राष्ट्रीय समाचार
यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या में अक्टूबर में 25 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल, 27.28 लाख करोड़ रुपए का हुआ लेनदेन
UPI
नई दिल्ली, 1 नवंबर: नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन (एनपीसीआई) ने नए महीने की शुरुआत के साथ शनिवार को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ट्रांजैक्शन के आंकड़े जारी किए हैं।
लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, बीते महीने अक्टूबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या में 25 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। यूपीआई ट्रांजैक्शन को लेकर यह उछाल फेस्टिव सीजन और जीएसटी 2.0 सुधार के बीच दर्ज किया गया है।
एनपीसीआई द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अक्टूबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन काउंट सालाना आधार पर 25 प्रतिशत बढ़कर 20.70 अरब दर्ज किए गए हैं।
इसके अलावा, ट्रांजैक्शन अमाउंट भी सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 27.28 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया है। एवरेज डेली ट्रांजैक्शन काउंट 668 मिलियन और एवरेज डेली ट्रांजैक्शन अमाउंट 87,993 करोड़ रुपए रिकॉर्ड किया गया है।
इससे पहले महीने सितंबर के आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन काउंट सालाना आधार पर 31 प्रतिशत बढ़कर 19.63 अरब दर्ज किए गए हैं। जबकि ट्रांजैक्शन अमाउंट सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की शानदार बढ़त के बाद 24.90 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया है। सितंबर में एवरेज डेली ट्रांजैक्शन काउंट 654 मिलियन और एवरेज डेली ट्रांजैक्शन अमाउंट 82,991 करोड़ रुपए देखा गया था।
इसके अलावा, एनपीसीआई द्वारा जारी किए गए इमीडिएट पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) के आंकड़े बताते हैं कि ट्रांजैक्शन की संख्या सितंबर के 394 मिलियन से बढ़कर अक्टूबर में 404 मिलियन हो गए। यह वृद्धि लेनदेन की राशि में भी दर्ज की गई है, जो कि सितंबर के 5.97 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर अक्टूबर में 6.42 लाख करोड़ हो गई है।
इस बीच, बैंक ऑफ बड़ौदा की हालिया रिपोर्ट बताती है कि बीते महीने फेस्टिव सीजन में यूपीआई के जरिए खर्च भी बढ़कर 17.8 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि बीते वर्ष के 15.1 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले 17 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि को दर्शाता है। यूपीआई के जरिए खर्च का यह आंकड़ा दिवाली से दशहरा तक की अवधि के लिए जारी किया गया था।
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एआईआईबी की बैठक में भाग लेने के लिए वित्त मंत्री सीतारमण कतर पहुंचीं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए कतर पहुंच गई हैं। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में सोमवार को दी गई।
दोहा के हमद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कतर में भारत के राजदूत श्रीकर रेड्डी कोप्पुला ने उनका स्वागत किया।
वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “केंद्रीय वित्त मंत्री अगले दो दिनों के दौरान दोहा में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक और एआईआईबी इन्वेस्टर्स डायलॉग 2026 में भाग लेंगी।”
वह एआईआईबी के अध्यक्ष के साथ-साथ जॉर्डन, स्विट्जरलैंड, अल्जीरिया, सऊदी अरब और नेपाल के अपने समकक्षों के साथ अन्य महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगी।
वित्त मंत्री एआईआईबी में भारत के गवर्नर के रूप में बैंक की वार्षिक बैठक में भाग लेंगी।
भारत एआईआईबी का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है।
आधिकारिक यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कतर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगी। इसके अलावा, वह कतर के कारोबारी नेताओं और निवेशकों के साथ भी बातचीत करेंगी।
एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जो एशिया और दुनिया भर में आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में सुधार के लिए सड़कों, स्वच्छ ऊर्जा और जल प्रणालियों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए वित्त पोषण करता है। बीजिंग में मुख्यालय वाले इस बैंक जनवरी 2016 में 100 अरब डॉलर की पूंजी के साथ काम शुरू किया था। बैंक के 111 स्वीकृत सदस्य देश हैं।
बैंक के प्रमुख क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण की रक्षा करने वाली परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण करना, परिवहन एवं डिजिटल नेटवर्क को बेहतर बनाना और देशों के बीच जल संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा, बैंक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी विकास परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए निजी निवेशकों के साथ भी काम करता है।
भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय ऊर्जा संबंध हैं। भारत की पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी के बीच 20 साल का एलएनजी समझौता है, जिसके तहत 2028 से 2048 तक हर साल 75 लाख टन एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
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सरकार ने कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को उपलब्ध पूरी क्षमता पर चलाने का दिया निर्देश

बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिजली मंत्रालय ने बिजली अधिनियम की धारा 11 लागू करते हुए 50 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता वाले कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अधिकतम बिजली उत्पादन करने का निर्देश दिया है।
मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय मौजूदा मांग-आपूर्ति की स्थिति और बिजली की खपत में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, देशभर के उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।
बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत सरकार को असाधारण परिस्थितियों में बिजली उत्पादन कंपनियों को आधिकारिक निर्देशों के अनुरूप अपने बिजली संयंत्र संचालित करने का निर्देश देने का अधिकार है।
इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मंत्रालय ने पात्र कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए बिजली उत्पादन करने को कहा है।
मंत्रालय ने कहा कि देश में बिजली की कुल उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए कैप्टिव बिजली संयंत्रों समेत बिजली उत्पादन के सभी स्रोतों की क्षमता का पूरी तरह उपयोग करना जरूरी है।
निर्देशों के अनुसार, बिजली उत्पादकों को अपनी कैप्टिव जरूरतें पूरी करने के बाद बची हुई बिजली को लागू बाजार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत पावर एक्सचेंजों पर बेचने की पेशकश करनी होगी।
इस कदम से बाजार में बिजली की उपलब्धता बढ़ने और पीक डिमांड को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह आदेश 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान बिजली उत्पादन कंपनियों को पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो और अधिकतम बिजली उत्पादन जारी रखा जा सके।
निगरानी को सुगम बनाने के लिए मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इन रिपोर्टों में बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंजों और अन्य स्वीकृत माध्यमों से बिजली की बिक्री, उपलब्ध उत्पादन क्षमता तथा कोयला भंडार के स्तर की जानकारी शामिल होगी।
सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से देशभर में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और साल की अंतिम तिमाही में बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके तहत अतिरिक्त कैप्टिव बिजली उत्पादन क्षमता को ग्रिड में लाया जाएगा।
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असम में सीजेपी की बैठक से पहले कार्रवाई, आशुतोष रांका समेत 30 से ज्यादा कार्यकर्ता हिरासत में

गुवाहाटी में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के 30 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को रविवार को असम पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें पार्टी की केंद्रीय समिति के चार सदस्य भी शामिल थे। ये सभी पार्टी के क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक के लिए इकट्ठा हुए थे।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कार्यक्रम एक निजी जगह पर होने वाली शांतिपूर्ण बैठक थी, फिर भी पुलिस ने रविवार सुबह से ही कार्रवाई शुरू कर दी।
रांका ने आरोप लगाया, “पुलिस रविवार सुबह से ही गुंडों की तरह व्यवहार कर रही थी। यह एक निजी जगह पर हो रही शांतिपूर्ण बैठक थी लेकिन पुलिस हमारी टीम के सदस्यों को हिरासत में लेती रही और अब हम सभी को हिरासत में ले लिया गया है।”
पार्टी के क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक शुरू में रविवार सुबह 10 बजे अठगांव में खड़गा चौधरी रोड पर स्थित ‘असम श्री परशुराम सेवा सदन’ में होनी थी। बाद में आयोजकों ने जगह बदलकर इसे असम सचिवालय के सामने ‘चौधरी टीला’ कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल स्थान के प्रबंधन पर बुकिंग रद्द करने का दबाव डाला गया था।
अंकित भारद्वाज, आकाश प्रेम, वरुण अग्रवाल और अनाम समेत सीजेपी के दूसरे सदस्यों के साथ शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे रांका ने पहले ही कहा था कि वेन्यू (कार्यक्रम स्थल) रद्द होने से पार्टी को असम में अपना कार्यक्रम करने से नहीं रोका जा सकेगा।
हिरासत में लिए जाने से पहले रांका ने असम सरकार पर आरोप लगाया कि वह पार्टी को राज्य से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने से रोकने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी सरकारी स्कूलों की हालत, जिसे उन्होंने ‘इंसानों की वजह से आई बाढ़’ बताया था, उसके असर और दूसरे जन-मुद्दों को उजागर करना चाहती थी।
रांका ने कहा, “सीएम हिमंता सरमा को डर है कि हम यहां के स्कूलों की हालत, इंसानों की वजह से आई बाढ़ की सच्चाई और दूसरे मुद्दों को उजागर कर देंगे। इसीलिए वे हमें धमका रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि हम किस मिट्टी के बने हैं। जब तक हम उनका पर्दाफाश नहीं कर देते, तब तक हम रुकेंगे नहीं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सुबह से ही सीजेपी के सदस्यों को रोका और उन्हें धमकाया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पार्टी अपनी गतिविधियां जारी रखेगी। रविवार दोपहर तक असम पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या की पुष्टि करने या हिरासत में लेने के कारणों के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सीजेपी असम में अपनी संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तार करने की कोशिश कर रही है; क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक का मकसद राज्य में पार्टी के समर्थकों और सदस्यों को एक साथ लाना था।
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