व्यापार
भारत में यूजर्स बढ़ाने के लिए ओपनएआई, गूगल और परप्लेक्सिटी ने शुरू किए मुफ्त एआई टूल्स
नई दिल्ली, 19 दिसंबर : ओपनएआई, गूगल और परप्लेक्सिटी ने भारत में अपने प्रीमियम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स को मुफ्त में उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, जिससे दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में से एक, यानी भारत में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है।
इस कदम का उद्देश्य भारत में तेजी से अपने यूजर्स की संख्या बढ़ाना है, क्योंकि यहां मोबाइल डेटा सस्ता है और स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या बहुत ज्यादा है।
भारत में तकरीबन 73 करोड़ स्मार्टफोन यूजर हैं और दुनिया में सबसे सस्ते मोबाइल डेटा की दरें हैं। लोग हर महीने लगभग 21 गीगाबाइट डेटा इस्तेमाल करते हैं और प्रति गीगाबाइट केवल 9.2 सेंट का भुगतान करते हैं। इससे एआई टूल्स का इस्तेमाल यहां कई अन्य देशों की तुलना में सस्ता पड़ता है।
ओपनएआई ने अपने चैटजीपीटी गो प्लान को भारत में एक साल के लिए मुफ्त कर दिया है। यह प्लान साधारण चैटजीपीटी से ज्यादा उपयोग की अनुमति देता है। पहले यह प्लान भारत में 54 डॉलर की थी। इस मुफ्त पेशकश की वजह से यूजर्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सेंसर टॉवर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में चैटजीपीटी के दैनिक एक्टिव यूजर 73 मिलियन तक पहुंच गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 607 प्रतिशत बढ़े हैं। यह संख्या अमेरिका के दैनिक यूजर्स की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। भारत अब रोजाना यूजर्स के हिसाब से सबसे बड़ा बाजार बन गया है।
परप्लेक्सिटी ने भी अपने प्रो प्लान को, जो दुनिया में 200 डॉलर सालाना का है, एयरटेल ग्राहकों के लिए एक साल के लिए मुफ्त कर दिया। इस प्लान से दुनिया भर में अब परप्लेक्सिटी के डेली एक्टिव यूजर्स की संख्या में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले साल केवल 7 प्रतिशत था।
यूजर इंगेजमेंट डेटा से पता चलता है कि भारत में चैटजीपीटी सबसे लोकप्रिय है। नवंबर में लगभग 46 प्रतिशत मासिक यूजर्स ने रोज ऐप खोला, जबकि परप्लेक्सिटी के लिए यह संख्या 20 प्रतिशथ और जैमिनी के लिए 14 प्रतिशत थी।
व्यापार
बाजार हरे निशान में बंद, सेंसेक्स में 299 अंकों की उछाल, निफ्टी में 0.50 प्रतिशत की तेजी

पिछले दिन की गिरावट से उबरते हुए बुधवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। अमेरिकी-ईरान वार्ता की उम्मीदों के चलते तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर होने से प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी में 0.50 प्रतिशत तक की उछाल दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय, सेंसेक्स 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत बढ़कर 74,828.25 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 117.80 अंक यानी 0.5 प्रतिशत बढ़कर 23,446.80 पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 0.70 प्रतिशत और 0.89 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वहीं, सेक्टरवार देखें, तो निफ्टी मेटल ने 2.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी सीमेंट ने भी अपने समकक्षों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया ने सबसे खराब प्रदर्शन किया, जिनमें क्रमशः 0.87 प्रतिशत और 0.50 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
निफ्टी50 इंडेक्स में बजाज फाइनेंस, हिंडाल्को, टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल और जेएसडब्ल्यू स्टील ने बेहतर प्रदर्शन किया और टॉप गेनर्स में शामिल रहे। इसके साथ ही ग्रासिम, नेस्ले इंडिया, आईटीसी, एलएंडटी, पावरग्रिड और अदाणी पोर्ट्स में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। जबकि इसके विपरीत, एचसीएल टेक, टाइटन, इंफोसिस, कोल इंडिया, टीसीएस, विप्रो, एनटीपीसी, बीईएल और ट्रेंट सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि दिन भर उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने कच्चे तेल की कीमतों में दिन के दौरान आई तेजी को नजरअंदाज किया और घरेलू विकास की रफ्तार मजबूत होने के संकेतों पर ध्यान दिया।
एक्सपर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण तेल की कीमतों में ‘रिस्क प्रीमियम’ बना रहा, जिससे मज़बूत होते अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपए पर दबाव पड़ा।
हालांकि, सितंबर के ‘फ्लैश पीएमआई’ के उम्मीद से बेहतर रहने से आर्थिक गतिविधियों के मजबूत बने रहने का भरोसा बढ़ा। इससे संकेत मिला कि महंगाई का दबाव बढ़े बिना विकास की रफ्तार बनी हुई है।
एक्सपर्ट ने कहा कि इस सकारात्मक मैक्रो माहौल ने पूरे बाजार में खरीदारी को बढ़ावा दिया, जिससे घरेलू शेयरों को एशियाई बाजारों की बढ़त के साथ आगे बढ़ने में मदद मिली।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो मेटल और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही, जबकि व्यापक बाजार में अच्छी भागीदारी से निवेशकों का बढ़ता भरोसा झलका। हालांकि, आईटी शेयरों में सुस्ती रही, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स की बढ़त ऊपरी स्तरों पर सीमित रही।
राष्ट्रीय समाचार
लिस्टिंग से पहले एनएसई आईपीओ का जीएमपी घटकर 43 रुपए, प्रीमियम लिस्टिंग की उम्मीद कमजोर

