरान वार्ता के घटनाक्रम और अमेरिका की दूसरी तिमाही (क्यू2) जीडीपी के आंकड़ों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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व्यापार

जयशंकर की ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों से मुलाकात, खाड़ी संकट के हालात पर चर्चा

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खाड़ी संकट के केंद्र में मौजूद दो देशों ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और मौजूदा हालात पर चर्चा की। इस संकट का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।

जयशंकर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर बताया कि शुक्रवार को ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमूद बिन हमूद अल बुसैदी ने उन्हें खाड़ी क्षेत्र में जारी तनावपूर्ण स्थिति की ताजा जानकारी दी।

इससे पहले दिन में जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से मुलाकात की। जयशंकर ने ‘एक्‍स’ पर कहा कि दोनों नेताओं ने खाड़ी में जारी संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की।

होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करने के लिए किसी अंतरिम समाधान तक पहुंचने में ईरान और ओमान की अहम भूमिका है। फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल की बमबारी के बाद शुरू हुए संकट के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

जयशंकर की ये मुलाकातें ऐसे समय हुईं, जब शुक्रवार को होर्मुज स्‍ट्रेट को फिर से खोलने को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया।

अराघची ने होर्मुज स्‍ट्रेट को खोलने के लिए सात दिन की योजना पेश की और साथ ही लंबे समय के युद्धविराम पर बातचीत दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव रखा। खबरों के मुताबिक, ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

ओमान और ईरान के बीच जलडमरूमध्य को खोलने की एक योजना पर भी बातचीत हुई थी। इसके तहत वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने और आवाजाही के लिए दो लेन की व्यवस्था बनाने की बात थी। योजना के मुताबिक, जहाज ईरान की तरफ से खाड़ी में प्रवेश करते और ओमान की तरफ से बाहर निकलते।

ईरान के साथ ऐसी योजना पर चर्चा करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ओमान को धमकी दी। आखिरकार ईरान भी इस बातचीत से पीछे हट गया और उसने ओमान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

कुछ जहाज ओमान के तट के बेहद करीब से गुजरते हुए होर्मुज स्‍ट्रेट को पार करने में कामयाब रहे हैं, जबकि ईरानी बंदरगाह अमेरिका की घेराबंदी में हैं।

तेहरान ने ओमान वाले रास्ते का इस्तेमाल करने वाले कुछ जहाजों पर हमले भी किए हैं।

इस बीच, जयशंकर ने जहाजरानी के रास्ते बंद किए जाने और जहाजों तथा नाविकों पर हमलों की निंदा की। उन्होंने यह बात 25 देशों के राजनयिकों के साथ हुई एक बैठक में कही। यह बैठक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ की शुरुआत के मौके पर आयोजित की गई थी।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

मिल्वौकी में जुटेंगे जी20 के व्यापार मंत्री, जबरन मजदूरी से लेकर वैश्विक व्यापार नियमों तक होगी चर्चा

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अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर अगले हफ्ते अमेरिका के मिल्वौकी में जी20 देशों के व्यापार मंत्रियों की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में जबरन मजदूरी, खाने-पीने की चीजों का व्यापार, जरूरत से ज्यादा औद्योगिक उत्पादन और वैश्विक व्यापार व्यवस्था के एक अहम नियम में संभावित बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) की ओर से शुक्रवार को जारी कार्यक्रम के मुताबिक, यह मंत्रिस्तरीय बैठक 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक चलेगी।

ग्रीर वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी को खत्म करने और जरूरत से ज्यादा उत्पादन तथा औद्योगिक क्षमता से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत की अगुवाई करेंगे। इस बैठक में भारत की ओर से वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल हिस्सा लेंगे।

मंत्री ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ के सिद्धांत को अपडेट करने पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों के व्यापार को दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के मुद्दे पर भी बातचीत होगी, जिसे यूएसटीआर व्यापार का हथियार बनाना बताया है।

‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ सिद्धांत के तहत विश्व व्यापार संगठन (डब्‍ल्‍यूटीओ) के किसी सदस्य देश को अगर वह किसी दूसरे सदस्य देश को कोई खास व्यापारिक फायदा देता है, तो आमतौर पर वही फायदा दूसरे डब्‍ल्‍यूटीओ सदस्य देशों को भी देना होता है। हालांकि, डब्‍ल्‍यूटीओ के नियमों के तहत इसके कुछ अपवाद भी हैं।

यूएसटीआर की ओर से जारी जानकारी में यह नहीं बताया गया कि अमेरिका एमएफएन सिद्धांत में किस तरह के बदलाव का प्रस्ताव मिल्वौकी की बैठक में रख सकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार शाम ‘बिज़नेस राउंडटेबल’ और ‘नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स’ की ओर से आयोजित स्वागत कार्यक्रम से होगी। बुधवार सुबह औपचारिक कार्यक्रम की शुरुआत ‘ग्लोबल फोरम ऑन स्टील एक्सेस कैपेसिटी’ की मंत्रिस्तरीय बैठक से होगी।

स्टील उत्पादन और जरूरत से ज्यादा औद्योगिक क्षमता हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बड़े विवादों में शामिल रही है। अमेरिका बार-बार कहता रहा है कि जरूरत से ज्यादा उत्पादन से उसके घरेलू उद्योगों और कामगारों पर दबाव पड़ता है।

स्टील से जुड़ी बैठक के बाद ग्रीर और दूसरे देशों के मंत्री मिल्वौकी में ‘रॉकवेल ऑटोमेशन’ की एक फैसिलिटी का दौरा करेंगे। यूएसटीआर के मुताबिक, वे फैक्ट्री के अंदर जाकर कामगारों और उद्योग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

इस दौरे के जरिए ट्रंप प्रशासन अपने इस दावे को सामने रखना चाहता है कि उसकी व्यापार नीति अमेरिका में औद्योगिक उत्पादन को दोबारा बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद कर रही है।

बुधवार दोपहर जी20 व्यापार मंत्रियों की पहली औपचारिक बैठक में ग्रीर शुरुआती संबोधन देंगे। उसी शाम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय और अमेरिकी कृषि विभाग विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए स्वागत डिनर का आयोजन करेंगे। मुख्य मंत्रिस्तरीय बातचीत गुरुवार को होगी। इसमें सुबह का एक सत्र दोपहर एक बजे तक चलेगा और दूसरा सत्र दोपहर बाद होगा। इन दोनों सत्रों के बीच ग्रीर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी तय है।

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