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संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने प्रशासनिक ढांचा बदलने का दिया प्रस्ताव, खर्चों में बड़ी कटौती का लक्ष्य

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संयुक्त राष्ट्र, 2 दिसंबर: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कामकाज को अधिक कुशल और कम खर्चीला बनाने के लिए एक बड़े प्रशासनिक सुधार की घोषणा की है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की विभिन्न इकाइयों को अलग-अलग तरीके से मिलने वाली प्रशासनिक सेवाओं को अब एक कॉमन एडमिनिस्ट्रेटिव प्लेटफॉर्म के तहत जोड़ा जाए। इससे काम की गति बढ़ेगी और खर्चों में भारी कटौती होगी।

गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की पांचवीं समिति को बताया कि इसे न्यूयॉर्क और बैंकॉक स्टेशनों से शुरू किया जाएगा। उन्होंने 2026 के लिए प्रस्तावित प्रोग्राम बजट और 2025/26 की अवधि के लिए पीसकीपिंग ऑपरेशन के सपोर्ट अकाउंट से जुड़ी एक रिवाइज्ड एस्टिमेट रिपोर्ट पेश की

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि अभी अलग-अलग इकाइयां एक जैसा काम करती हैं, जिससे समय और धन दोनों की अधिक खपत होती है। ये नया मॉडल हमारी दक्षता को काफी बढ़ाएगा।

यूएन प्रमुख ने पूरे यूएन सिस्टम की पेरोल प्रोसेसिंग को एक ग्लोबल टीम के तहत लाने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह टीम तीन प्रमुख केंद्रों से काम करेगी, जिनमें यूएन मुख्यालय (न्यूयॉर्क), रीजनल सर्विस सेंटर, एंटेब्बे (युगांडा) यूएन ऑफिस, नैरोबी (केन्या) शामिल हैं। इससे प्रक्रिया सरल होगी और खर्च भी कम होगा।

उन्होंने पेरोल प्रोसेसिंग को एक सिंगल ग्लोबल टीम में कंसॉलिडेट करने का भी प्रस्ताव रखा, जो तीन सेंटर्स — UN हेडक्वार्टर, एंटेबे में रीजनल सर्विस सेंटर और नैरोबी में यूनाइटेड नेशंस ऑफिस में काम करेगी।

इसके अलावा, गुटेरेस ने न्यूयॉर्क और जिनेवा में एंटिटीज द्वारा उन कामों की की व्यवस्थित समीक्षा करने का प्रस्ताव रखा, जिन्हें कम लागत वाले ड्यूटी स्टेशनों में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह हमारे कमर्शियल फुटप्रिंट को कम करने और लंबे समय में लागत में कमी लाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

यूएन प्रमुख के अनुसार, 2017 से न्यूयॉर्क में व्यावसायिक लीज खत्म करने और दफ्तरों के समेकन के जरिए यूएन सचिवालय ने 126 मिलियन डॉलर की बचत की है।

अब दो और इमारतों की लीज 2027 तक समाप्त की जाएगी, जिससे 2028 से हर साल 24.5 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त बचत होने का अनुमान है।

गुटेरेस द्वारा पेश रिपोर्ट के अनुसार, यूएन का 2026 का नियमित बजट 3.238 बिलियन डॉलर प्रस्तावित है, जो 2025 की तुलना में 15.1 प्रतिशत कम है।

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बांग्लादेश: अवामी लीग ने बीएनपी सरकार पर हिंसा और राजनीतिक बदले की भावना बढ़ाने का लगाया आरोप

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बांग्लादेश की अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) सरकार के कार्यकाल में देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। पार्टी ने हत्या, बलात्कार, भीड़ द्वारा हत्या और लोगों के जबरन गायब किए जाने की चिंताजनक घटनाओं का हवाला दिया है।

अवामी लीग ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद पर आरोप लगाया कि वह कानून-व्यवस्था के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध को तरजीह दे रहे हैं। हालात बिगड़ने के बावजूद वह एक मंच पर आए और अवामी लीग को खत्म करने का दावा करते हुए ऐसा करने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी की।

अवामी लीग के अनुसार, इस साल फरवरी से सितंबर के बीच, यानी सिर्फ सात महीनों में हिंसा के 21,756 मामले दर्ज किए गए। इन आंकड़ों में 1,789 हत्या और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ हिंसा के 11,165 मामले शामिल थे, जबकि पुलिस पर हमले के भी 317 मामले सामने आए।

