राष्ट्रीय समाचार
समुद्र में साइबर अटैक से बचने के लिए नौसेना प्रमुख ने दिए दो अहम सुझाव
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर: नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने समुद्री साइबर हमलों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि डिजिटल क्रांति जहां एक ओर अभूतपूर्व दक्षता ला रही है, वहीं यह नई कमजोरियां भी उत्पन्न कर रही है। उन्होंने कहा, ”जहां इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रगति का प्रतीक है, वहीं हर वस्तु के हथियारीकरण के जोखिम की परिभाषा भी बन चुकी है।”
उन्होंने कहा कि ये हमले केवल सिस्टम पर नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धमनियों पर प्रहार हैं। समुद्री क्षेत्र में किसी बड़े पोर्ट या जहाज पर साइबर व्यवधान के प्रभाव सीमाओं से परे जाकर पूरी आपूर्ति शृंखला, वैश्विक बाजारों और राजनयिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि भारत जैसे विशाल समुद्री राष्ट्र, जिसके पास 12 प्रमुख बंदरगाह, 200 से अधिक गैर-प्रमुख पोर्ट्स और 11,000 किमी लंबी तटरेखा है, ऐसे में साइबर खतरों के परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने एक वैश्विक उदाहरण देते हुए कहा कि 2021 में स्वेज नहर की छह दिन की बाधा ने हर दिन लगभग 10 अरब डॉलर के व्यापार को रोक दिया था। कल्पना कीजिए यदि ऐसी स्थिति एक अटके जहाज से नहीं, बल्कि एक साइबर कोड से उत्पन्न हो।
उन्होंने बताया कि नवंबर 2023 में ऑस्ट्रेलिया की डीपी वर्ल्ड पर हुए साइबर हमले से देश के लगभग 40 प्रतिशत कंटेनर व्यापार पर असर पड़ा। इसी प्रकार 2024 की मैरीटाइम साइबर सिक्योरिटी रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर में 50 अरब से अधिक फायरवॉल घटनाएं दर्ज की गईं, 1800 जहाज साइबर हमलों का शिकार हुए और 178 रैनसमवेयर घटनाओं में प्रति घटना औसतन आधा मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
नौसेना प्रमुख ने गुरुवार को नई दिल्ली में ‘समुद्री क्षेत्र पर साइबर हमलों का प्रभाव तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर उसके परिणाम’ विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित किया। नौसेना प्रमुख ने कहा, ”प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”
उन्होंने दो प्रमुख सुझाव प्रस्तुत किए। पहला यह कि साइबर सुरक्षा को समुद्री संचालन की मूल संरचना में प्रारंभ से ही सम्मिलित किया जाए, न कि इन्हें बाद में एक सहायक तत्व के रूप में जोड़ा जाए। सभी प्रणालियां, डिजाइन से लेकर संचालन तक, वैकल्पिक व्यवस्था और सुदृढ़ सुरक्षा के सिद्धांतों पर आधारित हों।
दूसरा सुझाव यह था कि स्पीड और पारस्परिक सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साइबर खतरों के प्रति त्वरित रेस्पॉन्स, सूचना का वास्तविक समय में आदान-प्रदान और सभी एजेंसियों के बीच अनुभव साझा करने की संस्कृति ही हमारी सामूहिक मजबूती तय करेगी।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना साइबर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई ठोस कदम उठा रही है। यह संगोष्ठी उसी दिशा में एक ईमानदार प्रयास है, जिसमें नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग जगत और कार्यान्वयनकर्ता सभी को एक मंच पर लाया गया है।
उन्होंने डायरेक्टरेट ऑफ इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर एवं आयोजक दल की सराहना करते हुए कहा कि यह संगोष्ठी विचार-विमर्श के माध्यम से न केवल समुद्री साइबर सुरक्षा की समझ को गहरा करेगी, बल्कि ठोस कार्रवाइयों को प्रेरित करेगी, जिससे भारत डिजिटल रूप से जुड़े समुद्री क्षेत्र में अवसरों और चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना कर सके।
कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय समाचार
अंतरिक्ष एजेंसियों व तकनीकी साझेदारों से जुड़ेगी उच्च शिक्षा संस्थानों की रिसर्च

भारत अपने नवाचार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा। शिक्षा मंत्रालय की पहल पर फ्रांस में भारतीय आईआईटी, विश्वविद्यालय व अन्य संस्थानों की रिसर्च वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित की जाएगी। यहां भारतीय नवउद्यम वैश्विक निवेशकों, अंतरिक्ष एजेंसियों और तकनीकी साझेदारों से जुड़ेंगे।
भारत इनोवेटस 2026 एक ग्लोबल एक्सेलेरेटर के रूप में 100 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स और प्रमुख संस्थानों को 13 अत्याधुनिक क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से जोड़ रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत के उच्च शिक्षण संस्थान अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये संस्थान नवाचार, उद्यमिता और गहन प्रौद्योगिकी अनुसंधान के शक्तिशाली केंद्र बनकर उभर रहे हैं।
