राजनीति
केजरीवाल को मिला सरकारी बंगला, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुआ आवंटन
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर : लंबी कानूनी लड़ाई और केंद्र सरकार के साथ चली तनातनी के बाद आखिरकार आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 95 लोधी एस्टेट स्थित टाइप-VII बंगला आवंटित कर दिया गया है। यह आवास उन्हें बतौर राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख के नाते दिया गया है।
यह आवंटन तब हुआ जब दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आवास आवंटन में की जा रही देरी पर सख्त टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि सरकारी आवासों के वितरण में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए। कोर्ट ‘आप’ की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संयोजक के लिए केंद्र सरकार से आवास की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने 16 सितंबर को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के रवैये को “टालमटोल” करार देते हुए कहा था कि आवास आवंटन की प्रक्रिया किसी विशेष व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि समान अवसर की प्रणाली होनी चाहिए। अदालत ने केंद्र को स्पष्ट किया था कि सरकारी आवास किसी भी व्यक्ति या पद के प्रति भेदभाव के आधार पर नहीं दिया जा सकता।
इससे पहले, आम आदमी पार्टी ने 35 लोधी एस्टेट स्थित टाइप-VII बंगला अरविंद केजरीवाल को देने का प्रस्ताव किया था। यह वही बंगला था जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने मई में खाली किया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने उस बंगले को केजरीवाल के बजाय एक केंद्रीय राज्य मंत्री को आवंटित कर दिया था। इस फैसले के बाद मामला और विवादित हो गया था।
इसके बाद, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि वह अपने आवंटन की प्राथमिकता और प्रक्रिया के रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे और यह भी स्पष्ट करे कि आखिर किस आधार पर अरविंद केजरीवाल को प्राथमिकता सूची में पीछे रखा गया। अब जबकि 95 लोधी एस्टेट का बंगला केजरीवाल को मिल गया है, ‘आप’ ने इसे “न्याय की जीत” बताया है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि यह फैसला न केवल कानूनी रूप से सही है, बल्कि यह दिखाता है कि संस्थाओं में पारदर्शिता और समानता अभी भी कायम है।
राष्ट्रीय समाचार
मथुरा में कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई पीईटी-2026 परीक्षा, 84 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) की ओर से आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी)-2026 मथुरा जनपद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई है। परीक्षा को नकलविहीन, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हैं।
जानकारी के अनुसार सभी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और अभ्यर्थियों की सघन जांच के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जा रहा है। सुबह से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। केंद्रों के मुख्य द्वार पर परीक्षार्थियों की गहन चेकिंग की जा रही है। बायोमीट्रिक सत्यापन और मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों के अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और ब्लूटूथ डिवाइस सहित प्रतिबंधित वस्तुओं को केंद्र के अंदर ले जाने पर रोक लगाई गई है।
परीक्षा में शामिल होने के लिए दूसरे जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों की भीड़ को देखते हुए जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने स्टेशन परिसर और आसपास की यातायात व्यवस्था का जायजा लिया। साथ ही सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि अभ्यर्थियों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मथुरा में पीईटी-2026 की परीक्षा कुल 33 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। परीक्षा छह पालियों में संपन्न कराई जाएगी। प्रत्येक पाली में 14,136 अभ्यर्थियों के शामिल होने का प्रावधान है। इस प्रकार सभी पालियों में कुल 84,816 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जा रही है। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक निर्धारित है।
परीक्षा को व्यवस्थित और नकलविहीन बनाने के लिए सभी 33 परीक्षा केंद्रों पर सेक्टर मजिस्ट्रेट और स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है। वहीं, सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत परीक्षा समाप्त होने तक केंद्रों के आसपास स्थित फोटोस्टेट की दुकानों और साइबर कैफे को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के बाहर अनावश्यक भीड़ जमा नहीं होने देने के लिए भी पुलिसकर्मियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन का उद्देश्य परीक्षा को पारदर्शी, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।
राजनीति
‘वोट चुराया जा रहा, हम चुपचाप नहीं सहेंगे’, एक नवंबर की दिल्ली रैली के लिए राहुल गांधी ने किया लोगों से आह्वान

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों, युवाओं और किसान-मजदूरों से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हमारा वोट चुराया जा रहा है और ये हम किसी हाल में चुपचाप नहीं सहेंगे।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “हमारा वोट चुराया जा रहा है और ये हम किसी हाल में चुपचाप नहीं सहेंगे। मतदाता सूचियों से नाम काटे गए। नियम-कानून तोड़े गए। और सवाल पूछने वालों पर लाठियां चलीं। अब जवाब देश देगा।”
