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Sunday,21-June-2026
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सीएसएमटी और आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन के कारण मुंबई में यातायात जाम और रेल यातायात बाधित

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मुंबई: मुंबई में मोटर चालकों और दैनिक यात्रियों को शुक्रवार को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के आसपास बड़ी भीड़ जमा हो गई, जबकि आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन के कारण दक्षिण मुंबई में व्यापक यातायात जाम हो गया।

मध्य रेलवे की सलाह

मध्य रेलवे के मुंबई मंडल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) पर एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें यात्रियों से आग्रह किया गया है कि जब तक बहुत ज़रूरी न हो, सीएसएमटी की यात्रा करने से बचें। एडवाइजरी में कहा गया है, “सीएसएमटी स्टेशन और उसके आसपास भारी भीड़ को देखते हुए, यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आवश्यक और अपरिहार्य होने पर ही सीएसएमटी की यात्रा करें।”

इस चेतावनी से कार्यालय जाने वाले लोगों में चिंता उत्पन्न हो गई, जो दिन में ही अपने कार्यस्थल पर पहुंच गए थे, तथा उनमें से कई लोग इस बात को लेकर अनिश्चित थे कि बढ़ती अराजकता के बीच वे शाम को घर कैसे लौटेंगे।

मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने भी एक ट्रैफिक अलर्ट जारी किया है, जिसमें वाहन चालकों को आज़ाद मैदान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के कारण ईस्टर्न फ्रीवे से बचने की सलाह दी गई है। विभाग ने सलाह दी है, “आजाद मैदान में आंदोलन के कारण, फ्रीवे का इस्तेमाल करने से बचें। कृपया अपनी योजना उसी के अनुसार बनाएँ।”

इस विरोध प्रदर्शन के कारण शहर के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों और मुख्य मार्गों के पास भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम हो गया, जिससे मुंबई के पहले से ही अत्यधिक दबाव वाले परिवहन ढांचे पर दैनिक बोझ और बढ़ गया।

कई यूज़र्स ने अपनी निराशा व्यक्त करने के लिए X का सहारा लिया। एक यूज़र ने मुंबई ट्रैफ़िक पुलिस को टैग करते हुए सवाल किया, “ऐसे विरोध प्रदर्शन की इजाज़त क्यों दी जाए जिससे रोज़ाना आने-जाने वालों को परेशानी हो?” एक अन्य यूज़र, दर्शील देसाई ने लिखा, “कार्य दिवस पर किसी भी आंदोलन की इजाज़त क्यों दी जाए? मुंबई की सड़कों पर पहले से ही ट्रैफ़िक है और अब यह भी। रोज़ाना आने-जाने वालों की मुश्किलें क्यों बढ़ाई जाएँ?”

अन्य उपयोगकर्ताओं ने ऐसी उच्च-आवागमन स्थितियों के दौरान सीएसएमटी के आसपास स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखने के बारे में चिंता व्यक्त की, जिनमें से एक ने कहा, “सीएसएमटी हमारी विरासत है! कृपया सुनिश्चित करें कि पूरे क्षेत्र में स्वच्छता और सफाई बनी रहे!”

44 वर्षीय दैनिक यात्री महेश जैन ने कहा, “शुक्रवार के व्यवधानों से यह स्पष्ट होता है कि अधिकारियों के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की अनुमति देने और शहर को सुचारू रूप से चलाने के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल है।” उन्होंने आगे कहा, “चुनावों से पहले और भी प्रदर्शनों की आशंका है, इसलिए अधिकारियों को भविष्य में ऐसे विरोध प्रदर्शनों की अनुमति देने से पहले आपस में बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा।”

राष्ट्रीय समाचार

हीरा ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई, ईडी ने 159 करोड़ रुपए की संपत्तियां की नीलाम

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 159 करोड़ रुपए मूल्य की 23 अटैच की गई अचल संपत्तियों की नीलामी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई आरोपी नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और उनसे संबंधित संस्थाओं के खिलाफ की है।

ईडी के अनुसार, नोहेरा शेख और उनकी कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान यह सामने आया था कि उन्होंने निवेशकों को सालाना 36 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का लालच देकर देशभर के लोगों से 5,978 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई थी। हालांकि बाद में निवेशकों को उनकी मूल राशि तक वापस नहीं मिल सकी, जिससे हजारों लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई।

प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में 19 जून को मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएसटीसी) के माध्यम से इन संपत्तियों की नीलामी कराई गई। नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी तरीके से आयोजित की गई, ताकि अधिकतम मूल्य प्राप्त किया जा सके।

ईडी द्वारा नीलाम की गई संपत्तियां उन परिसंपत्तियों में शामिल हैं जिन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अटैच किया गया था। जांच में इन्हें अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) से खरीदी गई संपत्ति के रूप में चिन्हित किया गया था। पीएमएलए की निर्णायक प्राधिकरण (एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी) ने भी इन संपत्तियों की जब्ती की पुष्टि की थी।

एजेंसी ने कहा कि नीलामी से प्राप्त धनराशि का उपयोग वास्तविक निवेशकों और पीड़ितों को मुआवजा देने तथा उनका पैसा लौटाने के लिए किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और निर्देशों के तहत संचालित होगी।

जांच के दौरान नोहेरा शेख पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप भी लगा। इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद हैदराबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने 7 मई 2026 को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। ईडी ने 21 मई 2026 को उन्हें गुरुग्राम से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

ईडी ने उनकी निजी सहायक नाजनीन अंसारी उर्फ अबीदा को भी गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि वह अपराध से अर्जित धन के प्रबंधन और संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया में बाधा डालने में शामिल थी। फिलहाल वह भी न्यायिक हिरासत में है।

