अपराध
हरियाणा पुलिस का बड़ा एक्शन: ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ में 11 दिन में 3000 से अधिक अपराधी गिरफ्तार
चंडीगढ़, 17 नवंबर: हरियाणा को सुरक्षित बनाने और संगठित अपराधों के सिंडिकेट को ध्वस्त करने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए चलाए जा रहे विशेष राज्यव्यापी अभियान ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ ने एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 5 नवंबर से शुरू हुआ यह सघन अभियान अपने 11वें दिन में पहुंच चुका है और प्रदेश में कानून का शिकंजा कसते हुए अपराधियों के मन में खौफ पैदा कर रहा है। इस ऑपरेशन के 11वें दिन विभिन्न अपराधों में शामिल 96 कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इस ऐतिहासिक कार्रवाई के साथ, ऑपरेशन ट्रैकडाउन ने अब तक कुल 3172 अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
इन गिरफ्तारियों में संगीन और गंभीर अपराधों में शामिल 610 अभियुक्त शामिल हैं, जबकि अन्य मुकदमों में गिरफ्तार अपराधियों की कुल संख्या 2562 हो गई है। आईजी राकेश आर्य ने बताया कि 15 नवंबर को हत्या के 7 मामलों में 8 गिरफ्तारियां, हत्या के प्रयास के 23 मामलों में 29 गिरफ्तारियां और आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार) के 22 मामलों में 27 अपराधियों को काबू किया गया, जिससे कुल 54 गंभीर मामलों में 67 अपराधी जेल भेजे गए।
अपराधियों पर नकेल कसने के लिए 15 नवंबर को 19 अभियुक्तों की हिस्ट्री शीट खोली गई है, और अब तक कुल 150 अपराधियों की हिस्ट्री शीट खोली जा चुकी है। यह आंकड़ा हरियाणा पुलिस के अपराध उन्मूलन के प्रति समर्पण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है और यह ऑपरेशन सही मायने में हरियाणा को अपराध मुक्त राज्य बनाने की दिशा में अद्भुत परिणाम दे रहा है।
हरियाणा पुलिस महानिदेशक के निर्देशों पर राज्य भर में संगठित अपराधों पर नकेल कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ के तहत करनाल पुलिस को आज दो महत्वपूर्ण सफलताएं मिलीं। करनाल पुलिस ने अपनी मुस्तैदी और सक्रियता दिखाते हुए छीना-झपटी और फायरिंग जैसी गंभीर वारदातों को अंजाम देने वाले कुल चार वांछित और कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार कर जिले में कानून का राज और मजबूत किया।
इस कड़ी में, पहली कार्रवाई लूटपाट और छीना-झपटी के एक मामले से जुड़ी है। दिनांक 13 नवंबर को नहर की पटरी पर गांव कलरी नन्हेड़ा की ओर जा रहे शिकायतकर्ता कमलजीत के साथ आरोपी और उसके साथियों ने लूटपाट की घटना को अंजाम दिया था, जिसके संबंध में थाना इंद्री में मुकदमा नंबर 650 दर्ज किया गया था। इस मामले में कार्रवाई करते हुए, पुलिस टीम ने आरोपी योगेश पुत्र दान सिंह निवासी नौरथा, इंद्री, करनाल को सफलतापूर्वक काबू कर लिया।
बताया गया कि गिरफ्तार आरोपी योगेश बेहद शातिर किस्म का अपराधी है और उसके खिलाफ सिर्फ यह लूट का मामला ही नहीं, बल्कि विभिन्न संगीन धाराओं के तहत आठ अन्य मामले पहले से ही इंद्री पुलिस स्टेशन में दर्ज हैं, जिनमें चोरी और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं। गहन पूछताछ के बाद, आरोपी योगेश को अदालत के सामने पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया।
दूसरी बड़ी सफलता करनाल पुलिस को सीएनजी पेट्रोल पंप पर फायरिंग के मामले में मिली। पुलिस अधीक्षक करनाल के मार्गदर्शन और ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ के तहत निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप, थाना घरौंडा की टीम ने विश्वसनीय सूचना के आधार पर तीन वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इन आरोपियों ने 13 अक्टूबर की रात को सीएनजी पेट्रोल पंप, घरौंडा के कर्मचारी के साथ मामूली कहासुनी होने पर अंधाधुंध फायर कर दहशत फैलाई थी और मौके से फरार हो गए थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जितेंद्र पुत्र सतपाल (पानीपत), सचिन उर्फ रिकी पुत्र हरीश भारद्वाज (शिवाह, पानीपत) और दीपक पुत्र कर्मवीर (जाटल, पानीपत) के रूप में हुई है। इनके खिलाफ थाना घरौंडा में मुकदमा नंबर 624 की धाराओं (109(1) बीएनएस व आर्म्स एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जानकारी दी गई है कि इन आरोपियों को गहनता से पूछताछ के लिए प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया था। मुख्य आरोपी जितेंद्र के खिलाफ भी पहले से ही हत्या के प्रयास, दंगा और धोखाधड़ी समेत चार अन्य संगीन मामले दर्ज हैं। पूछताछ के बाद तीनों आरोपियों को जिला जेल भेजा गया।
