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Thursday,01-October-2026
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केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, नवी मुंबई पर औपचारिक रूप से तैनात किया गया

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900 कर्मियों की प्रारंभिक तैनाती के साथ चरणबद्ध तरीके से बल का अधिस्ठापन किया जाएगा।

नवी मुंबई: केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (NMIA) पर औपचारिक रूप से तैनात किया गया है। सीआईएसएफ को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा, जिसमें प्रारंभिक तैनाती 900 कर्मियों की होगी।
दिनांक 29 अक्टूबर 2025 को NMIA के शामिल होने के साथ, CISF अब अपने एविएशन सिक्योरिटी ग्रुप (ASG) के तहत देश भर के 71 हवाई अड्डों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है।
औपचारिक अधिस्ठापन समारोह नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयोजित किया गया और इसमें CISF के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में श्रीमती बिनीता ठाकुर, अपर महानिदेशक (ए.पी.एस ) भी उपस्थित थीं। समारोह के दौरान, कैप्टन बी.वी.जे.के. शर्मा, सीईओ, एनएमआईए ने प्रतीकात्मक रूप से हवाई अड्डे की चाबियाँ श्री सुनीत शर्मा, वरिष्ठ कमांडेंट एवं एनएमआईए के चीफ एयरोड्रोम सिक्योरिटी ऑफिसर (CASO) को सौंपीं।
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, सीआईएसएफ के महानिदेशक, श्री प्रवीर रंजन ने कहा: “सीआईएसएफ वैश्विक मानकों के अनुरूप, एनएमआईए में विमानन सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे बल सदस्य पहले दिन से ही एक सुरक्षित, कुशल और यात्री-अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित, सुसज्जित और तैयार हैं।”
इस अवसर पर, कैप्टन बी.वी.जे.के. शर्मा, सीईओ, एनएमआईएएल ने कहा, “हमें नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। सीआईएसएफ का शामिल होना यात्रियों के स्वागत के लिए एनएमआईए की तैयारी में एक बड़ा कदम है, जो यात्रियों को विश्व स्तरीय यात्री अनुभव प्रदान करते हुए यात्री सुरक्षा और हवाई अड्डे की सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

सुरक्षा व्यवस्था
सीआईएसएफ पूरे हवाई अड्डे और उससे जुड़ी सुविधाओं के लिए व्यापक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। स्वीकृत 1,840 कर्मियों की संख्या के मुकाबले शुरुआती 900 कर्मियों की तैनाती की गई है, जिसे हवाई अड्डे पर यात्री और कार्गो संचालन में वृद्धि के अनुरूप चरणबद्ध रूप से बढ़ाया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार लागू की जाएगी, जिसमें हवाई अड्डे की सुरक्षा के मुख्य और गैर-मुख्य दोनों कार्य शामिल होंगे। सीआईएसएफ के कर्मी प्रवेश नियंत्रण, प्री-इम्बार्केशन सुरक्षा जांच, परिधि और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा, कार्गो की सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT), बम डिटेक्शन और निरोधक दस्ते (BDDS), और K9 दस्ते जैसी विशेष इकाइयों की जिम्मेदारी निभाएंगे।
स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित कर सीआईएसएफ प्रभावी शहर-स्तरीय प्रबंधन सुनिश्चित करेगा और उच्चतम स्तर की तैयारी बनाए रखने के लिए नियमित रूप से कंटिंजेंसी ड्रिल आयोजित करेगा।
पूर्व-प्रवेश प्रशिक्षण
हवाई अड्डे की सुरक्षा में पूर्व प्रशिक्षित सीआईएसएफ कर्मियों को एनएमआईए की सुविधाओं से प्री-इंडक्शन फेमिलियराइजेशन कराया गया है। उन्हें ऑपरेशनल रेडीनेस एंड एयरपोर्ट ट्रांसफर (ORAT) प्रक्रियाओं का भी प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें सुरक्षा प्रणालियाँ और उपकरण परीक्षण, यात्री और सामान की जाँच, प्रवेश नियंत्रण, निगरानी संचालन और कंटिंजेंसी रिस्पोंस ड्रिल शामिल हैं।
तैनाती से पहले, CISF की टीमों ने हवाई अड्डे परिसर की विस्तृत सुरक्षा जाँच की।
NMIA के बारे में
नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (NMIAL) एक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) परियोजना है, जो मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (MIAL)—अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) की एक सहायक कंपनी, जिसकी 74% हिस्सेदारी है—और महाराष्ट्र सरकार के उपक्रम, सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ महाराष्ट्र लिमिटेड (CIDCO), जिसकी शेष 26% हिस्सेदारी है, के बीच है।
ICAO कोड “VANM” से नामित, NMIA भारत के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण विमानन केंद्रों में से एक बनने के लिए तैयार है। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और पश्चिमी भारत की सेवा के लिए रणनीतिक रूप से स्थित, यह हवाई अड्डा 1,160 हेक्टेयर (2,866 एकड़) में फैला है। पूरा होने पर, इसकी क्षमता प्रति वर्ष 90 मिलियन यात्रियों (MPPA) को संभालने की होगी, जिसमें दो समानांतर रनवे, अत्याधुनिक टर्मिनल और आधुनिक कार्गो सुविधाएं होंगी, जो निर्बाध परिचालन और बढ़ी हुई यात्री सुविधा सुनिश्चित करेंगी।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख ने संजय राउत से उगाही के आरोपों के बीच भ्रष्टाचार के सबूत पेश करने को कहा

