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Tuesday,22-September-2026
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भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला, आज होगा आरबीआई एमपीसी के फैसलों का ऐलान

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मुंबई, 1 अक्टूबर: भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में तेजी के साथ खुला। बाजार के ज्यादातर सूचकांकों में हरे निशान में थे। सुबह 9:23 पर सेंसेक्स 51 अंक या 0.06 प्रतिशत की तेजी के साथ 80,319 और निफ्टी 23 अंक या 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,635 पर था।

शुरुआती सत्र में लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मजबूती के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 153 अंक या 0.27 प्रतिशत की मजबूती के साथ 56,682 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3 अंक की मामूली तेजी के साथ 17,566 पर था।

सेक्टरोल आधार पर ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, एफएमसीजी, रियल्टी, एनर्जी, प्राइवेट बैंक, इन्फ्रा, कमोडिटीज और पीएसई हरे निशान में थे। आईटी, पीएसयू बैंक और सर्विसेज लाल निशान में थे।

सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, एमएंडएम, टाटा मोटर्स, पावर ग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचसीएल टेक, मारुति सुजुकी, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, एनटीपीसी और टीसीएस टॉप गेनर्स थे। दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस, इटरनल (जोमैटो), बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, बीईएल, एसबीआई और अल्ट्राटेक सीमेंट टॉप लूजर्स थे।

आरबीआई के गर्वनर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) के फैसलों का ऐलान करेंगे। आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक 29 सितंबर को शुरू हुई थी।

इससे पहले अगस्त में हुई आरबीआई एमपीसी में ब्याज दरों को यथावत 5.50 प्रतिशत पर रखा गया था।

एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता हरे निशान में थे, जबकि टोक्यो लाल निशान में था। अमेरिकी बाजार मंगलवार को हरे निशान में बंद हुआ था।

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) 30 सितंबर को लगातार 7वें सत्र में शुद्ध विक्रेता बने रहे और उन्होंने 2,327 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने उसी दिन 5,761 करोड़ रुपए की इक्विटी खरीदी।

राष्ट्रीय समाचार

वित्त वर्ष 26 में सैमसंग इंडिया का मुनाफा 36 प्रतिशत घटकर 7,228 करोड़ रुपए रहा

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सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में अपने कंसोलिडेटेड मुनाफे में 36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है।

बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म टॉफ्लर के जरिए हासिल नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 7,228.10 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष में दर्ज 11,287.50 करोड़ रुपए से कम है।

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन निर्माता कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व वित्त वर्ष 2026 में सालाना आधार पर 1.2 प्रतिशत बढ़कर 1.12 लाख करोड़ रुपए हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 1,11,183.40 करोड़ रुपए था।

अन्य आय समेत कंपनी की कुल कंसोलिडेटेड आय वित्त वर्ष के दौरान 1,14,738.60 करोड़ रुपए रही।

सैमसंग इंडिया के राजस्व में मोबाइल फोन कारोबार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, जो देश में कंपनी के कारोबार के प्रमुख आधारों में से एक बना हुआ है।

कंपनी की टेलीविजन, टैबलेट, घरेलू उपकरणों और कंप्यूटर समेत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के कई क्षेत्रों में भी मजबूत मौजूदगी है।

दक्षिण कोरियाई टेक्नोलॉजी दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का हिस्सा यह कंपनी भारत के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में प्रमुख कंपनियों में बनी हुई है।

यह देश के अप्लायंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की एकमात्र कंपनी है, जिसका कारोबार 1 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है।

सैमसंग का वित्तीय प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी तेज है। वैश्विक और घरेलू कंपनियां विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में आक्रामक तरीके से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।

इस बीच, दक्षिण कोरिया की एक अन्य प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने भी वित्त वर्ष 2026 में अपेक्षाकृत स्थिर वृद्धि दर्ज की। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल आय सालाना आधार पर करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 2,46,049.12 करोड़ रुपए हो गई।

इसके अतिरिक्त, इस महीने की शुरुआत में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बढ़ती परिचालन लागत, कमजोर उपभोक्ता मांग और संगठनात्मक पुनर्गठन के बीच लागत को तर्कसंगत बनाने की कवायद के तहत सैमसंग इंडिया ने अपने टेलीविजन और होम अप्लायंस कारोबार से जुड़े कर्मचारियों की छंटनी की है।

कई रिपोर्टों में कहा गया कि इस कार्यबल में कमी का असर विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों पर पड़ा है, जिनमें निदेशक, टीम लीडर, ब्रांच मैनेजर और एरिया मैनेजर शामिल हैं।