शोध प्रयोगशालाओं से लेकर रिसर्च सेंटर्स और नवउद्यम सहायता केंद्रों तक, देश के विश्वविद्यालय तेजी से बढ़ते नवउद्यम तंत्र को दिशा दे रहे हैं। इसी सोच को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारत इनोवेटस 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े नवउद्यमों, शोधकर्ताओं और युवा नवप्रवर्तकों को दुनिया भर के निवेशकों, उद्योग जगत, विश्वविद्यालयों और नवाचार साझेदारों से जोड़ने का बड़ा मंच बनेगी।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की दूरदर्शी सोच को आगे बढ़ाती है। इसमें नवाचार आधारित शिक्षा, बहु-विषयक अनुसंधान और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि भारत के युवा नवप्रवर्तक अब केवल देश की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए समाधान विकसित कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि “भारत इनोवेट्स 2026” में भारत की अग्रणी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी ध्रुव स्पेस भी भाग लेगी। हैदराबाद स्थित यह कंपनी भारत की पहली निजी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल है और पूर्ण अंतरिक्ष अभियांत्रिकी समाधान उपलब्ध करा रही है। कंपनी उपग्रह मंच, सौर पैनल और प्रक्षेपण सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है। यह नागरिक और रक्षा दोनों क्षेत्रों के लिए सेवाएं प्रदान कर रही है। कंपनी ने भारत सरकार को अंतरिक्ष गुणवत्ता वाले सौर पैनल उपलब्ध कराए हैं।
वहीं विदेशों की बात करें तो कंपनी ने संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया तथा फ्रांस जैसे देशों को निर्यात भी किया है। इससे ‘मेड इन इंडिया’ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की वैश्विक क्षमता और विश्वसनीयता साबित हुई है। एक जानकारी में शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि ध्रुव स्पेस अब तक विभिन्न निवेश चरणों के माध्यम से 21 मिलियन डॉलर से अधिक की पूंजी जुटा चुका है और तेजी से आगे विस्तार कर रहा है।
कंपनी वर्ष 2026 के अंत तक सिंथेटिक एपर्चर रडार आधारित उपग्रह समूह विकसित करने पर काम कर रही है। यह प्रणाली हर मौसम में चौबीसों घंटे उच्च गुणवत्ता वाली पृथ्वी निगरानी और चित्रण सुविधा प्रदान करेगी, जिसका उपयोग रणनीतिक और रक्षा उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत इनोवेट 2026 के माध्यम से भारत अपने नवाचार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सामर्थ्य को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा। यह आयोजन 14 से 16 जून 2026 तक फ्रांस के नीस शहर में आयोजित होगा। यहां भारतीय नवउद्यम वैश्विक निवेशकों, अंतरिक्ष एजेंसियों और तकनीकी साझेदारों से जुड़ेंगे। सरकार का कहना है कि भारत की अंतरिक्ष क्रांति अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है और दुनिया जल्द ही भारतीय युवाओं द्वारा विकसित अत्याधुनिक तकनीकों का प्रभाव देखेगी।
राजनीति
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने जोसेफ विजय, राज्यपाल ने दिलाई सीएम पद की शपथ

टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें सीएम पद की शपथ दिलाई। विजय के शपथ ग्रहण के साथ ही द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) के लगभग छह दशकों का दबदबा खत्म हो गया।
जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह में विजय के अलावा एन. आनंद, आधव अर्जुन, केजी अरुण राज, केए. सेंगोट्टैयन, पी.वेंकेटरामनन, आर.निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ.टीके प्रभु और सेल्वी एस. कीर्तना ने मंत्री पद की शपथ ली।
शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेता, फिल्मी हस्तियां, पार्टी कार्यकर्ता और हजारों समर्थक शामिल हुए। भारी सुरक्षा व्यवस्था में शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ।
सबसे आगे की लाइन में विजय के माता-पिता, जाने-माने फिल्ममेकर एस.ए. चंद्रशेखर और शोभा चंद्रशेखर के लिए सीटें रिजर्व थीं। एक्टर त्रिशा कृष्णन और उनकी मां को भी उसी लाइन में सीटें दी गईं थीं।
टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन को 234 सदस्यों वाली तमिलनाडु असेंबली में 120 विधायकों का समर्थन मिलने के बाद विजय ने राज्यपाल से मिलकर दावा पेश किया। टीवीके ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी, लेकिन वह बहुमत से पीछे रह गई। कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट ने सरकार बनाने के लिए टीवीके का समर्थन किया।
