राजनीति
पीएम मोदी बोले- वंदे भारत ट्रेन भारत की आत्मनिर्भरता की पहचान
वाराणसी, 8 नवंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बनारस रेलवे स्टेशन से चार नई वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री ने बनारस रेलवे स्टेशन से रवाना किया, जबकि दिल्ली-फिरोजपुर, लखनऊ-सहारनपुर और एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस को उन्होंने वर्चुअली झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, एर्नाकुलम से केरल के राज्यपाल राजेन्द्र अर्लेकर, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और जॉर्ज कुरियन, फिरोजपुर से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू तथा लखनऊ से उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत भोजपुरी में करते हुए कहा, “बाबा विश्वनाथ के ई पावन नगरी में आप सब लोगन के काशी के परिवारजन के हमार प्रणाम। देव दीपावली के बाद आज के दिन भी काशी के विकास पर्व पर आप सबके शुभकामना देत हईं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित देशों की प्रगति का सबसे बड़ा आधार मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर रहा है। भारत भी अब तेजी से उसी राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे नेटवर्क, सड़कों और नई व्यवस्थाओं के विस्तार से देश के हर हिस्से में विकास की नई गाथा लिखी जा रही है।
पीएम मोदी ने बताया कि देश में अब 160 से अधिक वंदे भारत ट्रेन संचालित हो रही हैं। ये ट्रेन भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और आत्मनिर्भरता की प्रतीक हैं। “वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत ट्रेनें भारतीय रेलवे की अगली पीढ़ी की नींव तैयार कर रही हैं। वंदे भारत भारतीयों द्वारा भारतीयों के लिए बनाई गई ट्रेन है, जिस पर हर भारतीय को गर्व है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की तीर्थ यात्राएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि देश की आत्मा को जोड़ने वाली परंपरा है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट, कुरुक्षेत्र जैसे पावन धाम अब वंदे भारत नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, जिससे आस्था और विकास दोनों का संगम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में उत्तर प्रदेश में तीर्थाटन और पर्यटन से आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिला है। पिछले वर्ष 11 करोड़ श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आए, जबकि अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद 6 करोड़ से अधिक लोग रामलला के दर्शन कर चुके हैं। इससे यूपी की अर्थव्यवस्था को हजारों करोड़ का लाभ हुआ और लाखों लोगों को रोजगार मिला।
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी पूर्वांचल की हेल्थ कैपिटल बन गया है। पहले मरीजों को इलाज के लिए मुंबई जाना पड़ता था, लेकिन अब शहर में ही अत्याधुनिक अस्पताल, कैंसर सेंटर, आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्रों से लोगों को राहत मिल रही है।
उन्होंने कहा कि “काशी में रहना, काशी आना और यहां जीना अब सबके लिए विशेष अनुभव बन गया है।” प्रधानमंत्री ने बताया कि शहर में सड़कों, गैस पाइपलाइन, स्टेडियम और रोपवे जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट तेजी से पूरे हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान काशी के बच्चों की प्रतिभा का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेनों के उद्घाटन के दौरान विद्यार्थियों ने “विकसित भारत” पर सुंदर कविताएं और चित्र प्रस्तुत किए। काशी के सांसद के रूप में मुझे गर्व है कि मेरे शहर के बच्चे इतने प्रतिभाशाली हैं। मैं चाहता हूं कि इन बच्चों का कवि सम्मेलन काशी में कराया जाए और कुछ बच्चों को पूरे देश में ले जाया जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में काशी की भूमिका अग्रणी रहेगी। हमें काशी की ऊर्जा और गति बनाए रखनी है, ताकि भव्य काशी, समृद्ध काशी का सपना साकार हो सके।
राष्ट्रीय समाचार
सरकार ने कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को उपलब्ध पूरी क्षमता पर चलाने का दिया निर्देश

बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिजली मंत्रालय ने बिजली अधिनियम की धारा 11 लागू करते हुए 50 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता वाले कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अधिकतम बिजली उत्पादन करने का निर्देश दिया है।
मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय मौजूदा मांग-आपूर्ति की स्थिति और बिजली की खपत में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, देशभर के उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।
बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत सरकार को असाधारण परिस्थितियों में बिजली उत्पादन कंपनियों को आधिकारिक निर्देशों के अनुरूप अपने बिजली संयंत्र संचालित करने का निर्देश देने का अधिकार है।
इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मंत्रालय ने पात्र कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए बिजली उत्पादन करने को कहा है।
मंत्रालय ने कहा कि देश में बिजली की कुल उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए कैप्टिव बिजली संयंत्रों समेत बिजली उत्पादन के सभी स्रोतों की क्षमता का पूरी तरह उपयोग करना जरूरी है।
निर्देशों के अनुसार, बिजली उत्पादकों को अपनी कैप्टिव जरूरतें पूरी करने के बाद बची हुई बिजली को लागू बाजार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत पावर एक्सचेंजों पर बेचने की पेशकश करनी होगी।
इस कदम से बाजार में बिजली की उपलब्धता बढ़ने और पीक डिमांड को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह आदेश 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान बिजली उत्पादन कंपनियों को पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो और अधिकतम बिजली उत्पादन जारी रखा जा सके।
निगरानी को सुगम बनाने के लिए मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इन रिपोर्टों में बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंजों और अन्य स्वीकृत माध्यमों से बिजली की बिक्री, उपलब्ध उत्पादन क्षमता तथा कोयला भंडार के स्तर की जानकारी शामिल होगी।
सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से देशभर में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और साल की अंतिम तिमाही में बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके तहत अतिरिक्त कैप्टिव बिजली उत्पादन क्षमता को ग्रिड में लाया जाएगा।
राष्ट्रीय समाचार
असम में सीजेपी की बैठक से पहले कार्रवाई, आशुतोष रांका समेत 30 से ज्यादा कार्यकर्ता हिरासत में

गुवाहाटी में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के 30 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को रविवार को असम पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें पार्टी की केंद्रीय समिति के चार सदस्य भी शामिल थे। ये सभी पार्टी के क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक के लिए इकट्ठा हुए थे।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कार्यक्रम एक निजी जगह पर होने वाली शांतिपूर्ण बैठक थी, फिर भी पुलिस ने रविवार सुबह से ही कार्रवाई शुरू कर दी।
रांका ने आरोप लगाया, “पुलिस रविवार सुबह से ही गुंडों की तरह व्यवहार कर रही थी। यह एक निजी जगह पर हो रही शांतिपूर्ण बैठक थी लेकिन पुलिस हमारी टीम के सदस्यों को हिरासत में लेती रही और अब हम सभी को हिरासत में ले लिया गया है।”
पार्टी के क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक शुरू में रविवार सुबह 10 बजे अठगांव में खड़गा चौधरी रोड पर स्थित ‘असम श्री परशुराम सेवा सदन’ में होनी थी। बाद में आयोजकों ने जगह बदलकर इसे असम सचिवालय के सामने ‘चौधरी टीला’ कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल स्थान के प्रबंधन पर बुकिंग रद्द करने का दबाव डाला गया था।
अंकित भारद्वाज, आकाश प्रेम, वरुण अग्रवाल और अनाम समेत सीजेपी के दूसरे सदस्यों के साथ शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे रांका ने पहले ही कहा था कि वेन्यू (कार्यक्रम स्थल) रद्द होने से पार्टी को असम में अपना कार्यक्रम करने से नहीं रोका जा सकेगा।
हिरासत में लिए जाने से पहले रांका ने असम सरकार पर आरोप लगाया कि वह पार्टी को राज्य से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने से रोकने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी सरकारी स्कूलों की हालत, जिसे उन्होंने ‘इंसानों की वजह से आई बाढ़’ बताया था, उसके असर और दूसरे जन-मुद्दों को उजागर करना चाहती थी।
रांका ने कहा, “सीएम हिमंता सरमा को डर है कि हम यहां के स्कूलों की हालत, इंसानों की वजह से आई बाढ़ की सच्चाई और दूसरे मुद्दों को उजागर कर देंगे। इसीलिए वे हमें धमका रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि हम किस मिट्टी के बने हैं। जब तक हम उनका पर्दाफाश नहीं कर देते, तब तक हम रुकेंगे नहीं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सुबह से ही सीजेपी के सदस्यों को रोका और उन्हें धमकाया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पार्टी अपनी गतिविधियां जारी रखेगी। रविवार दोपहर तक असम पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या की पुष्टि करने या हिरासत में लेने के कारणों के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सीजेपी असम में अपनी संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तार करने की कोशिश कर रही है; क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक का मकसद राज्य में पार्टी के समर्थकों और सदस्यों को एक साथ लाना था।
अपराध
सीबीआई ने गुजरात के 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने रविवार को बताया कि यह कार्रवाई उन सिंडिकेट्स (गिरोहों) के खिलाफ सीबीआई की लगातार चल रही मुहिम का हिस्सा है, जो देशभर के नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
एजेंसी के अनुसार, सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अपराधों पर देशव्यापी कार्रवाई को तेज करते हुए 10 राज्यों में 22 जगहों पर एक साथ तलाशी ली। इसी कड़ी में गुजरात के एक बड़े डिजिटल अरेस्ट मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस मामले में पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया था। साइबर अपराधियों ने पुलिस और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अधिकारी बनकर पीड़ित को 11.42 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास के रूप में हुई है। सीबीआई जांच के दौरान दोनों आरोपियों की अपराध से मिली रकम प्राप्त करने, उसकी लेयरिंग (कई खातों में घुमाने) और उसे आगे भेजने में भूमिका का पता चला।
जांच से यह भी पता चला कि उन्होंने कथित तौर पर एक कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल पीड़ित से ठगे गए 11.42 करोड़ रुपए में से 2.5 करोड़ रुपए प्राप्त करने के लिए किया था। साथ ही, ये दोनों मनी ट्रेल को छिपाने के इरादे से इन फंड्स को अपने साथियों के कई खातों में ट्रांसफर करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।
जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी और दूसरे साइबर अपराधों से कमाए गए पैसे को निकालने के लिए बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल करने और एपीके फाइलें इंस्टॉल करने में शामिल थे। उनके पास से जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस से कई ऐसे चैट, मैसेज और दस्तावेज भी मिले हैं, जो अपराध में उनकी भूमिका साबित करते हैं।
मनी ट्रेल के विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर तलाशी की गई। इस दौरान आपत्तिजनक बैंकिंग दस्तावेज, खाते से संबंधित रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए गए। सीबीआई ने कहा कि इन सबूतों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि राज्यों की सीमाओं के पार चल रहे डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट्स के बड़े वित्तीय और तकनीकी ढांचे का पता लगाया जा सके।
एजेंसी ने जानकारी दी कि सीबीआई ने अलग-अलग राज्यों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के कई मामले अपने हाथ में लिए हैं। इनमें से चार मामलों में पिछले 30 दिनों में सीबीआई ने 22 राज्यों में 142 जगहों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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