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व्यापार

तेजी के बाद फिर गिरा बाजार, सेंसेक्स 330 अंक लुढ़का, निफ्टी में 0.36 प्रतिशत की गिरावट

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पिछले दिन की बढ़त के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स में 0.44 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इस तरह निफ्टी50 की चार दिन की लगातार बढ़त का सिलसिला टूट गया क्योंकि आईटी और वित्तीय शेयरों में गिरावट आई।

बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 74,529.08 पर आ गया, जबकि निफ्टी50 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत गिरकर 23,329.00 पर पहुंच गया।

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.08 प्रतिशत और 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली।

निफ्टी50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा कोल इंडिया के शेयरों में 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, इसके साथ ही इटरनल, इंडिगो, टाइटन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे। वहीं इसके विपरीत, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, नेस्ले इंडिया, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, ग्रासिम, ट्रेंट, आयशर मोटर्स और टीसीएस सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।

एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि लगातार चार सेशन की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से 99-100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। वहीं, विदेशी निवेश की निकासी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर सेंटीमेंट पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई और इंपोर्ट कॉस्ट को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

एक्सपर्ट ने बताया कि रुपया 95.8 रुपए प्रति डॉलर के आसपास बना हुआ है, जबकि ग्लोबल रेट्स को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।

मार्केट एक्सपर्ट ने आगे कहा कि निफ्टी के 23,300–23,350 के जोन में रहने के कारण, निवेशकों को शॉर्ट-टर्म रैली के पीछे भागने से बचना चाहिए। उन्हें निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटना चाहिए, अच्छी कमाई की संभावना वाली मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए और बाजार में बड़ी गिरावट का फायदा उठाने के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी (कैश) रखनी चाहिए।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत में रूसी तेल की मांग आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े झटकों का परिणाम, डिस्काउंट नहीं: रिपोर्ट

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भारत में रूसी तेल की मांग डिस्काउंट नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े झटकों का परिणाम है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

रिपोर्ट में बताया गया कि भारत रूस से औसत 60 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कि वित्त वर्ष 23-26 में औसत 46 मिलियन बैरल कच्चे तेल से अधिक है।

एक्सिस बैंक की इकोनॉमिक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से 298 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया है।

हालांकि मार्च 2022 से जून 2023 के बीच भारत के आयातित कच्चे तेल में रूस की हिस्सेदारी शून्य से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई (जिसकी वजह शायद डिस्काउंट थी), लेकिन मार्च 2026 से हर दिन अतिरिक्त 1 मिलियन बैरल आयात को “सिर्फ कीमतों में बदलाव से नहीं समझाया जा सकता।”

रिपोर्ट में कहा गया, “पहला, 2023 से पश्चिम एशिया के मुकाबले रूसी कच्चे तेल पर औसत डिस्काउंट 3-5 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा है। दूसरा, 7 डॉलर प्रति बैरल तक के प्रीमियम के बावजूद भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़ी है। अगर भारत स्पॉट मार्केट से ये अतिरिक्त 60-80 मिलियन बैरल खरीदता, तो तेल की कीमतें आज की तुलना में ज्यादा होतीं।”

रिपोर्ट के अनुसार, हाल के अनुभव से पता चलता है कि बहुत अधिक टैरिफ लगाने की धमकी, असल में टैरिफ लगाने की तुलना में व्यापार बातचीत में ज्यादा काम की होती है, और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर अमेरिका में खुदरा महंगाई पर पड़ता है।

ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के कारण रिपब्लिकन पहले से ही मध्यावधि चुनावों में मुश्किल स्थिति में हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, “कांग्रेस का समर्थन इस टैरिफ की धमकी को कानूनी रूप से मजबूत बनाता है, जबकि अतिरिक्त क्षमता पर सेक्शन 301 के तहत लंबित नतीजों से टैरिफ में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। भारत के लिए, एक काम का आधार वह 18 प्रतिशत की हेडलाइन दर है जिस पर फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईईईपीए अधिकार के तहत टैरिफ को अमान्य घोषित किए जाने से पहले सहमति बनी थी।”

जब इसे लागू किया जाता है, तो छूट के कारण प्रभावी दर भी हेडलाइन दर से कम होती है।

इस वित्त वर्ष (अब तक) में भारत का निर्यात साल-दर-साल 19 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो/पार्ट्स, धातु और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की मुख्य भूमिका रही है, साथ ही अमेरिका को होने वाले निर्यात में भी सुधार हुआ है।

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