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महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने मंगलवार को रेगुलेटरी बॉडी में उगाही के आरोपों पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ये दावे आम हैं। इनमें ठोस जानकारी की कमी है और इस बारे में उनके ऑफिस को अब तक कोई औपचारिक पत्र नहीं मिला है।

यह जवाब राउत के उस पत्र के बाद आया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि एफडीए के फील्ड अधिकारी कमिश्नर मुंढे के सख्त एक्शन अभियान का फायदा उठाकर स्थानीय व्यवसायों, होटल मालिकों और क्विक-कॉमर्स ऑपरेटरों को ब्लैकमेल कर रहे थे।

सार्वजनिक हुए इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुंढे ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय को राउत के पत्र की कोई आधिकारिक प्रति नहीं मिली है। उन्हें इस मामले की जानकारी केवल मीडिया रिपोर्टों से मिली।

मुंढे ने विधायक या किसी भी प्रभावित व्यवसाय के मालिक से सामान्य बयानों के बजाय सत्यापन योग्य तथ्य प्रदान करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “मैं वास्तव में उनका (संजय राउत) आभारी हूं। उनसे मेरा केवल यही अनुरोध है कि यदि उनके पास विशिष्ट विवरण हैं, तो वे उन्हें मेरे साथ या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के साथ साझा करें, जिस भी एजेंसी पर वे भरोसा करते हैं। यदि मेरा कोई अधिकारी भ्रष्टाचार में शामिल है, तो कृपया पूरी जानकारी के साथ इसे मेरे संज्ञान में लाएं।”

इस चिंता को संबोधित करते हुए कि छोटे और मध्यम स्तर के होटल मालिक भ्रष्ट अधिकारियों की रिपोर्ट करने पर प्रतिशोध या और अधिक उत्पीड़न से डरते हैं, मुंढे ने हितधारकों को आश्वासन दिया कि पहचान गुप्त रखी जाती है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक एफडीए शिकायत पोर्टल स्वचालित रूप से शिकायतकर्ता की पहचान को छिपा देता है, और वादा किया कि उन्हें सीधे तौर पर दी गई कोई भी जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रहेगी।

इससे पहले, मुंढे को लिखे अपने पत्र में, राउत ने 25 मई को कार्यभार संभालने के बाद से खाद्य मिलावट और रेस्तरां की अस्वच्छ स्थितियों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू करने के लिए कमिश्नर की सराहना की थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रवर्तन कार्यों का एक नकारात्मक पहलू भी सामने आया है।

राउत के अनुसार, नामित अधिकारी (डीओ), सहायक कमिश्नर और खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) बड़ी रकम वसूलने के लिए होटलों, रेस्तरां और गोदाम ऑपरेटरों को तत्काल लाइसेंस निलंबन की धमकी दे रहे हैं। निरीक्षण नोटिस को निपटाने या बंद करने की दर कथित तौर पर मुंढे के कार्यकाल से पहले 10,000-12,000 रुपए से बढ़कर हालिया प्रवर्तन छापों से मची व्यापक दहशत के बाद 75,000-2,00,000 रुपए हो गई है।