ईडी ने कहा कि निवेशकों को उनका धन वापस दिलाने और अपराध से अर्जित संपत्तियों के प्रभावी परिसमापन के लिए आगे की जांच जारी है।

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नोएडा श्रमिक हिंसा मामले में जांच पूरी, एसआईटी ने डेढ़ हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट कोर्ट में की दाखिल

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नोएडा में अप्रैल माह में हुई श्रमिक हिंसा के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने करीब डेढ़ हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी है। चार्जशीट में हिंसा की साजिश रचने वालों और उपद्रव में सीधे तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, 13 और 14 अप्रैल को नोएडा के विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान कई स्थानों पर आगजनी, तोड़फोड़ और सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई थीं।

हिंसा के कारण क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा था। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने पिछले कई महीनों में घटनास्थलों का निरीक्षण करने, सीसीटीवी फुटेज खंगालने, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और बड़ी संख्या में प्रत्यक्षदर्शियों एवं संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने का काम किया।

जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने करीब 10 ऐसे लोगों की पहचान की है, जिन पर हिंसा भड़काने और पूरी साजिश को अंजाम देने का आरोप है। इसके अलावा लगभग दो दर्जन लोगों को हिंसक घटनाओं में प्रत्यक्ष रूप से शामिल पाए जाने के आधार पर कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।

एसआईटी की जांच में मुख्य साजिशकर्ताओं के रूप में रूपेश राय, आकृति, मनीषा, सत्यम वर्मा, हिमांशु ठाकुर और सतीश कुमार सहित कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन आरोपियों की भूमिका हिंसा की योजना बनाने, लोगों को उकसाने और घटनाओं को अंजाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण रही।

इन सभी प्रमुख आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच अधिकारियों का कहना है कि चार्जशीट में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वीडियो फुटेज, मोबाइल डेटा, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी प्रमाण शामिल किए गए हैं, जो अदालत में अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।

अब मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। एसआईटी की चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही नोएडा के चर्चित श्रमिक हिंसा प्रकरण की जांच का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई से हिंसा और अराजकता फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त संदेश जाएगा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत ने एलपीजी आयात के स्रोत बढ़ाए, तेल कंपनियों को हुआ करीब 22,000 करोड़ रुपए का नुकसान

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पश्चिम एशिया में हाल ही में हुए संघर्ष के दौरान भारत ने तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के आयात के स्रोतों में विविधता लाई और खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका, ईरान और कई अन्य देशों से खरीद बढ़ा दी।

क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत की एलपीजी आयात संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला। परंपरागत रूप से भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी जरूरतें पश्चिम एशियाई देशों से पूरी करता रहा है। हालांकि अप्रैल 2026 तक अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई तक पहुंच गई, जबकि फरवरी में यह केवल 8 प्रतिशत थी।

यह बदलाव 2025 के अंत में भारत और अमेरिका के बीच हुए 22 लाख टन प्रति वर्ष एलपीजी आपूर्ति समझौते से संभव हुआ। यह समझौता भारत की सालाना एलपीजी आयात जरूरतों का लगभग 10 प्रतिशत पूरा करता है।

ईरान भी भारत के आयात स्रोतों में फिर से शामिल हो गया और अप्रैल में कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत रही। इसके अलावा, भारत ने अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों से भी एलपीजी की खरीद की।

आयात के स्रोतों में विविधता लाने की इस रणनीति से संघर्ष के दौरान आपूर्ति सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिली, लेकिन इसके कारण लंबी दूरी से माल लाना पड़ा और परिवहन लागत भी बढ़ गई।

आपूर्ति में बाधा और बढ़ी हुई कीमतों का असर घरेलू खपत पर भी पड़ा। फरवरी में जहां भारत की एलपीजी खपत 32 लाख टन थी, वहीं अप्रैल में यह घटकर 24.7 लाख टन रह गई। ऊंची कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों ने मांग को प्रभावित किया।

वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 3.32 करोड़ टन एलपीजी खपत दर्ज की गई थी, जो सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि थी। लेकिन इसके बाद के महीनों में मांग में तेज गिरावट देखने को मिली।

मार्च और अप्रैल में एलपीजी की मांग सालाना आधार पर 13 प्रतिशत घटी, जबकि मई में यह गिरावट और बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई।

रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित हुए क्योंकि उन्हें बाजार आधारित कीमतों का सामना करना पड़ा और बढ़ती लागत का असर उन पर तुरंत पड़ा। दूसरी ओर, घरेलू उपभोक्ताओं की मांग अपेक्षाकृत स्थिर रही क्योंकि रसोई गैस की खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई।

क्रिसिल ने बताया कि संघर्ष के कारण वैश्विक एलपीजी कीमतों में तेज उछाल आया। भारतीय आयात के लिए मानक मानी जाने वाली सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस फरवरी से जून के बीच 46 प्रतिशत बढ़ गई, जिसका कारण आपूर्ति में बाधा की आशंका और बढ़ी हुई मालभाड़ा लागत रही।

अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में अपेक्षाकृत कम वृद्धि की गई। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत इस अवधि में लगभग 10 प्रतिशत बढ़ी, जबकि 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 79 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई।

घरेलू गैस की कीमतों को सीमित रखने के कारण तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की अंडर-रिकवरी में भारी वृद्धि हुई, क्योंकि खरीद लागत खुदरा बिक्री मूल्य से काफी अधिक हो गई।

क्रिसिल के अनुमान के अनुसार, मई में दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी 651 रुपए प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई। वहीं मार्च से मई के बीच सरकारी तेल कंपनियों को कुल मिलाकर लगभग 22,000 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।

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