अपराध
मुंबई : अंधेरी में 60 लाख रुपये से ज़्यादा कीमत के गहने चोरी का ड्रामा करने के आरोप में दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने दो ऐसे चालाक आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है, जिन्होंने चोरी और सड़क हादसे की कहानी रची थी और 60 लाख रुपये के गहने चोरी होने का नाटक किया था। हालांकि, पुलिस जांच में पता चला कि सोने के गहने पहुंचाने वाला व्यक्ति ही चोर था और उसने अपने दोस्त के साथ मिलकर चोरी की थी। एमआईडीसी पुलिस ने गोल्ड स्टार कंपनी की कंचन पवार की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया था। जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने अपने कर्मचारी अविनाश गंगाधर कदम (26) को सोने के गहने पहुंचाने के लिए भेजा था। उसी समय उसने बताया कि उसकी मोटरसाइकिल एक्टिवा का एक्सीडेंट हो गया था और इस दौरान सोने के गहने और बैग भी चोरी हो गए। उसने बिना किसी चोट या घाव के अस्पताल में भर्ती होने का नाटक किया। इस दौरान पुलिस ने कई सीसीटीवी फुटेज की जांच की और पता चला कि संदिग्ध, जिसका नाम मनोज हेमंत जोगदंड (41) है, एक्सीडेंट से पहले संदिग्ध तरीके से यहां गश्त कर रहा था। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों ने चोरी का नाटक किया था और घटना को एक्सीडेंट बताकर लूट की योजना बनाई थी। इसके बाद पुलिस ने अविनाश को भी हिरासत में ले लिया। इस मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर रहस्य सुलझा लिया। यह ऑपरेशन मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती के निर्देश पर डीसीपी दत्ता नलावड़े ने किया।
अपराध
पुणे में दो करोड़ रुपए के गबन मामले में आरोपी नासिक में गिरफ्तार

महाराष्ट्र के पुणे में दो करोड़ रुपए के गबन के मामले में फरार एक आरोपी को नासिक में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पुणे पुलिस में 38 वर्षीय किरण दादासाहेब शिंदे की दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, ‘गंगा फर्नहिल’ प्रोजेक्ट की चार इमारतों में फ्लैट बेचने और उससे जुड़े कामों की जिम्मेदारी सीनियर सेल्स मैनेजर साइमन रॉनी पीटर को सौंपी गई थी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने फ्लैट की बिक्री से मिली रकम को कंपनी के खाते में जमा करने के बजाय, अपने सहयोगी बी. चंद्रशेखर के एक फर्जी प्राइवेट बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया। इस तरह उन्होंने 32 ग्राहकों से इकट्ठा किए गए लगभग 2 करोड़ रुपए का गबन किया।
इस शिकायत के आधार पर 9 जून को पुणे के कालेपडल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामला दर्ज होने के बाद पीटर फरार हो गया और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया।
जांच के दौरान पुणे पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी नासिक शहर में छिपा हुआ है। कालेपडल पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने गंगापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अशोक शर्माले से संपर्क किया और पीटर का पता लगाने और उसे पकड़ने में मदद मांगी।
विश्वसनीय जानकारी मिलने पर शर्माले को पता चला कि आरोपी पीटर कार से नासिक आया था और गंगापुर रोड पर कालेनगर में होटल ट्रीबो सफायर के कमरा नंबर 301 में ठहरा हुआ था।