पार्टी ने आगे कहा कि जनवरी से अगस्त के बीच रेप के 339 मामले सामने आए, जिनमें 114 गैंग रेप के मामले थे। 41 मामलों में पीड़िताओं की रेप के बाद हत्या कर दी गई। पार्टी ने जून में भीड़ की हिंसा में 31 लोगों की मौत और अगस्त में 28 और लोगों की मौत का भी जिक्र किया।

ढाका की संस्था ‘ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी’ (एचआरएसएस) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अवामी लीग ने कहा कि इस साल जनवरी से जून के बीच हुई 830 राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में 56 लोगों की मौत हुई और 5,246 लोग घायल हुए। अल्पसंख्यक समुदायों के 44 लोग मारे गए, जबकि 383 पत्रकारों को उत्पीड़न या हमलों का सामना करना पड़ा। सिर्फ अगस्त में ही नदियों, नहरों और जंगलों से 87 अज्ञात शव बरामद किए गए।

अवामी लीग ने कहा, “ऐसे हालात में, गृह मंत्री की सबसे बड़ी चिंता तथाकथित अवामी लीग सहयोगियों को पकड़ने पर इनाम देने की है। यह ऐसा है, जैसे खून से सने युद्ध के मैदान में गुलाब बांटे जा रहे हों। मंत्री पुलिस इंटेलिजेंस की डींगें तो मारते हैं, लेकिन पुलिस कस्टडी में मौतें, लोगों का जबरन गायब होना और जेलों में 58 लोगों की मौतें उनके हिसाब-किताब का हिस्सा नहीं लगतीं।”

पार्टी ने आगे कहा, “2001 से 2006 तक बीएनपी-जमात सरकार के दौरान बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याएं, लोगों का जबरन गायब होना, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और भ्रष्टाचार शामिल थे। इन्हें इतिहास के पन्नों से आसानी से मिटाया नहीं जा सकता। सत्ता में वापसी के बाद बीएनपी ने महज सात महीनों में ही यह दिखा दिया है कि वह शासन करने के लिए नहीं, बल्कि बदला लेने के लिए लौटी है।”

पार्टी ने सवाल उठाया कि राजनीतिक दिवालियापन किस हद तक बढ़ सकता है कि कोई सरकार उसी राजनीतिक पार्टी को पूरी तरह खत्म करने का इरादा जाहिर करे, जिसके नेतृत्व में बांग्लादेश बना था।

पार्टी ने कहा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। जब कोई मंत्री उस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहने के बाद राजनीतिक गिरफ्तारियों के लिए इनाम की घोषणा करने लगता है, तो यह साफ हो जाता है कि इस सरकार के लिए लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है, बल्कि राजनीतिक बदले की भावना प्राथमिकता है।”

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सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और अहम रणनीतिक साझेदार: वित्त मंत्री सीतारमण

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और अहम रणनीतिक साझेदार है। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी पर जोर दिया।

निर्मला सीतारण ने दोहा में ‘एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) 2026 सालाना बैठक’ के दौरान सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान से मुलाकात की। अल-जदान ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और बेहतर होते निवेश माहौल के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री को बधाई दी और सऊदी अर्थव्यवस्था के बारे में अपनी राय रखी।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने भारत-सऊदी अरब द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर बातचीत के सफल समापन का स्वागत किया। इससे द्विपक्षीय निवेश के लिए एक मजबूत और अधिक भरोसेमंद ढांचा मिलेगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। अल-जदान ने कहा कि सऊदी अरब इसके जल्द लागू होने का इंतजार कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब की राजकीय यात्रा के दौरान बताई गई सोच को याद करते हुए दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।

अलजदान ने भारत से निवेश का स्वागत करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। स्विट्जरलैंड से एआईआईबी गवर्नर और राजदूत पिएत्रो लाजेरी के साथ अपनी बैठक में उन्होंने भारत में मौके तलाश रहे विदेशी निवेशकों के लिए ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ (एनआईआईएफ) को एक भरोसेमंद पार्टनर बताया, जो गवर्नेंस और पारदर्शिता के ऊंचे स्टैंडर्ड्स का पालन करता है। साथ ही, स्विस निवेशक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश के लिए एनआईआईएफ इंफ्रास्ट्रक्चर फंड पर विचार कर सकते हैं।

राजदूत लाजेरी ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत में पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और निवेश के लिए बड़े मौके देखता है। उन्होंने भारत की आगामी राजकीय यात्रा और नई दिल्ली में होने वाले दूसरे यूरोपीय मुक्त व्यापार संगठन (ईएफटीए) प्रॉस्पेरिटी समिट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में स्विस फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) की ग्रोथ ग्लोबल एफडीआई से ज्यादा तेजी से हो रही है और ‘बायलैटरल इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन एग्रीमेंट’ को अंतिम रूप देने के लिए सहयोग मांगा।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, लाजेरी ने फाइनेंशियल सेक्टर और सस्टेनेबल फाइनेंस में सहयोग करने में भी दिलचस्पी दिखाई।