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की लिस्टिंग से एक दिन पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) में और गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को आईपीओ का जीएमपी घटकर 43 रुपए प्रति शेयर रह गया, जिससे लिस्टिंग पर सीमित लाभ मिलने के संकेत मिल रहे हैं।
ताजा जीएमपी के आधार पर एनएसई के शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत करीब 1,828 रुपए प्रति शेयर आंकी जा रही है। यह आईपीओ के ऊपरी इश्यू प्राइस 1,785 रुपए की तुलना में लगभग 2.41 प्रतिशत का संभावित प्रीमियम दर्शाता है।
ग्रे मार्केट में निवेशकों का उत्साह पिछले कुछ दिनों में काफी कम हुआ है। आईपीओ खुलने से पहले इसका जीएमपी करीब 145 रुपए प्रति शेयर तक पहुंच गया था, जिससे 8 प्रतिशत से अधिक लिस्टिंग गेन की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि समय के साथ प्रीमियम में लगातार गिरावट देखने को मिली है।
17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुले इस आईपीओ को निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली थी। शेयरों का आवंटन 22 सितंबर को पूरा हुआ, जबकि कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 24 सितंबर को बीएसई पर होने की उम्मीद है।
22,568.94 करोड़ रुपए के इस सार्वजनिक निर्गम को कुल मिलाकर 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 50.58 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए आवेदन प्राप्त हुए। कुल बोलियों का मूल्य 90,287.33 करोड़ रुपए रहा।
निवेशक श्रेणियों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) ने सबसे अधिक रुचि दिखाई। इस हिस्से को 12.68 गुना सब्सक्राइब किया गया। वहीं गैर-संस्थागत निवेशक (एनआईआई) श्रेणी को 6.55 गुना और रिटेल निवेशक (आरआईआई) श्रेणी को 1.39 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।
एनएसई ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपए से 1,785 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था, और यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) था, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारकों ने 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की। इस आईपीओ में कंपनी ने कोई नया शेयर जारी नहीं किया।
कारोबारी प्रदर्शन की बात करें तो एनएसई की आय का बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से आता है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन शुल्क से प्राप्त हुआ। इसमें अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग का योगदान परिचालन आय में 60 प्रतिशत से अधिक रहा, जो डेरिवेटिव कारोबार पर कंपनी की मजबूत निर्भरता को दर्शाता है।
बाजार हिस्सेदारी के मामले में भी एनएसई की स्थिति बेहद मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में एक्सचेंज की इक्विटी कैश सेगमेंट में लगभग 93 प्रतिशत, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.79 प्रतिशत, करेंसी फ्यूचर्स में 99.48 प्रतिशत और इक्विटी ऑप्शंस में प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर 74.71 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।
हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इक्विटी ऑप्शंस बाजार में इसकी हिस्सेदारी घटकर 68.48 प्रतिशत रह गई, जो बढ़ती प्रतिस्पर्धा की ओर संकेत करती है।
राष्ट्रीय समाचार
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुला; निफ्टी 23,400 के ऊपर

भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में तेजी के साथ खुला। सुबह 9:20 पर सेंसेक्स 260 अंक या 0.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,782 और निफ्टी 83 अंक या 0.35 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,411 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को सहारा मेटल और एफएमसीजी स्टॉक्स से मिल रहा था। सूचकांकों में निफ्टी मेटल और निफ्टी एफएमसीजी टॉप गेनर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी ऑटो हरे निशान में थे। केवल निफ्टी आईटी ही लाल निशान में था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 188 अंक या 0.29 प्रतिशत की तेजी के साथ 62,145 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 119 अंक या 0.60 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,934 पर था।
सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन,एचयूएल, इंडिगो, आईटीसी, एक्सिस बैंक, मारुति सुजुकी और भारती एयरटेल गेनर्स थे। टीसीएस, इन्फोसिस, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, आईसीआईसीआई बैंक और बीईएल लूजर्स थे।
जानकारों के मुताबिक, हाल के दिनों में मार्केट का स्ट्रक्चर तकनीकी रूप से कमजोर रहा है और इसमें गिरावट का रुझान दिखा है। अगर मार्केट की इस स्थिति को बदलना है, तो कुछ बड़े ट्रिगर की जरूरत होगी। लेकिन मौजूदा मैक्रो हालात में, खासकर विकसित देशों में ज्यादा महंगाई को देखते हुए, ऐसा होने की संभावना कम है।
उन्होंने आगे कहा कि घरेलू लिक्विडिटी से व्यापक बाजार को सहारा मिल रहा है। अच्छी ग्रोथ और बेहतर ग्रोथ की संभावनाओं के कारण कई मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में निवेश आ रहा है,लेकिन इन सेगमेंट में वैल्यूएशन काफी बढ़ गए हैं।
मध्य पूर्व में तनाव कम होने की संभावना के चलते कच्चे तेल में हाल के दिनों में गिरावट देखने को मिली है। अब बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 98.21 डॉलर प्रतिशत पर आ गया है।
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