राउत ने बांद्रा (मुंबई) में एफडीए मुख्यालय और ठाणे में क्षेत्रीय एफडीए कार्यालय को अवैध वसूली अभियान के मुख्य केंद्र के रूप में चिह्नित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाणे में दो डेजिग्नेटेड अधिकारियों ने एक क्विक-कॉमर्स कंपनी से सस्पेंड किए गए लाइसेंस को बहाल करने के लिए 17-18 लाख रुपए की मांग की।

राउत ने तर्क दिया कि अधिकारी बिना जांच-पड़ताल वाली शिकायतों के आधार पर तुरंत सस्पेंशन करने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं, जैसे सुधार के लिए नोटिस जारी करना, नियमों का पालन करने के लिए समय देना और औपचारिक सुनवाई करना, को नजरअंदाज कर रहे हैं।

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महाराष्ट्र

मुंबई में गणेश विसर्जन के दौरान चोर सक्रिय, भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी, 192 शिकायतें दर्ज, 18 गिरफ्तार

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अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के लिए जुटी भारी भीड़ का फायदा उठाते हुए, चोरों के गिरोहों ने पूरे मुंबई में श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन और सोने के गहने चुरा लिए। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि इन चोरियों के सिलसिले में 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो महिलाएं और एक नाबालिग शामिल है।

गणेश विसर्जन के दौरान अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में खोए और चोरी हुए मोबाइल फोन से जुड़ी 200 से ज्यादा शिकायतें मिलीं। पुलिस ने 192 खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन के मामले दर्ज किए, जबकि मोबाइल फोन और सोने की चेन चोरी होने के 10 अलग-अलग मामले भी दर्ज किए गए।

भगवान गणेश को विदाई देने के लिए लालबाग, परेल और गिरगांव चौपाटी जैसे इलाकों में लाखों भक्त जमा हुए। पुलिस ने बताया कि सेंट्रल मुंबई में ‘लालबागचा राजा’ के विसर्जन जुलूस के दौरान भारी भीड़ का फायदा जेबकतरे गिरोहों ने उठाया, जिनमें स्थानीय सदस्य और राज्य के बाहर के संदिग्ध दोनों शामिल थे।

कई भक्तों ने बताया कि उनकी जेब से मोबाइल फोन चोरी हो गए और गले से सोने की चेन छीन ली गई। भीड़ भरे जुलूसों के दौरान महिलाओं के पर्स भी निशाना बनाए गए। शुरुआती जांच से पता चला है कि इन चोरियों में संगठित गिरोह शामिल हैं, जो कुछ अपराधों को अंजाम देने के लिए महिलाओं और नाबालिगों का इस्तेमाल करते हैं।

विसर्जन जुलूस (जिसे ‘मिरवणूक’ भी कहा जाता है) के दौरान भक्तों के पर्स चुराने की कोशिश करते हुए दो महिलाओं को चोरी के सामान के साथ रंगे हाथों पकड़े जाने की खबर है।

चोरी की शिकायतों में बढ़ोतरी के बाद, मुंबई पुलिस ने विसर्जन के रास्तों पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की टीमें तैनात कीं। जांच के तहत संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ की गई। अब तक पुलिस ने आरोपियों से 14 स्मार्टफोन और सात सोने की चेन बरामद की हैं।

पुलिस अब गिरफ्तार संदिग्धों के अन्य कथित साथियों की तलाश कर रही है और बाकी चोरी हुए मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान बरामद करने के लिए आगे की जांच कर रही है।

इस बीच, लालबाग, चिंचपोकली, भारत माता जंक्शन और गिरगांव चौपाटी में गणेश विसर्जन के रास्तों पर लगे 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की जा रही है ताकि अन्य संदिग्धों की पहचान की जा सके और उनकी गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुंबई पुलिस का साइबर सेल और टेक्निकल एनालिसिस ब्रांच भी सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि चोरी हुए मोबाइल फोन को उनके इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (आईएमईआई) नंबरों के जरिए ट्रैक किया जा सके।

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महाराष्ट्र

सूखे से निपटने के लिए मदद का खर्च आम नागरिकों से नहीं बल्कि बिचौलियों से वसूला जाए: शिवसेना (यूबीटी)

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नागरिकों से निजी जश्न कम करने और अपनी बचत को सूखा राहत कार्यों में दान करने के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आग्रह पर शिवसेना (यूबीटी) की ओर से मंगलवार को प्रशासन की मंशा और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया गया है।