वित्त मंत्री सीतारमण ने स्विस निवेशकों और फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों को जीआईएफटी आईएफएससी में भारत के अपने फाइनेंशियल सर्विस सेंटर में निवेश के मौके तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया, जो वित्तीय सेवा और उत्पाद, टैक्स लाभ और बिजनेस के अनुकूल माहौल देता है।

सीतारमण ने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले से भी मुलाकात की। दोनों मंत्री दोबारा मिलकर खुश थे और उन्होंने नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान बातचीत को आगे बढ़ाने के मौके पर चर्चा की।

बातचीत में बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण और रिकवरी के लिए नेपाल के आकलन और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। साथ ही, इस मुश्किल समय में भारत जो भी मदद दे सकता है, उसकी बारीकियों पर काम करने के लिए दोनों देशों की टीमों के बीच लगातार बातचीत जारी रखने पर जअर दिया गया।

मंत्रियों ने नई दिल्ली बैठक में शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर भी चर्चा की और लगातार बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया। बयान में कहा गया है कि यूपीआई-एनपीआई लिंकेज को जल्द शुरू करने और इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई, क्योंकि यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद पहल है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

नेपाल में बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से 27 की मौत, चार लोग लापता

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नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई है कि 24 सितंबर से 28 सितंबर तक लगातार बारिश के कारण आई बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, तेज हवाओं और बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं में नेपाल में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए।

प्रधानमंत्री सचिवालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान चार लोग लापता हो गए और मॉनसून से जुड़ी 513 घटनाओं से 1,065 परिवार प्रभावित हुए। इन आपदाओं में 225 घर पूरी तरह और 137 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। सत्ताइस पशुशालाएं और 114 मवेशी भी प्रभावित हुए।

सरकार की ओर से कहा गया कि उसने बचाव, राहत और पुनर्वास के प्रयासों को तेज कर दिया है और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और सामान्य जीवन बहाल करने के लिए अपनी एजेंसियों को काम पर लगा दिया है। देश भर में बाढ़ और भूस्खलन से हाईवे और मुख्य सड़कों पर 147 जगहों पर नुकसान पहुंचा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 125 जगहों की मरम्मत कर उन्हें फिर से खोल दिया गया है।

पश्चिमी नेपाल में बेनी-जोमसोम, पाल्पा, बाग्लुंग और नवलपरासी जिलों के कुछ हिस्सों में भूस्खलन, सड़क धंसने और पुल के एप्रोच (पुल तक पहुंचने वाले रास्ते) को नुकसान पहुंचने के कारण कालीगंडकी कॉरिडोर पर भी यातायात बाधित हुआ है। अधिकारियों का अनुमान है कि सड़क को पूरी तरह बहाल करने में तीन दिन से ज्यादा का समय लग सकता है।

बाढ़ से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। कालीगंडकी, मार्स्यांगडी और सेती-माडी नदी कॉरिडोर में राष्ट्रीय ट्रांसमिशन सिस्टम के जरिए कुल 1,013.2 मेगावाट बिजली की आपूर्ति बाधित हुई।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, बीते महीने 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर पर बने लगभग एक दर्जन पनबिजली प्रोजेक्ट भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इस बाढ़ में 1,400 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और लगभग 5,000 लोग लापता हो गए थे।

सरकारी बिजली कंपनी, नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (एनईए) ने कहा कि वह आने वाले सर्दियों के मौसम में भारत से 1,100 मेगावाट से ज्यादा बिजली आयात करने की योजना बना रही है। सर्दियों में घरेलू बिजली उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट की आशंका है क्योंकि ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ पनबिजली प्रोजेक्ट कम बिजली पैदा करते हैं।

एनईए ने कहा कि जनवरी के बाद घरेलू बिजली उत्पादन लगभग 1,218 मेगावाट रहने की उम्मीद है, जबकि मांग 2,293 मेगावाट रहने का अनुमान है। एनईए के मैनेजिंग डायरेक्टर दीर्घायु कुमार श्रेष्ठ ने सोमवार को कहा, “इसीलिए हमने बिजली सप्लाई को मैनेज करने के लिए आने वाले सूखे मौसम में भारत से 1,155 मेगा वाट बिजली इंपोर्ट करने का प्लान बनाया है।”

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