यह जानकारी मिलने पर क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम के अधिकारी घनश्याम भोये और उनकी टीम को तुरंत उस जगह भेजा गया। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और बाद में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे पुणे पुलिस को सौंप दिया।
यह ऑपरेशन गंगापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर शर्माले और उनकी टीम की अगुवाई में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उनकी टीम में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर तुषार देवरे और पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रवींद्र मोहिते, गिरीश महाले, भागवत थाविल, घनश्याम भोये, प्रवीण केदारे, गोरख सालुंखे, सुजीत जाधव और तुलसीदास चौधरी शामिल थे।
अपराध
जम्मू-कश्मीर : सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार के मामले में दो वन अधिकारियों समेत तीन गिरफ्तार

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने रविवार को कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भ्रष्टाचार के आरोप में वन विभाग के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में वन विभाग के दो अधिकारी और उसी विभाग का एक कैजुअल लेबरर (अस्थायी कर्मचारी) शामिल है।
गिरफ्तार लोगों की पहचान कावूसा, मगाम के रेंजर मंजूर अहमद मलिक; नुसगाम, खानसाहिब के फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार; और रामहामा, बीरवाह के कैजुअल लेबरर बशीर अहमद गनी के तौर पर हुई है।
ये गिरफ्तारियां सीबीआई पुलिस स्टेशन, कश्मीर में ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ की धारा 7 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के सिलसिले में की गईं।
इससे पहले, सीबीआई की एक टीम ने बडगाम जिले के बीरवाह इलाके में जाल बिछाया और बशीर अहमद गनी को तब पकड़ा जब वह कथित तौर पर 15,000 रुपये की रिश्वत ले रहा था।
यह ऑपरेशन अवैध रूप से पैसे की मांग के आरोपों के बाद शुरू किया गया था। सूत्रों ने बताया कि आगे की जांच चल रही है।
इस केंद्र शासित प्रदेश की अपनी भ्रष्टाचार-रोधी संस्था, ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) है, जिसे सरकारी अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार की जांच करने और उसे रोकने का अधिकार है।
सीबीआई के पास ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ के तहत भ्रष्टाचार की जांच करने का मुख्य अधिकार क्षेत्र है, जिसमें मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारी, केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी शामिल होते हैं।
सीबीआई के भ्रष्टाचार-रोधी अधिकार क्षेत्र के दायरे और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई खास ऑपरेशनल नियम हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के तहत केंद्रीय अधिकार क्षेत्र उन अधिकारियों पर लागू होता है जो केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं। राज्य सरकार के कर्मचारी आम तौर पर राज्य के ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
चूंकि पुलिसिंग राज्य का विषय है, इसलिए सीबीआई राज्यों में ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम’ की धारा 6 के तहत संबंधित राज्य सरकारों द्वारा दी गई ‘सामान्य सहमति’ के माध्यम से काम करती है।
कई राज्यों ने यह सामान्य सहमति वापस ले ली है, जिसका मतलब है कि सीबीआई को उन इलाकों में जांच करने के लिए मामले-विशेष की सहमति या अदालत के आदेश की जरूरत होती है।
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट सीबीआई को देश में कहीं भी किसी भी भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने का अधिकार दे सकते हैं, भले ही राज्य सरकार सहमति देने से इनकार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थानीय राज्य पुलिस बल और एसीबी के पास भी अपने राज्य में काम कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत मामले दर्ज करने और उनकी जांच करने का अधिकार क्षेत्र है।
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