सरकार के इस रवैये को ‘खाली जेबों से पैसे निकालने’ जैसा बताते हुए, उद्धव ठाकरे गुट ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में कहा कि आर्थिक तंगी से जूझ रही जनता से आपदा प्रबंधन के लिए फंड जुटाने को कहना असंवेदनशील और नाकाफी है।

संपादकीय में पूरे महाराष्ट्र में बढ़ते कृषि संकट की ओर ध्यान दिलाया गया। इसमें बताया गया कि गंभीर सूखे के कारण कर्ज और मुश्किलों से जूझ रहे परभणी, यवतमाल, सोलापुर और हिंगोली जिलों में सिर्फ दो दिनों के भीतर चार किसानों ने आत्महत्या कर ली। इसमें चेतावनी दी गई कि अगर राज्य सरकार से तुरंत और सीधी मदद नहीं मिली, तो सूखा प्रभावित इलाके ‘कब्रिस्तान’ में बदल सकते हैं। इन समुदायों को बचाए रखने की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और उनके प्रशासन पर होगी।

मुख्यमंत्री फडणवीस को सीधे चुनौती देते हुए ठाकरे गुट ने कहा कि जो आम नागरिक पहले से ही महंगाई और आर्थिक तनाव से जूझ रहे हैं, उनसे शादी और नामकरण जैसे छोटे पारिवारिक समारोहों में कटौती करने के बजाय, सरकार को आंतरिक भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और ठेकेदारों के कमीशन पर सख्ती करनी चाहिए।

संपादकीय में राज्य की विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया। इसमें कोंकण क्षेत्र में तटीय जमीन की विवादास्पद बिक्री और शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे से जुड़े भारी फंड के लेन-देन का जिक्र किया गया।

इसमें यह भी दावा किया गया कि जनता का पैसा अक्सर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए दूसरी जगहों पर लगाया जाता है। मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि वे जनता से कंजूसी करने को कहने के बजाय, इस तरह की पैसे की बर्बादी को रोकें ताकि सूखा राहत के लिए फंड जुटाया जा सके।

ठाकरे गुट ने कहा, “राज्य सरकार कमीशन-एजेंटों और ठेकेदारों की सरकार बन गई है। हर तरफ लूट मची है। ठेकेदारों को सरकारी खजाने का पैसा देने और अपनी जेबें भरने के लिए गैर-जरूरी परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। अगर मुख्यमंत्री इस लूट को भी रोक दें, तो इससे सूखा प्रभावित लोगों को फायदा होगा।”

राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और नेताओं की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) के आरोपों पर निशाना साधते हुए, संपादकीय में सत्ताधारी गठबंधन से कहा गया है कि वे राजनीतिक खर्चों को ग्रामीण इलाकों की मुश्किलों को दूर करने में लगाएं। इसमें सुझाव दिया गया है कि राजनीतिक दल-बदल और चुनाव प्रचार के लिए रखे गए फंड को तुरंत प्रभावित किसानों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाए।

इसके अलावा, संपादकीय में सरकार के लिए सूखे से निपटने के लिए बड़ा फंड जुटाने के कई अहम उपाय सुझाए गए हैं। इसमें सरकार से कहा गया है कि वह राजनीतिक सहयोगियों के लिए तय बकाया रकम को सीधे सूखा राहत कोष में ट्रांसफर करे और मुंबई के बड़े बिल्डरों, स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) के डेवलपर्स और मोटी कमाई करने वाले वरिष्ठ नौकरशाहों से बड़ा योगदान अनिवार्य करे।

संपादकीय में राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि वह महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र की मदद के लिए पीएम केयर फंड में बची हुई रकम में से 2,000 करोड़ रुपये से 4,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग करे।

आखिर में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रियों द्वारा सांकेतिक दान (जैसे एक महीने की सरकारी सैलरी छोड़ना) सत्ताधारी नेताओं के पास मौजूद भारी संसाधनों को देखते हुए महज दिखावा है। पार्टी ने नेतृत्व से आग्रह किया कि वे भ्रष्ट अधिकारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक बिचौलियों की फल-फूल रही मिलीभगत को तोड़कर असली हिम्मत दिखाएं, ताकि राज्य के 11 करोड़ नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके।

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