समर्थन मिलने के बाद विजय ने शनिवार रात चेन्नई के लोक भवन में गवर्नर आर्लेकर से मुलाकात की थी और सभी पांच सहयोगी पार्टियों के समर्थन पत्र सौंपे। नए मुख्यमंत्री विजय को 13 मई या उससे पहले विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने का भी निर्देश दिया है।
विजय का शपथ ग्रहण तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव है, क्योंकि 1967 के बाद पहली बार राज्य में कोई गैर द्रविड़ पार्टी सत्ता में आई है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में एयरक्राफ्ट लीजिंग सेक्टर में 50 अरब डॉलर का बड़ा अवसर, लक्षद्वीप में जल्द शुरू होंगी सीप्लेन सेवाएं: राम मोहन नायडू

भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में विमान लीजिंग और फाइनेंसिंग के क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजारापु ने कहा कि भारतीय एयरलाइंस के पास वर्तमान में 1,640 विमानों की डिलीवरी लंबित है, जो अगले एक दशक में देश के लिए 50 अरब डॉलर के एयरक्राफ्ट लीजिंग अवसर पैदा करेगी। उन्होंने यह बात गांधीनगर के गिफ्ट सिटी में आयोजित इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट 2.0 के दौरान कही।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में शामिल हो चुका है और अब देश खुद को वैश्विक एविएशन फाइनेंसिंग और एयरक्राफ्ट लीजिंग हब के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय एयरलाइंस के पास 1,640 विमानों की लंबित डिलीवरी है। यह आने वाले 10 वर्षों में करीब 50 अरब डॉलर के लीजिंग अवसरों में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि भारत का कमर्शियल विमान बेड़ा 2027 तक बढ़कर 1,100 विमानों तक पहुंच सकता है, जबकि 2035 तक यह संख्या 2,250 से अधिक होने का अनुमान है।
मंत्री ने आगे कहा कि एविएशन सेक्टर के इस बड़े विस्तार को समर्थन देने के लिए मजबूत घरेलू फाइनेंसिंग और लीजिंग इकोसिस्टम की जरूरत है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि भारतीय एयरलाइंस को वैश्विक स्तर की सुविधाएं और वित्तीय सहायता मिल सके।
उन्होंने बताया कि पहले आयोजित इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट में किए गए कई बड़े वादों को सरकार ने पूरा कर दिया है। इसी क्रम में ‘प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स इन एयरक्राफ्ट ऑब्जेक्ट्स एक्ट 2025’ लागू किया गया है, जो भारत के कानूनी ढांचे को केप टाउन कन्वेंशन के अनुरूप बनाता है।
मंत्री ने कहा कि पहले एयरक्राफ्ट लीजिंग कंपनियों को विमान डी-रजिस्ट्रेशन और एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन जैसे मामलों में लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे एयरलाइंस की लागत बढ़ती थी और अंततः यात्रियों को महंगे हवाई किराए का सामना करना पड़ता था। अब सरकार ने इस समस्या का समाधान कर दिया है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने एयरलाइंस को राहत देने के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित रखा है। साथ ही एयरपोर्ट पर लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 प्रतिशत की कटौती की गई है और एयरलाइंस के लिए क्रेडिट सपोर्ट भी बढ़ाया गया है।
नायडू ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5,000 करोड़ रुपए की ‘क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम’ को मंजूरी दी है, जिससे एयरलाइंस को नकदी संकट से राहत मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि दुनिया में शायद ही किसी सरकार ने एविएशन सेक्टर के लिए इस तरह की पहल की हो।
इस दौरान, केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि लक्षद्वीप में जल्द ही सीप्लेन सेवाएं शुरू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल पारंपरिक विमान सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हेलीकॉप्टर, छोटे रीजनल एयरक्राफ्ट और सीप्लेन के जरिए दूर-दराज और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सरकार 40 से 100 सीट वाले छोटे विमानों के लिए भी लीजिंग फ्रेमवर्क को बढ़ावा दे रही है, ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हो सके। इसके अलावा एविएशन सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए फ्रैक्शनल ओनरशिप मॉडल और एयरक्राफ्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट मानने जैसे नए नीति विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है।
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