1 नवंबर के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए राहुल गांधी ने समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से राष्ट्रीय राजधानी में इकट्ठा होने की अपील की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “1 नवंबर – चलो दिल्ली। वोट बचाओ – देश बचाओ जन मार्च और महारैली। छात्र, किसान, मजदूर, महिलाएं, नौजवान और व्यापारी, जिस-जिस को लोकतंत्र की फिक्र है, वो जरूर आए। वोट आपका है। लड़ाई भी आपकी है।”
साथ ही, राहुल गांधी ने भाजपा और उसके सहयोगियों की आलोचना की। उन्होंने तंज कसते हुए ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “भाजपा और उसके साथियों का दिल से धन्यवाद, जो इस कार्यक्रम का इतना जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा रहे हैं। बस अगले 7 दिन भी यही जोश और लगन बनाए रखिए।”
कांग्रेस सांसद ने दिल्ली रैली को लेकर यह आह्वान ऐसे समय किया है, जब व्यापारी वर्ग और 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ित इसका विरोध कर रहे हैं। दिल्ली के व्यापारियों ने त्योहारों के मद्देनजर राहुल गांधी से रैली टालने की भी अपील की थी।
व्यापारियों ने अपनी अपील में कहा कि धनतेरस और दीपावली की खरीददारी नवंबर के पहले हफ्ते में शुरू हो जाएगी। त्योहार के समय लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है। अगर रैली हुई और पुलिस ने रास्ते बंद किए तो लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान दिल्ली के व्यापार को होगा।
उधर, 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों ने इस रैली का विरोध करने का ऐलान किया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि 1 नवंबर उनके लिए बेहद संवेदनशील तारीख है, क्योंकि 1984 में इसी दिन दिल्ली सहित कई स्थानों पर सिख समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तारीख पर राजनीतिक रैली आयोजित करना उनके पुराने जख्मों को फिर से ताजा करने जैसा है।
राजनीति
‘सीएम नायडू की ‘कठपुतली’ बन गया आंध्र प्रदेश निर्वाचन आयोग’, वाईएसआरसीपी के अंबाती रामबाबू ने लगाया आरोप

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के गुंटूर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू ने शनिवार को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के हाथों की ‘कठपुतली’ बन गया है और हिंसा तथा डर के माहौल के जरिए निर्विरोध चुनाव कराने में मदद कर रहा है।
गुंटूर स्थित अपने कैंप कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए रामबाबू ने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ टीडीपी नीत गठबंधन, पुलिस और निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया, “सुप्रीम कोर्ट के उम्मीदवारों को सुरक्षा देने संबंधी निर्देशों के बावजूद वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया। पुलिस की मौजूदगी में उनके नामांकन पत्र फाड़ दिए गए और टीडीपी नेताओं की कथित ज्यादतियों को छिपाने के लिए मीडिया को नामांकन केंद्रों से दूर रखा गया। पुलिस ने विपक्षी नेताओं को नजरबंद कर दिया, जबकि सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों को सुविधा दी गई।”
रामबाबू ने पूर्व मंत्री विदादला रजनी के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि एक उम्मीदवार की मदद कर रही रजनी को कथित तौर पर पुलिस ने धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। शुक्रवार को वाईएसआरसीपी ने इस घटना की राज्य निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि इस कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसे विपक्ष ने स्थानीय निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का एक और उदाहरण बताया।
रामबाबू ने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता पिन्नेली रामकृष्ण रेड्डी, बोला ब्रह्मा नायडू और नंबूरी शंकरा राव को घरों में नजरबंद कर दिया गया, जिससे वे उम्मीदवारों को बी-फॉर्म वितरित नहीं कर सके और उनकी मदद भी नहीं कर पाए।
वाईएसआरसीपी नेता ने यह भी दावा किया कि कथित हमले केवल उनकी पार्टी तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि जन सेना पार्टी के नेता बेल्लमकोंडा श्रीनिवास के परिवार और कडप्पा में भाजपा उम्मीदवार सुरेश पर भी हमले हुए।
उन्होंने कहा, “पुलिस ने फोन पर सुरक्षा देने का भरोसा दिया, लेकिन उम्मीदवारों, यहां तक कि महिला उम्मीदवारों पर हुए हमलों के दौरान मूकदर्शक बनी रही।”
अंबाती रामबाबू ने यह भी दावा किया कि वाईएसआरसीपी ने चुनावी अनियमितताओं में कथित संलिप्तता के आरोप में 54 पुलिस अधिकारियों की पहचान की है, जिनमें कुछ आईपीएस अधिकारी और सत्तेनापल्ली डीएसपी हनुमंता राव भी शामिल हैं।
उन्होंने इन अधिकारियों के खिलाफ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस तंत्र का इस्तेमाल मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके पुत्र तथा कैबिनेट मंत्री नारा लोकेश के राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है।
रामबाबू ने मतदाताओं से कथित ‘अलोकतांत्रिक तरीकों’ को खारिज करने की अपील की। उन्होंने गुंटूर में पार्टी की मेयर उम्मीदवार श्रीदेवी और कॉरपोरेटर उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान करने तथा ‘पंखा’ चुनाव चिह्न पर वोट देकर सत्तारूढ़ गठबंधन की ‘डराने-धमकाने की राजनीति’ को हराने की अपील की।
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